नबीन को मोदी-शाह का समर्थन, BJP के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राह आसान

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पहले अपना समर्थन पत्र सौंपा। उन्होंने उम्मीदवार के प्रति समर्थन जताते हुए पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नामांकन पत्रों का एक सेट, इस चुनाव के लिए रिटर्निंग ऑफिसर बनाए गए पार्टी नेता के लक्ष्मण को सौंपे। रिपोर्ट्स के मुताबिक नबीन के नामांकन का समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने किया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अलावा धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और किरेन रिजिजू जैसे वरिष्ठ पार्टी नेता भी नबीन के नामांकन के समय मौजूद रहे। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गयासमाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और अन्य राज्य नेताओं ने भी नबीन के समर्थन में नामांकन पत्रों का एक सेट जमा किया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पुष्कर सिंह धामी, नायब सिंह सैनी और प्रमोद सावंत भी उपस्थित रहे। बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, झारखंड और अन्य राज्यों के नेताओं ने भी नबीन के समर्थन में नामांकन पत्र जमा किए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नबीन के पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुने जाने की संभावना है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी नेतृत्व इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे है। बता दें कि बिहार से पांच बार के विधायक रहे 45 वर्षीय नबीन को दिसंबर, 2025 में पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। परिषद के चुनाव पहले ही पूरे हो चुकेभारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और विभिन्न राज्य परिषदों के प्रतिनिधियों से बने एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी पार्टी का राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी करता है। पार्टी के संविधान के मुताबिक, किसी भी राज्य के निर्वाचक मंडल के कम से कम 20 सदस्य मिलकर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए किसी उम्मीदवार का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि उम्मीदवार पार्टी का कम से कम चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य रहा हो और उसकी सदस्यता को 15 साल पूरे हो चुके हों। इसके अलावा, यह प्रस्ताव कम से कम पांच ऐसे राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हों।
कांग्रेस ने शुरू किया ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, केंद्र सरकार पर योजना कमजोर करने का आरोप

देशभर में बीते कुछ दिनों से ‘मनरेगा’ योजना के नाम को लेकर खूब चर्चा चल रही है। इसका बड़ा कारण केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को हटाकर नई योजना विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना लाना है। इसके बाद से कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि सरकार ने इस योजना पर बुलडोजर चला दिया है, जबकि यह योजना देश के करोड़ों गरीब और ग्रामीण लोगों की रोजी-रोटी का सहारा है। इतना ही नहीं अब कांग्रेस ने देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करने का भी एलान किया है। देशभर में जन आंदोलन बनाया जाएगाबात अगर मनरेगा बचाओ संग्राम की करें तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने बताया कि यह अभियान देश की करीब 2.5 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा और इसमें करोड़ों लोग जुड़ेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन लोगों के काम के अधिकार, मजदूरी के अधिकार और जवाबदेही को वापस दिलाने के लिए है। बता दें कि इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए कांग्रेस ने एक समन्वय समिति बनाई है। इसके संयोजक अजय माकन हैं, जबकि जयराम रमेश, संदीप दीक्षित और प्रियंक खरगे जैसे वरिष्ठ नेता इसके सदस्य हैं।कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई ग्रामीण गरीबों के हक और सम्मान के लिए है और इसे देशभर में जन आंदोलन बनाया जाएगा। मनरेगा की मूल भावना और उद्देश्य की रक्षा की जाएइस संग्राम को लेकर कांग्रेस ने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान से जुड़ें। इसके लिए पार्टी ने एक वेबसाइट भी शुरू की है, जहां लोग ऑनलाइन जुड़ सकते हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी जाने वाली याचिका पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। कांग्रेस की याचिका में कहा गया है कि मनरेगा एक संवैधानिक अधिकार है और इसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी की प्रमुख मांगें है कि इस योजना में काम की गारंटी को पूरी तरह बहाल किया जाए, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय की जाए, पंचायतों को ज्यादा अधिकार दिए जाएं और मनरेगा की मूल भावना और उद्देश्य की रक्षा की जाए। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस अभियान को लेकर विस्तृत निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में मनरेगा मजदूरों को सोनिया गांधी का वीडियो संदेश दिखाया जाएगा। इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से एक पत्र भी जल्द जारी किया जाएगा। इसे स्थानीय भाषाओं में छपवाकर ग्राम प्रधानों, मनरेगा मजदूरों, रोजगार सहायकों और पूर्व प्रधानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली विधानसभा शीतकालीन सत्र खत्म: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने BJP के वादों के पूरा होने का भरोसा दिलाया, विपक्षी हंगामे के बीच कई विधेयक पास

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र में जो भी वादे किए हैं, उन्हें हर हाल में पूरा किया जाएगा। फरवरी में भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली में बरसों से छाया अंधकार छंटा है और अब पूरी टीम शॉर्ट टर्म व मिड टर्म योजनाओं के जरिये राजधानी को विकास की सही दिशा में आगे बढ़ा रही है। हंगामे के बीच बाधित रहे सत्र को एक दिन बढ़ाकर शुक्रवार को सार्थक बनाया गया, जब दिल्ली से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी को शुरू हुआ था, लेकिन उपराज्यपाल के अभिभाषण के पहले दिन से ही शुरू हुए हंगामे के कारण चार दिन बेकार चले गए। इसके बाद सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाया गया। शुक्रवार को नियम 280 के तहत कई विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे, दिल्ली का प्रदूषण, राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा हुई। हालांकि आखिरी दिन भी आप का हंगामा जारी रहा। सदन में अव्यवस्था फैलाने के आरोप में आप के चार विधायक सोम दत्त, जरनैल सिंह, संजीव झा और कुलदीप कुमार को पूरे सत्र के लिए सुबह ही निलंबित कर दिया गया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के अन्य सदस्यों ने वॉकआउट किया, हालांकि कुछ विधायक बाद में वापस लौटे। वहीं सदन के बाहर आप विधायकों ने प्रदर्शन कर सरकार पर गुरुओं के पीछे छिपकर राजनीति करने का आरोप लगाया। दिल्ली को लूटकर बाहर चुनाव लड़ने वालों पर जनता ने भरोसा तोड़ासदन में हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी लगातार तीसरे दिन भी सदन से गायब रहीं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती और अगर हंगामा जारी रहा तो और कार्रवाई होगी। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि सत्ता पक्ष की ओर से नियम 280 पर चर्चा के लिए 16 सदस्यों के नाम आए, जबकि आप की ओर से केवल एक नाम दिया गया, जो विपक्ष की उदासीनता दिखाता है। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। कुलवंत राणा ने कहा कि दिल्ली का स्वरूप बिगाड़ने में कांग्रेस की बड़ी भूमिका रही और 1958 में बना डीडीए जनहित के बजाय व्यापारिक संस्था बन गया। भाजपा सरकार के दौर में मेट्रो आई और सड़कों में सुधार हुआ, लेकिन 11 साल की आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया। रवि कांत ने कहा कि उपराज्यपाल ने विकसित दिल्ली का स्पष्ट ब्लूप्रिंट दिया है। अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार ने ऑड-ईवन, स्मॉग टावर और रेड लाइट ऑन-गाड़ी ऑफ जैसे अभियानों पर भारी प्रचार किया, जबकि मौजूदा सरकार ने 11 महीनों में प्रदूषण के खिलाफ जमीन पर काम किया। उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि एलजी के सहयोग से भाजपा सरकार ने दस महीनों में दिल्ली के विकास को गति दी है। विपक्ष की ओर से अनिल झा और विरेंद्र सिंह काद्यान ने सरकार पर सवाल उठाए और आयुष्मान कार्ड, स्कूल, बसों, पानी और कूड़े के पहाड़ों को लेकर आंकड़े मांगे। संजय गोयल ने जवाब में कहा कि एलजी ने 70 बिंदुओं में 70 काम गिनाए हैं और दिल्ली को लूटकर बाहर चुनाव लड़ने वालों पर जनता ने भरोसा तोड़ा है। जन विश्वास विधेयक समेत अन्य विधेयक भी पारित किए गएमुख्यमंत्री ने कहा कि 11 महीनों में 19 हजार लोगों को आयुष्मान योजना से इलाज मिला है। दिल्ली में 1100 आरोग्य मंदिर खोले जाएंगे, 29 जन औषधि केंद्र शुरू हुए हैं और पांच अस्पतालों के नए ब्लॉक खोले गए हैं। उन्होंने बताया कि 100 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण लगाए गए, 1300 नर्सिंग स्टाफ भर्ती हुए और मानदेय 500 से बढ़ाकर 13,500 रुपये किया गया। सीएम ने कहा कि एमसीडी की बुक प्रॉपर्टी पर बिजली-पानी के कनेक्शन दिए जा रहे हैं, सभी सड़कों की कार्पेटिंग होगी और आने वाले समय में डीटीसी बसों में केवल डिजिटल टिकट चलेंगे। उन्होंने कहा कि अब कोई भी काम बजट के कारण नहीं रुकेगा। 15 हजार करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए उपलब्ध हैं। सत्र के दौरान कार्यमंत्रणा समिति और विशेषाधिकार समिति के प्रतिवेदन सर्वसम्मति से पास हुए। तथाकथित फांसी घर मामले में भी विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट सदन में रखी गई, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समिति के सामने पेश न होने को सदन की अवमानना माना गया। साथ ही कोर्ट फीस संशोधन और जन विश्वास विधेयक समेत अन्य विधेयक भी पारित किए गए।
ग्रामीण भारत में वापसी की जंग, मनरेगा के सहारे कांग्रेस का सियासी पुनरुत्थान अभियान

कांग्रेस फिर से ग्रामीण भारत में अपनी खोई हुई सियासी जमीन को मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। संसद में जीरामजी कानून के विरोध के बाद पार्टी अब सीधे सड़कों और गांवों तक उतरने की रणनीति पर काम कर रही है। नए कानून की वापसी की मांग को लेकर 10 जनवरी से 25 फरवरी तक ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाया जाएगा। पार्टी नेतृत्व इस आंदोलन को ग्रामीण भारत में कमजोर होती सियासी पकड़ को फिर से मजबूत करने और पारंपरिक वोट बैंक को साधने के मौके के तौर पर देख रहा है। यही वजह है कि अभियान की सफलता का पूरा दारोमदार राज्य इकाइयों पर डालते हुए उनकी सक्रियता की सीधी जवाबदेही कांग्रेस महासचिवों और राज्यों के प्रभारियों को सौंपी गई है। ग्रामीण इलाकों में अपने पुराने वोट बैंक को फिर से जोड़ना चाहतीदरअसल, कांग्रेस इस आंदोलन के बहाने ग्रामीण इलाकों में अपने पुराने वोट बैंक को फिर से जोड़ना चाहती है, लेकिन जमीनी हकीकत पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, गुजरात, दिल्ली,महाराष्ट्र जैसे राज्यों में संगठन कमजोर है। राजस्थान में कांग्रेस अंदरूनी सियासी संघर्षों से जूझती नजर आ रही है। दक्षिण भारत में केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में पार्टी की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में ठीक है लेकिन चुनावी राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में संगठन पहले के मुकाबले काफी कमजोर हो चुका है। चुनावी राज्य असम में भी पार्टी फिर से संगठन मजबूत करने में जुटी है. मौजूदगी फिर से दर्ज कराने की कोशिशपिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस ने वोट चोरी और एसआईआर जैसे मुद्दों को लेकर देशव्यापी सियासी मुहिम चलाने की कोशिश की थी, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर यह धारणा बनी कि ऐसे मुद्दे ज़मीनी स्तर पर ज्यादा असर नहीं छोड़ पाए। कांग्रेस नेतृत्व को महसूस हुआ कि जनता से सीधा संवाद बनाने के लिए किसी ऐसे विषय की जरूरत है, जो रोजमर्रा की जिंदगी और रोजी रोटी से सीधे जुड़ा हो। इसी तलाश में मनरेगा को सबसे प्रभावी मुद्दा माना गया, जिसे केंद्र में रखकर कांग्रेस अब नया राजनीतिक अभियान खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ा यह मुद्दा न सिर्फ सरकार को घेरने का मौका देगा, बल्कि कांग्रेस को अपने पारंपरिक सामाजिक आधार से दोबारा जोड़ने का जरिया भी बन सकता है। मनरेगा बचाओ संग्राम को इसी रणनीति का अहम औजार माना जा रहा है, जिसके जरिए कांग्रेस गांव-गांव अपनी सियासी मौजूदगी फिर से दर्ज कराने की कोशिश में है।