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अमेरिका से दूरी, चीन से नज़दीकी? ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर का सात साल बाद चीन दौरा

वैश्विक हालात इन दिनों तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका का दबदबा सिमट रहा है और एक समय अमेरिका के करीबी सहयोगी ही अब उसे आंखें दिखा रहे हैं। हाल ही में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने चीन का दौरा किया था और चीन के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की बात कही। इसे लेकर ट्रंप ने कड़ी नाराजगी जताई थी, लेकिन अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी चीन दौरे पर पहुंच रहे हैं। इसे भी यूरोप के अमेरिका के पाल से दूर जाने के तौर पर देखा जा रहा है। कीर स्टार्मर और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात बुधवार को होगी। इस दौरे की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी बार साल 2018 में किसी ब्रिटिश पीएम ने चीन का दौरा किया था और अब करीब सात साल बाद अब कीर स्टार्मर चीन पहुंच रहे हैं। स्कॉच व्हिस्की को बड़ा बाजार मिल सकेइस दौरे से ब्रिटेन और चीन अपने व्यापारिक संबंधों को बेहतर करने की कोशिश करेंगे। हालांकि चीन दौरे के चलते कीर स्टार्मर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गुस्से का भी शिकार होना पड़ सकता है। कीर स्टार्मर से पहले कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी चीन का दौरा किया था। जिस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर कनाडा ने चीन से व्यापार समझौता किया तो वे कनाडा से होने वाले आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। अमेरिकी धमकी के बाद कनाडा के पीएम ने साफ किया कि वे, चीन के साथ व्यापार समझौता नहीं करने जा रहे। कीर स्टार्मर के साथ ही उनके व्यापार मंत्री और कई कंपनियों के प्रमुख भी चीन दौरे पर जा रहे हैं। ब्रिटेन की मंशा है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार चीन में एंट्री मिले, जिससे उसकी कारों और स्कॉच व्हिस्की को बड़ा बाजार मिल सके। चीनी निवेश रोककर चीन को नाराज किया हुआवहीं यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर कर चीन अपने वैश्विक दबदबे में इजाफा करने की इच्छा रखता है। हालांकि ब्रिटेन और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी हैं, जिनमें रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चीन का रूस को समर्थन देना, चीन का ब्रिटेन की जासूसी करना, हॉन्गकॉन्ग में चीन द्वारा किया जा रहा अत्याचार आदि कई वजह हैं, जिन्हें लेकर ब्रिटेन द्वारा चीन के साथ अपने संबंधों को शक की निगाह से देखा जाता है। ब्रिटेन ने भी अपने टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर से चीनी कंपनियों को निकालकर और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में चीनी निवेश रोककर चीन को नाराज किया हुआ है। ऐसे में अब दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाना आसान नहीं है, लेकिन कीर स्टार्मर के इस दौरे से शुरुआत हो सकती है।