संविधान में ‘वी द पीपल’ ‘भारत माता’ नहीं! ओवैसी के बयान से छिड़ा नया विवाद, राष्ट्रवाद की परिभाषा पर घमासान

भारत के संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने इस मुद्दे को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत ‘वी द पीपल’ यानी जनता से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से।ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का आधार समावेशी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर टिका है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता की बात कही गई है। उनके अनुसार देशभक्ति को किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ना संविधान की भावना के खिलाफ है। एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहींओवैसी ने अपने भाषण में संसद में हुई वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि 24 जनवरी 1950 को देश ने खुद को संविधान दिया और उसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है। उन्होंने कहा कि संविधान किसी खास धार्मिक प्रतीक का नाम लेकर शुरू नहीं होता, बल्कि जनता को सर्वोच्च मानता है। ओवैसी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि यही भारत की संवैधानिक ताकत है। उनके मुताबिक प्रस्तावना साफ तौर पर बताती है कि देश का ढांचा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। इसे किसी एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहीं है। पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकताएआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि अगर देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ा जाएगा तो यह आजादी की लड़ाई लड़ने वाले कई नेताओं के योगदान को कमजोर करेगा। उन्होंने बहादुर शाह जफर और यूसुफ मेहरअली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने देश के लिए बलिदान दिया। उनके मुताबिक राष्ट्र प्रेम को धार्मिक पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान “वी द पीपल” शब्दों से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से। उन्होंने संविधान की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भावना पर जोर दिया। अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि देशभक्ति को धर्म से जोड़ना सही नहीं।
मुंबई में पहली बार खिलेगा ‘कमल’ रितु तावड़े होंगी भाजपा की पहली महिला मेयर, महायुति का शक्ति प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी ने रितु तावड़े को मुंबई महापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मुंबई मेयर का पद खुली श्रेणी में महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है, ऐसे में साफ है कि मुंबई को एक बार फिर महिला महापौर मिलेंगी। इसी कड़ी में मुंबई में पहली बार भाजपा का महापौर बनेगा। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने नाम का एलान किया है। वहीं शिंदे गुट के संजय शंकर घाड़ी डिप्टी मेयर बनेंगे। जिसकी घोषणा शिवसेना नेता राहुल शेवाले ने की। भाजपा मेयर प्रत्याशी रितु तावड़े घाटकोपर से तीन बार की पार्षद और शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी है। जबकि शिवसेना ने मुंबई के वार्ड नंबर 5, मागाथाने के पार्षद संजय शंकर घाड़ी को उप महापौर पद के लिए नामित किया है। बहुमत को देखते हुए महायुति पार्टी के महापौर और उप महापौर पदों के उम्मीदवारों की जीत निश्चित मानी जा रही है। डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकतीडिप्टी मेयर के पद के लिए शिवसेना ने यह साफ किया है कि घाड़ी उप महापौर पद पर डेढ़ साल तक बने रहेंगे। शिवसेना सचिव संजय मोरे ने एक बयान में कहा है कि घाड़ी 15 महीने तक उप महापौर के रूप में कार्य करेंगे। दरअसल, घाड़ी शिवसेना (यूबीटी) के उन वरिष्ठ पूर्व पार्षदों में से एक थे, जिन्होंने पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। मुंबई में उप महापौर के कार्यकाल को विभाजित करके शिवसेना अपने चार पार्षदों को अवसर देना चाहती है। दरअसल, मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज, सात फरवरी को समाप्त हो रही है। उसके बाद 11 फरवरी को मेयर चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा-शिवसेना गठबंधन मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए आवेदन दाखिल करेगा। इस दौरान सभी पार्षद मौजूग रहेंगे और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबि शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए उम्मीदवार उतार सकती है। 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन कियाबता दें कि हाल ही में हुए बृहन्मुंबई नगर निगम के 227 सदस्यीय चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं। सत्तारूढ़ गठबंधन, जिसके पास कुल 118 पार्षद हैं, बहुमत के आंकड़े (114) को पार कर चुका है और महापौर पद हासिल करने की अच्छी स्थिति में है। शिवसेना (यूबीटी), जिसने 1997 से 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन किया, उसने 65 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) ने क्रमशः छह और एक सीट जीती।
ईरान को ट्रंप की ‘न्यूक्लियर’ चेतावनी! बोले समझौता करो या गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो

ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते पर पहले दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। हालांकि दोनों ही देशों ने इस वार्ता को सकारात्मक बताया। अब अगले हफ्ते फिर से वार्ता की जाएगी। इस बीच अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को ‘बहुत अच्छा’ बताया है और अगले सप्ताह की शुरुआत में और बातचीत की योजना के बारे में कहा। साथ ही दबाव भी बढ़ाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता है, तो उसे ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे। विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजादरअसल, ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ईरान को जीरो न्यूक्लियर कैपेबिलिटी यानी शून्य परमाणु क्षमता की ओर ले जाना है। ईरान सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय गतिविधियों को भी समझौते में शामिल करना चाहता है। ट्रंप ने ईरान को इस कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य कार्रवाईकरने की बार-बार धमकी दी है, इससे पहले उन्होंने तेहरान को देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर की गई खूनी कार्रवाई के जवाब में इस विमानवाहक पोत को क्षेत्र में भेजा था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे और इस्लामिक गणराज्य में हजारों अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया था। जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गएओमान में हुई बातचीत पर जब कोई ठोक नतीजा सामने नहीं आया तो नाराज राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर नई सख्त कार्रवाई की है। नए आदेश के तहत कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिका के मुताबिक ईरान से जुड़े तेल कारोबार के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा था। बता दें कि ओमान हमेशा की तरह दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहा है। वार्ता में राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर ने किया। दोनों पक्षों के राजनयिक अब अपने-अपने देशों में मशविरा करेंगे। अगली बैठक अगले सप्ताह की शुरुआत में होने की संभावना है। वार्ता के बाद अमेरिका ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। इधर, बैठक को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। हमारे हमने अपने दृष्टिकोण एक-दूसरे तक पहुंचाए, जो बेहद जरूरी था।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म, युमनाम खेमचंद सिंह संभालेंगे सत्ता की कमान

मणिपुर में लगभग एक साल से चले आ रहे राष्ट्रपति शासन को हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर राज्य से राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटाने की घोषणा की। इसके साथ ही भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह आज शाम 6 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने आज लोक भवन में राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात कर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राष्ट्रपति की ओर से जारी घोषणा में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत 13 फरवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी 2026 से वापस लिया जाता है। अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा कीबता दें कि इससे पहले मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया था। अब वे राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभालेंगे। पिछले साल 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। यह फैसला तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लिया गया था। उस समय राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा और संवैधानिक संकट से गुजर रहा था, जिसके चलते केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा था। मणिपुर से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर इसकी घोषणा की है।
अयोध्या में ‘धर्मयुद्ध’ जगद्गुरु परमहंस की शंकराचार्य को दोटूक, ‘माफी मांगो वरना अयोध्या में नो एंट्री’

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद तेज होता जा रहा है। अयोध्या में तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अविमुक्तेश्वरानंद के लिए चेतावनी जारी की है। उन्होंने शंकराचार्य को अयोध्या में प्रवेश न करने देने की चेतावनी जारी की है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित अभद्र टिप्पणियों से नाराज हैं। परमहंस आचार्य का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औरंगज़ेब और हुमायूं का बेटा कहना अत्यंत निंदनीय है। यह एक संत को शोभा नहीं देता। विपक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहाउन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म और उत्तर प्रदेश के हित में लगातार काम कर रहे हैं। इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है। जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते और सीएम योगी से क्षमा नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यह भी आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गाय को लेकर चल रहा आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और विपक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सभी सनातनी उनका बहिष्कार करेंउन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग के बावजूद बछड़ा और बैल के वध पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका है। परमहंस आचार्य ने केंद्र और राज्य सरकार से गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने और पूर्ण रूप से गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही ग्रामस्तर पर गौरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था किए जाने की अपील की। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि भगवा पहनकर इस तरह की टिप्पणी करना पूरे संत समाज का अपमान है। जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते, तब तक सभी सनातनी उनका बहिष्कार करें।
राहुल का संसद में ‘चीन राग’, पीएम मोदी पर लगाया किसानों को बेचने का आरोप!

लोकसभा में कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगातार दूसरे दिन भारत-चीन सीमा विवाद का मुद्दा उठाया। इस दौरान सत्ता पक्ष की तरफ से ऐतराज जताया गया। वहीं स्पीकर ने कई बार उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के लिए कहा, आखिर में स्पीकर ने दूसरे सदस्यों को बोलने के लिए आमंत्रित किया। जिसके बाद विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया। भारी हंगामे को देखते हुए स्पीकर लोकसभा की कार्रवाई दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उस लेख की प्रति को प्रमाणित किया जिसमें पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित ‘संस्मरण’ का हवाला दिया गया था। उन्होंने इसे प्रमाणित करते हुए सदन के पटल पर रखा। इसके बाद स्पीकर ने उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने के लिए कहा। राहुल गांधी ने कहा, ‘कल मैंने इस आर्टिकल पर अपना भाषण शुरू किया था। स्पीकर सर ने कहा था इसे प्रमाणित करें। मैं आज इसे प्रमाणित कर रहा हूं। सदन की कार्यवाही बाधित हो गईइसके बाद विपक्ष के नेता ने कहा, ‘राष्ट्रपति के भाषण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। पाकिस्तानियों, चीनियों और हमारे बीच के संबंध। इस लेख में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है जिसकी मैंने पुष्टि की है। यह प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के बारे में बात करता है… हमारे राष्ट्रपति का भाषण उस मार्ग के बारे में था जिस पर भारत को आज चलना है। विश्व मंच पर, अंतरराष्ट्रीय मामलों का मुख्य मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष है। यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का केंद्र बिंदु है। मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन और भारत के बीच जो हुआ और हमारे प्रधानमंत्री ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी, उस पर एक बयान देने दीजिए। मुझे क्यों रोका जा रहा है?’ वहीं जब राहुल गांधी ने अपनी चीन राग अलापना जारी रखा तो स्पीकर ने कई अन्य सदस्यों को बोलने के लिए आमंत्रित किया। तो राहुल गांधी के समर्थन में विपक्ष के तीन सांसद नरेश उत्तम पटेल, शताब्दी राय, डीएम खातिर आनंद ने बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्ष की तरफ से जोरदार हंगामा किया गया और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के जरिए बेच दिया गयाकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में आकर ट्रेड डील को फाइनल करने के लिए झुक गए हैं और इस समझौते के जरिए भारतीय किसानों की मेहनत को बेच दिया है। संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए, जब उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया क्योंकि वे एक आर्टिकल से कोट करना चाहते थे जिसमें पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र था, राहुल गांधी ने कहा कि इतिहास में यह पहली बार है कि विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने कहा, ‘हमें यह समझने की जरूरत है कि लगभग चार महीने से अटकी हुई ट्रेड डील अचानक कल शाम को क्यों फाइनल हो गई,’ उन्होंने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री मोदी पर बहुत ज्यादा दबाव था।’ यह पूछे जाने पर कि वे किस तरह के दबाव की बात कर रहे हैं, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ एक मामला है और एपस्टीन फाइलों में और भी बहुत कुछ सामने आने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी समझौते में फंस गए हैं और भारतीय किसानों को यह समझना चाहिए कि उनकी मेहनत साथ ही उनका खून-पसीना भारत-अमेरिका ट्रेड डील के जरिए बेच दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा देश बेच दिया गया है।
दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, उन्हें दोष देती हूँ जो शीर्ष पर बैठे, बंगा भवन के बाहर सुरक्षाकर्मियों पर भड़कीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दिल्ली के बंगा भवन के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों का सामना किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में किसी आंदोलन के लिए नहीं आई हैं। उनका मकसद चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना है। ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंची थीं। इसके बाद वो बंगा भवन गईं, जो दिल्ली में पश्चिम बंगाल सरकार का गेस्ट हाउस है। वहां वे परिवार ठहरे हुए हैं जो बंगाल में चुनावी सूची की जांच प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। इमारत के बाहर भारी पुलिस बल तैनात देखकर मुख्यमंत्री नाराज हो गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि वे बंगाल के लोगों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगा भवन में बंगाल के लोगों को डराया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा, “हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हमारी चुनाव आयोग के साथ बैठक तय है। लोग परेशान हैं, क्या उनके परिवार मीडिया से बात भी नहीं कर सकते?” मुख्यमंत्री ने कहा, जहां भी एसआईआर से प्रभावित परिवार ठहरे हैं, वहां दिल्ली पुलिस तैनात है। जब दिल्ली में धमाका होता है तो दिल्ली पुलिस कहां होती है? मुख्यमंत्री ने कहा मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं उन लोगों को दोष देती हूं जो शीर्ष पर हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग देश की रक्षा करने में नाकाम हैं और आम लोगों पर एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली की तुलना एक जमींदारी से की, जहां गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर से लेकर तेल डील तक… क्या ट्रंप बन गए हैं भारत सरकार के प्रवक्ता? जयराम रमेश का बड़ा हमला

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की थी। अमेरिकी की पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर लिए गए एक्शन के बाद वेनेजुएला की भारत से यह पहली वार्ता की। अब इस कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल खरीद पर भारत को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही तेल खरीदने के लिए एक समझौता कर चुका है। डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (01 फरवरी) को कहा कि भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदने के बजाए वेनेजुएला से तेल आयात करेगा। फ्लोरिडा जाते समय एयर फोर्स वन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘हमने पहले ही समझौता कर लिया है। भारत इसमें शामिल हो रहा है और वह ईरान से तेल खरीदने के बजाए वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। इसलिए हमने समझौते की रूपरेखा तैयार कर ली है।’ उन्होंने उस सौदे पर सहमति जताईउन्होंने आगे कहा, ‘हमने पहले ही समझौता कर लिया है। भारत इसमें शामिल हो रहा है और वह ईरान से तेल खरीदने के बजाए वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। हमने पहले ही समझौता कर लिया है। भारत इसमें शामिल हो रहा है और वे आ रहे हैं, हमने पहले ही उस समझौते पर सहमति बना ली है, समझौते की अवधारणा तैयार कर ली है।’ फिलहाल भारत की ओर से अभी ट्रंप की टिप्पकी पर किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसी के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला का तेल खरीदने के लिए चीन से भी तेल खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि चीन का स्वागत है, वे आएं और तेल पर एक शानदार डील करें। हमने पहले ही एक डील (भारत से) कर ली है। बता दें कि इससे पहले ट्रंप ने बताया था कि वेनेजुएला ने वॉशिंगटन को 52 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के 50 मिलियन बैरल तेल की पेशकश की है, और उन्होंने उस सौदे पर सहमति जताई है। संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकेइधर, ट्रंप के भारत के वेनेजुएला से तेल खरीदने के बयान पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने केंद्र को घेरते हुए कहा कि अमेरिकी नेता हमारी अपनी सरकार ने जो किया है या करने वाली है, उसके बारे में जानकारी देना जारी रखे हुए हैं। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर ट्रंप की टिप्पणियों का ऑडियो साझा किया और कहा, ‘उन्होंने (ट्रंप ने) हमें बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। उन्होंने हमें बताया था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। और अब यह।’ रमेश ने एक्स पर कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप हमें लगातार इस बात की जानकारी दे रहे हैं कि हमारी अपनी सरकार ने क्या किया है या क्या करने वाली है।’ बता दें कि शुक्रवार (30 जनवरी) को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर वार्ता की। जिसमें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा हुई। एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बात हुई। हमने सभी क्षेत्रों में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने व विस्तार देने पर सहमति जताई है, ताकि आने वाले वर्षों में भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके।