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कांग्रेस का आरोप: फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग, मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) वाले राज्यों में फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिये तय रणनीति के तहत योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जैसा पैटर्न सामने आना बेहद गंभीर चिंता का विषय है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को लिखे पत्र में दावे और आपत्तियों के मौजूदा चरण के दौरान फार्म-7 के गलत इस्तेमाल पर विस्तार से आपत्ति जताई है। संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रहीपत्र में कहा गया है कि फार्म-7 का प्रयोग मौत या दोहराव जैसे ठोस तथ्यों पर आधारित आपत्तियों के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसका इस्तेमाल लक्षित तरीके से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल समेत कई राज्यों में एक जैसी गतिविधियां सामने आई हैं। आरोप है कि पहले से छपे फार्म-7 भरे जा रहे हैं और चुनिंदा मतदाता समूहों के खिलाफ बड़ी संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में ये फॉर्म जमा कराए जा रहे हैं। मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहापार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो इससे न केवल सत्ताधारी भाजपा को चुनावी लाभ मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिकों का मताधिकार भी छिन सकता है। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रक्रिया खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर फार्म-7 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कुछ राज्यों में इसका इस्तेमाल योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद खुलासा, एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के इच्छुक

महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में एनसीपी प्रमुख का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अजित पवार के निधन के बाद से ही उनके राजनीतिक विरासत को लेकर अलग-अलग तरह से कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच अब उनके एक करीबी ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वो जल्द एनसीपी के दोनों गुटों का विलय करने जा रहे थे। बारामती में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य और पवार परिवार के करीबी किरण गुजर ने कहा, “आज यहां अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन किया गया। ‘दादा’ की आखिरी इच्छा थी कि एनसीपी के दोनों गुटों का विलय हो। सभी को एकजुट होना चाहिए। इस बारे में पूरे परिवार में बात हो रही थी। उनसे मेरी आखिरी फोन कॉल में उन्होंने मुझसे चुनाव से जुड़े कुछ कागजात मांगे थे।’ दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बतायादिवंगत अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने दावा किया कि वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय के लिए उत्सुक थे, और यह जल्द ही होने वाला था। दिग्गज नेता के निधन के दो दिन बाद उनके किरण गुजर ने बताया कि उनसे यह बात खुद अजित पवार ने साझा की थी। 1980 के दशक के मध्य में राजनीति में आने से पहले से ही किरण गुजर अजित पवार से जुड़े हुए थे। वो दिवंगत नेता के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी थे। अब किरण गुजर ने गुरुवार (29 जनवरी) को बातचीत में कहा कि अजित पवार ने बुधवार (28 जनवरी) को विमान दुर्घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही उन्हें इस बारे में बताया था। एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयारगुजर ने आगे कहा कि वह दोनों गुटों को मिलाने के लिए सौ प्रतिशत उत्सुक थे। उन्होंने मुझे पांच दिन पहले बताया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी हो गई है और अगले कुछ दिनों में विलय होने वाला है। बता दें कि हाल के नगर निगम चुनावों के दौरान जिसमें दोनों गुटों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। अजित पवार ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों से यह भी कहा था कि वह अपनी पार्टी का NCP (SP) में विलय करना चाहते हैं। पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में 15 जनवरी को हुए नगर निगम चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ने के बाद दोनों गुटों ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए भी गठबंधन जारी रखने का फैसला किया था। इतना ही नहीं गुजर ने दाने के साथ कहा कि अजित पवार के पास विलय और एकजुट एनसीपी के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार था।

बजट सत्र से पहले मोदी पर कांग्रेस का हमला जयराम रमेश बोले, संसद को पृष्ठभूमि बनाकर देते हैं ‘पाखंड से भरा देश के नाम संदेश’

कांग्रेस ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बजट सत्र पर उनकी टिप्पणियों को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे प्रत्येक सत्र की शुरुआत से पहले “देश को अपना वही पाखंडी संदेश” देते हैं। आज का प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा है। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “वह (प्रधानमंत्री) राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए सर्वदलीय बैठकें नहीं बुलाएंगे और न ही उनकी अध्यक्षता करेंगे।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता महत्वाकांक्षी भारत के लिए है। उन्होंने निर्माताओं से आग्रह किया कि वे उनके लिए खुल रहे नए बाजारों से लाभ उठाएं। मोदी ने यह भी कहा कि देश लंबे समय से लंबित समस्याओं से उबर रहा है और दीर्घकालिक समाधानों की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब समाधान खोजने का समय आ गया है, न कि बाधाएं पैदा करने का। उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं की अंतिम-मील डिलीवरी सुनिश्चित करने पर भी काम कर रही है। बजट सत्र की शुरुआत में संसद भवन परिसर में अपने पारंपरिक संबोधन में उन्होंने पत्रकारों से कहा, “देश के सर्वांगीण विकास के लिए कदम उठाते समय हमारी प्राथमिकता हमेशा मानव-केंद्रित रहती है।” उन्होंने आगे कहा कि आत्मविश्वास से भरा भारत दुनिया के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है। पृष्ठभूमि बनाकर अपना वही पाखंड से भरा ‘देश के नाम संदेश’रमेश ने दावा किया कि वह अचानक अंतिम समय में विधेयक पेश करवाएंगे और आवश्यक विधायी जांच के बिना उन्हें संसद से पारित करवा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि मोदी संसद में बैठकर विपक्षी नेताओं की चिंताओं का जवाब नहीं देंगे, बल्कि दोनों सदनों में चुनावी रैलियों में भाषण देंगे। आगे उन्होंने कहा “प्रत्येक सत्र की शुरुआत से पहले, वह संसद को पृष्ठभूमि बनाकर अपना वही पाखंड से भरा ‘देश के नाम संदेश’ देंगे। आज का प्रदर्शन इसी श्रृंखला का हिस्सा है,”

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शशि थरूर ने तोड़ी चुप्पी, कांग्रेस में कलह की अटकलों पर लगा विराम

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर और राहुल गांधी के बीच एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “सब ठीक है।” उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। थरूर ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुई इस बातचीत को “बहुत ही रचनात्मक और सकारात्मक” बताया। उन्होंने साफ किया कि अब वे और पार्टी नेतृत्व एक ही बात पर सहमत हैं। पिछले कुछ महीनों से शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव की खबरें आ रही थीं। थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उनके कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि वे 17 साल से कांग्रेस में हैं और उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ने लगींविवाद की शुरुआत तब हुई जब थरूर पार्टी की एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि वे एक साहित्य उत्सव में गए थे और इसकी जानकारी नेतृत्व को पहले ही दे दी गई थी। इसके अलावा, कोच्चि में पार्टी के एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए खराब व्यवहार की खबरों पर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी। पार्टी के भीतर असली बेचैनी तब बढ़ी जब पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकट प्रबंधन की तारीफ की थी। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद भाजपा ने थरूर को एक अंतरदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दल में कांग्रेस का कोई और नेता शामिल नहीं था, जिससे उनके भाजपा में जाने की अफवाहें उड़ने लगीं। वंशवादी राजनीति की आलोचना कीतनाव तब और बढ़ गया जब थरूर ने प्रधानमंत्री के एक भाषण की सोशल मीडिया पर सराहना की और “भारतीय राजनीति एक पारिवारिक व्यवसाय है” शीर्षक से एक लेख लिखा। इस लेख में उन्होंने वंशवादी राजनीति की आलोचना की थी, जिससे कांग्रेस नेतृत्व काफी नाराज हुआ था। हालांकि, थरूर ने हमेशा यही कहा कि उनकी टिप्पणियां किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से प्रेरित थीं। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री की तारीफ करने का मतलब यह नहीं है कि वे भाजपा में शामिल हो रहे हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता का संदेश है। अब राहुल गांधी से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद सुलझ गए हैं।

गणतंत्र दिवस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप, खरगे बोले विपक्ष और संविधान का हुआ अपमान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में विपक्ष के नेताओं का अपमान किया गया है। खरगे के अनुसार, सरकार ने जानबूझकर प्रोटोकॉल के नियमों की अनदेखी की और विपक्षी नेताओं को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार हैं। अपनी बात रखते हुए खरगे ने कहा कि वह देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उनके और राहुल गांधी के पास कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। प्रोटोकॉल के हिसाब से कैबिनेट रैंक वाले नेताओं को पहली कतार में जगह मिलनी चाहिए। इसके बावजूद, उन्हें समारोह में तीसरी लाइन में बैठाया गया। खरगे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस लाइन में उन्हें जगह दी गई, वहां राज्य मंत्री और बच्चे बैठे थे। अपमानजनक व्यवहार पर स्पष्ट जवाब देकांग्रेस अध्यक्ष ने पास मिलने में हुई परेशानियों का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने सचिवों को भेजकर बैठने की जगह की जानकारी जुटानी पड़ी। उन्हीं सचिवों ने काफी कोशिशों के बाद पास का इंतजाम किया। खरगे ने सरकार के इस व्यवहार को सिर्फ कांग्रेस का नहीं, बल्कि देश के संविधान और पूरे विपक्ष का अपमान बताया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह इस अपमानजनक व्यवहार पर स्पष्ट जवाब दे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गणतंत्र दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट रैंक होने के बाद भी उन्हें और राहुल गांधी को तीसरी लाइन में बैठाया गया। खरगे ने इसे विपक्ष और संविधान का अपमान बताते हुए सरकार से इस पर जवाब मांगा है।

केंद्रीय लेबर कोड पर केरल सरकार सख्त, मंत्री शिवनकुट्टी बोले मजदूर विरोधी नीतियां नहीं होंगी स्वीकार

केरल के श्रम मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने मंगलवार को केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताया। विधानसभा में उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार नए लेबर कोड को रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार पर हर संभव दबाव बनाएगी। यह मामला सीपीआई(एम) विधायक पी. नंदकुमार ने सदन में उठाया था। उन्होंने कहा कि नए नियम नौकरी की सुरक्षा को खत्म करते हैं और वेतन की शर्तों का उल्लंघन करते हैं। मंत्री शिवनकुट्टी ने विधायक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि केरल सरकार मजदूरों के खिलाफ किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगी। श्रमिक अधिकारों से समझौता नहींपिछले महीने, मंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार केंद्रीय श्रम कोड का अध्ययन करने, श्रमिकों पर उनके प्रभाव का आकलन करने और सुधारात्मक उपायों का सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन करेगी। शिवनकुट्टी ने कहा था कि 29 प्रमुख श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए चार श्रम कोड श्रमिकों के बजाय कॉर्पोरेट हितों की रक्षा करते हैं और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलनों के विपरीत हैं। उन्होंने दावा किया था कि जहां अधिकांश राज्यों ने श्रम कोड के अनुरूप अपने कानूनों में संशोधन किया है, वहीं केरल ने यह दृढ़ रुख अपनाया है कि वह कोई भी मजदूर विरोधी संशोधन पेश नहीं करेगा। केंद्रीय श्रम कानूनों को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच टकराव गहराता जा रहा है। केरल सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह श्रमिक अधिकारों से समझौता नहीं करेगी और मजदूरों के हितों के खिलाफ किसी भी नीति का खुलकर विरोध करेगी।

ममता बनर्जी से मिले अखिलेश यादव, बोले“भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला सिर्फ दीदी ही कर सकती

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह मुलाकात कोलकाता में राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में हुई। अखिलेश यादव अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव के साथ एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने कोलकाता आए थे। दोपहर करीब 1:40 बजे उन्होंने मुख्यमंत्री से उनके दफ्तर में बातचीत की। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा के हमलों का डटकर मुकाबला कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने जांच एजेंसी ईडी (ईडी) को हरा दिया है और वह आने वाले समय में भाजपा को भी हराएंगी। अखिलेश कहा, BJP अभी तक पेन ड्राइव खोने का दर्द नहीं भूल पाई है, यह कथित तौर पर उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संदर्भ में था जिन्हें सीएम छापे के दौरान एजेंसी के तलाशी अभियान परिसर से बाहर लाई थीं। चुनाव में धांधली का आरोप लगायाअखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समाज में फूट डालने की राजनीति करती है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा इसके जरिए अपने वोट बढ़ाने के बजाय विरोधियों के वोट कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। अखिलेश ने कहा कि बंगाल, बिहार और यूपी जैसे राज्यों में यह अभ्यास सिर्फ विपक्ष को कमजोर करने का एक जरिया बन गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात कर उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा का मुकाबला कर सकती हैं। अखिलेश ने भाजपा पर जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल और चुनाव में धांधली का आरोप लगाया।

जाति जनगणना पर कांग्रेस का हमला, सवाल 12 ने सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा हो। पार्टी ने कहा कि जनगणना के पहले चरण यानी मकानों की सूची बनाने (हाउसलिस्टिंग) के लिए जो सवाल तैयार किए गए हैं, वे सरकार की असली मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि जाति जनगणना की प्रक्रिया तय करने से पहले सरकार को राजनीतिक दलों, राज्यों और सामाजिक संगठनों के साथ बातचीत करनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना 2027 का काम काफी देरी से चल रहा है। इसका पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। दूसरा चरण, जिसमें जनसंख्या की गिनती होगी, वह फरवरी 2027 में होगा। हालांकि, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में ही हो जाएगा। सवाल नंबर 12 चिंताजनकजयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले जाति जनगणना का विरोध किया था। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने इसे शहरी नक्सली सोच बताया था। लेकिन बाद में राहुल गांधी और कांग्रेस के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा और उन्होंने इसे जनगणना 2027 में शामिल करने की बात मानी। रमेश ने बताया कि सरकार ने मकानों की सूची बनाने के लिए जो फॉर्म जारी किया है, उसमें सवाल नंबर 12 चिंताजनक है। इसमें पूछा गया है कि क्या घर का मुखिया अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या ‘अन्य’ श्रेणी से है। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के बारे में साफ तौर पर नहीं पूछा गया है। रमेश ने कहा कि यह तरीका बताता है कि सरकार निष्पक्ष जाति जनगणना के लिए गंभीर नहीं है। सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुलेगाकांग्रेस नेता ने सुझाव दिया कि सरकार को तेलंगाना सरकार के 2025 के सर्वे (SEEEPC) से सीखना चाहिए। वहां शिक्षा, रोजगार और आय पर जाति-वार जानकारी जुटाई गई थी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए ऐसी जानकारी जरूरी है। सरकार ने जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवालों की अधिसूचना जारी की है। यह चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि अधिकारियों को लोगों से कई तरह की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच होगा। हर राज्य अपने हिसाब से 30 दिनों का समय तय करेगा। लोगों के पास खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी होगा, जो सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले खुलेगा। इस पूरी कवायद पर 11,718 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

शशि थरूर बोले पार्टी लाइन नहीं तोड़ी, राष्ट्रीय हित में ऑपरेशन सिंदूर पर असहमति पर आज भी कायम

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैद्धांतिक रूप से उनकी एकमात्र सार्वजनिक असहमति ऑपरेशन सिंदूर को लेकर थी। थरूर केरल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया था और वह इस अब भी बिना किसी पछतावे के इस रुख पर कायम हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद चल रहे हैं। इन अटकलों में यह भी शामिल है कि कोच्चि में हुए एक हालिया कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उन्हें पर्याप्त महत्व न दिए जाने और राज्य के नेताओं की ओर से कई बार उन्हें किनारे लगाने की कोशिशों से वे नाराज हैं। भारत को सर्वोपरि रखना चाहिएअपने रुख को स्पष्ट करते हुए थरूर ने कहा कि एक पर्यवेक्षक और लेखक के रूप में उन्होंने पहलगाम की घटना के बाद एक अखबार में लेख लिखा था। उस लेख में उन्होंने कहा था कि बिना सजा दिए इस मामले को नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इसके जवाब में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने ही वह प्रसिद्ध सवाल उठाया था- अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा? थरूर ने कहा, जब भारत की प्रतिष्ठा दांव पर हो, जब भारत की सुरक्षा और दुनिया में उसकी जगह का सवाल हो, तब भारत सबसे पहले आता है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर भारत के निर्माण की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय हितों की बात हो, तो भारत को सर्वोपरि रखना चाहिए।

“इतिहास को तोड़-मरोड़ रहे हैं पीएम मोदी!” जयराम रमेश का बड़ा आरोप, बोले- ‘बापू की विरासत मिटाने की हो रही साजिश’

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शुक्रवार को तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने में सबसे माहिर हैं। कांग्रेस ने ये भी कहा कि राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और बीते महीने संसद में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान करने का प्रयास किया गया।कांग्रेस संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पीएम मोदी व्यवस्थागत तरीके से महात्मा गांधी की यादों और विरासत को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा, ‘बीते महीने संसद में राष्ट्रगीत पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी और उनके सहयोगी बेनकाब हो गए। राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और इस दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान का प्रयास किया गया।”आज 23 जनवरी 2026 के दिन देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, जिन्होंने 1937 में वंदे मातरम की पंक्तियों को लेकर हुए विवाद को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाई, जिसका पीएम मोदी ने जानबूझकर जिक्र नहीं किया।’ दोबारा लिखने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाएजयराम रमेश ने लिखा ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परपोते और इतिहासकार सुगत बोस ने लिखा कि नेताजी ने 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर का उद्घाटन किया था और उस दौरान उन्होंने राष्ट्रगान के दौरान पर जन गण मन गाया था।”नेताजी ने ही 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से प्रसारित संदेश में पहली बार महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। अब प्रधानमंत्री महात्मा गांधी की यादों और विरासत को व्यवस्थागत तरीके से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं और इसका ताजा उदाहरण मनरेगा कानून वापस लेना है।’ बीते माह संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि बंगाल में चुनाव होने के चलते वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जा रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर वंदे मातरम के नाम पर राजनीति करने और इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाए। इसके जवाब में सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।