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ईरान-अमेरिका शांति वार्ता फेल: इस्लामाबाद में 20 घंटे की मैराथन बातचीत बेनतीजा, गालिबाफ ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली 20 घंटे से ज्यादा की मैराथन बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। वार्ता की विफलता के तुरंत बाद ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सीधे तौर पर अमेरिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का विश्वास हासिलसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान कई भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहल पेश की थीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा। गालिबाफ ने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ही तय करना है कि वह ईरान का विश्वास हासिल करना चाहता है या नहीं।

ट्रंप का पश्चिमी देशों पर तीखा प्रहार ‘ब्रिटेन और फ्रांस खुद लड़ना सीखें, अमेरिका नहीं आएगा साथ’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन जैसे जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार किया था, उनके लिए उनके पास दो सुझाव हैं। ब्रिटेन जैसे जो देश होर्मुज जलडमरूमध्य की वजह से जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं, जिन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया, उनके लिए मेरा सुझाव है: पहला- अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। दूसरा- हिम्मत जुटाओ, जलडमरूमध्य पर जाओ और उसे अपने कब्जे में ले लो। अब तुम्हें खुद अपने लिए लड़ना सीखना होगा, अमेरिका अब तुम्हारी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे तुम हमारे लिए नहीं आए। ईरान लगभग तबाह हो चुका है। मुश्किल काम खत्म हो गया है। जाओ, अपना तेल खुद हासिल करो। 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डालाउन्होंने आगे लिखा, फ्रांस ने इस्राइल जा रहे सैन्य सामान से भरे विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने नहीं दिया। फ्रांस ने ‘ईरान के कसाई’ के मामले में बहुत ही खराब सहयोग किया, जिसे सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया है। अमेरिका इसे याद रखेगा। इससे पहले, सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनका देश ईरान में अपने सैन्य अभियानों को समाप्त करने के लिए एक और अधिक समझदार शासन के साथ गंभीरता से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। लेकिन अगर किसी भी वजह जल्द ही कोई समझौता नहीं हो पाता है (जिसकी बहुत अधिक संभावना है)और अगर होर्मुजलडमरूमध्य व्यापार के लिए नहीं खुलता है, तो हम उनके सभी बिजली उत्पादन संयंत्रों, तेल कुओं और खर्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर देंगे, जिन्हें हमने जानबूझकर अभी तक छुआ नहीं है। उन्होंने लिखा, यह उन असंख्य सैनिकों और अन्य लोगों का बदला होगा, जिन्हें ईरान ने पिछले शासन के 47 वर्षों के आतंक के दौरान बेरहमी से मार डाला था।

Donald Trump की ईरान को कड़ी चेतावनी: “अब फैसला लो, वरना वापसी का रास्ता नहीं बचेगा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द गंभीर होकर फैसला लेना होगा, वरना हालात ऐसे हो जाएंगे जहां से वापसी संभव नहीं होगी। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इसी के साथ उन्होंने नाटो देशों पर भी निशाना साधा और सहयोग न करने का आरोप लगाया.ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं। वे हमसे डील करने के लिए भीख मांग रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं। उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा! मिले-जुले संकेत दिएईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह “न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।”

ईरान पर अमेरिका-इज़राइल के हमलों पर भारत की पहली प्रतिक्रिया, खाड़ी संकट से बढ़ीं ऊर्जा और प्रवासी सुरक्षा की चिंताएं

ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के ताजा हमलों के बाद भारत सरकार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया कि भारत, ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगीईरान पर हमले से भारत के लिए भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। लड़ाई लंबी चली तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक स्थिरता समेत कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा ईरान के पड़ोसी देशों से आयात करता है। देश का करीब 40 से 60 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के निकास मार्ग से आता है। यहां किसी तरह का सैन्य अवरोध होने पर तेल की आपूर्ति में बाधा आ सकती है। खाड़ी देशों में 80 लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय रहते हैं। इनकी सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर इनकी निकासी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी