लखीमपुर खीरी का मुस्तफाबाद बनेगा कबीरधाम, CM योगी का बड़ा ऐलान “कबीरदास ने दिखाया समाज को एकता का मार्ग”

संत क्षमा देव और गुरमन देव के स्मृति जन्मोत्सव मेले में सोमवार को लखीमपुर खीरी के मुस्तफाबाद स्थित कबीरधाम पहुंचे मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ ने कहा कि जब वह यहां आए तो गांव का नाम मुस्तफाबाद होने के बारे में जानकारी ली। पता चला कि यहां मुस्लिम आबादी एक भीनहीं है। उन्होंने कहा कि इस गांव का नाम कबीरधाम होना चाहिए। इसके लिए प्रस्ताव मांगा गया है। जल्द ही मुस्तफाबाद का नाम बदलकरकबीरधाम किया जाएगा। बाउंड्री वॉल बनाने में जातामुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो भाजपा की सरकार राष्ट्र हित के भाव से काम कर रही है, वैसे भाव 2014 से पहले नहीं थे। तब हिंदू आस्था पर प्रहारकरने व देश के खजाने को लूटने का काम होता था। योगी ने कहा कि भाजपा सरकार में अयोध्या और काशी के साथ ही धार्मिक आस्था वाले स्थलोंके लिए धन खर्च किया। पहले यह पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल बनाने में जाता था। समाज का विभाजन हुआमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक आस्था पर चोट करने के लिए अयोध्या का नाम बदलकर फैजाबाद और प्रयागराज का नाम बदलकरइलाहाबाद किया गया था। हमारी सरकार आई तो अयोध्या और प्रयागराज को उसका पुराना गौरवशाली इतिहास वापस मिला। इसी तरह से अबमुस्तफाबाद भी कबीरधाम के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने कबीरधाम से जात-पात पर भी प्रहार किया। यहां से समाज को एकजुटता का संदेशदिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कबीरदास ने जातीयता पर प्रहार किया। जाति की विसंगितयों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा था कि जात-पात पूछेना कोई, हरि को भजे सो हरि का होइ। मुख्यमंत्री ने कहा कि जात-पात देश की गुलामी का कारण रहा था। जाति के नाम पर समाज का विभाजनहुआ था। इस विभाजन से उबारने के लिए उस समय गुरु रामानंद, कबीरदास, रविदास समेत अनेक संतों ने समाज को नई दिशा दी। उनकी वाणीआज भी उतनी ही प्रासांगिक है, जितना उस समय थी।
इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 में अमित शाह का ऐलान, भारत की समुद्री कनेक्टिविटी होगी दोगुनी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना देश के समुद्री व्यापार में कई गुना वृद्धि करेगी। करीब पांच अरब डॉलर(लगभग 42,000 करोड़ रुपये) की इस परियोजना से भारत की समुद्री कनेक्टिविटी और रणनीतिक क्षमताएं मजबूत होंगी। इंडिया मैरीटाइम वीक2025 के उद्घाटन समारोह में शाह ने कहा कि भारत के पास लोकतांत्रिक स्थिरता और मजबूत नौसैनिक क्षमता है। साथ ही, देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्रऔर ग्लोबल साउथ के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है। भारतीय समुद्री सप्ताह 2025 की शुरुआत हो गईदेश की समुद्री ताकत और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत बनाने के लिए मुंबई में इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसकार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमीत शाह ने 27 अक्तूबर को किया, जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रपटेल, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सवंवादाताओं से बातचीत करते हुएभारत के केंद्रीय पत्तान, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल कहा कि आज से, समुद्री सप्ताह शुरू हो गया है। समुद्री क्षेत्र की भूमिका, भारतीय समुद्री सप्ताह 2025 की शुरुआत हो गई है। यह साल 2023 में हुए शिखर सम्मेलन की तुलना का दोगुना हो गया है। सम्मेलन के लिए एक मानक स्थापित कर दियाउन्होंने कहा उद्घाटन सत्र ने पूरे शिखर सम्मेलन के लिए एक मानक स्थापित कर दिया है। इस समारोह में 350 से अधिक वैश्विक वक्ता हिस्सा ले रहे हैंऔर 11 से अधिक विदेशी मंत्री इसमें भाग ले रहे हैं। हम भविष्य में भारत को एक महाशक्ति बनाएंगे के लिए प्रतिबद्ध हैं। वैश्विक खिलाड़ियों कासहयोग, भारत 2047 तक जहाज निर्माण में शीर्ष पांच राष्ट्र बन जाएगा। नीति और सुधार हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्प्रेरक हैं, और हमाराआत्मविश्वास दोगुना हो गया है। कार्गो हैंडलिंग सुविधा, और कारोबार में विश्वास, भारत अपने दृष्टिकोण को कार्यरूप में बदलने के लिए तैयार है।इस क्षेत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन हमारी राह आसान करता है, सुशासन और पारदर्शिता ने हमारे बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाई है। यहपारिस्थितिकी तंत्र के विकास, जहाज निर्माण और जहाज पुनर्चक्रण में मदद करेगा। अगले 22 वर्षों में, हम आत्मनिर्भर बनेंगे और दुनिया में एकअग्रणी विकसित देश बनेंगे। हमारे बंदरगाहों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना हमारा लक्ष्य है, जो अप्रत्यक्ष रूप से समुद्री अर्थव्यवस्था के निर्माणमें योगदान देगा। इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण भारत की वैश्विक मजबूती का मार्ग प्रशस्त करेगा। गुणवत्तापूर्ण कार्यबल और युवाओं कीभागीदारी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है और भारत को वैश्विक समुद्री क्षेत्र में अपना दबदबा बनाने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री क्लस्टरआधारित सुविधाओं के विकास के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और उन्हें जरूरी अन्य सभी सुविधाएं भारत सरकार की ओर सेप्रदान की जाएंगी।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम, 7 इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिखाई हरी झंडी

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंटमैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत सात नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। मंत्री नेबताया कि सरकार को इस योजना के तहत कुल 249 प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से प्रारंभिक चरण में 7 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है। इन प्रोजेक्ट्स मेंप्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) यानी मदरबोर्ड बेस, कैमरा मॉड्यूल, कॉपर लैमिनेट और पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स (जो कैपेसिटर और कंज्यूमरइलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग होती हैं) के निर्माण से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। अग्रणी भूमिका निभाई जाएइलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि इन सात प्रोजेक्ट्स में कुल ₹5,532 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इससे लगभग5,195 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक ₹1.15 लाख करोड़ मूल्य के निवेश प्रस्ताव प्राप्त किएहैं, जो देश में बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमताओं का संकेत है। सरकार की यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को औरबल देगी। इस योजना के तहत देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने, और भारत को वैश्विकमैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन हब बनता जा रहाहै। मोबाइल फोन से लेकर सेमीकंडक्टर और अब कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग तक, भारत का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात के क्षेत्रमें भी अग्रणी भूमिका निभाई जाए। दुनिया का एक प्रमुख केंद्र बनेगाइलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के पहले चरण की आवेदन प्रक्रिया 30 सितंबर को समाप्त हो चुकी है, जबकि कैपिटलइक्विपमेंट्स के लिए आवेदन की विंडो अभी खुली हुई है। सरकार का कहना है कि इस स्कीम के दूसरे चरण में और कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स कोमंजूरी मिलने की संभावना है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में देश की भागीदारी और भी मजबूत होगी। बीते दस वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्सउत्पादन करीब चार गुना बढ़ चुका है। यह 2014 के ₹2.4 लाख करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹9.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। मोबाइल फोनमैन्युफैक्चरिंग अकेले ₹4.4 लाख करोड़ के स्तर तक पहुंच चुकी है, जिसमें ₹1.5 लाख करोड़ का निर्यात शामिल है। सरकार का कहना है कि आनेवाले वर्षों में भारत न सिर्फ मोबाइल, बल्कि चिप्स, कंपोनेंट्स और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन में भी दुनिया का एक प्रमुख केंद्रबनेगा।
विकसित भारत में पुलिस की भूमिका अहम, राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश आईपीएस अफसरों को “जानें क्या है मुख्य संदेश”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि तकनीक ने पुलिसिंग के क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला दिया है और ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ नागरिकों के लिएसबसे भयावह खतरों में से एक बन गई है। राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने आए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों के एकसमूह को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि लोगों, खासकर वंचित वर्ग को पुलिस को एक भयावह संस्था के रूप में नहीं, बल्कि एक सहारेके स्रोत के रूप में देखना चाहिए। भारत’ के निर्माण में एक प्रमुख भूमिका निभाएगाराष्ट्रपति ने इस दौरान कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और ‘हमें अपनी आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और तेजकरने के लिए लगातार बढ़ते सार्वजनिक और निजी निवेश की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा, ‘किसी भी राज्य या क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिएकानून-व्यवस्था एक आवश्यक पूर्व शर्त है। निवेश और विकास को बढ़ावा देने में प्रभावी पुलिसिंग उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि आर्थिकप्रोत्साहन।’ राष्ट्रपति ने कहा कि आईपीएस परिवीक्षाधीन अधिकारियों जैसे युवा अधिकारियों के नेतृत्व में भविष्य के लिए तैयार पुलिस बल ‘विकसितभारत’ के निर्माण में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। आधारित एक नया दृष्टिकोण लाने के लिएउन्होंने कहा, ‘धोखेबाज कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण करते हैं, गिरफ्तारी और बैंक खातों को फ्रीज करने जैसी धमकियों का इस्तेमालकरके पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए जुर्माना या जमानत राशि के रूप में पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं। ये धोखेबाज कानून प्रवर्तनअधिकारी बनकर वीडियो कॉल का इस्तेमाल करते हैं और पीड़ितों को निशाना बनाते हैं। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत में आर्टिफिशियलइंटेलिजेंस (एआई) का सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता उपयोगकर्ता आधार है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन उन्होंने भारत जैसे उपनिवेशों में भय, अविश्वास और दूरी पर आधारित पुलिस व्यवस्थाएँ बनाईं। पुलिस व्यवस्था में सांस्कृतिक वि-उपनिवेशीकरण की प्रक्रिया आईपी या भारतीय पुलिसको आईपीएस या भारतीय पुलिस सेवा में बदलने के साथ शुरू हुई। यह बदलाव शासन करने के बजाय सेवा करने के विचार पर आधारित एक नयादृष्टिकोण लाने के लिए था।’
PM मोदी करेंगे सरदार पटेल की 150वीं जयंती का नेतृत्व, एकता नगर में भव्य समारोह की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस शुक्रवार गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का नेतृत्वकरेंगे। यहां स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी इस समारोह का केंद्रबिंदु रहेगा। इस मौके पर राष्ट्रीय एकता दिवस को भव्य तरीके से मनाने की तैयारी है, जिसमेंदेश की एकता, अनुशासन और वीरता का अद्भुत प्रदर्शन होगा। हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल की जयंती के रूप मेंमनाया जाता है। इस वर्ष यह आयोजन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह उनकी 150वीं जयंती है। इस अवसर पर एक सांस्कृतिक उत्सव और राष्ट्रीयएकता परेड आयोजित होगी, जिसमें सुरक्षा बल अपनी वीरता और समर्पण का प्रदर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से रन फॉर यूनिटी मेंशामिल होने का आह्वान किया है ताकि देश में एकता और अखंडता के संदेश को और मजबूत किया जा सके। महिला अधिकारी के नेतृत्व में दिया जाएगाइस वर्ष की राष्ट्रीय एकता परेड में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां हिस्सालेंगी। इसके अलावा असम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, केरल और आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम भी परेडमें शामिल होगी। परेड में घुड़सवार दस्ते, ऊंट दल और देशी नस्ल के कुत्तों के प्रदर्शन को विशेष आकर्षण के रूप में शामिल किया गया है। इस बारगार्ड ऑफ ऑनर एक महिला अधिकारी के नेतृत्व में दिया जाएगा। वहीं, सीआईएसएफ और सीआरपीएफ की महिला कर्मी मार्शल आर्ट्स औरनिहत्थे युद्ध कौशल का प्रदर्शन करेंगी। इस परेड में बीएसएफ का ऊंट दस्ते का बैंड, गुजरात पुलिस का घोड़ा दल, असम पुलिस का मोटरसाइकिलस्टंट शो और देशी नस्ल के रैंपोर और मुदहोल हाउंड्स कुत्तों की क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया जाएगा। असाधारण साहस दिखायापरेड का एक बड़ा आकर्षण होगा भारतीय वायु सेना की ‘सूर्य किरण’ टीम का शानदार एयर शो, जो आसमान में एकता के रंग बिखेरेगा। इसकेअलावा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 10 झांकियां एकता में विविधता का संदेश देंगी। इन झांकियों में एनएसजी, एनडीआरएफ, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, अंडमान-निकोबार, मणिपुर, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पुडुचेरी शामिल हैं। कार्यक्रम में सीआरपीएफ के पांच शौर्यचक्र विजेता और बीएसएफ के 16 बहादुरी पदक विजेता भी शामिल होंगे, जिन्होंने झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादविरोधी कार्रवाई और पश्चिमी सीमा पर ऑपरेशन सिंदूर में असाधारण साहस दिखाया था।
एक वक्त था जब बिहारी कहलाना अपमान था, अब गर्व की बात है बोले नीतीश कुमार “जानें क्या कुछ कहा”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुनावी सभाओं को लेकर सक्रियता खूब नोटिस की जा रही। संबोधन से लेकर संवाद का अंदाज चर्चा में है। नीतीश कुमारका विपक्ष को लेकर हमला बोलना भी सुर्खियों में है। इसी कड़ी में उन्होंने अपने 20 साल के कार्यकाल में क्या-क्या बदलाव किए वो बताए। आइयेसिलसिलेवार जानते हैं। सबसे पहले नीतीश कुमार ने 2005 से पहले का दौर याद किया। जिसमें उन्होंने कहा कि आप सब को याद होगा, जब बिहारमें अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर था। हर तरफ अराजकता का माहौल था। लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया था। शाम 6 बजे के बाद लोगअपने घरों से बाहर नहीं निकल पाते थे। हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। राज्य में अपहरण का धंधा उद्योग का रूप धारण कर चुका था। शोरूमसे दिनदहाड़े गाड़ियां लूट ली जाती थीं।भाईचारे और शांति का माहौलअपराधियों के भय से कोई नई गाड़ी नहीं खरीदना चाहता था। पैसा रहते हुए भी कोई नया मकान नहीं बनाना चाहता था। राज्य में रंगदारों के आतंककी वजह से उद्योग धंधे बंद हो चुके थे। राज्य से डॉक्टर-इंजीनियर पलायन कर रहे थे। पूरी व्यवस्था चरमरा गई थी। बिहार में कानून-व्यवस्था नाम कीकोई चीज नहीं रह गई थी। अपराध को सत्ता से सीधे संरक्षण मिल रहा था और सत्ता में बैठे लोगों ने शासन-प्रशासन को पूरी तरह से पंगु बना कर रखदिया था। राज्य की जनता डर के साए में जीवन व्यतीत करने को मजबूर थी। बिहारी कहलाना अपमान की बात थी। सीएम नीतीश ने आगे बतायाकि जब वर्ष 2005 में जब हमलोगों की सरकार बनी, तो हमने सबसे पहले विधि-व्यवस्था के संधारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कानून का राजस्थापित किया। अपराध और भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी गई। अब राज्य में किसी प्रकार के डर एवं भय का वातावरण नहींहै। राज्य में प्रेम, भाईचारे और शांति का माहौल है। पुलिसकर्मियों की बहाली की जा रहीपहले पुलिस के पास न तो गाड़ियां होती थीं और न हथियार। अत्याधुनिक हथियारों के अभाव में पुलिस का मनोबल काफी नीचे था। वर्ष 2005 मेंबिहार में थानों की संख्या सिर्फ 817 थी, जिसे बढ़ाकर अब 1380 से भी ज्यादा कर दिया गया है। पुलिस थानों के लिए अत्याधुनिक भवन बनाएगए। साथ ही, पुलिस वाहनों की संख्या कई गुणा बढ़ाई गयी। पुलिस प्रशासन को अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया गया। सिपाही एवं पुलिसपदाधिकारियों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी गई। स्पेशल ऑग्जिलरी पुलिस (सैप) का गठन किया गया। 24 नवंबर 2005 को राज्य में नई सरकारबनने के समय बिहार पुलिस में कार्यरत बल की संख्या काफी कम थी। उस समय मात्र 42 हजार 481 पुलिसकर्मी कार्यरत थे। हमारी सरकार ने वर्ष2006 में कानून व्यवस्था को और बेहतर करने के लिए पुलिस बल की संख्या में बढ़ोत्तरी की। वर्तमान में राज्य में पुलिस बल की संख्या बढ़कर 1 लाख 25 हजार से भी ज्यादा हो गई है। सरकार ने तय किया है कि पुलिस बल की संख्या को और बढ़ाना है। इसके लिए कुल 2 लाख 29 हजार सेभी अधिक पदों का सृजन कर तेजी से पुलिसकर्मियों की बहाली की जा रही है। अनुसंधान को अलग-अलग किया गयावर्ष 2013 से ही पुलिस में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये तथा महिलाओं केसशक्तीकरण के लिये बिहार पुलिस में महिला सिपाहियों की बड़ी संख्या में नियुक्ति की गयी। साथ ही ‘आदिवासी महिला स्वाभिमान बटालियन’ कागठन किया गया। बिहार पुलिस में महिलाओं की भागीदारी आज देश में सबसे ज्यादा है। वर्ष 2008 में राज्य सिपाही भर्ती बोर्ड का गठन किया गयाएवं वर्ष 2017 में बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग का गठन किया गया ताकि पुलिस बल की नियुक्ति शीघ्र हो सके। अपराध के वैज्ञानिक अनुसंधानके लिये विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना की गयी। आपराधिक मामलों के तेजी से निष्पादन के लिये थानों में विधि व्यवस्था और अनुसंधानको अलग-अलग किया गया।
बगावती नेताओं पर भाजपा का कड़ा कदम छह नेता निष्कासित, एनडीए उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई

जनता दल यूनाईटेड के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने बागियों पर कार्रवाई की है। बगावत कर चुनाव मैदान में महागठबंधन को समर्थन दे रहे छहनेताओं को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। इनमें कुछ चुनाव मैदान में आ गए हैं। भाजपा के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पार्टी से बगावत करने कोअनुशासनहीनता मानने के साथ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर इनकी प्राथमिक सदस्यता भी रद कर दी गई है। इन नेताओं में कहलगांवके विधायक पवन यादव भी शामिल हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि पार्टी ने कहा कि सभी छह नेताओं के खिलाफअनुशासनात्मक कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वह राज्य में जारी विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए उम्मीदवारों के खिलाफ गतिविधियों मेंशामिल थे। पिछले कई महीनों से भाजपा कार्यकर्ता इनकी शिकायत कर रहे हैं। जांच में मामला सही पाया गया। इसके बाद इन पर कार्रवाई की गईहै। विचारधारा के विपरीत गतिविधियाँ चला रहेकहलगांव से मौजूदा विधायक पवन यादव को इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। वह एनडीए उम्मीदवार के खिलाफ बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावलड़ रहे हैं। वहीं भाजपा से निष्कासित अन्य नेताओं में सनी यादव, श्रवण कुशवाहा, उत्तम चौधरी, मारुति नंदन मारुति और पवन चौधरी शामिल हैं।बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड ने बड़ा और सख्त एक्शन लिया है। नीतीश कुमार ने बीते शनिवार को अपने 11 नेताओं कोपार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। रविवार को फिर उनकी पार्टी ने पांच और लोगों पर कार्रवाई की है, इनमें गोपाल मंडल का नाम भी शामिलहै। यह सभी टिकट की मांग कर रहे थे। टिकट न मिलने पर बगावत कर चुनाव मैदान में उतर गए। इससे पार्टी प्रत्याशियों को ही नुकसान हुआ है।भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इन नेताओं को इसलिए निष्कासित किया गया क्योंकि वह एनडीए के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफकाम कर रहे थे और पार्टी की विचारधारा के विपरीत गतिविधियाँ चला रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने 22वें आसियान शिखर सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित किया, “समावेशिता और स्थिरता” को बताया मुख्य विषय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आसियान शिखर सम्मेलन में वर्चुअली हिस्सा लिया। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा किआसियान के देश साझा मूल्यों की डोर से बंधे हुए हैं। 21वीं सदी आसियान देशों की सदी है। बता दें कि आसियान की यह बैठक मलयेशिया में होरही है।शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मलयेशियाई प्रधानमंत्री और मेरे मित्र अनवर इब्राहिम आपने मुझे आसियान परिवार मेंशामिल होने का अवसर दिया, इसके लिए मैं बहुत खुश हूं। मैं आपको इस सफल शिखर सम्मेलन के लिए बधाई देता हूं। पीएम ने कहा, समावेशीपनऔर स्थिरता इस वर्ष के आसियान शिखर सम्मेलन के विषय हैं और यह विषय हमारे साझा प्रयासों को दर्शाता है। चाहे वह डिजिटल समावेशन हो, खाद्य सुरक्षा हो, या इस अशांत वैश्विक समय में लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं हों। हम साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘भारतके देश समन्वयक की भूमि का कुशलता से निभाने पर फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस का धन्यवाद करता हूं।’ पीएम मोदी ने इस दौरान कहाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘थाईलैंड की राजमाता के निधन पर मैं सभी भारतवासियों की ओर से थाईलैंड के राज परिवार और जनता के प्रतिअपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।’ पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, ‘भारत और आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक-चौथाई जनसंख्या काप्रतिनिधित्व करते हैं। हम न केवल भूगोल साझा करते हैं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक संबंधों और साझे मूल्य के जोड़ से जुड़े हुए हैं। हम वैश्विक दक्षिणका हिस्सा हैं। हमारे बीच न केवल व्यापारिक संबंध हैं, बल्कि सांस्कृतिक संबंध भी हैं। आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति का मुख्य स्तंभ है। भारत नेहमेशा आसियान की केंद्रीयता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। अनिश्चितता के इस दौर में भारत-आसियानव्यापक रणनीतिक साझेदारी निरंतर मजबूत हुई है। हमारी मजबूत साझेदारी वैश्विक स्थिरता और विकास का आधार बनकर उभर रही है।’ प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने आज मलयेशिया में आयोजित 22वें आसियान शिखर सम्मेलन 2025 को वर्चुअली संबोधित किया है। पीएम ने कहा- इस वर्षआसियान शिखर सम्मेलन का विषय ‘समावेशीपन और स्थिरता’ है। यह विषय हमारे साझा प्रयासों में स्पष्ट रूप से दिखती है- चाहे वह डिजिटलसमावेशन हो या वर्तमान चुनौतियों के बीच खाद्य सुरक्षा और लचीली आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हर नागरिक का स्वस्थ होना जरूरी, आयुष्मान योजना सभी का अधिकार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश के हर नागरिक को स्वस्थ रखकर ही 2047 में देश को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना पूरा हो सकताहै। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठाना अब तक गरीबों के लिए एक सपना था, लेकिन अब यह उनका अधिकार बन गया है। आयुष्मानयोजना के अंतर्गत हर परिवार को पांच लाख रुपये तक का इलाज कराने की सुविधा मिलने से अब गरीब परिवारों की सबसे बड़ी मुश्किल हल हो गईहै। उन्होंने कहा कि यदि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने का सपना देख रहा है तो यह हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराए बिना नहींहो सकता।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि जब भारत का हर नागरिक स्वस्थ होगा तभी भारत सशक्त होगा। इसी तरह के भारतका सपना हमारे पूर्वजों ने देखा था और हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापितकरना है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए राष्ट्र के नागरिकों का स्वास्थ्य उत्तम होना बहुत जरूरी है। योजना में शामिल किया गयाउन्होंने कहा कि आज देश के कोने-कोने में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खुल रहे हैं। इसमें बेहतर सुविधाएं लोगों को मिल रही हैं। डॉक्टरों कीसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे लोगों को अपने नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे की सेवा करने का भाव पीड़ामहसूस करके ही किया जा सकता है। आज स्वास्थ्य सुविधा लोगों का अधिकार बनकर उनके घरों तक पहुंच गई है। अब कोई गरीब किसी भी बीमारीके कारण अपने जीवन की उम्मीद नहीं खोएगा। देश के 10 करोड़ परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रूपए के स्वास्थ्य बीमा का कवच प्रदान किया गयाहै। अब 70 वर्ष से ऊपर के सभी वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना में शामिल किया गया है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रहीमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उत्तर प्रदेश में हर जिले, हर क्षेत्र में बेहतर अस्पतालों-मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हो रही है। इससे लोगों को अपने आसपास ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि अब लोगों कोइलाज की सुविधा पाने के लिए दूर के बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। अब गोरखपुर हो या यूपी का कोई दूसरा इलाका, हर जगहबेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हेल्थकेयर सेक्टर मेंनिवेश, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की दिशा में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल बनने से लोगों को केवल स्वास्थ्यसुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं, बल्कि इससे रोजगार का निर्माण भी हो रहा है। केवल एक अस्पताल बनने से पांच हजार लोगों तक को रोजगार मिलरहा है। उन्होंने कहा कि इससे यूपी की तस्वीर बदल रही है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में अब तक 42 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाचुके हैं, जबकि दो एम्स (गोरखपुर और रायबरेली) सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। डबल इंजन सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को गुणवत्तापूर्णस्वास्थ्य सुविधा मिले और हेल्थकेयर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो। उन्होंने कहा कि भारतीय मनीषा कहती है कि “शरीरं माध्यमं खलु धर्मसाधनम्” यानी जीवन के सभी उद्देश्यों की पूर्ति एक स्वस्थ शरीर से ही संभव है।
पियूष गोयल ब्रुसेल्स जाएंगे, भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को रणनीतिक बढ़ावा देने पर होगी चर्चा

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल 27 अक्तूबर को दो दिवसीय दौरे पर ब्रुसेल्स जाएंगे। इस दौरान वे यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्यकारी उपाध्यक्षऔर वाणिज्य आयुक्त मारोस सेफचोविक से मुलाकात करेंगे। भारत-ईयू के बीच चल रहे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को राजनीतिक बढ़ावा देने औररणनीतिक दिशा देने के उद्देश्य से यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि यह दौरा उस समय हो रहा है जब भारत-ईयूएफटीए वार्ता अपने निर्णायक मोड़ पर है। दोनों पक्ष व्यापक, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिमरूप देने की कोशिश में जुटे हैं। मंत्रालय के अनुसार, गोयल की यात्रा का लक्ष्य बातचीत को रणनीतिक दिशा देना और वार्ता में राजनीतिक गति लानाहै, ताकि दिसंबर तक समझौता हो सके। प्रतिशत भारत को भेजतादोनों पक्षों के बीच होने वाली चर्चा में बाज़ार तक पहुंच, गैर-शुल्क अवरोध और नियामकीय सहयोग जैसे अहम विषय शामिल रहेंगे। मंत्रालय ने कहाकि इस यात्रा के दौरान अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहाँ और अधिक समन्वय की जरूरत है।उल्लेखनीय है कि छह से 10 अक्तूबर के बीच दोनों पक्षों के बीच 14वें दौर की वार्ता संपन्न हुई थी। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी हाल मेंब्रुसेल्स में यूरोपीय आयोग की ट्रेड डायरेक्टर जनरल सबीन वैयंड से बातचीत की थी। भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय माल व्यापार वर्ष 2024-25 में136.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर और आयात 60.68 अरब डॉलर का था। यूरोपीय संघ भारत कासबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो भारत के कुल निर्यात का 17 प्रतिशत और अपने कुल निर्यात का नौ प्रतिशत भारत को भेजता है। सतत विकास शामिलभारत-ईयू व्यापार समझौते की वार्ता 23 नीति-क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें माल और सेवाओं का व्यापार, निवेश, विवाद समाधान, भौगोलिक संकेतक, बौद्धिक संपदा अधिकार और सतत विकास शामिल हैं। ईयू की ओर से वाहनों और चिकित्सा उपकरणों पर शुल्क में कमी, वाइन, स्पिरिट, मांस-पोल्ट्री जैसे उत्पादों पर कर घटाने और सशक्त आईपीआर ढांचे की मांग की जा रही है। वहीं, भारत का मानना है कि समझौता दोनों पक्षों के लिएसमान रूप से लाभदायक और टिकाऊ होना चाहिए, ताकि भारतीय वस्त्र, दवाइयां, इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी जैसे क्षेत्रों कोप्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके।