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एपस्टीन फाइल्स का नया खुलासा: ट्रंप पर विदेशी दबाव और कुशनर के कथित रूसी कनेक्शन को लेकर गंभीर दावे

अमेरिका के न्याय विभाग ने बहुचर्चित एपस्टीन फाइल्स के एक और बैच को जारी कर दिया है। इस खेप में 30 लाख दस्तावेज के साथ 1.80 लाख फोटो और 2 हजार वीडियो शामिल है। शुक्रवार (31 जनवरी) को प्रकाशित किए गए दस्तावेजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। जिसके बाद हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के नवीनतम बैच में सामने आए आरोपों पर एफबीआई की एक रिपोर्ट में ‘विश्वसनीय’ गोपनीय सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस्राइल का दबाव था यानी इस्राइल के साथ समझौता किया गया। इतनी ही नहीं ट्रंप अपने एक करीबी शख्स के इतने जाल में थे कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप के कारोबार और राष्ट्रपति के कामकाज दोनों पर बहुत ज्यादा दखल था। अमेरिकी परियोजनाओं में लगाया गया थाजिस शख्स के बारे में बताया गया है, वो ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर हैं। इस विस्फोटक दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि कुशनर के परिवार के भ्रष्टाचार, रूसी धन प्रवाह और कट्टर यहूदी चबाड नेटवर्क से संबंध थे। रिपोर्ट में कुशनर के पारिवारिक इतिहास के बारे में बताया, जिसमें कहा गया कि उनके पिता को पहले वित्तीय आरोपों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें ट्रंप से राष्ट्रपति क्षमादान मिला। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुशनर ने रूसी निवेश की बड़ी रकम को इधर-उधर स्थानांतरित किया और रूसी राज्य से जुड़े संस्थानों से संबंधित हितों का ठीक से खुलासा नहीं किया। इसी के साथ रियल एस्टेट निवेश प्लेटफॉर्म कैडर में कुशनर की हिस्सेदारी को चिंता का विषय बताया गया है और सूत्र ने सवाल उठाया है कि क्या रूसी धन को बिचौलियों के माध्यम से अमेरिकी परियोजनाओं में लगाया गया था।

अमेरिका से दूरी, चीन से नज़दीकी? ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर का सात साल बाद चीन दौरा

वैश्विक हालात इन दिनों तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका का दबदबा सिमट रहा है और एक समय अमेरिका के करीबी सहयोगी ही अब उसे आंखें दिखा रहे हैं। हाल ही में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने चीन का दौरा किया था और चीन के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की बात कही। इसे लेकर ट्रंप ने कड़ी नाराजगी जताई थी, लेकिन अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी चीन दौरे पर पहुंच रहे हैं। इसे भी यूरोप के अमेरिका के पाल से दूर जाने के तौर पर देखा जा रहा है। कीर स्टार्मर और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात बुधवार को होगी। इस दौरे की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी बार साल 2018 में किसी ब्रिटिश पीएम ने चीन का दौरा किया था और अब करीब सात साल बाद अब कीर स्टार्मर चीन पहुंच रहे हैं। स्कॉच व्हिस्की को बड़ा बाजार मिल सकेइस दौरे से ब्रिटेन और चीन अपने व्यापारिक संबंधों को बेहतर करने की कोशिश करेंगे। हालांकि चीन दौरे के चलते कीर स्टार्मर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गुस्से का भी शिकार होना पड़ सकता है। कीर स्टार्मर से पहले कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी चीन का दौरा किया था। जिस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर कनाडा ने चीन से व्यापार समझौता किया तो वे कनाडा से होने वाले आयात पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। अमेरिकी धमकी के बाद कनाडा के पीएम ने साफ किया कि वे, चीन के साथ व्यापार समझौता नहीं करने जा रहे। कीर स्टार्मर के साथ ही उनके व्यापार मंत्री और कई कंपनियों के प्रमुख भी चीन दौरे पर जा रहे हैं। ब्रिटेन की मंशा है कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार चीन में एंट्री मिले, जिससे उसकी कारों और स्कॉच व्हिस्की को बड़ा बाजार मिल सके। चीनी निवेश रोककर चीन को नाराज किया हुआवहीं यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को बेहतर कर चीन अपने वैश्विक दबदबे में इजाफा करने की इच्छा रखता है। हालांकि ब्रिटेन और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी हैं, जिनमें रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चीन का रूस को समर्थन देना, चीन का ब्रिटेन की जासूसी करना, हॉन्गकॉन्ग में चीन द्वारा किया जा रहा अत्याचार आदि कई वजह हैं, जिन्हें लेकर ब्रिटेन द्वारा चीन के साथ अपने संबंधों को शक की निगाह से देखा जाता है। ब्रिटेन ने भी अपने टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर से चीनी कंपनियों को निकालकर और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में चीनी निवेश रोककर चीन को नाराज किया हुआ है। ऐसे में अब दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाना आसान नहीं है, लेकिन कीर स्टार्मर के इस दौरे से शुरुआत हो सकती है।

ट्रंप का सनसनीखेज दावा ‘डिसकंबोबुलेटर’ से मादुरो की सेना हुई ठप, रूस-चीन के हथियार भी बेकार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा था, तब उन्होंने एक गोपनीय हथियार का इस्तेमाल किया था जिसे उन्होंने ‘द डिसकंबोबुलेटर’ नाम दिया। ट्रंप के अनुसार इस हथियार ने मादुरो के सैनिकों के उपकरणों को निष्क्रिय (काम न करने वाला) बना दिया, जिससे वे अपने रूसी और चीनी रॉकेट भी नहीं चला पाए। ट्रंप ने कहा कि वह इस हथियार के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी शेयर करने की अनुमति नहीं है। लेकिन यह हथियार काराकस में ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल हुआ, जिससे विरोधी की प्रणालियां ‘काम नहीं कर रही थीं।’ मलों में अब तक 117 से अधिक लोगों की मौत हुईअमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम के अभियान में मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया। मादुरो को न्यूयॉर्क में नार्को-टेररिज्म और हथियार मामले में पेश किया गया। वेनेजुएला सरकार ने इसे ‘अपहरण’ करार दिया है और विरोध जताया है। इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ड्रग कार्टेल के खिलाफ जमीन पर सैन्य हमले जारी रखेगा, और यह हमले सिर्फ दक्षिण अमेरिका तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि मध्य अमेरिका और मेक्सिको तक भी हो सकते हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने पूर्वी प्रशांत महासागर में एक ड्रग-तस्करी जहाज पर हमला किया, यह अब तक के 36वें ज्ञात हमले में से एक है। इन हमलों में अब तक 117 से अधिक लोगों की मौत हुई है। बाउल में प्रदर्शन और अपनी उपस्थिति पर भी टिप्पणी कीवहीं ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े सात तेल टैंकों का तेल कब्जा कर लिया, और बताया कि ‘वे अब तेल कहीं नहीं रखते- हमने ले लिया।’ लेकिन उन्होंने इसका स्थान बताने से इनकार किया। एक न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में ट्रंप ने ये भी बताया कि उन्हें वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो की तरफ से दिया गया नोबेल पुरस्कार मिला है, और वह उसे कहां लटकाएंगे, यह सोच रहे हैं। उन्होंने नए आर्कटिक सुरक्षा समझौते के बारे में कहा कि इससे अमेरिका को वहां की जमीनों पर कब्जा मिल जाएगा, हालांकि डेनमार्क व ग्रीनलैंड ने इसका खंडन किया है। उन्होंने 2026 के सुपर बाउल में प्रदर्शन और अपनी उपस्थिति पर भी टिप्पणी की।

अपनी सुरक्षा खुद करो! पेंटागन की नई रक्षा नीति से दुनिया में हड़कंप, अमेरिका ने सहयोगियों से खींचे हाथ

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार देर रात प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाने वाली नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति जारी की। इसमें नाटो व अन्य सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद संभालने को कहा गया है। इसमें वो सभी राष्ट्र शामिल हैं, जिनसे अब तक अमेरिका के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। इस प्रकार का 34 पन्नों का दस्तावेज 2022 के बाद पहली बार जारी किया गया है, जो एक सैन्य नीति दस्तावेज होने के बावजूद काफी हद तक राजनीतिक है। इसमें यूरोप से एशिया तक के साझेदार देशों की आलोचना की गई है। दस्तावेज में हुई आलोचना के तहत यूरोप और एशियाई साझेदार देश अपनी रक्षा के लिए पूर्व अमेरिकी सरकारों पर निर्भर रहे। इसमें दृष्टिकोण, फोकस और लहजे में तीव्र बदलाव की बात कही गई है, जिसका मतलब है कि रूस से लेकर उत्तर कोरिया तक के खतरों से निपटने का ज्यादा बोझ अब सहयोगी देशों को उठाना होगा। समर्थन की बात कही गईयह दस्तावेज ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन और यूरोप जैसे उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच तनाव है। इसमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मंत्रालय की तरफ से ग्रीनलैंड और पनामा नहर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक अमेरिकी सैन्य और व्यावसायिक पहुंच सुनिश्चित करने के विश्वसनीय विकल्प देने की बात कही गई है। 34 पेज का यह दस्तावेज चीन के संदर्भ में कहता है कि बदलाव दर्शाने वाली नई राष्ट्रीय रक्षा नीति का उद्देश्य चीन पर प्रभुत्व जमाना या उसे अपमानित करना नहीं है। इसका मुख्य मकसद उसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हावी होने से रोकना है। हालांकि, इस अहम रणनीतिक दस्तावेज में ताइवान का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है, जबकि 2022 की रणनीति में ताइवान की आत्मरक्षा के समर्थन की बात कही गई थी। कनाडा के लिए गंभीर खतरा साबित होगायूरोप के बारे में कहा गया है कि रूस उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के पूर्वी सदस्यों के लिए खतरा बना रहेगा, लेकिन नाटो सहयोगी यूरोप की पारंपरिक रक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद संभालने में सक्षम हैं। मालूम हो कि अमेरिका पहले ही यूक्रेन सीमा के पास नाटो क्षेत्रों से अपने सैनिकों की संख्या घटाने की पुष्टि कर चुका है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर कनाडा को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई व्यापारिक सौदा किया तो अमेरिका सभी कनाडाई वस्तुओं और उत्पादों पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी को आगाह करते हुए कहा कि ऐसा कोई भी समझौता कनाडा के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।

ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ेगा महायुद्ध? USS अब्राहम लिंकन की तैनाती के बाद तेहरान के किलेबंद बंकर में शिफ्ट हुए खामेनेई

अमेरिकी हमले के खतरे को देखते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई राजधानी तेहरान के एक बंकर में शिफ्ट हो गए हैं। ईरान के मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बंकर को युद्धकालीन सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह किले की तरह तैयार किया गया है। खामेनेई के तीसरे बेटे मसूद खामेनेई अब उनके कार्यालय के दैनिक कामकाज को संभाल रहे हैं और ईरान के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि अमेरिका का नौसैनिक ‘आर्मडा’ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इसे युद्धपोत क्षेत्र के पास इसलिए तैनात किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर ईरान पर कार्रवाई की जा सके। अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक फिलहाल हिंद महासागर में हैं और जल्द ही मध्य पूर्व पहुंचेंगे। इसके साथ ही अतिरिक्त हवाई रक्षा प्रणालियां भी तैनात की जा रही हैं, संभवतः अमेरिकी और इजरायली हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए। लगभग 26,541 लोग गिरफ्तार किए गएअमेरिका के इस कदम पर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर ने कहा कि ईरानी बल “पहले से कहीं अधिक तैयार हैं” और सर्वोच्च नेता के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि किसी भी हमले को “पूरी तरह की युद्ध” माना जाएगा और ईरान ‘सबसे कठोर तरीके से’ जवाब देगा।सैन्य तनाव के बीच, ईरान में आंतरिक अशांति बढ़ती जा रही है। आर्थिक संकट और रियाल के गिरते मूल्य के कारण दिसंबर के अंत में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो पूरे देश में फैल गए। सुरक्षा बलों ने व्यापक कार्रवाई की और इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया। यूएस-आधारित HRANA ने कहा कि अब तक कम से कम 5,002 लोग मारे गए हैं, जिनमें 43 बच्चे और 40 सामान्य नागरिक शामिल हैं। लगभग 26,541 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

“ट्रंप से दोस्ती, घर में फजीहत!” ‘शांति बोर्ड’ पर हस्ताक्षर कर बुरे फंसे शहबाज शरीफ, पाकिस्तान में भारी बवाल

अमेरिका के साथ गलबहियां करने के चक्कर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने ही घर में सवालों के बीच घिर गए हैं। उन्हें विपक्ष की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड की अध्यक्षता में बने शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए शरीफ ने शरीफ ने गुरुवार को हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान समेत 19 देशों के नेताओं ने दावोस में इस समूह के चार्टर के रूप में अपना-अपना नाम दर्ज कराया। इस दौरान जब शहबाज का हस्ताक्षर करने का वक्त आया तो वह ट्रंप के बगल में बैठक मुस्कुराते नजर आए। हालांकि, इस फैसले ने पाकिस्तान के अंदर बवाल मचा दिया। आइए पहले जानते हैं कि यह शांति बोर्ड क्यों बनाया गया है और इसको बनाने का विचार कहां से आया है। शांति बोर्ड बनाने का विचार सबसे पहले गाजा युद्ध के दौरान आया, जब अमेरिकी ने अपनी शांति योजना को पेश किया। यह बोर्ड गाजा में शांति की निगरानी करने के लिए बनाया गया। लेकिन यह बोर्ड अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि ट्रंप इसके माध्यम से अपना खुद का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) बना रहे हैं। धारणा बने कि पाकिस्तान में लोकतंत्रविपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष गोहर अली खान ने इस फैसले पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शरीफ ने किसी परामर्श के शांति बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने कहा, कल विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह शांति बोर्ड में शामिल हो गया है। सरकार ने संसद को नजरअंदाज किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति बोर्ड में शामिल होने से पहले उसकी शर्तों के बारे में संसद को बताया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, क्या आप हमास को निरस्त्र करने में भूमिका निभाएंगे? अगर यह संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का कोई निकाय होता, तो सरकार खुद से कदम उठा सकती थी। लेकिन शांति बोर्ड कोई यूएन का निकाय नहीं है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की खबर के मुताबिक, पीटीआई के वरिष्ठ नेता असद कैसर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इतने संवेदनशील मुद्दे पर सर्वसम्मति से फैसला लेने की जहमत नहीं उठाई। उन्हें इस पर संसद में चर्चा करना चाहिए थी, ताकि विश्व समुदाय में यह धारणा बने कि पाकिस्तान में लोकतंत्र है। शांति की उम्मीद करना बेवकूफों की जन्नतजमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख फजलुर रहमान ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने हमास को निरस्त्र करने के किसी भी अभियान का हिस्सा बनने के खिलाफ चेतावनी दी। पाकिस्तान की संसद में रहमान ने कहा कि फलस्तीनियों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोग शांति बोर्ड का हिस्सा हैं।उन्होंने कहा कि ट्रंप से शांति की उम्मीद करना बेवकूफों की जन्नत (स्वर्ग) में रहने जैसा है। फजलुर रहमान ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप ही बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपनी इच्छा से सदस्यों को चुना है।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने ट्रंप के ग्रीनलैंड कब्जे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, “नाटो और सुरक्षा खतरे में”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिए गए बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को करारा हमला बोला और उन्होंने कहा कि डेनमार्क को अमेरिका वेनेजुएला समझने की कोशिश न करे। हम पर हमला करना नाटो मिलिट्री गठबंधन का अंत होगा। वेनेजुएला में मिलिट्री ऑपरेशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि अब अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की तैयारी में है। उनके इस बयान पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने सोमवार को तीखा पलटवार किया और कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा नाटो मिलिट्री गठबंधन का अंत होगा। बता दें कि काराकास में अमेरिकी सेना द्वारा नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए आधी रात को किए गए ऑपरेशन से पूरी दुनिया हैरान है। अमेरिका के इस कदम से डेनमार्क और ग्रीनलैंड की चिंता बढ़ गई, जो डेनिश साम्राज्य का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और इस तरह नाटो का हिस्सा है। ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेंगेफ्रेडरिकसेन ने सोमवार को डेनिश ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति की ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की और विनाशकारी परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका किसी दूसरे नाटो देश पर मिलिट्री हमला करने का फैसला करता है, तो सब कुछ रुक जाएगा। यानी, हमारे नाटो और इस तरह दूसरी दुनिया की जंग खत्म होने के बाद से मिली सुरक्षा भी खत्म हो जाएगी।” ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति बनने के दौरान और अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में बार-बार ग्रीनलैंड पर अमेरिका के अधिकार की बात कही, और उन्होंने द्वीप पर कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल करने से भी इनकार नहीं किया है। रविवार को उनकी टिप्पणियों, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा, ‘आइए 20 दिनों में ग्रीनलैंड के बारे में बात करते हैं’ ने इस डर को और बढ़ा दिया कि अमेरिका भविष्य में ग्रीनलैंड में दखल देने की योजना बना रहा है। फ्रेडरिकसेन ने यह भी कहा कि जब ट्रंप कहते हैं कि वह ग्रीनलैंड चाहते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं करेंगे जहां हमें और ग्रीनलैंड को इस तरह से धमकी दी जाए।” इस संभावना को मानना पड़ रहानीलसन ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती है। उन्होंने अपने समर्थकों से शांत और एकजुट रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं जहां हमें लगता है कि रातों-रात देश पर कब्जा हो सकता है और इसीलिए हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हम अच्छा सहयोग चाहते हैं।’ नीलसन ने आगे कहा, हमारी स्थिति ऐसी नहीं है कि अमेरिका आसानी से ग्रीनलैंड पर कब्जा कर ले। वहीं, डेनिश ब्रॉडकास्टर के राजनीतिक पत्रकार आस्क रोस्ट्रुप ने सोमवार को स्टेशन के लाइव ब्लॉग पर लिखा कि मेटे ने पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के विचार को साफ तौर पर खारिज कर दिया होता। लेकिन अब बयानबाजी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें इस संभावना को मानना पड़ रहा है।

ट्रंप की टैरिफ धमकी पर कांग्रेस का वार, मोदी सरकार पर उठे सवाल, रूस से तेल खरीद पर ट्रंप सख्त, भारत पर टैरिफ बढ़ाने का संकेत

कांग्रेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर दिए गए एक हालिया बयान के मद्देनजर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वॉशिंगटन नई दिल्ली पर बहुत जल्द टैरिफ बढ़ा सकता है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि नमस्ते ट्रंप, हाउडी मोदी कार्यक्रम, जबरन गले मिलना और अमेरिकी नेता की प्रशंसा करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट से कोई खास फायदा नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं कि वह भारत की तरफ से रूसी तेल की खरीद से खुश नहीं हैं और वाशिंगटन नई दिल्ली पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है। कांग्रेस ने ट्रंप के इसी बयान मोदी सरकार पर सियासी हमला बोला। बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकतेकांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री के करीबी दोस्त भारत के प्रति अपना ‘कभी नरम, कभी सख्त’ रवैया जारी रखे हुए हैं। उन्होंने एक बार फिर धमकी दी है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता है तो वे अमेरिका से आयात होने वाले तेल पर टैरिफ बढ़ा देंगे।’ जयराम रमेश ने कहा, ‘वे सभी नमस्ते ट्रंप, हाउडी मोदी के कार्यक्रम, वे सभी (जबरदस्ती के) गले मिलना और अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रशंसा करने वाले वे सभी सोशल मीडिया पोस्ट बहुत कम कारगर साबित हुए हैं।’ ट्रंप ने रविवार को फ्लोरिडा से वाशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘वे (भारत) मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं; वे नेक दिल हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं, इसलिए मुझे खुश करना उनके लिए जरूरी था। वे रूस से व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।’ आयात पर 500 प्रतिशत शुल्क लगानाट्रंप की ये टिप्पणी तब आई जब एयर फोर्स वन में उनके साथ यात्रा कर रहे अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ ही वह मुख्य वजह है जिसके चलते नई दिल्ली अब रूस से काफी कम तेल खरीद रही है। ग्राहम ने अपने टैरिफ बिल के बारे में बात की, जिसका उद्देश्य रूसी तेल खरीदने वाले देशों से आयात पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाना है। ग्राहम ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ग्राहकों पर दबाव डालना होगा।