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ममता सरकार का बड़ा एक्शन, राजीव कुमार के रिटायर होते ही पुलिस महकमे में भारी फेरबदल

पश्चिम बंगाल सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार ने एक साथ 22 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से लेकर कई जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) तक बदल दिए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर हुआ है। राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी पीयूष पांडे को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया है। वहीं, सुप्रतिम सरकार अब कोलकाता के नए पुलिस कमिश्नर होंगे। इससे पहले वह दक्षिण बंगाल के एडीजी पद पर तैनात थे। कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा को अब राज्य का सुरक्षा निदेशक नियुक्त किया गया है। धृतिमान सरकार मुर्शिदाबाद के नए एसपी होंगेएसटीएफ के एडीजी विनीत कुमार गोयल को अब एडीजी (कानून-व्यवस्था) बनाया गया है। उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। दूसरी ओर, जावेद शमीम अब एसटीएफ के एडीजी होंगे और उनके पास इंटेलिजेंस ब्यूरो का अतिरिक्त जिम्मा भी रहेगा। रेंज स्तर पर भी कई बदलाव हुए हैं। अमित पी जावलगी अब बारासात रेंज के आईजीपी होंगे। आलोक राजोरिया को बर्दवान रेंज का डीआईजी बनाया गया है। हाल ही में हिंसा का सामना करने वाले मुर्शिदाबाद जिले के एसपी कुमार सन्नी राज को हटाकर इंटेलिजेंस ब्यूरो में भेज दिया गया है। उनकी जगह धृतिमान सरकार मुर्शिदाबाद के नए एसपी होंगे। व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश कीअन्य तबादलों में प्रतीक्षा झरखरिया को दार्जिलिंग का एसपी और दिनेश कुमार को कोलकाता पुलिस के नॉर्थ डिवीजन का डीसी बनाया गया है। दीपक सरकार अब डीसी साउथ की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रियब्रत रॉय को डीसी नॉर्थ और अरिश बिलाल को इंटेलिजेंस ब्यूरो में विशेष अधीक्षक नियुक्त किया गया है। देबजानी दत्ता अब सियालदह की रेलवे पुलिस अधीक्षक (एसआरपी) होंगी। सरकार ने इन तबादलों के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की है।

उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर की गहन जांच, फर्जी प्रविष्टियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

प्रदेश में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च स्तरीय बैठक में सीएम धामी ने प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी के पास सुरक्षित रखे जाने के लिए कहा गया, जिससे अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न हो। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच सीडीओ/ एडीएम स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया। सीएम धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान हो सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अंतर्गत संचालित होतीसीएम धामी ने परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण तथा नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में निहित है, जिसे अब और अधिक सख़्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है। पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए. निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जीएक अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत तथा 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन एवं अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है, जिसके दृष्टिगत प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किए जाने का भी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।