
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर जिस वीडियो को पोस्ट कर दिल्ली में भाजपा और पुलिस पर बंगालियों पर अत्याचार कारने काआरोप लगाया था. उस वीडियो को दिल्ली पुलिस ने फर्जी बता दिया है. पुलिस के मुताबिक जांच में पता चला कि महिला ने पश्चिम बंगाल, मालदाके रहने वाले एक टीएमसी नेता बप्पी खान के कहने पर फर्जी वीडियो बनाकर वायरल किया था. ममता बनर्जी ने जो वीडियो एक्स पर पोस्ट किया थाउसमें एक महिला दिल्ली पुलिस पर पीटने का आरोप लगाते हुए नजर आ रही है पुलिस के मुताबिक जांच में पता चला कि महिला के पति के बैंकखाते में वीडियो बनाने के अगले ही दिन 25 हजार रुपये आए हैं.
नियत से रची जा रही थी सारी साजिश
आशंका व्यक्त की जा रही है कि छवि खराब करने की नियत से सारी साजिश रची गई है दिल्ली पुलिस ने फिलहाल इस संबंध में अभी कोईएफआईआर नहीं की है. पुलिस के मुताबिक मूलरूप से मालदा की रहने वाली सजनूर नामक महिला पूर्वी दिल्ली के ईस्ट विनोद नगर में परिवार केसाथ रहती है वह एक सार्वजनिक शौचालय में काम करती है. इसके सास-ससुर गीता कालोनी में काम करते हैं. 26 जुलाई को सजनूर ने दावा कियाथा कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने उसके व बच्चे के साथ मारपीट की. अगले दिन 27 जुलाई को इस वीडियो को ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्टकरते हुए दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े किए। मधु विहार थाना पुलिस साजिश समेत तमाम एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है.
ममता बनर्जी ने जो वीडियो एक्स पर पोस्ट किया था उसमें एक महिला दिल्ली पुलिस पर पीटने का आरोप लगाते हुए नजर आ रही है.
X पर किया था पोस्ट
पुलिस के मुताबिक जांच में पता चला कि महिला के पति के बैंक खाते में वीडियो बनाने के अगले ही दिन 25 हजार रुपये आए हैं. दिल्ली पुलिस नेतुरंत जांच शुरू की और पाया कि इस वीडियो में दिख रही महिला, संजानु परवीन, अपने मालदा स्थित एक राजनीतिक कार्यकर्ता रिश्तेदार के कहने परफर्जी वीडियो बना कर viral कर रही थी. वीडियो वायरल करने के तुरंत बाद महिला के पति के बैंक खाते में ₹25,000 जमा हुए थे पश्चिम बंगाल कीमुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक बंगाली-मौली महिला और उसके बच्चे की कथित दिल्ली पुलिस द्वारा मारपीट की वीडियो शेयर कीथी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला सिर्फ बंगाली भाषा बोलने के कारण हुआ था हालांकि, ममता बनर्जी ने इन पुलिस दावों को खारिजकरते हुए कहा कि महिला और उसके बच्चे को धमकी दी गई थी, उन्हें विभिन्न थानों में ले जाया गया—और उन्होंने प्रवासियों की मदद के लिए कहाकि वे बंगाल लौट आए ताकि सच सामने आ सके.