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उत्तर भारत में ठंड का कहर: हिमाचल से दिल्ली तक जनजीवन प्रभावित, बर्फबारी और कोहरे का प्रकोप जारी

उत्तर भारत में ठंड का असर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की दिनचर्या पर गहरा प्रभाव पड़ा है। हिमाचल प्रदेश की स्थिति हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी बर्फबारी के बाद तापमान में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल और स्पीति जिले के ताबो क्षेत्र में न्यूनतम तापमान शून्य से 10.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जिससे यह प्रदेश का सबसे ठंडा क्षेत्र बन गया। पंजाब में हालात अमृतसर में घने कोहरे के चलते दृश्यता शून्य पर पहुंच गई, जिससे हवाई यातायात बाधित हुआ। इसके अलावा, किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण सड़कों और रेलवे ट्रैकों पर आवागमन में दिक्कतें आईं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश की स्थिति दिल्ली में कोहरे के कारण दृश्यता 50 मीटर तक सिमट गई, जिससे उड़ानों पर असर पड़ा। उत्तर प्रदेश में आगरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनें 7 घंटे की देरी से चल रही हैं, जबकि बुलंदशहर में दृश्यता महज 5 मीटर तक रह गई। मध्य प्रदेश की स्थिति कोहरे के कारण मध्य प्रदेश में कई स्थानों पर दृश्यता 100 मीटर से कम रही, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रभाव नोएडा में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं, पटना में स्कूलों की समय सारिणी में बदलाव किया गया है। जम्मू-कश्मीर में हालात जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा, कुपवाड़ा, बारामूला और अनंतनाग में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। श्रीनगर और गांदरबल के मैदानी इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई। मौसम विभाग ने 4 से 6 जनवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फबारी जारी रहने का अनुमान जताया है। आने वाले दिनों का अनुमान हरियाणा में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद तापमान में स्थिरता रहने की उम्मीद है। उत्तर भारत, ठंड, बर्फबारी, कोहरा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, स्कूल बंद, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी विक्षोभ, मौसम समाचार, ठंड का असर, जनजीवन प्रभावित, तापमान गिरावट, दृश्यता, यातायात प्रभावित

ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान: दिल्ली और बिहार में चुनाव लड़ने का ऐलान, गठबंधन पर भी बात की

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली औरबिहार में आगामी चुनावों में हिस्सा लेगी। उन्होंने साफ किया कि यदि गठबंधन बना, तो वह गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगे, अन्यथा अपने दम पर भीचुनाव लड़ा जाएगा। राजभर ने कहा, “हम दिल्ली और बिहार में चुनाव लड़ेंगे। यदि गठबंधन बन सका तो गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे, और अगर ऐसानहीं हुआ, तो अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।” बिहार और दिल्ली में चुनावी तैयारी पर जोरराजभर ने आगे कहा कि दिल्ली और बिहार में पार्टी संगठन की तैयारी तेज़ी से चल रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि चुनाव लड़ने के लिए उनकीपार्टी पूरी तरह से तैयार है। बिहार में उनकी पार्टी 36 जिलों में चुनावी तैयारी कर रही है, और राजभर ने कहा कि सीटों की संख्या तय करने से पहलेप्रदेश अध्यक्ष और जिलों के अध्यक्षों से बातचीत की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी रणनीति और गठबंधन के बारे में अंतिम निर्णय तबलिया जाएगा जब चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहींओम प्रकाश राजभर ने गठबंधन को लेकर भी कुछ अहम बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनकी बात अन्य दलों से चल रही है, लेकिन अभी तककोई ठोस गठबंधन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “हमसे कहा गया है कि जब चुनाव की अधिसूचना जारी होगी, तब हम बैठकर बात करेंगे। अगरगठबंधन की बात नहीं बनी, तो हम अकेले चुनाव लड़ेंगे।” AAP पर हमला: घोषणाओं से बचने की सलाहओम प्रकाश राजभर ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “आपकी सरकार है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य मेंसरकार बनेगी या नहीं। उन्हें घोषणाएं नहीं करनी चाहिए, बल्कि जो भी करना है लोगों के लिए, वह कर देना चाहिए।” राजभर ने दिल्ली के मुख्यमंत्रीअरविंद केजरीवाल पर भी तंज करते हुए कहा, “केजरीवाल आप के बड़े नेता हैं और बुद्धि लगाकर दल को चलाने के लिए समय-समय पर बोलते रहतेहैं, लेकिन फिलहाल उनकी सरकार के भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।” राजभर की बढ़ती भूमिका: बिहार और यूपी में चुनौतीओम प्रकाश राजभर अपने विवादित बयानों और राजनीतिक गतिविधियों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। उनका यह बयान दिल्ली और बिहार मेंचुनावी रणनीति को लेकर विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि उनकी पार्टी का यूपी में भी एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है। बिहार औरदिल्ली में चुनावी चुनौती बढ़ने के साथ ही राजभर की भूमिका राजनीति में और भी अहम हो सकती है।

केजरीवाल का मोहन भागवत को पत्र: बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर बीजेपी की नीतियों पर गंभीरसवाल उठाए हैं। अपनी चिट्ठी में केजरीवाल ने पूछा, “भाजपा ने जो कुछ भी गलत किया है, क्या आरएसएस उसका समर्थन करती है?” उन्होंने यह भीसवाल किया कि “क्या आरएसएस खुलेआम वोट खरीदने और पैसे बांटने को सही मानता है?” केजरीवाल ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा किदलित और पूर्वांचलियों के वोटों को बड़े पैमाने पर काटा जा रहा है, और क्या आरएसएस को यह जनतंत्र के लिए सही लगता है? इसके अलावा, उन्होंने पूछा, “क्या आरएसएस को नहीं लगता कि बीजेपी लोकतंत्र को कमजोर कर रही है?” आतिशी का वीके सक्सेना को पत्र: धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने का मुद्दा उठायाअरविंद केजरीवाल के साथ-साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को पत्र लिखा है। आतिशी ने पत्र मेंआरोप लगाया कि उपराज्यपाल के आदेश पर दिल्ली के मंदिरों और बौद्ध धार्मिक स्थलों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “दिल्ली में किसी भी मंदिरया धार्मिक स्थल को तोड़ने का काम नहीं होना चाहिए, क्योंकि बौद्ध धार्मिक स्थल दलित समुदाय से जुड़ी आस्था का केंद्र हैं।” आतिशी ने यह भीआरोप लगाया कि धार्मिक कमिटी ने बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के मंदिर तोड़ने की फाइल उपराज्यपाल को भेज दी है, जो इस मुद्दे को और गरमासकता है। वीके सक्सेना की टिप्पणी पर आतिशी का पलटवारइससे पहले, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा आतिशी को “कामचलाऊ मुख्यमंत्री” कहे जाने पर चिंताव्यक्त की थी। सक्सेना ने इसे “संविधान में निहित लोकतांत्रिक भावना और मूल्यों की घोर अवहेलना” बताया था। उनके मुताबिक, यह टिप्पणीराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान है, जिन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री नियुक्त किया, और साथ ही यह उपराज्यपाल का भी अपमान है, क्योंकि वहराष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं। इस पर आतिशी ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर जवाब दिया था और इसे राजनीति का हिस्सा बताते हुए अपनी प्रतिक्रियादी थी। राजनीतिक विवादों का ताजा मोड़दिल्ली की राजनीति में इस समय विवादों का दौर जारी है, जहां एक तरफ केजरीवाल ने आरएसएस प्रमुख से बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ आतिशी ने उपराज्यपाल के फैसलों पर विरोध दर्ज कराया है। इन घटनाओं ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया हैऔर आने वाले दिनों में इन पर और भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

बीजेपी का अरविंद केजरीवाल पर हमला: “जो कहते हैं, वो करते नहीं”

सुधांशु त्रिवेदी और शाजिया इल्मी का पलटवारभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा कि जो बातें वह करते हैं, उन्हें लागू नहीं करते। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज आम जनता के बीच केजरीवाल की विश्वसनीयता पर गंभीरसवाल उठ रहे हैं। त्रिवेदी के मुताबिक, “आज सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता का संकट है। आम जनता के मन में यह विचार घर कर गया है किकेजरीवाल जो कहते हैं, उसे पूरा नहीं करते।” केजरीवाल के ‘गिरगिट’ जैसे बदलाव पर शाजिया इल्मी का हमलाबीजेपी नेता शाजिया इल्मी ने भी केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। उन्होंने कहा, “केजरीवाल के बयानोंऔर क्रियाओं में लगातार बदलाव देखा गया है, जो दर्शाता है कि वह अपनी राजनीति में विश्वास नहीं रखते, बल्कि केवल परिस्थितियों के अनुसारअपनी दिशा बदलते रहते हैं।” 2024 में जेल में रहते हुए मुख्यमंत्री बनने पर उठे सवालसुधांशु त्रिवेदी ने 2024 में एक “विचित्र संवैधानिक उदाहरण” का जिक्र करते हुए कहा कि यह देखा गया कि एक मुख्यमंत्री जेल में रहते हुए भीअपना पद नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा, “केजरीवाल से पहले भी कई मुख्यमंत्री जेल गए हैं, लेकिन कम से कम लालू प्रसाद यादव ने जेल जाने के बादअपनी मर्यादा बनाए रखते हुए पद छोड़ दिया था।” त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि केजरीवाल का यह कदम ‘विस्मयकारी और विचित्र’ था, जो आमजनता के लिए समझना मुश्किल है। लटकते तारों का मुद्दा: केजरीवाल की कार्यशैली पर सवालसुधांशु त्रिवेदी ने केजरीवाल की कार्यशैली पर भी निशाना साधते हुए कहा, “केजरीवाल ने कहा था कि वह लटकते तारों की समस्या का समाधानकरेंगे, लेकिन वह इस मुद्दे को 10 साल में भी हल नहीं कर पाए। इसके परिणामस्वरूप लोगों की जान भी चली गई।” त्रिवेदी ने यह उदाहरण देकरयह दिखाने की कोशिश की कि केजरीवाल के वादों का सच में कोई असर नहीं पड़ा है। विश्वसनीयता पर बीजेपी का आरोपत्रिवेदी और इल्मी दोनों ने यह साफ किया कि आम आदमी पार्टी और केजरीवाल के नेतृत्व में जनता को वह उम्मीदें नहीं मिल रही हैं, जिनकी उन्हेंउम्मीद थी। बीजेपी का कहना है कि आम आदमी पार्टी की राजनीति की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि केजरीवाल के शब्द और उनके काम में कोईमेल नहीं है, और यही उनके खिलाफ सबसे बड़ा आरोप बन चुका है। आगे की राजनीति पर सवालबीजेपी के इन आरोपों से यह स्पष्ट है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के खिलाफ बीजेपी ने अपनी रणनीति को और तेज कर दियाहै। अब देखना यह होगा कि अरविंद केजरीवाल इन आरोपों का किस तरह जवाब देते हैं और अपनी विश्वसनीयता को फिर से कैसे साबित करते हैं।

संदीप दीक्षित ने केजरीवाल और आप नेताओं पर मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी

नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार संदीप दीक्षित ने मंगलवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और आम आदमी पार्टी (AAP) केसांसद संजय सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही। उनके ऊपर भाजपा से पैसे लेने के आरोप के बाद दीक्षित ने यह कदमउठाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीक्षित ने बताया कि वह मानहानि के मुकदमे में 10 करोड़ रुपये की मांग करेंगे और इसका उपयोग यमुना की सफाई औरदिल्ली में प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए करेंगे। दीक्षित का बयान: केजरीवाल और AAP पर हमलासंदीप दीक्षित ने कहा, “कुछ दिन पहले दिल्ली की सीएम आतिशी ने यह आरोप लगाया था कि मैं भाजपा से बहुत बड़ी रकम ले रहा हूं। पिछले 10-12 सालों से कांग्रेस, मुझे और मेरे परिवार को निशाना बना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचारकर रहे थे, तब वे शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ 360 पन्नों के सबूत दिखाते थे। “भा.ज.पा. के विजय कुमार मल्होत्रा ने मुझे बताया कि एकभाजपा प्रतिनिधिमंडल ने केजरीवाल से उनके सीएम बनने के बाद मुलाकात की थी और सबूत मांगे थे।” पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की याद में प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थगितदीक्षित ने यह भी बताया कि 360 अखबार की कटिंग के रूप में जो सबूत केजरीवाल दिखाते थे, वह सबसे पहले थे जिन्होंने इस तरह के सबूत प्रस्तुतकिए। दीक्षित ने कहा, “जिस दिन सीएम आतिशी ने कहा कि हम भाजपा से पैसे ले रहे हैं, उस दिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन हो गयाथा, इसलिए हम प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर पाए थे। अब, मैं सीएम आतिशी और संजय सिंह के खिलाफ आपराधिक और दीवानी मानहानि का केसकरूंगा और उनसे 10 करोड़ रुपये की मांग करूंगा।” इस रकम का 5 करोड़ यमुना की सफाई और 5 करोड़ दिल्ली में प्रदूषण की समस्या के समाधानके लिए दान किया जाएगा। केजरीवाल पर कटाक्ष: योजनाओं का क्रियान्वयन असंभवसंदीप दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल की हालिया कल्याणकारी योजनाओं पर भी कटाक्ष किया और कहा कि अगर वह दोबारा मुख्यमंत्री बने, तो भी इनयोजनाओं को लागू नहीं कर पाएंगे। उन्होंने पूछा, “वे ये योजनाएं अब क्यों लागू कर रहे हैं? पिछले 5 सालों से वे सत्ता में हैं, लेकिन जब वे जेल गएथे, तो डेढ़ साल का समय बर्बाद हो गया। अगर वे सीएम बने तो भी किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे।” दीक्षित ने यह भी कहा, “वह सीएमबनने के बाद एक पैसा भी नहीं बांट पाएंगे।” आगामी चुनावों को लेकर दीक्षित का जोरसंदीप दीक्षित का यह बयान आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों के संदर्भ में आया है, जो अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं। दीक्षित, जो नईदिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, ने कहा कि वह अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं और जनता से उन्हें जीतने की उम्मीद है।

शहजाद पूनावाला का हमला: केजरीवाल और AAP को धोखेबाज बताया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शहजाद पूनावाला ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल परतीखा हमला बोला। उन्होंने AAP और केजरीवाल को “सबसे बड़ा धोखेबाज” करार दिया, यह टिप्पणी दिल्ली सरकार की नई योजना “पुजारी ग्रंथीसम्मान योजना” के जवाब में आई, जिसका उद्देश्य पुजारियों और ग्रंथियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। पूनावाला का आरोप: AAP ने अपने वादे पूरे नहीं किएपूनावाला ने कहा कि दिल्ली सरकार के RTI रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि AAP ने जनवरी 2021 से मई 2022 तक मौलवियों और इमामों कोवेतन देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP ने अपने ही मतदाता आधार का शोषण किया और कभी भीग्रंथियों और पुजारियों की जरूरतों को पूरा नहीं किया। पूनावाला ने कहा, “AAP अपने वोट बैंक को लूटती है और ग्रंथियों और पुजारियों का कभीउल्लेख नहीं किया।” AAP से सवाल: चुनाव के नजदीक क्यों आई योजना?पूनावाला ने यह भी सवाल उठाया कि अगर AAP ने पुजारियों और ग्रंथियों की मदद करने की योजना बनाई थी, तो उसे चुनावों के नजदीक लाने काफैसला क्यों किया? उन्होंने कहा, “AAP वर्तमान में सत्ता में है, तो ये नीतियां पहले क्यों लागू नहीं की गईं? चुनाव के लिए इंतजार क्यों किया गया?” उन्होंने यह भी कहा कि AAP को अब अपने लंबित कार्यों को निपटाना चाहिए, क्योंकि उनकी सत्ता ज्यादा दिन नहीं चलेगी। केजरीवाल का ‘अस्थायी सीएम’ बयान पर भी पूनावाला का हमलाइस बीच, पूनावाला ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया। इस पत्र मेंउपराज्यपाल ने केजरीवाल द्वारा आतिशी को “अस्थायी मुख्यमंत्री” कहने पर चिंता व्यक्त की थी। पूनावाला ने कहा, “यह परेशान करने वाला है किअरविंद केजरीवाल, जो एक आम विधायक हैं, सीएम आतिशी को अस्थायी प्रॉक्सी सीएम कहते हैं। यह न केवल मुख्यमंत्री पद का बल्कि संवैधानिकप्रक्रिया, राष्ट्रपति और उपराज्यपाल का भी अपमान है।” केजरीवाल की योजना: पुजारियों और ग्रंथियों के लिए मानदेयइस बीच, अरविंद केजरीवाल ने अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ कश्मीरी गेट स्थित मरघट बाबा मंदिर से “पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना” कीशुरुआत की। इस योजना के तहत दिल्ली के मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारे के ग्रंथियों को लगभग 18,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलेगा। यह योजना दिल्ली सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है, लेकिन बीजेपी के नेता शहजाद पूनावाला का मानना है कि यह सबचुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है।

संतोष सिंह का तेजस्वी यादव पर हमला: 2025 में आरजेडी का दरवाजा बंद होने की बात

बिहार के श्रम मंत्री संतोष सिंह ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार के लिएआरजेडी का दरवाजा हमेशा के लिए बंद है। संतोष सिंह ने तेजस्वी के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि “भगवान करे आरजेडी का दरवाजा हमेशा केलिए बंद हो जाए।” उन्होंने आगे कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में तो आरजेडी का दरवाजा और दुकान हमेशा के लिए बंद होने वाली है। तेजस्वी के बयान पर संतोष सिंह का तंजतेजस्वी यादव के बयान का जवाब देते हुए मंत्री संतोष सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव मुंगेली लाल के सपने देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी खुदअपना दरवाजा बंद करते हैं और फिर उसे खोलते हैं। सीएम नीतीश कुमार ने कई बार कहा है कि अब वह उन लोगों के साथ नहीं जाएंगे, जिन्होंनेगड़बड़ियां की हैं। संतोष सिंह का यह भी कहना था कि तेजस्वी यादव सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं, क्योंकि अगले साल होनेवाले विधानसभा चुनाव में जनता उन्हें और उनकी पार्टी को हमेशा के लिए नकार देगी। तेजस्वी यादव का बयानतेजस्वी यादव ने सोमवार को कहा था कि नीतीश कुमार के साथ गठबंधन करना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है और उनके लिए अब गठबंधन मेंकभी भी नीतीश कुमार को नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “नीतीश कुमार के लिए हमारे दरवाजे हमेशा के लिए बंद हैं।” पहले किया था यह दावाइससे पहले, शनिवार को तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब सामान्य रूप से काम करने में सक्षम नहीं हैं और कुछ करीबीसहयोगियों ने उन्हें “बंधक” बना लिया है। तेजस्वी का कहना था कि नीतीश कुमार अब अपने फैसले खुद नहीं ले पा रहे हैं और उनके फैसले उनकेकरीबी नेता ले रहे हैं।

एलजी ने सीएम आतिशी की तारीफ की, केजरीवाल पर साधा निशाना

दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने एक बार फिर मुख्यमंत्री आतिशी की तारीफ की है, लेकिन इस पत्र में उनकी निगाहें कहीं औरनिशाना कहीं और है। सीएम को लिखे पत्र में एलजी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आपको (आतिशी) सार्वजनिक रूप से एकअस्थायी-काम चलाऊ मुख्यमंत्री कहना, मुझे बहुत आपत्तिजनक लगा और मैं इससे आहत भी हुआ। यह न सिर्फ आपका अपमान था, बल्कि मेरा भीअपमान था। एलजी ने दिल्ली सरकार के नाम पर हो रही घोषणाओं का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। दिल्ली की समस्याओं पर एलजी का पत्र दिल्ली की समस्याओं के बारे में बताते हुए एलजी ने यह खत सीएम आतिशी को लिखा है। अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए एलजी नेलिखा कि अस्थायी अथवा काम चलाऊ मुख्यमंत्री की जो सार्वजनिक व्याख्या केजरीवाल ने की, उसका कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है और यहबाबा साहब आंबेडकर द्वारा बनाए संविधान के मूल्यों की अवहेलना भी है। हाल की योजनाओं का जिक्र करते हुए एलजी ने लिखा कि जिस तरहकेजरीवाल द्वारा आपकी उपस्थिति में गलत तरीके से सीनियर सिटीजन एवं सीएम के नाम पर ही महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की हवाई घोषणाएं कीजा रही हैं, इससे सीएम पद की गरिमा धूमिल हुई है। दिल्ली के ही दो विभागों ने पब्लिक नोटिस निकालकर लोगों को सावधान किया है। यह घटनाअभूतपूर्व है और आपके लिए भी असहज करने वाला रहा होगा। जेल भेजने की बात नहीं हो रही एलजी ने लगे हाथ यह भी कह डाला कि पूर्व मुख्यमंत्री आपको जेल भिजवाने की बात तक कह चुके हैं। लेकिन यह पूरी तरह गलत है। आपकेखिलाफ किसी भी तरह की जांच नहीं की जा रही है और न ही ऐसा करने के बारे में कभी कोई बात हुई है। खुद परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्यसचिव ने भी इस बारे में आपको बताया है। दिल्ली की समस्याओं के लिए आप जिम्मेदार दिल्ली की समस्याएं गिनाते हुए एलजी ने कहा कि पिछले दस सालों में यमुना की बदतर हालत हो या पीने के पानी की कमी, कचरे के पहाड़ों कामुद्दा या औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, अब तक समस्याएं दूर नहीं हो पाई हैं। आपको अस्थाई और काम चलाऊ घोषित किया जाचुका है, ऐसे में तीन चार महीने में आपके लिए इन समस्याओं को दूर करना असंभव है। फिर भी इन विफलताओं की जिम्मेदारी आपकी ही मानीजाएगी।

प्रशांत किशोर समेत करीब 20 नामजद और 600 अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज, छात्रों को उकसाने का आरोप*

बिहार में बीपीएससी परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारी छात्र सीएम आवास की ओर बढ़ रहे थे, जिन्हेंरोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस पूरे घटनाक्रम में जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर भी शामिल थे, जिनपर छात्रों को उकसाने का आरोप प्रशासन ने लगाया है। *क्या है पूरा मामला?*बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में पेपर लीक होने के आरोप के बाद छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का आरोप था कि परीक्षामें धांधली हुई है और परीक्षा रद्द होनी चाहिए। छात्रों ने सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की मांग की थी। *प्रशांत किशोर पर क्यों हुआ FIR?*प्रशांत किशोर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उन्होंने छात्रों का समर्थन किया था। पुलिस का आरोप है कि प्रशांत किशोर ने छात्रों कोउकसाया और प्रदर्शन को हिंसक बनाने में भूमिका निभाई। इसी आधार पर प्रशांत किशोर समेत 20 अन्य लोगों और 600 अज्ञात लोगों के खिलाफFIR दर्ज की गई है। *प्रशासन का क्या कहना है?*पटना के जिलाधिकारी ने कहा है कि प्रशासन ने छात्रों से बातचीत के लिए कहा था, लेकिन छात्र बातचीत के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा किप्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।

BPSC परीक्षा विवाद: राजनीतिक नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक,प्रशांत किशोर पर भड़के पप्पू यादव

BPSC (बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन) परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिसमें छात्रों और पुलिस के बीच हुई लाठीचार्ज की घटना नेबिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है। इस मामले में कई राजनीतिक दल सरकार को घेरने में लगे हुए हैं, जबकि कुछ नेता एक-दूसरे पर जमकरआरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। अब तक इस मामले में प्रशांत किशोर, पप्पू यादव और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी कूद चुके हैं। आइए जानते हैं किकिस नेता ने बीपीएससी के मुद्दे पर क्या कहा। पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर पर कसा तंजपूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बीपीएससी मामले में प्रशांत किशोर को जमकर घेरा। न्यूज18 के डिबेट शो गूंज में पप्पू यादव ने जब प्रशांत किशोर कानाम लिया, तो वह भड़क गए। पप्पू यादव ने कहा, “छी-छी, आप किसका नाम ले रहे हैं? वह व्यक्ति जो चार दिन पहले राजनीति में आया, जिसनेबिहारियों की तुलना सूडान से की, जिसने बीपीएससी छात्रों को लाठीचार्ज करवाया और 25 मिनट पहले खुद वहां से भाग गया।” पप्पू यादव नेप्रशांत किशोर पर कांग्रेस, बीजेपी और ममता बनर्जी की पार्टी को बर्बाद करने का आरोप भी लगाया। पप्पू यादव की कार्रवाई और आरोपपप्पू यादव ने आगे बताया कि वह बीपीएससी के मसले पर बिहार के गवर्नर और चीफ सेक्रेटरी से मिल चुके हैं। इस दौरान बीपीएससी के उम्मीदवारोंने उन्हें लाठीचार्ज की घटना से अवगत कराया और बताया कि कुछ परीक्षा के सवाल पहले से ही कोचिंग सेंटरों को दिए गए थे। पप्पू यादव ने गवर्नरसे सीसीटीवी फुटेज की जांच और अन्य सबूतों के आधार पर कार्रवाई की मांग की। चिराग पासवान ने छात्रों से शांति की अपील कीइन आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी इस मामले में कूद पड़े हैं। चिराग पासवान नेबीपीएससी उम्मीदवारों से अपील की है कि वे शांतिपूर्वक अपने मुद्दे उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत शुरू कर दी है और जल्द हीसार्थक परिणाम सामने आएंगे। चिराग पासवान ने छात्रों से राजनीतिक बहकावे में न आने की भी अपील की है। बीपीएससी विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार बढ़ रही हैं, और अब यह मामला बिहार की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। BPSC Exam Controversy,Bihar Politics, Lathi Charge Incident, Pappu Yadav, Prashant Kishor, Chirag Paswan, Bihar Government,BPSC Protest राहुल गांधी के विदेश दौरे पर बीजेपी का हमला, कांग्रेस ने किया पलटवार राहुल गांधी के विदेश जाने को लेकर एक नया विवाद उभरा है। नए साल की शुरुआत से ठीक पहले, जब पूरा देश प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह केनिधन पर शोक मना रहा था, विपक्ष के नेता का विदेश दौरा बीजेपी के लिए कांग्रेस पर हमला करने का अवसर बन गया। बीजेपी ने राहुल गांधी परतीखा हमला करते हुए कहा कि जब पूरा देश शोक मना रहा है, राहुल गांधी मौज मस्ती करने के लिए बाहर जा रहे हैं। शहजाद पूनावाला का आरोपबीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के विदेश जाने पर ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “जब पूरा देश डॉ. मनमोहन सिंह के निधन परशोक मना रहा है, तब राहुल गांधी विदेश जा रहे हैं, इससे यह साफ़ होता है कि कांग्रेस को डॉ. मनमोहन सिंह की कोई परवाह नहीं है। राहुल गांधी नेउनके जीवनकाल में उनका अपमान किया और अब भी यही कर रहे हैं।” पूनावाला ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ना तो कोई कांग्रेस नेता डॉ. मनमोहन सिंह के अस्थि विसर्जन में शामिल हुआ, और ना ही पार्टी ने उन्हें भारत रत्न देने का समर्थन किया। राहुल गांधी की ‘पर्यटन नीति’पूनावाला ने राहुल गांधी के विदेश यात्रा को ‘पर्यटन’ बताया और कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने विपक्षके नेता का मतलब ही बदल दिया है और उन्हें ‘पर्यटन’ के नेता और पार्टी के नेता बना दिया है। पूनावाला ने यह भी कहा कि जब मुंबई में 26/11 काहमला हुआ, तब भी राहुल गांधी पार्टी कर रहे थे और उन्हें डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की कोई चिंता नहीं थी। अमित मालवीय का बयानबीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी राहुल गांधी पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस को देश के हालात से कोई फर्क नहींपड़ता। गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी सिखों के खिलाफ नफरत रखते हैं।” मालवीय ने कहा कि राहुल गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह के निधन काराजनीतिकरण किया और उनकी मौत का फायदा अपनी राजनीति के लिए उठाया। कांग्रेस का पलटवारकांग्रेस ने बीजेपी के इन आरोपों का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इसे बीजेपी की ‘भटकाव की राजनीति’ करार दिया। उन्होंनेकहा कि यह मुद्दा सिर्फ देश की राजनीति को भटकाने के लिए उठाया गया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि हर साल राहुल गांधी क्रिसमस केआसपास विदेश जाते हैं, खासकर इटली, और यह कोई नई बात नहीं है। यह विवाद अब भी जारी है और दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रखे हुए हैं।