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Narendra Modi: ‘मन की बात’ में भारतीय चीज की वैश्विक पहचान का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भारत के डेयरी सेक्टर की बढ़ती ताकत और वैश्विक स्तर पर भारतीय चीज की पहचान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का स्वाद, परंपरा और गुणवत्ता अब दुनिया भर में नई पहचान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘हमारे देश में खान-पान की परंपराएं सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रही हैं। भारतीय चीज भी इसी परंपरा का अहम हिस्सा है।’ उन्होंने बताया कि ब्राजील में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय चीज प्रतियोगिता में भारत के दो ब्रांड्स को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हुई। भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रहीपीएम मोदी ने कहा कि भारत के डेयरी सेक्टर में तेजी से बदलाव हो रहा है। उन्होंने बताया कि वैल्यू एडिशन के चलते पारंपरिक स्वादों को नई पहचान मिली है और अब भारतीय चीज वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहा है। प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में बनने वाले खास चीज का भी जिक्र किया। जम्मू-कश्मीर का कालारी चीज, जिसे ‘मोजरेला ऑफ कश्मीर’ भी कहा जाता है, लंबे समय से गुज्जर-बकरवाल समुदाय द्वारा बनाया जाता रहा है। वहीं, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में मिलने वाला ‘छुर्पी’ याक के दूध से तैयार किया जाता है। पीएम मोदी ने कहा कि इसका स्वाद पहाड़ों की सादगी और नरमी को दर्शाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र और गुजरात का ‘टोपली नू पनीर’ या ‘सुरती चीज’ भी अपनी अलग पहचान रखता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कई भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। नई तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों के कारण भारतीय उत्पाद अब वैश्विक बाजार और रेस्टोरेंट तक पहुंच रहे हैं।

चीन के ‘मैन्युफैक्चरिंग’ किले में सेंध लगाएगा भारत, बजट 2026-27 में दिखा विकसित भारत का रोडमैप

चीन और अमेरिका इस समय निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र बने हुए हैं। चीन सामान्य उपभोग की वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बना हुआ है तो अमेरिका और यूरोप के कुछ देश तकनीक, मशीन और युद्ध सामग्री के निर्यातक के रूप में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। भारत अब तक अपनी आंतरिक खपत, खाद्यान्न प्रसंस्कृत उत्पादों और सेवाओं के निर्यात से एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है। लेकिन 2026-27 का बजट यह बताता है कि भारत अब मूलभूत वस्तुओं-सेवाओं के निर्यात के साथ-साथ उन्नत तकनीक पर आधारित वस्तुओं के उत्पादन-निर्यात पर आधारित व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। निर्मला सीतारमण द्वारा पेश नौवां बजट उसी औद्योगिक ढांचे को विश्वसनीय मजबूती प्रदान करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है। महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहतीबजट में औद्योगिक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुओं, मशीनों, कलपुर्जों और तकनीक के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य से लेकर दस प्रतिशत के बीच कर दी गई है। सरकार का यह कदम देश में रक्षा उत्पादों, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए सहायक होगा। केंद्र सरकार लगातार देश को रक्षा उत्पादों के एक वैश्विक निर्यातक के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। इससे यह समझ आता है कि सरकार का विजन ही बजट में कानूनी प्रावधानों के रूप में उभर कर सामने आया है। आज घरेलू उपभोग की छोटी-छोटी वस्तुओं से लेकर कारों-वायुयानों और उपग्रह निर्माण तक में जिस तरह सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग बढ़ रहा है, कोई भी देश चिप्स के लिए चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश पर निर्भर नहीं रह सकता। बजट में देश को इस सेक्टर में मजबूत बनाकर देश को रणनीतिक मजबूती देने की कोशिश की गई है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा सेंटरों के भारत में सेंटर निर्माण करने पर विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलीडे प्रदान करना भी सरकार की उसी नीयत को स्पष्ट करता है जिसके अंतर्गत वह महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहती है। बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकताभाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जर्मनी की ड्यूश बैंक की भारतीय इकाई के पूर्व प्रबंध निदेशक जफर इस्लाम ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को 2047 में एक विकसित देश बनाने की बात करते रहे हैं। वर्तमान बजट देश को उसी दिशा में ले जाने का एक रोड मैप दिखाई देता है। लेकिन कोई भी देश औद्योगिक उत्पादन का केंद्र बने बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता। यह बजट देश को सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्माण की एक वैश्विक इकाई के रूप में विकसित करने का फ्रेम वर्क प्रदान करता है।