मोदी सरकार का बड़ा फैसला, सीमा से जुड़े देशों के लिए FDI नियम आसान

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को आसान बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अहम फैसले के तहत सरकार ने 2020 में जारी ‘प्रेस नोट 3’ के प्रावधानों में ढील दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए यह सख्त नियम लागू किया गया था। पुराने नियमों के अनुसार, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों- चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान- से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगेगौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में भारी तनाव आ गया था। इसके परिणामस्वरूप, भारत सरकार ने टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। देश में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी इन्वेस्टमेंट एजेंडा 2024’ के तहत कैबिनेट ने कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इन फैसलों में रेलवे, हाईवे, एविएशन और ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे प्रमुख सेक्टर्स शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
चीन के ‘मैन्युफैक्चरिंग’ किले में सेंध लगाएगा भारत, बजट 2026-27 में दिखा विकसित भारत का रोडमैप

चीन और अमेरिका इस समय निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के केंद्र बने हुए हैं। चीन सामान्य उपभोग की वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बना हुआ है तो अमेरिका और यूरोप के कुछ देश तकनीक, मशीन और युद्ध सामग्री के निर्यातक के रूप में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। भारत अब तक अपनी आंतरिक खपत, खाद्यान्न प्रसंस्कृत उत्पादों और सेवाओं के निर्यात से एक मजबूत अर्थव्यवस्था बना हुआ है। लेकिन 2026-27 का बजट यह बताता है कि भारत अब मूलभूत वस्तुओं-सेवाओं के निर्यात के साथ-साथ उन्नत तकनीक पर आधारित वस्तुओं के उत्पादन-निर्यात पर आधारित व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। निर्मला सीतारमण द्वारा पेश नौवां बजट उसी औद्योगिक ढांचे को विश्वसनीय मजबूती प्रदान करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दे रहा है। महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहतीबजट में औद्योगिक उत्पादन के लिए आवश्यक वस्तुओं, मशीनों, कलपुर्जों और तकनीक के आयात पर इम्पोर्ट ड्यूटी शून्य से लेकर दस प्रतिशत के बीच कर दी गई है। सरकार का यह कदम देश में रक्षा उत्पादों, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के उत्पादन के लिए सहायक होगा। केंद्र सरकार लगातार देश को रक्षा उत्पादों के एक वैश्विक निर्यातक के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। इससे यह समझ आता है कि सरकार का विजन ही बजट में कानूनी प्रावधानों के रूप में उभर कर सामने आया है। आज घरेलू उपभोग की छोटी-छोटी वस्तुओं से लेकर कारों-वायुयानों और उपग्रह निर्माण तक में जिस तरह सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग बढ़ रहा है, कोई भी देश चिप्स के लिए चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश पर निर्भर नहीं रह सकता। बजट में देश को इस सेक्टर में मजबूत बनाकर देश को रणनीतिक मजबूती देने की कोशिश की गई है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डाटा सेंटरों के भारत में सेंटर निर्माण करने पर विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलीडे प्रदान करना भी सरकार की उसी नीयत को स्पष्ट करता है जिसके अंतर्गत वह महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में देश को मजबूत करना चाहती है। बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकताभाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जर्मनी की ड्यूश बैंक की भारतीय इकाई के पूर्व प्रबंध निदेशक जफर इस्लाम ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को 2047 में एक विकसित देश बनाने की बात करते रहे हैं। वर्तमान बजट देश को उसी दिशा में ले जाने का एक रोड मैप दिखाई देता है। लेकिन कोई भी देश औद्योगिक उत्पादन का केंद्र बने बिना विकसित अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता। यह बजट देश को सभी महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्माण की एक वैश्विक इकाई के रूप में विकसित करने का फ्रेम वर्क प्रदान करता है।
किसी एक मुद्रा पर भरोसा नहीं! जानिए क्यों सोने की तरफ भाग रहे हैं निवेशक? निर्मला सीतारमण का बड़ा खुलासा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की बजट रणनीति में निवेश को प्राथमिक औजार बनाया गया है, ताकि आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ बनाए रखा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट का फोकस ऐसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर है, जहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता मौजूद है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि यह वैश्विक अनिश्चितता की वजह से हो रहा है। इससे पता चलता है कि निवेशकों को फिलहाल किसी एक मुद्रा पर पूरा भरोसा नहीं है, इसलिए वे सुरक्षित विकल्पों की तलाश में हैं। सीतारमण ने कहा है कि 7-8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि इससे सभी नागरिकों को फायदा होगा और ज्यादा रोजगार पैदा होंगे। नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रहीवित्त मंत्री ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी रहती है, तो उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे तेजr से बढ़ती अर्थव्यवस्था बने रहने के लिए 7 से 8 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी। सीतारमण ने कहा कि आर्थिक विकास से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, ज्यादा लोग कार्यबल से जुड़ते हैं और उत्पादकता में सुधार होता है। महिलाओं की भागीदारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नियोक्ता अब महिलाओं की दक्षता और सटीक कामकाज को अधिक महत्व देने लगे हैं। इसका असर यह है कि सेमी-स्किल्ड नौकरियों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि बोर्डरूम और नेतृत्व के स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी अभी भी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि ज्यादा महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आना चाहिए, ताकि वे फैसलों को प्रभावित कर सकें और दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें।