राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार को अंतिम विदाई बारामती में उमड़ा जनसैलाब, ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारों से गूंजा माहौल

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को गुरुवार को उनके गृहनगर बारामती में अंतिम विदाई दी गई। एक दुखद विमान हादसे में उनके निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर है। अजित पवार का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में भारी संख्या में समर्थक अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। अंतिम संस्कार की रस्में दोपहर में शुरू हुईं। अजित पवार के बेटों, पार्थ और जय ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान उनकी पत्नी और राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार अपने आंसू नहीं रोक पा रही थीं। जब उनके पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ उनके गांव काटेवाड़ी से विद्या प्रतिष्ठान मैदान लाया गया। मैदान में मौजूद हजारों लोगों ने “अजित दादा अमर रहें” के नारे लगाए, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया। काटेवाड़ी जाकर अजित पवार को श्रद्धांजलि दीइस दुखद घड़ी में देश और राज्य के कई बड़े नेता बारामती पहुंचे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, मुरलीधर मोहोल और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। अजित पवार के चाचा और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार भी वहां मौजूद थे। वे पूरे समय चुपचाप बैठे रहे और अपने भतीजे को अंतिम विदाई दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी पुणे से बारामती पहुंचे और पुष्पचक्र अर्पित किए। अजित पवार की चचेरी बहन और सांसद सुप्रिया सुले पूरे समय सुनेत्रा पवार के साथ खड़ी रहीं और उन्हें सांत्वना देती रहीं। अंतिम संस्कार में प्रफुल्ल पटेल, रामदास अठावले, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, पूर्व मुख्यमंत्री सुशीलकुमार शिंदे और अशोक चव्हाण जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी काटेवाड़ी जाकर अजित पवार को श्रद्धांजलि दी। अभिनेता रितेश देशमुख भी इस मौके पर मौजूद थे।
महाराष्ट्र की राजनीति में महा-शोक विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन, बारामती के पास हुई दुर्घटना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की जांच की मांग

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज सुबह विमान हादसे में निधन हो गया। इस घटना ने देश के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि वह सामने आई खबरों से स्तब्ध हैं और इसे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटनाएं सच साबित होती हैं, तो यह राजनीतिक नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा जा रहा था कि अजित पवार राजनीतिक रूप से अलग राह अपनाने पर विचार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन दावों के कारण कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। घटना की उचित जांच की जानी चाहिएममता बनर्जी ने जोर देते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। इससे पहले ममता ने एक्स पर इस घटना को लेकर संवेदन व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अजित पवार के अचानक निधन से मैं गहरे सदमे और स्तब्ध हूं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके सहयात्रियों की आज सुबह बरामती में हुए भीषण विमान हादसे में मौत हो गई। इस खबर से मुझे गहरा दुख महसूस हो रहा है। मैं उनके परिवार, उनके चाचा शरद पवार जी, और दिवंगत अजित जी के सभी मित्रों और समर्थकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। इस घटना की उचित जांच की जानी चाहिए। कठिन समय में संबल मिलने की कामनाजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एक प्रभावशाली नेता का इस तरह जाना देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि विमान हादसे के कारणों का स्पष्ट पता चल सके। अब्दुल्ला ने याद किया कि बॉम्बे में अपने कॉलेज के दिनों से मैं अजित दा को जानता हूं, जब मैं शरद पवार साहब और उनके परिवार के साथ वर्षा में रहता था। अजित दा एक सक्षम प्रशासक और कुशल राजनीतिक संगठनकर्ता थे, जिनकी कमी बहुत महसूस की जाएगी। मैं अपने पिता के साथ मिलकर शरद पवार साहब, सुप्रिया और पूरे परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खबर बेहद दुखद है और इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की।
जाते-जाते भी दे गए विकास की आखिरी सौगात, विमान हादसे से कुछ घंटे पहले युवाओं के लिए अजित पवार ने किया था यह वादा

बारामती में विमान दुर्घटना से पहले महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने एक पोस्ट में कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसलों की जानकारी साझा की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) में ‘पीएम सेतु’ योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में यह योजना नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे जिलों में लागू होगी। इसके बाद इसे पूरे राज्य में विस्तार दिया जाएगा। इस योजना से युवाओं के लिए रोजगार पाना आसान हो जाएगा। उन्होंने अपनी पोस्ट में आगो लिखा, लोक निर्माण विभाग से जुड़े छोटे और मध्यम ठेकेदारों के लिए भी अच्छी खबर है। उनके रुके हुए भुगतान के लिए ‘TReDS’ प्लेटफॉर्म की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, धुले जिले की जवाहर शेतकरी सहकारी कताई मिल को फिर से शुरू करने का फैसला हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार की संस्था एनसीडीसी को सिफारिश भेजी गई है। अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गयाजमीन से जुड़े मामलों में भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। 30 साल की लीज पर दी गई सरकारी जमीन की समय सीमा अब बढ़ाई जाएगी। साथ ही, सरकार के कब्जे वाली ‘एनिमी संपत्ति’ की खरीद-बिक्री पर अब स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी होगी। बता दें कि बुधवार सुबह विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा उस समय हुआ जब विमान पुणे के बारामती में लैंडिंग कर रहा था। इस घटना से देश भर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उनके निधन पर दुख जताया है। बुधवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया। इस हादसे से कुछ घंटे पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया था, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय है। इस पोस्ट में उन्होंने कैबिनेट बैठक से जुड़े कई अहम फैसले की जानकारी साझा की थी।
अमरावती में BJP की बगावत 22 उम्मीदवारों का फडणवीस को पत्र, नवनीत राणा को बाहर करने की मांग

अमरावती नगर निगम चुनाव में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। यहां चुनाव लड़ने वाले 22 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। इन नेताओं ने पूर्व सांसद नवनीत राणा को पार्टी से तुरंत बाहर निकालने की मांग की है। शिकायत करने वालों में 20 हारे हुए और दो जीते हुए उम्मीदवार शामिल हैं। उम्मीदवारों का आरोप है कि नवनीत राणा ने चुनाव में भाजपा के खिलाफ काम किया। उन्होंने भाजपा उम्मीदवारों को डमी बताया और अपने पति रवि राणा की ‘युवा स्वाभिमान पार्टी’ के उम्मीदवारों को असली भाजपा उम्मीदवार बताकर उनका प्रचार किया। बता दें कि चुनाव से पहले भाजपा और रवि राणा की पार्टी का गठबंधन टूट गया था। हालांकि, एक स्थानीय भाजपा नेता ने कहा था कि नवनीत राणा पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करती रहेंगी। राणा ने कोई जवाब नहीं दियापत्र में नेताओं ने लिखा है कि उनकी हार जनता या विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि नवनीत राणा की वजह से हुई है। 15 जनवरी को हुए चुनाव के नतीजों में भाजपा को भारी नुकसान हुआ है। 87 सीटों वाले निगम में भाजपा 45 सीटों से घटकर 25 पर आ गई है। वहीं, युवा स्वाभिमान पार्टी और कांग्रेस को 15-15 सीटें मिलीं, एआईएमआईएम को 12, एनसीपी को 11, शिवसेना और बीएसपी को तीन-तीन, शिवसेना (यूबीटी) को दो और वंचित बहुजन अघाड़ी को एक सीट मिली।नाराज उम्मीदवारों ने सीएम से कहा है कि वे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं, जो समाज से जुड़े हुए हैं। लेकिन नवनीत राणा ने खुलेआम पार्टी को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राणा को पार्टी से नहीं निकाला गया, तो वे भविष्य में अमरावती शहर में पार्टी की मौजूदगी को खत्म कर देंगी। फिलहाल इस पर नवनीत राणा ने कोई जवाब नहीं दिया है।
हिंदुत्व हमारी आत्मा है, वोट के लिए प्रदर्शन नहीं किया, निकाय चुनाव से पहले देवेंद्र फडणवीस का बयान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निकाय चुनाव के मतदान से पहले कहा कि उनकी पार्टी ने कभी वोट पाने के लिए हिंदुत्व का प्रदर्शन नहीं किया। फडणवीस ने हिंदुत्व को अपनी पार्टी की “आत्मा” बताते हुए कहा कि यह मराठी समाज में गहराई से जुड़ा हुआ है और उनकी पार्टी हर समुदाय की परंपराओं और विश्वासों का सम्मान करती है। फडणवीस ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा हिंदुत्व हमारी आत्मा है। हमने कभी वोट पाने के लिए हिंदुत्व का प्रदर्शन नहीं किया। हमने केवल हिंदुत्व की पूजा की। क्या मराठी व्यक्ति हिंदुत्व में विश्वास नहीं करता? हम हर जाति के हिंदुत्व का उनके अपने रीति-रिवाजों के अनुसार सम्मान और पूजा करते हैं। हिंदुत्व की वास्तविकता जनता के सामने रखनी पड़तीउन्होंने असदुद्दीन ओवैसी पर इशारों में निशाना साधा। ओवैसी ने हाल ही में यह कहा था कि अगर उनकी गठबंधन सरकार बनी, तो हिजाब पहनने वाली महिला मेयर बन सकती हैं। फडणवीस ने इसे मराठी लोगों की अस्मिता को भ्रमित करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा जब कोई ‘मराठी मुसलमानों’ के साथ गठबंधन कर के हिजाब में मेयर बनाने का दावा करता है और मराठी लोगों की अस्मिता को भ्रमित करता है, तब हमें हिंदुत्व की वास्तविकता जनता के सामने रखनी पड़ती है। हिंदुत्व से दूरी बनानासीएम ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर भी आरोप लगाया कि वे चुनावी फायदे के लिए हिंदुत्व से दूरी बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बलासाहेब ठाकरे के लंबे समय से चले आ रहे लाउडस्पीकर हटाने के सपने को कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार पूरा किया। फडणवीस ने कहा केवल वोट के लिए हिंदुत्व से दूरी बनाना और किसी विशेष समुदाय को लुभाना सही नहीं है। जो लोग सत्ता में आने के बाद लाउडस्पीकर वापस लगाने का दावा कर रहे थे, अब घृणास्पद ढंग से व्यवहार कर रहे हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए।
अंबरनाथ नगर परिषद में सियासी संग्राम, उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा शिवसेना आमने-सामने

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद की सामान्य सभा बैठक में सोमवार को उस समय हंगामा हो गया, जब परिषद के उपाध्यक्ष को लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। बैठक के दौरान भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पार्षदों के बीच जोरदार बहस और नारेबाजी देखने को मिली। दरअसल, अंबरनाथ नगर परिषद में लंबे समय से भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। ऐसे में पिछले महीने हुए चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटील को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन अब उपाध्यक्ष पद का चुनाव नया विवाद बन गया है। बता दें कि 60 सदस्यीय नगर परिषद में फिलहाल शिवसेना (शिंदे गुट) के 27 पार्षद, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी के चार और दो निर्दलीय पार्षद हैं। शुरुआत में भाजपा ने कांग्रेस के 12 और एनसीपी के चार पार्षदों के समर्थन से ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी (एवीए)’ बनाई थी, जिससे उसके पास 32 का बहुमत हो गया था। एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार बनायालेकिन बाद में कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया, जिन्होंने भाजपा का साथ दिया था। इसके बाद एनसीपी के चारों पार्षदों ने भाजपा से समर्थन वापस ले लिया और शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए। इससे शिवसेना की संख्या बढ़कर 32 हो गई और उन्हें सदन में बहुमत मिल गया। बात अगर अब बैठक में हुए हंगामा की करें तो सोमवार की बैठक में भाजपा ने एवीए के सभी सदस्यों को अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटील के पक्ष में वोट देने का व्हिप जारी किया। लेकिन एनसीपी ने इस व्हिप को मानने से इनकार कर दिया। इस फैसले का समर्थन स्थानीय शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किणीकर ने किया और कहा कि अब एवीए का कोई अस्तित्व नहीं है। वहीं, शिवसेना ने उपाध्यक्ष पद के लिए एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार बनाया। परिषद में सत्ता को लेकर तनाव बना हुआइतना ही नहीं जैसे ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी, सदन का माहौल बिगड़ गया। दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज शुरू हो गई। गुस्से में आए भाजपा पार्षदों को चप्पल लहराते और शिवसेना उम्मीदवार के खिलाफ नारे लगाते भी देखा गया। गौरतलब है कि उपाध्यक्ष चुनाव का आधिकारिक नतीजा मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा। फिलहाल नगर परिषद में सत्ता को लेकर तनाव बना हुआ है।
नगर निगम चुनाव से पहले बीजेपी का दावा, पश्चिमी महाराष्ट्र की सभी सीटों पर महायुति का कब्जा बरकरार

महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों से पहले राज्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने भरोसा जताया है कि बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन आगामी नगर निगम चुनावों में पश्चिमी महाराष्ट्र की सभी पांचों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखेगा। रविवार को एक इंटरव्यू में वरिष्ठ बीजेपी नेता ने दावा किया कि महायुति (बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी) राज्य के सभी 29 नगर निगमों में अपना मेयर बनाएगी। इन जगहों पर 15 जनवरी को चुनाव होने हैं। उन्होंने मुंबई में विपक्ष की तरफ से उठाए गए क्षेत्रीय और भाषाई मुद्दों को बेअसर बताया। उन्होंने दावा किया कि मराठी और गैर-मराठी दोनों वोटर गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। पाटिल पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, कोल्हापुर, सांगली और इचलकरंजी में चुनाव तैयारियों की देखरेख कर रहे हैं। 2017 के चुनावों के बाद यहां बीजेपी सत्ता में आई थी। 65 सीटों में से बीजेपी 55 सीटें जीतेगीबीजेपी नेता ने कहा कि उनके अंदरूनी सर्वे से पता चलता है कि इन निकायों में उन्हें अच्छी बढ़त हासिल है। 165 सदस्यों वाले पुणे नगर निगम में बीजेपी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा, “हमें 115 से ज्यादा सीटें जीतने का भरोसा है।” यह अनुमान प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की वार्ड-स्तर की समीक्षा पर आधारित है। पाटिल ने दावा किया कि चव्हाण के सुझावों पर अमल करने के बाद 10 और सीटें बढ़ सकती हैं। पुणे में बीजेपी लगभग अकेले चुनाव लड़ रही है, बस कुछ सीटें गठबंधन सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के साथ साझा की गई हैं। सीट बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं हो पाया। पाटिल ने कहा कि पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को 128 में से 80 सीटें जीतने की उम्मीद है। जबकि स्थानीय नेताओं का मानना है कि यह आंकड़ा 85 तक जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोल्हापुर में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी मिलकर लड़ रहे हैं। पाटिल ने इसे ‘परफेक्ट गठबंधन’ बताया। उन्होंने कहा कि 81 में से महायुति को करीब 65 सीटें मिलेंगी और मेयर उन्हीं का होगा। वहीं, इचलकरंजी नगर निकाय की 65 सीटों में से बीजेपी 55 सीटें जीतेगी। विपक्ष अभी भी बिखरा हुआसांगली में, उन्होंने एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल, कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम, पूर्व बीजेपी सांसद और एनसीपी नेता संजय काका पाटिल और मौजूदा सांसद विशाल पाटिल जैसे कुछ विपक्षी राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी के बावजूद, पाटिल ने कहा बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार करने की अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा पार्टी को 78 में से कम से कम 45 सीटें जीतने का भरोसा है। इसमें आरपीआई की सीटें भी शामिल हैं जो बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर लड़ रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि सांगली में शिवसेना गठबंधन का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही बीजेपी नेता ने सोलापुर में अंदरूनी कलह की बातों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद कोई भी नेता पार्टी के खिलाफ काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अभी भी बिखरा हुआ है, जबकि जिले में बीजेपी की ताकत बढ़ी है।
अंबरनाथ में सियासी भूचाल, कांग्रेस के 12 पार्षद BJP में शामिल, अयोग्यता की तैयारी

महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में चुनाव नतीजों के बाद मचा राजनीतिक घमासान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा के कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को तुरंत खारिज कर दिया गया। इसी के साथ कांग्रेस ने अपने 12 नए पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को पार्टी से निलंबित कर दिया। हालांकि इसके बाद कांग्रेस के सभी 12 निलंबित पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। बुधवार देर रात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इन पार्षदों के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की। वहीं अब महाराष्ट्र कांग्रेस ने गुरुवार (08 जनवरी) को कहा कि वह अंबरनाथ के 12 पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी, जो पार्टी के सिंबल पर चुने गए थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी ने इस कदम को अवैध और असांविधानिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि पार्षदों ने कांग्रेस के सिंबल पर चुने जाने के बाद दल-बदल करके सांविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। शामिल होना न केवल अनैतिकउन्होंने एक बयान में कहा, ‘यह काम पूरी तरह से अवैध है। किसी पार्टी के सिंबल पर चुने जाने के बाद एक स्वतंत्र समूह बनाना या बाद में किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होना न केवल अनैतिक है, बल्कि असांविधानिक भी है।’ सावंत ने आगे कहा, ‘कांग्रेस पार्टी इन पार्षदों की सदस्यता रद्द करवाने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी। जल्द ही इन सभी को कानूनी नोटिस जारी किए जाएंगे।’ मालूम हो कि 20 दिसंबर को हुए ठाणे जिले के अंबरनाथ शहर में भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन किया और नगर परिषद का अध्यक्षता बनाया।इस गठबंधन के बाद भाजपा की कुल 31 सीटें हो गई थीं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 27 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल बुधवार को शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराकर परिषद अध्यक्ष चुनी गईं। प्रतिद्वंद्वी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर उपजे विवाद के बाद कांग्रेस ने पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की। कांग्रेस ने अपने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित किया।
अगर नगर निगम भी गए तो मराठी मानूस कमजोर हो जाएगा, राज ठाकरे का BJP पर हमला

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि जो ताकतें मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती हैं, वही आज केंद्र और राज्य की सत्ता में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नगर निकायों पर भी ऐसी शक्तियों का नियंत्रण हो गया, तो मराठी मानूस पूरी तरह कमजोर हो जाएगा।राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का संयुक्त साक्षात्कार का पहला भाग गुरुवार को सामना में प्रकाशित हुआ। इसमें राज ठाकरे ने कहा कि वह और उनके चचेरे भाई किसी राजनीतिक अस्तित्व के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में मराठी मानूस के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए एक साथ आए हैं।ठाकरे परिवार के चचेरे भाइयों का साक्षात्कार शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत और जाने-माने निर्देशक महेश मांजरेकर ने लिया। पिछले महीने, चचेरे भाइयों ने 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के लिए अपनी पार्टियों के गठबंधन की घोषणा की थी। नशीली दवाओं की तस्करी पर कोई नियंत्रण नहींइंटरव्यू में राज ठाकरे ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले लोग न केवल आजीविका के लिए आ रहे हैं, बल्कि वे अपने स्वयं के निर्वाचन क्षेत्र बना रहे हैं।उन्होंने दावा किया, “यह एक पुराना घाव है… मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने के सपने को साकार करने के प्रयास जारी हैं।” उन्होंने कहा कि आज का माहौल कुछ वैसा ही है जैसा संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान था जब गुजरात मुंबई को अपना हिस्सा बनाना चाहता था। उन्होंने दावा किया, “अगर भाजपा नगर निगमों पर नियंत्रण कर लेती है तो मराठी मानुष कुछ भी नहीं कर पाएंगे।” राज ठाकरे ने बढ़ते मादक पदार्थों के खतरे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति में धन के इस्तेमाल और आसानी से उपलब्ध मादक पदार्थों के बीच संबंध स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि नशीली दवाओं के खिलाफ छापे बंद हो गए हैं और राज्य में नशीली दवाओं की तस्करी पर कोई नियंत्रण नहीं है। “बिना योजना के विकास”एमएनएस प्रमुख ने कहा कि अगर इस पर सीमाएं तय करनी हैं तो नगर निकायों को नियंत्रित करना जरूरी है, खासकर मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, मीरा-भयंदर, कल्याण-डोम्बिवली और छत्रपति संभाजीनगर में। राज्य सरकार को निशाना बनाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा विकास का प्रचार करती है, लेकिन इससे प्रगति के बजाय विनाश होता है। उन्होंने दावा किया कि यह “बिना योजना के विकास” है। पूर्व राज्य मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “सरकार को खुद नहीं पता कि वह क्या चाहती है।” उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, सत्ता में बैठे लोग मराठी या महाराष्ट्र से हैं, लेकिन उनका मुंबई की जनता से कोई लेना-देना नहीं है। वे केवल ठेकेदारों के लिए काम करते हैं।
राजनीति में भूचाल! अंबरनाथ में BJP-Congress गठबंधन ने शिवसेना को किया हाशिए पर

एक सियासी कहावत है कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है, चाहे वह दोस्ती हो या दुश्मनी। महाराष्ट्र में ये कहावत भाजपा और कांग्रेस ने चरितार्थ कर दी है। महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर सियासी उथल-पुथल मचा दी है। कांग्रेस से गठबंधन कर भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता हासिल कर ली। भाजपा-कांग्रेस के इस सियासी खेल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ में हाशिए पर धकेल दिया है। चौंकाने वाली बात है कि भाजपा ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया है। शिवसेना को सफाई देने की जरूरतअंबरनाथ के निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच बना सियासी तालमेल इसलिए भी चौंकाने वाला है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा कांग्रेस-मुक्त भारत की समर्थक है। वहीं, अंबरनाथ में इस गठबंधन से भाजपा की तेजश्री करंजुले को महापौर पद पर जीत हासिल हुई। गठबंधन को 32 पार्षदों का समर्थन मिला। इनमें भाजपा के 16, कांग्रेस के 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) के चार पार्षद शामिल थे। भाजपा की ओर से मिले इस झटके के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में काफी रोष नजर आ रहा है। इस मामले पर शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब भी उनके ही नेताओं को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और न ही इस पर शिवसेना को सफाई देने की जरूरत है। कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता मेंमहाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की सरकार में भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है। हालांकि, महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन है। इसके बावजूद अंबरनाथ में शिवसेना को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। शिंदे खेमे के विधायक बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को अपवित्र गठबंधन करार दिया और भाजपा पर विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘जिस पार्टी ने कांग्रेस-मुक्त भारत की बात की थी, वह अब कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में है। यह शिवसेना को पीठ में छुरा घोंपने के अलावा और कुछ नहीं है।’