जूते चाटने वाले और मारने वाले… AIMIM नेता तौकीर निजामी का मुसलमानों पर शर्मनाक बयान!

एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता तौकीर निजामी ने एक सार्वजनिक सभा में मुसलमानों को लेकर विवादित बयान दिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। निजामी ने अपने बयान में कहा कि मुसलमान तीन तरह के होते हैं। उन्होंने कहा कि एक तरह के मुसलमान वो हैं जो जूते चाटने का काम करते हैं, ये कांग्रेस में मिलेंगे। दूसरा वो जो जूते खाने का काम करते हैं, ये भाजपा में मिलेंगे। और तीसरा वो मुसलमान जो जूते मारने का काम करते हैं, ये AIMIM पार्टी में मिलेंगे। इसके बाद उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि “तुम कौन से मुसलमान हो?” वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा लगातार जारीइस बयान के बाद कई विपक्षी नेताओं ने निजामी के इस बयान की निंदा की है और इसे साम्प्रदायिक रूप से विभाजनकारी बताया है। वहीं AIMIM पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि ऐसे बयान चुनावी माहौल और समाज में तनाव बढ़ा सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा लगातार जारी है।
संविधान में ‘वी द पीपल’ ‘भारत माता’ नहीं! ओवैसी के बयान से छिड़ा नया विवाद, राष्ट्रवाद की परिभाषा पर घमासान

भारत के संविधान और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने इस मुद्दे को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की शुरुआत ‘वी द पीपल’ यानी जनता से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से।ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान का आधार समावेशी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर टिका है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता की बात कही गई है। उनके अनुसार देशभक्ति को किसी एक धार्मिक पहचान से जोड़ना संविधान की भावना के खिलाफ है। एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहींओवैसी ने अपने भाषण में संसद में हुई वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई बहस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि 24 जनवरी 1950 को देश ने खुद को संविधान दिया और उसकी शुरुआत “वी द पीपल” से होती है। उन्होंने कहा कि संविधान किसी खास धार्मिक प्रतीक का नाम लेकर शुरू नहीं होता, बल्कि जनता को सर्वोच्च मानता है। ओवैसी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि यही भारत की संवैधानिक ताकत है। उनके मुताबिक प्रस्तावना साफ तौर पर बताती है कि देश का ढांचा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। इसे किसी एक धार्मिक विचार से जोड़ना सही नहीं है। पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकताएआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि अगर देशभक्ति को किसी एक धर्म से जोड़ा जाएगा तो यह आजादी की लड़ाई लड़ने वाले कई नेताओं के योगदान को कमजोर करेगा। उन्होंने बहादुर शाह जफर और यूसुफ मेहरअली का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने देश के लिए बलिदान दिया। उनके मुताबिक राष्ट्र प्रेम को धार्मिक पहचान से जोड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान “वी द पीपल” शब्दों से शुरू होता है, न कि भारत माता के नाम से। उन्होंने संविधान की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी भावना पर जोर दिया। अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि देशभक्ति को धर्म से जोड़ना सही नहीं।