भारत की ग्रोथ मजबूत, 7% तक विकास दर का अनुमान, लेकिन कमजोर रुपया और ग्लोबल उथल-पुथल बनी चुनौती

संसद में आज पेश किए गए ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26’ ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर पेश की है। सरकार ने साफ किया है कि अगले वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि, सर्वे में आगाह किया गया है कि कमजोर होता रुपया और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतें महंगाई को थोड़ी हवा दे सकती हैं। अच्छी खबर यह है कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी के दाम घट रहे हैं। साथ ही, अच्छी फसल के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम भी काबू में रहने की उम्मीद है, जो महंगाई को ज्यादा बढ़ने नहीं देंगे। कुल मिलाकर आर्थिक सर्वे का संदेश साफ है- भारत की ग्रोथ स्टोरी मजबूत है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बनी रहेगी। हालांकि, कमजोर रुपया और ग्लोबल मार्केट की उथल-पुथल के बीच सरकार को फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे। राहत मिलने की उम्मीदसर्वे और हालिया व्यापार समझौतों का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर भी दिखने वाला है। भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारतीय ऑटो सेक्टर सतर्क हो गया है। यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर 10% होने जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, इससे टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी देसी कंपनियों को यूरोपीय कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। महंगाई के काबू में रहने और ग्रोथ को सहारा देने के लिए आरबीआई अगले हफ्ते ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। यह इस साइकिल की आखिरी कटौती हो सकती है, जिससे होम लोन और कार लोन लेने वालों को थोड़ी और राहत मिलने की उम्मीद है।
बजट 2026 से पहले कांग्रेस का वार, जयराम रमेश ने गिनाईं अर्थव्यवस्था की तीन बड़ी चुनौतियां

केंद्र सरकार का आम बजट 2026 अगले महीने फरवरी में पेश किया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस ने उम्मीद जताई कि आने वाला केंद्रीय बजट में सुस्त प्राइवेट कॉर्पोरेट निवेश और आय में असमानताओं की चुनौतियों से निपटने के लिए सार्थक कदम उठाए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि घरेलू बचत दरें काफी कम हो गई हैं, और धन, आय व उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं। जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह देखना बाकी है कि आने वाला केंद्रीय बजट सांख्यिकीय भ्रम के आराम से दायर से बाहर निकलकर वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है, और उनसे निपटने के लिए सार्थक कदम उठाता है या नहीं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि संसद के आने वाले सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। 2026-27 का बजट अब से 20 दिन बाद पेश किया जाएगा। असमानताएं लगातार गहराती जा रहीअपने एक्स पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा, ‘संसद के आगामी सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026/27 का बजट अब से बीस दिन बाद पेश किया जाएगा। यह बजट निस्संदेह 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को प्रतिबिंबित करेगा, जिसने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ये सिफारिशें 2026/27 से 2031/32 की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र व राज्यों के बीच कर राजस्व के बँटवारे तथा राज्यों के बीच इन राजस्व के वितरण से संबंधित हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा को बुलडोजर से खत्म करने वाले नए कानून में लागू किए गए 60:40 लागत को साझा करने के फॉर्मूले से पहले ही बेहद चिंतित राज्य सरकारें अब निश्चित रूप से और भी अधिक आशंका में उंगलियाँ क्रॉस किए बैठी होंगी। अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफ़े के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं। दूसरा, घरेलू बचत दरों में काफ़ी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है। तीसरा, संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं। बजट में उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगाकांग्रेस नेता ने कहा कि अब देखना यह है कि आने वाला बजट सांख्यिकीय भ्रमों के अपने आरामदेह दायरे से बाहर निकलकर इन वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है या नहीं, और उनसे निपटने के लिए कोई सार्थक कदम उठाता है या नहीं। रोजगार सृजन के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक उच्च जीडीपी वृद्धि दरें भी तब तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं, जब तक ये कदम अभी नहीं उठाए जाते। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय बजट 2026 से पहले देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चुनौतियां गिनाई। उन्होंने इसके तीन प्रमुख कारण भी बताए। साथ ही उम्मीद जताई कि इस बजट में उनपर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।