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सेंगर की अपील नाकाम, पीड़िता की सुरक्षा और साक्ष्यों पर हाईकोर्ट की सुनवाई 25 फरवरी तक टली

दिल्ली हाईकोर्ट से सोमवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका खारिज हो गई है। यह फैसला हाईकोर्ट की ओर से सुनाया गया है। बीते दिनों उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की इस याचिका के माध्यम से पीड़िता ने पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर की सजा के खिलाफ दायर अपील में अतिरिक्त सामग्री पेश करने की मांग की है। पीड़िता का उद्देश्य अदालत में ऐसे तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत करना है जो हालिया घटनाक्रमों को दर्शाते हों। साथ ही, वह खुद और अपने परिवार को जान के खतरे की बात को भी अदालत के सामने रखना चाहती है। अपना जवाब दाखिल करने को कहा गयायह याचिका कुलदीप सेंगर की उस अपील के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने दुष्कर्म के मामले में अपनी सजा को चुनौती दी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि सेंगर ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी बताया कि मुकदमे के दौरान उसकी उम्र के बारे में जाली और झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिनका अब अपील में भी सहारा लिया जा रहा है। अपनी याचिका में, पीड़िता ने उन्नाव के उसके स्कूल के दो अधिकारियों से उसकी जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए अतिरिक्त साक्ष्य दर्ज कराने का निर्देश देने की भी मांग की है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने इस मामले का अवलोकन किया। पीठ ने पाया कि अपील पहले से ही अंतिम सुनवाई के चरण में है। अदालत ने पीड़िता की याचिका पर विचार करने के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की है। इसके अतिरिक्त, पीठ ने पीड़िता के वकील से 31 जनवरी तक अपनी याचिका के साथ प्रासंगिक दस्तावेज दाखिल करने को कहा है। सेंगर और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से भी इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। एक ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दीयह याचिका उच्च न्यायालय के 23 दिसंबर, 2025 के उस आदेश के बाद आई है, जिसमें सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था। उस आदेश में यह भी कहा गया था कि वह पहले ही सात साल और पांच महीने जेल में बिता चुका है। सजा के निलंबन का यह आदेश न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने दिया था। हालांकि, बाद में 29 दिसंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को स्थगित कर दिया था। सेंगर की सजा को उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के मामले में उसकी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील के लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। उसने दुष्कर्म के मामले में दिसंबर 2019 के एक ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।

गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कॉम्प्लेक्स के विरोध पर CJI सूर्यकांत सख्त, बोले निजी हित विकास में बाधा नहीं बन सकते

गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर चल रहे विरोध को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जो लोग इस नए कोर्ट परिसर का विरोध कर रहे हैं, वे पूरी जानकारी के बिना विरोध कर रहे हैं। सीजेआई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हित या सुविधा किसी भी तरह से न्यायिक ढांचे के विकास में बाधा बनने का कारण नहीं हो सकते। दरअसल, गुवाहाटी हाईकोर्ट के लिए एक नया कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाए जाने की योजना है। इसे लेकर बार एसोसिएशन के कुछ वकील विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उन्हें असुविधा हो सकती है। न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकतेमुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि कोर्ट और न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि केवल निजी सुविधा या व्यक्तिगत कारणों के आधार पर विकास कार्यों का विरोध सही नहीं है। सीजेआई ने कहा कि ऐसे विरोध से न्याय व्यवस्था के सुधार में रुकावट आती है। इस दौरान सीजेआई ने यह भी कहा कि नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स से न्यायिक कामकाज ज्यादा सुचारु और प्रभावी होगा, जिससे आम लोगों को भी फायदा मिलेगा।गुवाहाटी हाईकोर्ट के नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के विरोध पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले पूरी जानकारी के बिना ऐसा कर रहे हैं। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि निजी सुविधा या व्यक्तिगत हित न्यायिक ढांचे के विकास में रुकावट नहीं बन सकते।