ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत के लिए भरोसे का संदेश, राजदूत मोहम्मद फथाली ने जताया आभार

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के असफल रहने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक साथ सभी पहलुओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसके साथ ही ईरान का रुख भी साफ किया। फथाली ने सबसे पहले पहले भारत और यहां की जनता का आभार जताया। साथ ही कहा कि संकट के समय भारतीय लोगों ने सच्चे और भरोसेमंद साथी होने का परिचय दिया। एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।इस दौरान फथाली ने भारत सरकार का भी धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि इस संकट के समय में भारत सरकार ने जरूरी सभी व्यवस्थाएं करने में मदद की। उन्होंने कहा कि भारत ने हर स्तर पर सहयोग किया, जिससे हालात को संभालने में मदद मिली। उनके मुताबिक, भारत और ईरान के रिश्ते मजबूत और भरोसे पर आधारित हैं, जो संकट के समय और भी स्पष्ट हो जाते हैं। इस दौरान ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों से ईरान कोई टोल वसूल नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में ईरान और भारत के रिश्ते अच्छे बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत के मुताबिक, ईरान और भारत के बीच साझा हित और साझा भविष्य है, इसलिए दोनों देश एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता फेल: इस्लामाबाद में 20 घंटे की मैराथन बातचीत बेनतीजा, गालिबाफ ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली 20 घंटे से ज्यादा की मैराथन बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। वार्ता की विफलता के तुरंत बाद ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सीधे तौर पर अमेरिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का विश्वास हासिलसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान कई भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहल पेश की थीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा। गालिबाफ ने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ही तय करना है कि वह ईरान का विश्वास हासिल करना चाहता है या नहीं।