एपस्टीन फाइल्स का नया खुलासा: ट्रंप पर विदेशी दबाव और कुशनर के कथित रूसी कनेक्शन को लेकर गंभीर दावे

अमेरिका के न्याय विभाग ने बहुचर्चित एपस्टीन फाइल्स के एक और बैच को जारी कर दिया है। इस खेप में 30 लाख दस्तावेज के साथ 1.80 लाख फोटो और 2 हजार वीडियो शामिल है। शुक्रवार (31 जनवरी) को प्रकाशित किए गए दस्तावेजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। जिसके बाद हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के नवीनतम बैच में सामने आए आरोपों पर एफबीआई की एक रिपोर्ट में ‘विश्वसनीय’ गोपनीय सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस्राइल का दबाव था यानी इस्राइल के साथ समझौता किया गया। इतनी ही नहीं ट्रंप अपने एक करीबी शख्स के इतने जाल में थे कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप के कारोबार और राष्ट्रपति के कामकाज दोनों पर बहुत ज्यादा दखल था। अमेरिकी परियोजनाओं में लगाया गया थाजिस शख्स के बारे में बताया गया है, वो ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर हैं। इस विस्फोटक दस्तावेज में यह भी दावा किया गया है कि कुशनर के परिवार के भ्रष्टाचार, रूसी धन प्रवाह और कट्टर यहूदी चबाड नेटवर्क से संबंध थे। रिपोर्ट में कुशनर के पारिवारिक इतिहास के बारे में बताया, जिसमें कहा गया कि उनके पिता को पहले वित्तीय आरोपों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें ट्रंप से राष्ट्रपति क्षमादान मिला। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुशनर ने रूसी निवेश की बड़ी रकम को इधर-उधर स्थानांतरित किया और रूसी राज्य से जुड़े संस्थानों से संबंधित हितों का ठीक से खुलासा नहीं किया। इसी के साथ रियल एस्टेट निवेश प्लेटफॉर्म कैडर में कुशनर की हिस्सेदारी को चिंता का विषय बताया गया है और सूत्र ने सवाल उठाया है कि क्या रूसी धन को बिचौलियों के माध्यम से अमेरिकी परियोजनाओं में लगाया गया था।
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक SC बोला नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका, 19 मार्च को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट में इन विनियमों को सामान्य वर्गों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण होने के आधार पर चुनौती दी गई है। ऐसे में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगी दी। अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट के कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरतमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन रिट याचिकाओं की सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए या हम पीछे जा रह हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे। जिन्हें सुरक्षा चाहिए, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने केंद्र और यूजीसी से जवाब मांगा है। साथ ही कहा है कि एक विशेष कमेटी भी बनाई जा सकती है। इसी के साथ नए नियमों की भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत पर भी जोर दिया। वहीं याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा, ‘आज, सीजेआई ने हमारी दलीलों की सराहना की। हमें कहना होगा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है। जैसा कि हम खास तौर पर तीन मुद्दों के बारे में बात कर रहे थे, एक है सेक्शन 3C जो जातिगत भेदभाव के बारे में बात करता है और उस खास सेक्शन में, सामान्य जाति को बाहर रखा गया है और बाकी सभी जातियों को शामिल किया गया है। तो, यह खास सेक्शन यह संदेश दे रहा है कि SC, ST और OBC के साथ सामान्य जाति द्वारा भेदभाव किया जा रहा है।’ 19 मार्च के लिए सूचीबद्धउन्होंने आगे कहा कि यह सीजेआई के सामने हमारी दलील थी और उन्होंने हमारी दलील की सराहना की और खास तौर पर कहा कि हम जो कह रहे हैं वह सही है और अगर ऐसे सेक्शन हैं, तो यह निश्चित रूप से सामान्य जाति के लिए बहुत कठोर और भेदभावपूर्ण होगा और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। दूसरा हिस्सा इक्विटी कमेटी के संबंध में है जो इन नए UGC सेक्शन के सेक्शन 18 के तहत बनाई गई है। इन खास नियमों में सामान्य समुदाय के लिए कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं बताया गया है। CJI ने भी हमारी इस दलील को माना और सुझाव दिया कि एक खास कमेटी बनाई जानी चाहिए, जिसमें शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों, जिन्हें इस खास विषय का ज्ञान हो और अब यह मामला 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध है और उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में महा-शोक विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन, बारामती के पास हुई दुर्घटना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की जांच की मांग

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का आज सुबह विमान हादसे में निधन हो गया। इस घटना ने देश के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि वह सामने आई खबरों से स्तब्ध हैं और इसे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटनाएं सच साबित होती हैं, तो यह राजनीतिक नेतृत्व की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा जा रहा था कि अजित पवार राजनीतिक रूप से अलग राह अपनाने पर विचार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन दावों के कारण कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। घटना की उचित जांच की जानी चाहिएममता बनर्जी ने जोर देते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। इससे पहले ममता ने एक्स पर इस घटना को लेकर संवेदन व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अजित पवार के अचानक निधन से मैं गहरे सदमे और स्तब्ध हूं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके सहयात्रियों की आज सुबह बरामती में हुए भीषण विमान हादसे में मौत हो गई। इस खबर से मुझे गहरा दुख महसूस हो रहा है। मैं उनके परिवार, उनके चाचा शरद पवार जी, और दिवंगत अजित जी के सभी मित्रों और समर्थकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। इस घटना की उचित जांच की जानी चाहिए। कठिन समय में संबल मिलने की कामनाजम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एक प्रभावशाली नेता का इस तरह जाना देश के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि विमान हादसे के कारणों का स्पष्ट पता चल सके। अब्दुल्ला ने याद किया कि बॉम्बे में अपने कॉलेज के दिनों से मैं अजित दा को जानता हूं, जब मैं शरद पवार साहब और उनके परिवार के साथ वर्षा में रहता था। अजित दा एक सक्षम प्रशासक और कुशल राजनीतिक संगठनकर्ता थे, जिनकी कमी बहुत महसूस की जाएगी। मैं अपने पिता के साथ मिलकर शरद पवार साहब, सुप्रिया और पूरे परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खबर बेहद दुखद है और इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में संबल मिलने की कामना की।
जाते-जाते भी दे गए विकास की आखिरी सौगात, विमान हादसे से कुछ घंटे पहले युवाओं के लिए अजित पवार ने किया था यह वादा

बारामती में विमान दुर्घटना से पहले महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने एक पोस्ट में कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसलों की जानकारी साझा की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) में ‘पीएम सेतु’ योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में यह योजना नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे जिलों में लागू होगी। इसके बाद इसे पूरे राज्य में विस्तार दिया जाएगा। इस योजना से युवाओं के लिए रोजगार पाना आसान हो जाएगा। उन्होंने अपनी पोस्ट में आगो लिखा, लोक निर्माण विभाग से जुड़े छोटे और मध्यम ठेकेदारों के लिए भी अच्छी खबर है। उनके रुके हुए भुगतान के लिए ‘TReDS’ प्लेटफॉर्म की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, धुले जिले की जवाहर शेतकरी सहकारी कताई मिल को फिर से शुरू करने का फैसला हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार की संस्था एनसीडीसी को सिफारिश भेजी गई है। अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गयाजमीन से जुड़े मामलों में भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। 30 साल की लीज पर दी गई सरकारी जमीन की समय सीमा अब बढ़ाई जाएगी। साथ ही, सरकार के कब्जे वाली ‘एनिमी संपत्ति’ की खरीद-बिक्री पर अब स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी होगी। बता दें कि बुधवार सुबह विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा उस समय हुआ जब विमान पुणे के बारामती में लैंडिंग कर रहा था। इस घटना से देश भर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उनके निधन पर दुख जताया है। बुधवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया। इस हादसे से कुछ घंटे पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया था, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय है। इस पोस्ट में उन्होंने कैबिनेट बैठक से जुड़े कई अहम फैसले की जानकारी साझा की थी।
ट्रंप का सनसनीखेज दावा ‘डिसकंबोबुलेटर’ से मादुरो की सेना हुई ठप, रूस-चीन के हथियार भी बेकार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा था, तब उन्होंने एक गोपनीय हथियार का इस्तेमाल किया था जिसे उन्होंने ‘द डिसकंबोबुलेटर’ नाम दिया। ट्रंप के अनुसार इस हथियार ने मादुरो के सैनिकों के उपकरणों को निष्क्रिय (काम न करने वाला) बना दिया, जिससे वे अपने रूसी और चीनी रॉकेट भी नहीं चला पाए। ट्रंप ने कहा कि वह इस हथियार के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी शेयर करने की अनुमति नहीं है। लेकिन यह हथियार काराकस में ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल हुआ, जिससे विरोधी की प्रणालियां ‘काम नहीं कर रही थीं।’ मलों में अब तक 117 से अधिक लोगों की मौत हुईअमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम के अभियान में मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया। मादुरो को न्यूयॉर्क में नार्को-टेररिज्म और हथियार मामले में पेश किया गया। वेनेजुएला सरकार ने इसे ‘अपहरण’ करार दिया है और विरोध जताया है। इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ड्रग कार्टेल के खिलाफ जमीन पर सैन्य हमले जारी रखेगा, और यह हमले सिर्फ दक्षिण अमेरिका तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि मध्य अमेरिका और मेक्सिको तक भी हो सकते हैं। इसी कड़ी में अमेरिका ने पूर्वी प्रशांत महासागर में एक ड्रग-तस्करी जहाज पर हमला किया, यह अब तक के 36वें ज्ञात हमले में से एक है। इन हमलों में अब तक 117 से अधिक लोगों की मौत हुई है। बाउल में प्रदर्शन और अपनी उपस्थिति पर भी टिप्पणी कीवहीं ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े सात तेल टैंकों का तेल कब्जा कर लिया, और बताया कि ‘वे अब तेल कहीं नहीं रखते- हमने ले लिया।’ लेकिन उन्होंने इसका स्थान बताने से इनकार किया। एक न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में ट्रंप ने ये भी बताया कि उन्हें वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो की तरफ से दिया गया नोबेल पुरस्कार मिला है, और वह उसे कहां लटकाएंगे, यह सोच रहे हैं। उन्होंने नए आर्कटिक सुरक्षा समझौते के बारे में कहा कि इससे अमेरिका को वहां की जमीनों पर कब्जा मिल जाएगा, हालांकि डेनमार्क व ग्रीनलैंड ने इसका खंडन किया है। उन्होंने 2026 के सुपर बाउल में प्रदर्शन और अपनी उपस्थिति पर भी टिप्पणी की।
“जापान में मध्यावधि चुनाव का बिगुल!” पीएम सनाए तकाइची ने भंग की संसद, 8 फरवरी को होगा शक्ति परीक्षण

जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने शुक्रवार को संसद के निचले सदन को भंग कर दिया, जिससे देश में 8 फरवरी को मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। तकाइची ने यह फैसला केवल तीन महीने के कार्यकाल के बाद लिया है। अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री चुनी गईं तकाइची को अब तक लगभग 70 प्रतिशत की ऊंची लोकप्रियता मिली है। माना जा रहा है कि वह इसी लोकप्रियता का लाभ उठाकर सत्तारूढ़ दल की स्थिति मजबूत करना चाहती हैं, जिसे हाल के वर्षों में भारी नुकसान झेलना पड़ा है। हालांकि, संसद भंग होने से उस बजट पर मतदान टल गया है, जिसका उद्देश्य कमजोर अर्थव्यवस्था को सहारा देना और बढ़ती महंगाई से निपटना था। 465 सदस्यीय निचले सदन के भंग होने के साथ ही 12 दिनों का चुनाव प्रचार अभियान शुरू होगा, जिसकी औपचारिक शुरुआत मंगलवार से होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी जापान पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबावप्रधानमंत्री तकाइची ने कहा कि वह चाहती हैं कि जनता तय करे कि उन्हें प्रधानमंत्री बने रहना चाहिए या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस चुनाव को अपने राजनीतिक भविष्य से जोड़ रही हैं। सख्त रुख वाली रूढ़िवादी नेता तकाइची अपने पूर्ववर्ती शिगेरु इशिबा से अलग नीतियों को सामने रखना चाहती हैं। उनके एजेंडे में ज्यादा सरकारी खर्च, सैन्य ताकत में इजाफा और कड़ी आव्रजन नीति शामिल है, ताकि जापान को ‘मजबूत और समृद्ध’ बनाया जा सके। हालांकि तकाइची की छवि युवा मतदाताओं में लोकप्रिय है, लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) अभी भी राजनीतिक फंडिंग घोटाले के असर से उबर रही है। इसके चलते कई पारंपरिक मतदाता उभरती दक्षिणपंथी विपक्षी पार्टियों की ओर रुख कर चुके हैं। प्रधानमंत्री का लक्ष्य इस चुनाव के जरिए निचले सदन में मजबूत बहुमत हासिल करना है, ताकि उनकी सरकार बिना विपक्ष पर निर्भर हुए अपने एजेंडे को आगे बढ़ा सके। इस बीच चीन के साथ जापान का तनाव भी बढ़ा है। तकाइची की ताइवान समर्थक टिप्पणियों के बाद बीजिंग ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी जापान पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं।
“इतिहास को तोड़-मरोड़ रहे हैं पीएम मोदी!” जयराम रमेश का बड़ा आरोप, बोले- ‘बापू की विरासत मिटाने की हो रही साजिश’

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शुक्रवार को तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने में सबसे माहिर हैं। कांग्रेस ने ये भी कहा कि राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और बीते महीने संसद में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान करने का प्रयास किया गया।कांग्रेस संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पीएम मोदी व्यवस्थागत तरीके से महात्मा गांधी की यादों और विरासत को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। जयराम रमेश ने पोस्ट में लिखा, ‘बीते महीने संसद में राष्ट्रगीत पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी और उनके सहयोगी बेनकाब हो गए। राष्ट्रगान के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की गई और इस दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान का प्रयास किया गया।”आज 23 जनवरी 2026 के दिन देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, जिन्होंने 1937 में वंदे मातरम की पंक्तियों को लेकर हुए विवाद को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाई, जिसका पीएम मोदी ने जानबूझकर जिक्र नहीं किया।’ दोबारा लिखने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाएजयराम रमेश ने लिखा ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परपोते और इतिहासकार सुगत बोस ने लिखा कि नेताजी ने 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर का उद्घाटन किया था और उस दौरान उन्होंने राष्ट्रगान के दौरान पर जन गण मन गाया था।”नेताजी ने ही 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से प्रसारित संदेश में पहली बार महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। अब प्रधानमंत्री महात्मा गांधी की यादों और विरासत को व्यवस्थागत तरीके से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं और इसका ताजा उदाहरण मनरेगा कानून वापस लेना है।’ बीते माह संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि बंगाल में चुनाव होने के चलते वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जा रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर वंदे मातरम के नाम पर राजनीति करने और इतिहास को दोबारा लिखने की कोशिश करने जैसे आरोप लगाए। इसके जवाब में सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
“भाजपा में ‘नितिन नवीन’ युग की शुरुआत!” पद संभालते ही अपनों के निशाने पर अध्यक्ष, उम्र और अनुभव पर छिड़ी जंग

भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नवीन ने जिम्मेदारी संभाल ली है। पद ग्रहण करने से पहले उन्होंने सभी बड़े नेताओं का आशीर्वाद लिया। इन सबके बीच उनका कुर्सी संभालना कुछ नेताओं को रास नहीं आया है। इस तरह के नेता नितिन नवीन उम्र और अनुभव को लेकर बातें कर रहे हैं। एक नेता जी नितिन नवीन के बारे में चर्चा पर इतना बिदक गए कि बोले वह क्या कर लेंगे? भाजपा के भीतर एक चर्चा यह भी है कि नितिन नवीन के बहाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर चले आ रहे संकट को बड़ी चतुराई से टाल दिया है। हालांकि दूसरे गुट की उम्मीद अभी भी कायम है। बोलते नहीं। बस धीरे से काम कर देतेपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2 फरवरी को राज्य का अंतरिम बजट पेश करेंगी। इस बार के बजट पर चुनावी चुनौतियों को देखकर ममता बनर्जी का खास ध्यान है। वह युवा वर्ग को खास तौर पर ध्यान में रख सकती हैं। हालांकि भाजपा की अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि ममता बनर्जी अब चाहे जो कर लें। इस बार वह बंगाल का मिजाज भांपने में चूक गई हैं। ममता ने इस बार तृणमूल के दूसरे नेताओं को काफी अहम जिम्मेदारी दी है। उन्होंने पार्टी के नेताओं से भी बयान पर नियंत्रण रखने और सोच समझकर बोलने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू के सुप्रीम लीडर हैं, लेकिन अब थोड़ा शांत रहते हैं। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह कांटा सहित मछली को निगल जाने की राजनीति में पारंगत माने जाते हैं। वहीं, नीतीश कुमार के दूसरे वफादार भी हैं। कुछ हाशिए पर धकेल दिए हैं। उनमें मुख्य धारा में लौटने की छटपटाहट है। इस छटपटाहट के पीछे आगामी राज्यसभा चुनाव भी है। ऐसे में कई दौर का शीतयुद्ध चल रहा है। आरसीपी सिंह भी पार्टी में आने के लिए बेताब हैं। श्याम रजक ने यह कहकर मुश्किलें पैदा कर दी हैं कि आरसीपी पार्टी से गए ही कब थे? इधर दिल्ली में ललन सिंह की टीम ने केसी त्यागी का पत्ता काटने की कोशिश की है। हालांकि नीतीश कुमार राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं। बोलते नहीं। बस धीरे से काम कर देते हैं। ऐसे में सब समय की धार देख रहे हैं। रणनीतिकारों को हैरत में डाल दियाअसम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने केन्द्रीय भाजपा को भरोसा दिया है कि राज्य में पार्टी की 80 से अधिक सीटें आएंगी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और भंवर जितेन्द्र सिंह की टीम इस बार बड़े दावे कर रही है। कांग्रेस के सांसद गौरव गगोई को कोच-राजबोंगशी, ताई-अहोम, चुटिया, मटक, मोरान और चाय जनतजातियों की नाराजगी से काफी उम्मीदें हैं। तृणमूल की एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि सीएए-एनआरसी को लेकर जनता के एक बड़े वर्ग में बड़ी नाराजगी है। इन सबके बीच भाजपा के ही एक नेता ने अपनी पार्टी के रणनीतिकारों को हैरत में डाल दिया। उन्होंने साफ कहा कि बिस्वा सरमा जितने अच्छे नेता हैं, उससे बड़े शो-मैन। इसलिए सावधानी हटी तो दुर्घटना हटी।
“ट्रंप से दोस्ती, घर में फजीहत!” ‘शांति बोर्ड’ पर हस्ताक्षर कर बुरे फंसे शहबाज शरीफ, पाकिस्तान में भारी बवाल

अमेरिका के साथ गलबहियां करने के चक्कर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने ही घर में सवालों के बीच घिर गए हैं। उन्हें विपक्ष की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड की अध्यक्षता में बने शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए शरीफ ने शरीफ ने गुरुवार को हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान समेत 19 देशों के नेताओं ने दावोस में इस समूह के चार्टर के रूप में अपना-अपना नाम दर्ज कराया। इस दौरान जब शहबाज का हस्ताक्षर करने का वक्त आया तो वह ट्रंप के बगल में बैठक मुस्कुराते नजर आए। हालांकि, इस फैसले ने पाकिस्तान के अंदर बवाल मचा दिया। आइए पहले जानते हैं कि यह शांति बोर्ड क्यों बनाया गया है और इसको बनाने का विचार कहां से आया है। शांति बोर्ड बनाने का विचार सबसे पहले गाजा युद्ध के दौरान आया, जब अमेरिकी ने अपनी शांति योजना को पेश किया। यह बोर्ड गाजा में शांति की निगरानी करने के लिए बनाया गया। लेकिन यह बोर्ड अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान के लिए एक मध्यस्थ की भूमिका की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि ट्रंप इसके माध्यम से अपना खुद का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) बना रहे हैं। धारणा बने कि पाकिस्तान में लोकतंत्रविपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष गोहर अली खान ने इस फैसले पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शरीफ ने किसी परामर्श के शांति बोर्ड में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने कहा, कल विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह शांति बोर्ड में शामिल हो गया है। सरकार ने संसद को नजरअंदाज किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति बोर्ड में शामिल होने से पहले उसकी शर्तों के बारे में संसद को बताया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, क्या आप हमास को निरस्त्र करने में भूमिका निभाएंगे? अगर यह संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का कोई निकाय होता, तो सरकार खुद से कदम उठा सकती थी। लेकिन शांति बोर्ड कोई यूएन का निकाय नहीं है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की खबर के मुताबिक, पीटीआई के वरिष्ठ नेता असद कैसर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने इतने संवेदनशील मुद्दे पर सर्वसम्मति से फैसला लेने की जहमत नहीं उठाई। उन्हें इस पर संसद में चर्चा करना चाहिए थी, ताकि विश्व समुदाय में यह धारणा बने कि पाकिस्तान में लोकतंत्र है। शांति की उम्मीद करना बेवकूफों की जन्नतजमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख फजलुर रहमान ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने हमास को निरस्त्र करने के किसी भी अभियान का हिस्सा बनने के खिलाफ चेतावनी दी। पाकिस्तान की संसद में रहमान ने कहा कि फलस्तीनियों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोग शांति बोर्ड का हिस्सा हैं।उन्होंने कहा कि ट्रंप से शांति की उम्मीद करना बेवकूफों की जन्नत (स्वर्ग) में रहने जैसा है। फजलुर रहमान ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप ही बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपनी इच्छा से सदस्यों को चुना है।
हिमाचल कैबिनेट के बड़े फैसले, हमीरपुर में कैंसर केयर सेंटर से लेकर एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन तक मंजूरी

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। राज्य कैबिनेट की बैठक में डॉ. राधाकृष्णन सरकारी मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में एक अत्याधुनिक कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने का फैसला किया गया। कैबिनेट ने 11 नए विभागों के गठन और विभिन्न श्रेणियों के जरूरी पदों के सृजन और उन्हें भरने की भी मंजूरी दी। कैबिनेट ने लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा (पेंशन और भत्ता) नियम 2010 में संशोधन करने का फैसला किया है। कैबिनेट ने राज्य में इस्तेमाल न किए गए जियोथर्मल एनर्जी रिसोर्स की खोज और विकास को आसान बनाने के लिए जियोथर्मल एनर्जी पर राष्ट्रीय नीति को अपनाने की भी मंजूरी दी। इसने इस नीति को लागू करने के लिए ऊना निदेशालय को नोडल एजेंसी के तौर पर मंजूरी दी और जियोथर्मल एनर्जी से जुड़े दिशा-निर्देशों को शामिल करने के लिए स्वर्ण जयंती एनर्जी पॉलिसी 2021 में संशोधनों को मंजूरी दी। आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगीकैबिनेट ने अनाथों और विधवाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने के मकसद से राज्य में पहली बिक्री के समय पेट्रोल और हाईस्पीड डीजल पर अनाथ और विधवा सेस लगाने के लिए एक अध्यादेश जारी करने को मंजूरी दे दी है। यह सेस उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डालेगा, साथ ही इन कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी सुनिश्चित करेगा। कैबिनेट ने टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल बोली लगाने वालों को 25 मेगावाट तक के चार हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स आवंटित करने की मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने कांगड़ा जिले के धर्मशाला के पास 4.3 किलोमीटर लंबा नड्डी जिपलाइन प्रोजेक्ट बनाने का फैसला किया है, जिसकी अनुमानित लागत 7.41 करोड़ रुपये होगी। पूरा होने पर यह एशिया की सबसे लंबी जिपलाइन होगी और उम्मीद है कि यह इस इलाके में आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनेगी। तय सैलरी पर फिर से काम पर रखने का भी फैसला कियाकैबिनेट ने इन सर्विस जीडीओ और एमओ के लिए 66.66 प्रतिशत कोटा और सीधे उम्मीदवारों के लिए 33.33 प्रतिशत सीटें देकर सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी में बदलाव को मंजूरी दे दी। यह भी तय किया गया कि अगर संबंधित श्रेणी में योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो सीटों का बंटवारा अंतरपरिवर्तनीय होगा। मंत्रिमंडल ने सहायक आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी के 11 पदों को भरने की मंजूरी दे दी। शिमला जिले के हीरानगर में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के आवासीय संस्थान में जॉब ट्रेनी के तौर पर अलग-अलग श्रेणी के 11 पदों को भरने का भी फैसला किया। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन सेल में अलग-अलग श्रेणी के 11 पद बनाने और भरने की मंजूरी दी। राजस्व विभाग में तहसीलदार के 6 पदों को भरने की भी मंजूरी दी। इसके अलावा, राजस्व विभाग में लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को तय सैलरी पर फिर से काम पर रखने का भी फैसला किया गया।