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“हिजाब पहनी बेटी बनेगी प्रधानमंत्री” बयान पर सियासी घमासान, ओवैसी का हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला

महाराष्ट्र निकाय चुनाव प्रचार में व्यस्त ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का हिजाब पहने बेटी का एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनने वाले बयान पर सियासत शुरू हो चुकी है। ओवैसी ने अब रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी का यह बयान असम सीएम की टिप्पण के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र होने के नाते एक हिंदू व्यक्ति को ही देश का प्रधानमंत्री बनते हुए देखेगा। रविवार को नागपुर में ओवैसी ने असम सीएम पर करारा तंज कसते हुए कहा कि उनके दिमाग में ‘ट्यूबलाइट’ है। उन्होंने संविधान की कसम खाई है। संविधान में यह कहां लिखा है? पाकिस्तान के संविधान में लिखा है कि सिर्फ एक समुदाय का व्यक्ति ही उस देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है। हमारे देश में बाबासाहेब अंबेडकर ने संविधान दिया है। वे हिमंत बिस्वा सरमा से अधिक बुद्धिमान और पढ़े-लिखे थे। दुर्भाग्य से जो लोग संविधान और उसकी भावना को नहीं समझते कि यह देश सिर्फ एक समुदाय का नहीं है। उनकी (असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की) सोच छोटी है, इसलिए वे ऐसी छोटी-छोटी बातें करते हैं। हिजाब पहनी हुई बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगीदरअसल, शनिवार को गुवाहाटी में ओवैसी के बयान पर असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि संवैधानिक रूप से कोई रोक नहीं है। कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है। लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र है, हिंदू सभ्यता है, और हम हमेशा यह मानेंगे और हमें पूरा भरोसा है कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा एक हिंदू व्यक्ति ही होगा।ओवैसी ने शुक्रवार, 09 जनवरी को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि एक दिन ऐसा आएगा, जब हिजाब पहनी बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। अपने बयान में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि पाकिस्तान का संविधान साफ तौर पर कहता है कि सिर्फ एक धर्म का व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। लेकिन बाबा साहेब का संविधान कहता है कि भारत का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मेयर बन सकता है। मेरा सपना है कि एक दिन ऐसा आएगा, जब हिजाब पहनी हुई बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया गयाइधर, रायपुर में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी के मन के भाव बार-बार प्रकट होते हैं कि वे किस प्रकार की राजनीति करते हैं, किस प्रकार वे धर्म के आधार पर बात करते हैं। वास्तविकता यह है कि ओवैसी के पास इस तरह से भावनात्मक और सांप्रदायिक राजनीति करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। ओवैसी के बयान पर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाया गया। हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया गया। उन्हें और क्या चाहिए?…वह दिवास्वप्न देख रहे हैं। अगर भारत में कोई महिला प्रधानमंत्री बनेगी, तो वह साड़ी पहनकर ही बनेगी।

मलयालम थोपने के आरोपों पर पिनराई विजयन का जवाब, बोले भाषा विधेयक 2025 पूरी तरह समावेशी

केरल के मलयालम भाषा विधेयक 2025 को लेकर कर्नाटक समेत कई जगहों पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप यह लग रहा है कि यह कानून दूसरी भाषाओं पर जबरन मलयालम थोपेगा। ऐसे में बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन सभी दावों को खारिज करते हुए इस विधेयक को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा द्वारा पारित यह कानून पूरी तरह समावेशी है और इसमें भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की विशेष सुरक्षा की गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि केरल की प्रगति हमेशा समानता, भाईचारे और समग्र विकास पर आधारित रही है। राज्य सरकार धर्मनिरपेक्षता और बहुलतावाद जैसे संवैधानिक मूल्यों को पूरी मजबूती से बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मलयालम की परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगाविजयन ने स्पष्ट किया कि मलयालम भाषा विधेयक में एक साफ और मजबूत प्रावधान (धारा 7) शामिल है, जो भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है। खासतौर पर कन्नड़ और तमिल भाषी समुदायों के हितों को सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी नागरिक पर कोई भाषा थोपने के पक्ष में नहीं है और भाषाई विविधता की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन क्षेत्रों को अधिसूचित किया गया है, वहां तमिल और कन्नड़ भाषी लोग सचिवालय, विभागाध्यक्षों और स्थानीय कार्यालयों से अपनी मातृभाषा में पत्राचार कर सकते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें जवाब भी उसी भाषा में दिया जाएगा। दूसरी ओर शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठाई गई चिंताओं को लेकर खासकर कासरगोड जिले में कन्नड़ माध्यम के स्कूलों को लेकर पिनराई विजयन ने कहा कि जिन छात्रों की मातृभाषा मलयालम नहीं है, वे राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार स्कूलों में उपलब्ध भाषाओं में से अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि अन्य राज्यों या विदेशी छात्रों को कक्षा 9, 10 या उच्च माध्यमिक स्तर पर मलयालम की परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। राज्यों में विवाद खड़ा हो गयामुख्यमंत्री ने कहा कि केरल की भाषा नीति पूरी तरह से भारत के संविधान और आधिकारिक भाषा अधिनियम 1963 के अनुरूप है। यह नीति संविधान के अनुच्छेद 346 और 347 का पूरी तरह पालन करती है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता हमारी ताकत है, इसे एक ही ढांचे में जबरन नहीं ढाला जा सकता। इसके साथ ही केरल मॉडल ऑफ गवर्नेंस का जिक्र करते हुए पिनराई विजयन ने कहा कि राज्य की प्रगति भागीदारी और पारदर्शिता पर आधारित रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार संघीय ढांचे के अधिकारों की रक्षा करते हुए हर नागरिक की भाषाई पहचान को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मलयालम भाषा विधेयक 2025 को लेकर कर्नाटक समेत कई राज्यों में विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि केरल सरकार दूसरी भाषाओं पर मलयालम थोपना चाहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि विधेयक पूरी तरह समावेशी है।