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कांग्रेस का आरोप: फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग, मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) वाले राज्यों में फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिये तय रणनीति के तहत योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जैसा पैटर्न सामने आना बेहद गंभीर चिंता का विषय है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को लिखे पत्र में दावे और आपत्तियों के मौजूदा चरण के दौरान फार्म-7 के गलत इस्तेमाल पर विस्तार से आपत्ति जताई है। संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रहीपत्र में कहा गया है कि फार्म-7 का प्रयोग मौत या दोहराव जैसे ठोस तथ्यों पर आधारित आपत्तियों के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसका इस्तेमाल लक्षित तरीके से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल समेत कई राज्यों में एक जैसी गतिविधियां सामने आई हैं। आरोप है कि पहले से छपे फार्म-7 भरे जा रहे हैं और चुनिंदा मतदाता समूहों के खिलाफ बड़ी संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में ये फॉर्म जमा कराए जा रहे हैं। मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहापार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो इससे न केवल सत्ताधारी भाजपा को चुनावी लाभ मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिकों का मताधिकार भी छिन सकता है। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रक्रिया खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर फार्म-7 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कुछ राज्यों में इसका इस्तेमाल योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

मतदाता सूची ड्यूटी में खतरा, बैंक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर AIBOC ने उठाई आवाज़

3.25 लाख सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले बैंकिंग क्षेत्र के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन संगठन ‘अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ’ (एआईबीओसी) ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर ड्यूटी को लेकर चिंता जताई है। ‘एसआईआर’ ड्यूटी, बैंक अधिकारियों के लिए ‘जी का जंजाल’ बन गई है। एआईबीओसी ने तनावपूर्ण/असुरक्षित माहौल में बैंक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की है। पश्चिम बंगाल में 26 दिसंबर 2025 से 14 फरवरी 2026 तक, लगभग डेढ़ महीने की अवधि के लिए, बैंक अधिकारियों को मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षक (ईआरएमओ) के रूप में तैनात किया गया है। परिसंघ ने इस मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन अधिकारियों और वित्तीय सेवा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। घटना स्थल पर पुलिस मौजूद नहींअखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने अपने बयान में यह बात कही है। परिसंघ ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान अपने सदस्यों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फरक्का में हुई एक घटना का हवाला देते हुए रॉय ने कहा, एसआईआर प्रक्रिया के सूक्ष्म पर्यवेक्षक के रूप में तैनात बैंक अधिकारियों पर कथित तौर पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया है। इसमें कुछ अधिकारी घायल हो गए हैं। यह घटना संकेत देती है कि तनावपूर्ण एवं असुरक्षित माहौल में बिना पर्याप्त सुरक्षा के ड्यूटी कर रहे बैंक अधिकारी व्यक्तिगत जोखिम का सामना कर रहे हैं। एआईबीओसी ने आरोप लगाया है कि घटना स्थल पर पुलिस मौजूद नहीं थी। परिचालन परिणामों पर सीधा प्रभाव पड़ेगाएसआईआर ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। यह तैनाती, तिमाही और वर्ष के अंत के सबसे महत्वपूर्ण बैंकिंग समय के साथ मेल खाती है। एआईबीओसी को आशंका है कि अधिकारियों का इस प्रकार लंबे समय तक मुख्य बैंकिंग कार्यों से अलग होना, आंतरिक और बाह्य नियामक अनुपालन, लेखा समापन, लेखापरीक्षा संबंधी कार्य और वैधानिक/व्यावसायिक लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करेगा। एसआईआर ड्यूटी के चलते से ग्राहक सेवा और परिचालन परिणामों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। इसका अन्य सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि बैंक अधिकारियों ने राष्ट्रीय हित में वैध सार्वजनिक कर्तव्यों का निरंतर पालन किया है, लेकिन इस तरह की तैनाती का पैमाना, समय और लंबी अवधि अब आवश्यक बैंकिंग कार्यों को काफी हद तक बाधित कर रहा है। बैंक अधिकारियों को अनावश्यक परिचालन, अनुपालन और सेवा जोखिमों की तरफ ले जाया जा रहा है। इससे अधिकारियों के व्यक्तिगत जीवन में भी काफी व्यवधान उत्पन्न होता है। इतना ही नहीं, एसआईआर ड्यूटी से कार्य की निरंतरता, प्रशिक्षण संबंधी दायित्व और वैध कैरियर प्रगति प्रभावित होती है।

वोटर लिस्ट विवाद पर ममता बनर्जी का EC पर बड़ा हमला, लिखा पांचवां पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, ‘आयोग अपने ही 20 वर्षों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है, जिससे मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।’ बता दें कि मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी एक अन्य पत्र में निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष कई गंभीर मुद्दे उठाए थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को सोमवार को एक और पत्र लिखा है। यह उनका पांचवां पत्र है। इसमें उन्होंने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। संविधान की भावना के खिलाफ बतायाममता बनर्जी का दावा है कि 2002 की वोटर लिस्ट को डिजिटल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया गया, जिससे गंभीर गलतियां हुई हैं। उनका कहना है कि इन तकनीकी खामियों की वजह से असली वोटरों को गलत तरीके से ‘विसंगति’ वाली श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है।मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह अपनी ही पुरानी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में जो सुधार हुए थे, उन्हें दरकिनार कर वोटरों को फिर से अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे मनमाना और संविधान की भावना के खिलाफ बताया। सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाएबनर्जी ने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की कोई रसीद नहीं दी जा रही है। उन्होंने सुनवाई प्रक्रिया को पूरी तरह मशीनी और संवेदनहीन बताया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया मानवीय संवेदनाओं से खाली है और लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को नया पत्र लिखा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर सुधारों की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। सीएम ममता ने कहा कि आयोग के रूख के कारण मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा सिद्ध करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

एसआईआर पर ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, कहा– भाजपा आईटी सेल के ऐप से हो रहा है अवैध काम

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग राज्य में एसआईआर अभ्यास को कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल के बनाए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। मुख्यमंत्री बनर्जी दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए दो दिन की यात्रा पूरी करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग ‘हर तरह के गलत तरीके’ अपना रहा है। मतदाताओं की परेशानियों को काफी बढ़ा दियाउन्होंने कंहा, एसआईआर कराने के लिए चुनाव आयोग हर तरह के गलत कदम उठा रहा है। वह योग्य मतदाताओं को मृत घोषित कर रहा है और बुजुर्ग, बीमार और असहाय लोगों को सुनवाई में आने के लिए मजबूर कर रहा है। वह इस काम के लिए भाजपा के आईटी सेल के बनाए मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहा है। यह अवैध, असांविधानिक और अलोकतांत्रिक है। ऐसे नहीं चल सकता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो की ओर से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब उनकी पार्टी के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर को कराने के लिए आयोग ने मनमाने और प्रकिया के खिलाफ कदम उठाए हैं। टीएमसी ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने राज्य के योग्य और वास्तविक मतदाताओं की परेशानियों को काफी बढ़ा दिया है। एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगीममता बनर्जी ने कहा, मैं जनता से अपील करती हूं कि एसआईआर में भाग लेते समय सतर्क रहें। जो लोग जरूरतमंद हैं, उनके साथ खड़े रहें। उन्हें मेरा समर्थन करने की जरूरत नहीं है, केवल लोगों का साथ दें, जो इस प्रक्रिया की वजह से परेशानी में हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा था कि वह राज्या में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि डर, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण मौतें हो रही हैं और लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है।