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भाजपा ने राहुल, ममता और तेजस्वी पर हमला बोलते हुए वंशवादियों को सत्ता से हटाने की अपील की, कांग्रेस ने बोला तीखा हमला

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को वंशवादी नेताओं को सत्ता से हटाने की अपील की और विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला किया। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि ये नेता ‘अवैध घुसपैठियों’ का स्वागत करने की कोशिश कर रहे हैं और ‘विदेश से ज्ञान’ दे रहे हैं। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के इंस्टाग्राम पासवर्ड जानने की बात कहते हुए भाजपा ने तंज कसा। पार्टी ने जनता से अपील की कि वे ऐसे नेतृत्व आगे बढ़ाएं जो भारत की सीमाओं को सुरक्षित कर सके, न कि इसे बेच दे। वास्तविकता पर उनकी पकड़ जितनी कमजोरभाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, राहुल के ‘विदेश से ज्ञान’ यात्री जाल (टूरिस्ट ट्रैप) से लेकर ममता के ‘अवैध घुसपैठिया’ के स्वागत तक..यही विपक्ष की सुरक्षा (नीति) है, जिसमें देश की सीमाएं खुली छोड़ दी जाती हैं, जिसका कोई भी गलत फायदा उठा सकता है। भाजपा ने राजनेताओं के इंस्टाग्राम खातों के संपादित स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किए और उनके प्रोफाइल बायो बदलकर उन पर तंज कसा। पार्टी ने कहा कि जब इंडिया ब्लॉक के नेता सोचते हैं कि राजनीतिक जुमले अभेद्य पासवर्ड बन सकते हैं, लेकिन वे वास्तविकता पर उनकी पकड़ जितनी कमजोर है, वे उतने ही कमजोर हैं। एसआईआर अभ्यास को लेकर चिंता जताईराहुल गांधी के खाते के स्क्रीनशॉट को संपादित करते हुए भाजपा ने बायो में बदलाव किया और उन्हें ‘पर्यटन का नेता’ (लीडर ऑफ पर्यटन) बताया। बायो में लिखा गया- जेन-जी कॉमेडी के मकसद से मुझे देखते हैं। स्क्रीनशॉट में ममता बनर्जी के बायो को भी बदला गया। इसमें बायो में भाजपा ने लिखा- ममता बनर्जी का आधिकारिक इंस्टाग्राम खाता, जिनके लिए अवैध अप्रवासी ही सब कुछ हैं’। वहीं राजद नेता तेजस्वी यादव के स्क्रीनशॉट में संपादित बायो में लिखा था-‘जंगलराज के नेता, बिहार।’ पोस्ट में आगे लिखा गया, इन वंशवादी आपदाओं को बंद करने और वास्तविक नेतृत्व को अपनाने का समय आ गया है, जो सीमाओं को सुरक्षित करे, न कि उन्हें बेच दे। हमेशा भारत पहले। पश्चिम बंगाल में कथित ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे पर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे पर ऐसे समय में हमले कर रहे हैं, जब राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर अभ्यास को लेकर चिंता जताई है। आम नागरिकों के साथ हो रहे व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया काफी हद तक यांत्रिक हो गई है, जो तकनीकी आंकड़ों पर आधारित है और इसमें संवेदनशीलता, मानवीय स्पर्श और विवेक का अभाव है, जो लोकतंत्र में ऐसे बुनियादी अभ्यास के लिए जरूरी है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने ट्रंप के ग्रीनलैंड कब्जे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, “नाटो और सुरक्षा खतरे में”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिए गए बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को करारा हमला बोला और उन्होंने कहा कि डेनमार्क को अमेरिका वेनेजुएला समझने की कोशिश न करे। हम पर हमला करना नाटो मिलिट्री गठबंधन का अंत होगा। वेनेजुएला में मिलिट्री ऑपरेशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि अब अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की तैयारी में है। उनके इस बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को तीखा पलटवार किया और कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा नाटो मिलिट्री गठबंधन का अंत होगा। बता दें कि काराकास में अमेरिकी सेना द्वारा नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए आधी रात को किए गए ऑपरेशन से पूरी दुनिया हैरान है। अमेरिका के इस कदम से डेनमार्क और ग्रीनलैंड की चिंता बढ़ गई, जो डेनिश साम्राज्य का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और इस तरह नाटो का हिस्सा है। ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेंगेफ्रेडरिकसेन ने सोमवार को डेनिश ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति की ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की और विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका किसी दूसरे नाटो देश पर मिलिट्री हमला करने का फैसला करता है, तो सब कुछ रुक जाएगा। यानी, हमारे नाटो और इस तरह दूसरी दुनिया की जंग खत्म होने के बाद से मिली सुरक्षा भी खत्म हो जाएगी।” ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति बनने के दौरान और अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में बार-बार ग्रीनलैंड पर अमेरिका के अधिकार की बात कही, और उन्होंने द्वीप पर कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल करने से भी इनकार नहीं किया है। रविवार को उनकी टिप्पणियों, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, ‘आइए 20 दिनों में ग्रीनलैंड के बारे में बात करते हैं’ ने इस डर को और बढ़ा दिया कि अमेरिका भविष्य में ग्रीनलैंड में दखल देने की योजना बना रहा है। फ्रेडरिकसेन ने यह भी कहा कि जब ट्रंप कहते हैं कि वह ग्रीनलैंड चाहते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेंगे जहां हमें और ग्रीनलैंड को इस तरह से धमकी दी जाए।” इस संभावना को मानना पड़ रहानीलसन ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती है। उन्होंने अपने समर्थकों से शांत और एकजुट रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं जहां हमें लगता है कि रातों-रात देश पर कब्जा हो सकता है और इसीलिए हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हम अच्छा सहयोग चाहते हैं।’ नीलसन ने आगे कहा, हमारी स्थिति ऐसी नहीं है कि अमेरिका आसानी से ग्रीनलैंड पर कब्जा कर ले। वहीं, डेनिश ब्रॉडकास्टर के राजनीतिक पत्रकार आस्क रोस्ट्रुप ने सोमवार को स्टेशन के लाइव ब्लॉग पर लिखा कि मेटे ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के विचार को साफ तौर पर खारिज कर दिया होता। लेकिन अब बयानबाजी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें इस संभावना को मानना पड़ रहा है।