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दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त फैसला, कांग्रेस और AAP को दुष्यंत गौतम से जुड़े मानहानिकारक पोस्ट हटाने का आदेश

अंकिता भंडारी हत्याकांड में अपना नाम उछाले जाने के मामले भाजपा नेता दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया। इस मामले में आज सुनवाई हुई। दुष्यंत गौतम को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को मानहानिकारक मानते हुए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स को दुष्यंत गौतम से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाने को कहा है। गौतम द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर दिए गए एक अंतरिम आदेश में, जस्टिस मिनी पुष्करणा ने दोनों राजनीतिक पार्टियों को हत्या के मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव को कथित ‘वीआईपी’ बताकर टारगेट करने वाला कोई भी कंटेंट पोस्ट करने से भी रोक दिया। 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गईहाल ही में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ बातें सामने आई थीं, जिनमें भाजपा नेता दुष्यंत गौतम का नाम भी कथित तौर पर जोड़ा गया था। इन आरोपों को दुष्यंत गौतम ने सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि को खराब करने की सोची-समझी साजिश बताया था। उन्होंने इन आरोपों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्यंत गौतम की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की गंभीरता को समझा। अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया, सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी मानहानिकारक प्रतीत होती है, जिससे भाजपा नेता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा। इस आधार पर, अदालत ने तत्काल प्रभाव से कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे दुष्यंत गौतम से संबंधित सभी विवादास्पद पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री को हटा दें। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सत्र न्यायालय ने तीनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।