ईरान-अमेरिका शांति वार्ता फेल: इस्लामाबाद में 20 घंटे की मैराथन बातचीत बेनतीजा, गालिबाफ ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली 20 घंटे से ज्यादा की मैराथन बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। वार्ता की विफलता के तुरंत बाद ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सीधे तौर पर अमेरिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का विश्वास हासिलसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान कई भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहल पेश की थीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा। गालिबाफ ने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ही तय करना है कि वह ईरान का विश्वास हासिल करना चाहता है या नहीं।
ट्रंप को चुकानी होगी खून की कीमत, ईरान के शीर्ष अधिकारी की खुली चेतावनी

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान अपने नेता और अपने लोगों के मारे जाने का बदला लेगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बहुत करीबी रहे लारीजानी ने साफ कहा, “हम अपने नेता और अपने लोगों के खून का बदला जरूर लेंगे। ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल एक बड़े सैन्य टकराव में उलझे हुए हैं। लारीजानी ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका और इस्राइल के ठिकानों पर हमले कर रहा है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका को लगा था कि वह युद्ध जल्दी जीत लेगा, जैसा उसने वेनेजुएला में किया था, लेकिन इस बार वह नाकाम रहा। अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से ज्यादाइससे पहले अली लारीजानी ने शनिवार को कुछ ऐसे दावे किए जिनसे सनसनी फैल गई। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लिया है, जो जेलों में बंद हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को तुरंत खारिज कर दिया। अमेरिका के एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि ईरान के ये दावे उसके झूठ का एक और उदाहरण हैं। लारीजानी ने ट्रंप पर यह भी आरोप लगाया कि वह ईरान के हमलों में मारे गए छह अमेरिकी सैनिकों की मौत के बारे में झूठी खबरें फैला रहे हैं। उनका कहना है कि असल में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से ज्यादा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका धीरे-धीरे मरने वालों की संख्या बढ़ाता है और कभी दुर्घटनाएं तो कभी और बहाने बताता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अमेरिकी सैनिक बंदी बनाए गए हैं, लेकिन अमेरिका कह रहा है कि वे युद्ध में मारे गए।