क्रिकेट के मैदान से सत्ता के मैदान तक, मोहम्मद अजहरुद्दीन बने तेलंगाना सरकार के मंत्री

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन कभी राष्ट्रीय टीम की कमान संभालते थे और अब वह तेलंगाना सरकार का हिस्सा बन गए हैं। कांग्रेसनेता और पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने शुक्रवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली। राजभवन मेंआयोजित एक समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के मौके पर मुख्यमंत्री सहित कईप्रमुख नेता मौजूद थे। अजहरुद्दीन के शामिल होने के साथ मंत्रिमंडल में अब कुल 16 सदस्य हो गए हैं, जबकि दो और पद खाली हैं। विधानसभा केआकार के अनुसार तेलंगाना में अधिकतम 18 मंत्री हो सकते हैं। अजहरुद्दीन को अगस्त के अंतिम सप्ताह में राज्यपाल कोटे के तहत विधान परिषद कासदस्य नामित किया गया था, हालांकि राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अभी इस पर अंतिम स्वीकृति नहीं दी है। अजहरुद्दीन ने 2023 के विधानसभाचुनाव में जुबली हिल्स सीट से उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। बीआरएस उम्मीदवार को 80,549 और अजहरुद्दीन को 64,212 वोट मिलेअजहरुद्दीन ने साल 2009 में राजनीति में कदम रखा था। कांग्रेस ने उन्हें युपी के मुरादाबाद सीट से लोकसभा चुनाव में टिकट दिया था। वह पार्टी केउम्मीदों पर खरे उतरे और चुनाव जीता, लेकिन इसके बाद 2014 और 2023 के चुनाव में उन्हें हार मिली थी। 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेउन्हें राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर सीट से टिकट दिया, जहां उन्हें हार मिली। इसके बाद वह 2018 में तेलंगाना कांग्रेस प्रदेश कमेटी के कार्यकारीअध्यक्ष बनाए गए। फिर उन्होंने तेलंगाना की जुब्ली हिल्स विधानसभा से चुनावा लड़ा, लेकिन वे बीआरएस उम्मीदवार मगंती गोपीनाथ से 16,337 वोट से हार गए थे। बीआरएस उम्मीदवार को 80,549 और अजहरुद्दीन को 64,212 वोट मिले थे। अब हालांकि, अब वह तेलंगाना सरकार काहिस्सा बन गए हैं।’ अजहरुद्दीन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाईअजहरुद्दीन की गिनती भारत के सबसे सफल कप्तानों में होती है। अजहरुद्दीन के क्रिकेट करियर की बात करें तो उन्होंने 99 टेस्ट मैचों में 6215 रनबनाए हैं जिसमें 22 शतक और 21 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, वनडे में अजहरुद्दीन ने 334 मैचों में 9378 रन बनाए जिसमें सात छक्के और 58 अर्धशतक शामिल हैं। टेस्ट में कप्तान के तौर पर उन्होंने 47 मैचों में टीम की कमान संभाली, जबकि वनडे में 174 मैचों में कप्तानी की। कलाई केजादूगर के नाम से विख्यात अजहर का करियर मैच फिक्सिंग कांड से बर्बाद हुआ। साल 2000 में बीसीसीआई ने उन पर आजीवन बैन लगाया था।राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अजहरुद्दीन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
राजनाथ सिंह और अमेरिकी युद्ध मंत्री हेगसेथ ने किया 10 साल का रक्षा समझौता, Indo-US रिश्ते हुए और मजबूत

भारत और अमेरिका के बीच एक 10 वर्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। दोनों देशों के रिश्तों के लिए इसे अहम समझौता बताया जा रहा है।अमेरिका के युद्ध मंत्री ने समझौते पर हस्ताक्षर के बाद कहा कि दोनों देशों के रक्षा संबंध इतने मजबूत कभी नहीं रहे। अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ नेसोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में बताया कि उनकी भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात हुई और एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए।उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ समझौता क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि सूचनाएं साझा करने, तकनीकी सहयोगबढ़ाने में हम अपने समन्वय को बेहतर कर रहे हैं। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समझौते को लेकर कहा कि मुझे लगता है कि आज रक्ष ढांचासमझौते पर हस्ताक्षर के बाद एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये समझौता भारत और अमेरिका के बीच कीरक्षा साझेदारी की नीतियों को तय करने में मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि ‘हमारे द्विपक्षीय संबंधों में रक्षा क्षेत्र एक अहम स्तंभ है। एक मुक्त, नियमआधारित हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र के लिए हमारी साझेदारी बेहद अहम है। यह समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग के मजबूतहोने का संकेत है।’ गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहाराजनाथ ने इससे पहले अगस्त में वाशिंगटन में हेगसेथ से मिलने की योजना बनाई थी लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात परटैरिफ दोगुना करके 50% कर दिया और दोनों देशों के बीच संबंध दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए, जिसके बाद राजनाथ सिंह की अमेरिकायात्रा रद्द कर दी गई थी। अब आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राजनाथ सिंह कुआलालंपुर गए, जहां उनके औरअमेरिकी रक्षा मंत्री के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए। पिछले हफ्ते अमेरिका ने रूस की दो शीर्ष कच्चे तेल निर्यातक कंपनियों पर प्रतिबंधों केएलान किया। जिसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल आयात में कटौती की है, जिसके बाद दोनों देश अब संबंधों के पुनर्निर्माण की संभावनादेख रहे हैं। पिछले दिनों दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान ट्रंप ने भी कहा कि वह भारत के साथ एक व्यापार समझौता करना चाहते हैं। हाल के वर्षों मेंअमेरिका और भारत के बीच अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन टैरिफ विवाद और रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर दोनों देशों के संबंधों में थोड़ी गिरावटआई। भारत ने इसे लेकर कहा कि उसे गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी अपने हितों के अनुसारमॉस्को के साथ व्यापार जारी रखे हुए हैं। राजनाथ सिंह की अमेरिका यात्रा रद्द कर दी गईइससे पहले भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने भी कुआलालंपुर में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ मुलाकात की थी। उस मुलाकात मेंभी दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने पर चर्चा हुई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी अपने एक बयान में कहा था कि भारत केसाथ रिश्तों की कीमत पर अमेरिका, पाकिस्तान से संबंध मजबूत नहीं करेगा। राजनाथ ने इससे पहले अगस्त में वाशिंगटन में हेगसेथ से मिलने कीयोजना बनाई थी लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय आयात पर टैरिफ दोगुना करके 50% कर दिया और दोनों देशों के बीच संबंधदशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए, जिसके बाद राजनाथ सिंह की अमेरिका यात्रा रद्द कर दी गई थी।
FOभारतीय महिला क्रिकेट का गौरव, जेमिमा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रचा इतिहास

क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया शायद ही कभी हारता है और महिला क्रिकेट में तो लगभग कभी नहीं, लेकिन 2017 में भारत ने कुछ ऐसा किया जिसने दुनियाको हिला दिया था। 2017 में ब्रिस्टल में खेले गए महिला वनडे विश्व कप सेमीफाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया की 26 मैचों की अजेय लड़ी तोड़ी थी।उस दिन हरमनप्रीत कौर ने जो 171 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी, वह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगी। उसी दिन, मुंबई में एक16 साल की लड़की जेमिमा रॉड्रिग्स टीवी के सामने बैठी थी। वह पहले से ही हॉकी की नेशनल प्लेयर थी, लेकिन उसने हाल ही में हॉकी छोड़करक्रिकेट को अपनाने का कठिन फैसला लिया था। जब हरमन ने ऑस्ट्रेलियाई स्पिनरों की गेंदों पर छक्का उड़ाया, तो जेमिमा के भीतर कुछ जल उठा।जैसे 1983 की कपिल देव की टीम ने सचिन को प्रेरित किया था, वैसे ही 2017 की हरमन ने जेमिमा को सपना दिया। जेमिमा ने ठान लिया ‘एकदिन मैं भी ऐसा करूंगी’। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे बड़ी पार्टनरशिपकुछ दिनों बाद, मुंबई एयरपोर्ट पर वही जेमिमा तिरंगा लहराते हुए टीम इंडिया का स्वागत कर रही थी। भले ही भारत लॉर्ड्स में फाइनल हार गया था, लेकिन जेमिमा की नजरों में वे हारे नहीं थे। उन्होंने भारतीय क्रिकेट में एक नई आग जलाई थी, एक ऐसी आग, जिसने हर उस लड़की को प्रेरित कियाजो बल्ला उठाने का सपना देखती थी। 2017 का वह सेमीफाइनल सिर्फ भारत का गौरव नहीं था, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के लिए भी एक मोड़ था। हारनेके बाद उन्होंने खुद को और भी मजबूत बनाया। उन्होंने 15 मैच लगातार जीते, 2022 का वर्ल्ड कप आसानी से अपने नाम किया और 2025 तकअजेय बने रहे। लेकिन इतिहास खुद को दोहराने वाला था। 2017 में हरमन ने चमत्कार किया था और 2025 में वही कहानी दोहराई जेमिमा ने। नवीमुंबई में गुरुवार को खेले गए महिला वनडे विश्व कप 2025 के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया एक बार फिर प्रबल दावेदार था। उन्होंने ग्रुप स्टेज में भारतके खिलाफ 331 रन का टारगेट चेज किया था, लेकिन इस बार कुछ असाधारण हुआ। वही लड़की, जिसने कभी एयरपोर्ट पर झंडा लहराया था, अबबल्ला थामे खड़ी थी। 25 साल की जेमिमा रॉड्रिग्स ने 127 नाबाद रन ठोककर ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया और भारत को फाइनल मेंपहुंचाया।जेमिमा हमेशा कहती हैं, ‘ये सब जीसस की योजना है। उनका टाइम सही होता है, मेरा नहीं।’ यह कहानी उनके विश्वास की भी कहानी है। 2017 में’हैरी दी’ (हरमन) को देखकर जिसने सपना देखा था, वही अब उनके साथ क्रीज पर थी। ऑस्ट्रेलिया ने 338 रन का पहाड़ जैसा स्कोर बनाया था।स्मृति मंधाना जल्द ही आउट हो गईं, और सबको लगा- अब तो सपना खत्म, लेकिन जेमिमा और हरमन ने मिलकर चमत्कार कर दिया। दोनों ने 167 रनों की साझेदारी की, जो वर्ल्ड कप इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे बड़ी पार्टनरशिप थी। पार्टनर के लिए दौड़ रही थींहरमनप्रीत ने मैच के बाद कहा, ‘हम एक-दूसरे को बहुत अच्छे से कॉम्प्लिमेंट कर रहे थे। वो (जेमिमा) हर ओवर के बाद मुझे बताती थी कि हमने कितनेरन लिए हैं, आगे कितना चाहिए। वो खुद पूरी तरह इनवॉल्व थी और खुद को भी और मुझे भी पुश कर रही थी। बहुत क्रेडिट उसे जाता है कि उसनेकैसे खुद को संभाला।’ हरमनप्रीत 89 रन बनाकर आउट हुईं और तब भारत को 113 रन और चाहिए थे। अब जिम्मेदारी पूरी तरह जेमिमा के कंधों परथी और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रॉड्रिग्स के 127 रन में से 71 रन रनिंग से आए। उन्होंने अपनी पारी में एक भी छक्का नहीं लगाया। वो खुद केऔर अपनी पार्टनर के लिए दौड़ रही थीं। जब अमनजोत कौर ने 49वें ओवर में विजयी चौका लगाया, जेमिमा पिच के बीचोंबीच घुटनों पर गिर पड़ीं।आंसू, थकान, और एक सपना, उनके मन में सब एक साथ था।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में बदलाव किया, दिसंबर की दर कटौती पर संदेह

फेडरल रिजर्व की ओर से मौद्रिक नीति दर में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद दिसंबर में एक और दर कटौती की संभावना अब कुछ कम हो गईहै। आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के हालिया संकेतों औरश्रम बाजार से जुड़े आर्थिक आंकड़ों में संभावित देरी को देखते हुए दिसंबर में 25 आधार अंकों की नई कटौती की उम्मीद कुछ घट गई है। फेडरलओपन मार्केट कमेटी ने अपनी ताजा बैठक में नीति दर को 25 आधार अंकों तक घटाकर 3.75 से 4.00 प्रतिशत के दायरे में ला दिया। यह कदमबाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप था और इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में वृद्धि को संतुलित रखते हुए महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है। हालांकिब्याज दरों में कटौती का फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ। कमेटी के सदस्य मीरान ने 50 आधार अंकों की बड़ी कटौती का समर्थन किया, जबकिसदस्य श्मिड ने दरों अपरिवर्तित रखन का मत दिया। केंद्रीय बैंक भविष्य की नीति में अधिक सतर्क रुख अपनाएगारिपोर्ट के अनुसार, यह असहमति फेड की नीति दिशा में मौजूद अनिश्चितता को दर्शाती है, क्योंकि केंद्रीय बैंक अब भी विकास और मुद्रास्फीति, दोनोंके बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। नीतिगत बयान में पिछले बैठक के मुकाबले अधिक बदलाव नहीं किया गया, हालांकि इसमें यह उल्लेखकिया गया कि अमेरिकी सरकार के शटडाउन के कारण कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों का प्रकाशन प्रभावित हुआ है। बैठक की सबसे बड़ी चौंकानेवाली बात फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का अपेक्षाकृत सख्त रुख रहा। उन्होंने दिसंबर में एक और दर कटौती की संभावना को काफी हद तक खारिजकरते हुए संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक भविष्य की नीति में अधिक सतर्क रुख अपनाएगा। बाजार की उम्मीदें मुख्य रूप से पॉवेल की टिप्पणियोंपॉवेल ने कहा कि पिछली नीति बैठक के बाद से श्रम बाजार में कोई उल्लेखनीय गिरावट नहीं आई है। उन्होंने स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति अभी भीऊंची बनी हुई है। उन्होंने सरकारी शटडाउन के दौरान आर्थिक स्थिति का आकलन करने में आने वाली चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया, क्योंकिप्रमुख डेटा जारी नहीं किए गए, जिससे भविष्य में नीतिगत निर्णय लेने में बाधा उत्पन्न हो सकती है। रिपोर्ट ने 2025 और 2026 के शेष समय में 75 आधार अंकों की और संचयी कटौती का अपना पूर्वानुमान बरकरार रखा है। इससे ब्याज दर 3.00 प्रतिशत से 3.25 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।हालांकि, इसने आगाह किया है कि इस अनुमान के जोखिम ऊपर की ओर झुके हुए हैं। इस बार कोई नया आर्थिक अनुमान या डॉट प्लॉट जारी नहींकिए जाने के कारण, रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार की उम्मीदें मुख्य रूप से पॉवेल की टिप्पणियों और समिति के भीतर व्याप्त तीखी असहमति सेनिर्देशित थीं। बैठक से पहले, फेड फंड्स फ्यूचर्स ने दिसंबर 2025 में 25 बीपीएस कटौती की पूरी उम्मीद जताई थी, लेकिन अब संभावना घटकरलगभग 70 प्रतिशत रह गई है।
गन्ना किसानों को सिर्फ़ 30 पैसे का ‘चुनावी लॉलीपॉप’ , लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह का सरकार पर हमला

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंचायत चुनाव नज़दीक आते ही सरकार ने गन्नाकिसानों को केवल 30 पैसे प्रति किलो (₹30 प्रति क्विंटल) की दर से मूल्यवृद्धि देकर किसानों की मेहनत का मज़ाक उड़ाया है। उन्होंने इस बढ़ोतरीको “ऐतिहासिक” बताने वाले सरकारी बयानों को “चुनावी नौटंकी” करार दिया। सुनील सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 से अब तक यह वृद्धि इतनीमामूली है कि इसे “उपहार” कहना किसानों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और बीजेपी किसान मोर्चा द्वारा इस छोटे से बढ़ोतरी कोतीन हज़ार करोड़ रुपये के उपहार के रूप में प्रचारित करना सिर्फ़ चुनावी प्रचार का हिस्सा है। 30 पैसे प्रति किलो की गन्ना मूल्य वृद्धिउन्होंने यह भी कहा कि जब वर्ष 2014 में सोने का भाव ₹26,000 प्रति 10 ग्राम था और आज बढ़कर ₹1,25,000 प्रति 10 ग्राम हो गया है, तोकेवल 30 पैसे प्रति किलो की गन्ना मूल्य वृद्धि को “मास्टर स्ट्रोक” कहना किसानों के साथ अन्याय और उपहास है। सुनील सिंह ने सवाल उठाया किक्या गन्ना किसान की लागत नहीं बढ़ी? क्या बिजली, डीज़ल, खाद, मजदूरी सब सस्ते हो गए हैं? अंत में उन्होंने कहा कि लोकदल हमेशा किसानोंकी वास्तविक लागत के अनुरूप गन्ने का दाम तय करने और समय पर भुगतान की गारंटी की मांग करता रहेगा।
“डॉ. संपदा मुंडे की मौत ‘संस्थागत हत्या’ , कांग्रेस ने फडणवीस से इस्तीफे की मांग की, सीबीआई स्तर की जांच की उठाई मांग”

कांग्रेस ने महाराष्ट्र में मेडिकल ऑफिसर डॉ. संपदा मुंडे की मृत्यु को संस्थागत हत्या करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस्तीफे की मांग की है।इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष व सांसद वर्षा गायकवाड़ और महाराष्ट्र कांग्रेसके वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने बताया कि 23 अक्टूबर को भाईदूज के दिन सातारा के फलटण उपजिला अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर केरूप में कार्यरत डॉ. संपदा मुंडे को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्षा गायकवाड़ ने बतायापूरे मामले का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए वर्षा गायकवाड़ ने बताया कि संपदा मुंडे का यह कदम राजनीतिक दबाव, ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़नकी साजिश का नतीजा था। इससे पूर्व संपदा मुंडे ने भाजपा के पूर्व सांसद रणजीतसिंह नाईक निंबालकर और उनकी शुगर फैक्ट्री के पदाधिकारियों केदबाव का विरोध किया था। यह दबाव मजदूरों को फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने के लिए डाला जा रहा था।बहुजन समाज से आने के कारण डॉ संपदा को अपमानित किया गया और फिटनेस सर्टिफिकेट न देने पर धमकी दी गई व ब्लैकमेल किया गया। संपदाने तंग आकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस सांसद ने आगे बताया कि पीड़िता कीसबसे बड़ी उम्मीद थी कि पुलिस उसे बचाएगी, लेकिन पुलिस खुद उसके उत्पीड़न का कारण बन गई। उसके साथ पुलिस उपनिरीक्षक गोपाल बडने नेचार बार दुष्कर्म किया। इसके अलावा प्रशांत बानकर नाम के व्यक्ति ने भी उसे प्रताड़ित किया। वर्षा गायकवाड़ ने बताया कि डॉ. संपदा का सुसाइडनोट उनके हाथ पर लिखा हुआ मिला, जो यह दर्शाता है कि उन्हें डर था कि कहीं कागज़ पर लिखने पर उसे छुपा न दिया जाए। उन्होंने कहा कि यहघटना दिखाती है कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था ध्वस्त है, महिला अपराध चरम पर हैं और रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं। हमेशा अपराधियों के संरक्षण में खड़ी मिलतीकांग्रेस सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार हमेशा अपराधियों के संरक्षण में खड़ी मिलती है और इस मामले में भी राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस नेकोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि फडणवीस ने फलटण जाकर पूर्व सांसद रणजीतसिंह नाईक के साथ मंच साझा किया और उन्हें क्लीन चिटदी। उन्होंने सवाल किया कि जांच पूरी हुए बिना मुख्यमंत्री ने उन्हें बचाने का काम क्यों किया?वर्षा गायकवाड़ ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पर भी निशाना साधा, जो फलटण गईं, लेकिन पीड़ित परिवार से नहीं मिलीं और उल्टा उनकेचरित्र पर लांछन लगाया। उन्होंने पूछा कि आखिर राज्य महिला आयोग सत्ता की ढाल बनकर क्यों खड़ा हुआ है? वहीं, अतुल लोंढे पाटिल ने कहा किइस घटना के पीछे आरएसएस की सोच है, जो बहुजन समाज, आदिवासियों, दलितों की विरोधी है और अपराधियों के साथ पूरी ताकत से खड़ी रहतीहै। उन्होंने इसे रावण राज बताते हुए कहा कि फडणवीस को मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंतइस्तीफा दे देना चाहिए। विपक्ष राहुल गांधी जी ने संपदा मुंडे के परिवार से बात कीअतुल लोंढे ने यह भी बताया कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी जी ने संपदा मुंडे के परिवार से बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि उन्हें न्यायमिलेगा। अगर सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करती है, तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।कांग्रेस नेताओं ने इस मामले की जांच सीबीआई के समकक्ष अधिकार-प्राप्त एसआईटी या हाईकोर्ट की समिति से कराने और सभी आरोपियों कोतत्काल गिरफ्तार किए जाने की मांग की। साथ ही कहा कि बिना जांच के आरोपियों को क्लीन चिट देने पर फडणवीस को माफी मांगनी चाहिए।उन्होंने पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता व सुरक्षा प्रदान करने और डॉ. संपदा मुंडे की याद में महिला डॉक्टर सुरक्षा अधिनियम बनाए जाने की भीमांग की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब तक डॉ. संपदा मुंडे को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को जारी रखेगी।
मायावती की नई चाल, दलित-मुस्लिम समीकरण से फिर यूपी की सियासत में धमाका करने की तैयारी

मायावती एक बार फिर मुसलमानों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रही हैं। 29 अक्टूबर को पार्टी के लखनऊ कार्यालय पर दलित-मुस्लिमभाईचारा कमेटी की बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मुसलमानों के बीच जाकर काम करें। वे उन्हें यह भरोसा दिलाने की कोशिश करें किमुसलमानों का भविष्य बहुजन समाज पार्टी के शासनकाल में ही सुरक्षित है। वे मुसलमानों को उन कार्यों की लिखित जानकारी दें जो मायावती नेमुसलमानों के लिए किए थे। लेकिन क्या मुसलमान एक बार फिर बसपा के साथ जाएगा? 2007 में दलित-ब्राह्मण और मुसलमान समीकरण केसहारे ही मायावती ने सफलता पाई थी। यदि मुसलमान मायावती के साथ गया तो इससे राहुल गांधी और अखिलेश यादव को कितना नुकसान होगाजिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मुसलमानों और दलितों के समर्थन के सहारे भाजपा को गहरी चोट पहुंचाई थी? दरअसल, बीते दिनों में मुस्लिमोंके वोट बैंक बनने से जुड़ी कई तरह की बयानबाजी हुई है। जहां भाजपा ने सपा-कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगाए हैं, वहीं यह दोनोंपार्टियां भाजपा पर बिहार में मुसलमानों को टिकट न देने को लेकर निशाना साध रही हैं। ऐसे दौर में मायावती की मुसलमानों को अपने करीब लाने कीकोशिश रंग दिखा सकती है। मायावती की यह अपील काम कर सकतीयूपी में मुसलमानों की आबादी 19.26 प्रतिशत है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में मुसलमानों की आबादी लगभग निर्णायक भूमिका में है। यहांदलितों की भी बड़ी भागीदारी है। इसी मुसलमान और दलित समीकरण के सहारे बसपा ने 2007 में अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने काकाम किया था। बिहार की तरह अब यूपी का मुसलमान भी अपने लिए राजनीति में बड़ी भूमिका पाना चाहता है। यदि बसपा मुसलमानों को ज्यादाप्रभावी भूमिका देती हुई दिखाई पड़ी तो इससे समीकरण बदल भी सकता है। लखनऊ बैठक में मायावती ने मुसलमानों को भरोसा दिलाने की कोशिशकी कि उनके सत्ता में आते ही बुलडोजर कार्रवाई बंद होगी और सबके लिए सुरक्षा-न्याय उपलब्ध होगा। मायावती की यह अपील काम कर सकती है। सड़क पर उतरकर इसका विरोधबसपा के लखनऊ मंडल प्रभारी (मुस्लिम संयोजक) फैजान खान ने अमर उजाला से कहा कि यूपी के इतिहास में मायावती की सरकार बेमिसाल है।इस दौरान बिना किसी बुलडोजर कार्रवाई के उन्होंने समाज के हर वर्ग को सुरक्षा दी थी। अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हुई। हर समाज केलिए विकास के काम हुए और हर समाज को विकास करने का अवसर मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि आज बुलडोजर कार्रवाई के नाम पर सरकारअपनी असफलता छिपाने का काम कर रही है। फैजान खान ने कहा कि भाजपा हो या समाजवादी पार्टी, सत्ता में आने पर केवल सांप्रदायिक विभाजनको गहरा करने का काम करती हैं जिससे उनकी प्रशासनिक असफलता छिपी रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने सत्ता में आने के बादकेवल अपने परिवार के लिए काम करने का काम किया, जबकि जहां भी मुसलमानों-दलितों पर अत्याचार हुए, वहां उन्होंने आवाज उठाने की बजायचुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के सत्ता के पांच साल और विपक्ष के रूप में पिछले सात-आठ साल के उनके कामों को देखते हुएअब कोई भी मुसलमान सपा के साथ नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस आज पूरे देशमें उन गरीबों, दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों की सबसे बड़ी आवाज बन चुकी है जिनके ऊपर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चाहेसीएए-एनआरसी का मामला रहा हो या कोई अन्य बड़ा मुद्दा, उनके नेताओं प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने सड़क पर उतरकर इसका विरोध किया।
आरएसएस को मिली मंजूरी, मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र गुरमित कल में निकलेगा पथ संचलन

कर्नाटक के यादगीर जिले के गुरमितकल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को पथ संचलन निकालने की अनुमति मिल गई है। यह इलाकाकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र माना जाता है। प्रशासन ने बुधवार को आदेश जारी कर 1 नवंबर (शुक्रवार) को होने वाले इस मार्च केलिए मंजूरी दी। यह आयोजन आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है। यादगीर जिला प्रशासन ने पथ संचलन की मंजूरी देते समय 10 सख्त शर्तें लगाई हैं। आरएसएस के मार्च का जो रास्ता तय किया गया है, उसमें सम्राट सर्कल, एपीएमसी सर्कल, हनुमान मंदिर, मराठवाड़ी, पुलिसस्टेशन रोड, मिलन चौक और सिहिनेहरू बावी मार्केट मेन रोड से होते हुए राम नगर में इसका समापन होगा। पथ संचलन के दौरान पूरे मार्ग पर पुलिसबल तैनात रहेगा। गुरमितकल निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गएपथ संचलन की अनुमति ऐसे समय पर दी गई है जब राज्य मंत्री प्रियांक खरगे, जो मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं, ने हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कोपत्र लिखकर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आरएसएस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि, ‘आरएसएस सरकारी स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर शाखाएं लगाकर बच्चों और युवाओं में नकारात्मक विचार भर रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा थाकि सरकारी कर्मचारी अगर ऐसे आयोजनों में भाग लेते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद राज्य कैबिनेट ने निर्णय लिया किसरकारी संपत्ति पर किसी भी संगठन को कार्यक्रम करने से पहले प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। हाल में कुछ सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस केपथ संचलन में भाग लेने पर निलंबित भी किया गया था। कांग्रेस प्रमुख, जो वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं, आठ बार गुरमितकल निर्वाचन क्षेत्र सेविधायक चुने गए थे। प्रशासन ने कई शर्तें भी लगाईअब तक यह साफ नहीं हुआ है कि शुक्रवार के पथ संचलन में स्वयंसेवकों को लाठी लेकर चलने की अनुमतिदी जाएगी या नहीं। आरएसएस नेप्रशासनिक अड़चनों के बावजूद आखिरकार इस ऐतिहासिक आयोजन की मंजूरी हासिल कर ली है, लेकिन अब नजर इस पर है कि आयोजन कितनीशांति के साथ होता है। कर्नाटक में सरकारी संस्थानों में आरएसएस की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए प्रियांक खरगे की मांग और राज्यकैबिनेट में इस पर मुहर लगाई गई। वहीं अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र में आरएसएस के रूट मार्च को अनुमति मिल गई है।लेकिन इस अनुमति के साथ प्रशासन ने कई शर्तें भी लगाई हैं…
कांग्रेस नेता जयराम रमेश का मोदी सरकार पर वार, श्रम नीति में मनुस्मृति का ज़िक्र संविधान का अपमान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की तरफ से जारी ‘राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति – श्रम शक्ति नीति 2025’ केमसौदे पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस नीति मसौदे में यह लिखा गया है कि श्रम नीति की प्रेरणा प्राचीन ग्रंथों जैसेमनुस्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति, नारदस्मृति, शुक्रनीति और अर्थशास्त्र से ली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुस्मृति ने भारत में जाति व्यवस्था औरजातिवाद को जन्म दिया, इसलिए इसे नीति की नींव बताना संविधान के खिलाफ है। जयराम रमेश ने कहा, ‘मोदी सरकार का यह कहना कि श्रमशक्ति नीति संविधान से नहीं बल्कि मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से प्रेरित है, यह हमारे संविधान का अपमान है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।’ श्रम शासन की नैतिक बुनियाद को दर्शातेजयराम रमेश ने कहा, ‘यह नीति अभी मसौदे के रूप में है, और मोदी सरकार ने इसे अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक सुझाव के लिए डाला है। लेकिनइस मसौदे में साफ लिखा है कि यह नीति मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से प्रेरणा लेती है। जब 1949 में हमारा संविधान लागू हुआ था, तब आरएसएस ने उसपर हमला किया था और कहा था कि यह ‘भारतीय संविधान’ नहीं है क्योंकि यह मनुस्मृति पर आधारित नहीं है। आज वही सोच फिर लौट आई है।’ उन्होंने कहा कि मोदी और आरएसएस की सोच एक ही है, और श्रम नीति को मनुस्मृति से जोड़ना न केवल संविधान का अपमान है, बल्कि यहजातिवाद को बढ़ावा देने वाला कदम है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘मनुस्मृति ने जाति व्यवस्था को जन्म दिया, और अब उसी ग्रंथ से प्रेरणा लेकर श्रमिकनीति बनाना, यह हमारे संविधान और आंबेडकर की भावना के खिलाफ है।’ श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे में लिखा है, ‘मनुस्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति, नारदस्मृति, शुक्रनीति और अर्थशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में ‘राजधर्म’ की अवधारणा के माध्यम से न्याय, उचित मजदूरी और श्रमिकोंकी सुरक्षा की नैतिक नींव रखी गई थी। ये सिद्धांत भारत की सभ्यतागत परंपरा में श्रम शासन की नैतिक बुनियाद को दर्शाते हैं।’ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारकांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान की अनदेखी लगातार कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘तीस साल पहले, 1994 में, कांग्रेससरकार ने तमिलनाडु के 69% आरक्षण कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर उसे सुरक्षा दी थी। लेकिन बिहार में ऐसा क्यों नहींकिया गया? वहां कहते हैं ‘डबल इंजन सरकार’, पर अब यह ‘ट्रबल इंजन’ बन चुकी है।’ उन्होंने कहा कि बिहार में जब 65% आरक्षण कानून पारितहुआ था, तब कांग्रेस महागठबंधन की सरकार थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे रद्द कर दिया और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वहीं बिहार चुनावोंपर बोलते हुए जयराम रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री के पास रिमोट कंट्रोल है, और वे नीतीश कुमार को कंट्रोल कर रहे हैं। वे खुलकर क्यों नहीं कहते किनीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं? सच यह है कि उनके पास कोई कार्यक्रम या एजेंडा नहीं है। वे घबराए हुए हैं, क्योंकि बिहार कीजनता अब बदलाव चाहती है। महागठबंधन की सरकार बनेगी।’
बिहार में दो युवराजों की झूठ की दुकान, पीएम मोदी का राहुल-तेजस्वी पर तीखा हमला “जानें क्या है पूरा मामला”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मुजफ्फरपुर की जनसभा राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में दोयुवराजों ने झूठे वादों की दुकान खोल रखी हैं। एक भारत के सबसे भ्रष्ट परिवार का युवराज है। वहीं दूसरा बिहार के सबसे भ्रष्ट परिवार का युवराज है।यह दोनों ही हजारों करोड़ों के घोटाले पर जमानत है। इन दोनों ने बुधवार को मोदी को भर-भर के गालियां दीं। अब जो लोग नामदार हैं, वह इसकामदार को गालियां तो देंगे ही। मुझे गाली दिए बिना, इनका खाना हजम नहीं होता है। दलित और पिछड़ों को गाली देना तो यह नामदार अपनाजन्म सिद्ध अधिकार समझते हैं। इसलिए 24 घंटें यह लोग मुझे गंदी-गंदी गालियां देते रहते हैं। इसलिए क्योंकि इन्हें बर्दाश्त नहीं होता कि एकपिछड़ा का बेटा और चाय बेचने वाला आज यहां पहुंच गया। गालियां देने वाले कान खोलकर सुन लो, यह गरीब का बेटा जनता के आशीर्वाद से यहांतक पहुंचा है। पीएम मोदी ने कहा कि राजद और कांग्रेस का झगड़ा आज की असली खबर है। अब इनका रिश्ता तेल और पानी की तरह हो चुका है।बिहार में हर तरफ से खबरें आ रही हैं कि कैसे राजद और कांग्रेस के कार्यकर्ता एक-दूसरे से दुश्मनी निकाल रहे हैं। जमानत पर चल रहे दोनों युवराजों नेबुधवार को यह दिखाने की कोशिश की कि इनके बीच मनमुटाव नहीं है। इन्हें जो चीज एक साथ ले आई है, वो है सत्ता का लालच। इन्हें किसी भीतरह बिहार की सरकार पर कब्जा करना है। ताकि यह लोग फिर से बिहार को लूट सके हैं। फिर से जंगलराज वापस ला सकते हैं। लोगों को सिर्फ धोखा और विश्वासघात ही दियापीएम मोदी ने जनता से पूछा कि आप बताइए क्या आप जमानत पर निकले इन दोनों युवराजों को बिहार लूटने देंगे क्या? साथियों आज हर सर्वे मेंएक बात खुलकर सामने आ रही है कि इस चुनाव में राजद और कांग्रेस की सबसे बड़ी हार होने जा रही है। सारे सर्वे बता रहे हैं कि एनडीए की सबसेबड़ी जीत होने जा रही है। इसी चुनाव में अब तक की सबसे कम सीटें मिलने जा रही है। एक नया इतिहास बिहार की जनता बनाने जा रही है। अपनेघोषणा पत्र में यह लोग केवल झूठ बोल रहे हैं। यह लोग इतना फेंक रहे हैं कि इनके समर्थकों को इनकी बात पर यकीन नहीं हो रहा है। लोग सोशलमीडिया पर इनका मजाक बना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महागठबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजद और कांग्रेस बिहार कोकभी विकसित नहीं बना सकतीं। इन पार्टियों ने वर्षों तक बिहार पर राज किया, लेकिन लोगों को सिर्फ धोखा और विश्वासघात ही दिया।