बीजेपी नेता रूबी फोगाट यादव का नशा मुक्ति जागरूकता अभियान: स्वस्थ समाज की ओर एक कदम

आज दक्षिण दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में एक अहम पहल का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों से लोगों को जागरूक करना औरएक स्वस्थ जीवन शैली की ओर प्रेरित करना था। इस पहल का आयोजन ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा किया गया था, और इसमें प्रमुख बीजेपी नेतारूबी फोगाट यादव ने हिस्सा लिया। उन्होंने नशा मुक्ति जागरूकता मार्च को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया और लोगों को इस मुद्दे के प्रति जागरूककिया। रूबी फोगाट यादव ने मार्च के दौरान उपस्थित लोगों से बात करते हुए कहा, “नशा छोड़ो, जीवन संवारो!” उनका यह संदेश साफ था कि नशे से नकेवल स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। उनका मानना था कि नशे से बचकर ही हम एकस्वस्थ और समृद्ध समाज की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों में नशे के खतरों के बारे में जानकारी देना और उन्हें नशे से बचने के उपायों के प्रति जागरूक करनाथा। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का यह कदम बहुत सराहनीय है, क्योंकि आजकल के समाज में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है, और इसके दुष्प्रभाव नकेवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी होते हैं। रूबी यादव ने आगे कहा कि नशे से न केवल युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है, बल्कि यह समस्या हर आयु वर्ग में बढ़ती जा रही है। उन्होंने समाज के सभीवर्गों से अपील की कि वे इस अभियान में भाग लेकर एक नशा मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग दें। उनके अनुसार, नशे से मुक्ति पाने के लिएशिक्षा और जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण हैं, और यह जागरूकता समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। यह कार्यक्रम न केवल दक्षिण दिल्ली के नागरिकों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह जागरूकता अभियान एक सकारात्मकबदलाव की दिशा में एक कदम है, जो सभी को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा। आखिरकार, नशा मुक्ति की दिशा में यह पहल न केवल व्यक्तिगत जीवन को संवारने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में एक सकारात्मकपरिवर्तन लाने में भी सहायक होगी।
मायावती ने उठाया बड़ा कदम, बसपा OBC को साथ जोड़ने के लिए भाईचारा कमेटी का ऐलान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में अब लगभग दो साल का समय रह गया है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुखमायावती ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को अपनी पार्टी से जोड़ने के लिए नई रणनीति बनाई है। मंगलवार को बसपाने ओबीसी के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की और इस दौरान मायावती ने भाईचारा कमेटी के गठन की घोषणा की। इस कदम से मायावती नेदलितों और ओबीसी को एक साथ लाकर यूपी में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने का इरादा व्यक्त किया है।2007 की भाईचारा कमेटी का पुनः गठनमायावती ने पहले भी 2007 में भाईचारा कमेटी का गठन किया था, जो बसपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम साबित हुआ था। हालांकि, 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा की हार और मायावती की सरकार के गिरने के बाद इस कमेटी का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद सेभाईचारा कमेटी का पुनर्निर्माण नहीं हुआ था, लेकिन अब मायावती ने इसे फिर से जीवित करने का फैसला किया है। अब, एक बार फिर दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को एक साथ लाने के उद्देश्य से भाईचारा कमेटी का गठन किया जा रहा है। पार्टी के भीतरमुस्लिम और सवर्ण जातियों के बीच भी भाईचारे को बढ़ाने के लिए नई कमेटी बनाई जाएगी। इस तरह से बसपा अपनी रणनीति में विभिन्न जातियोंके बीच सशक्त संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। बसपा का राजनीतिक संकल्प: सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करनाबसपा द्वारा जारी किए गए एक प्रेस विज्ञप्ति में यह साफ कहा गया है कि “बहुजन समाज के सभी अंगों को आपसी भाईचारे के आधार पर संगठितराजनीतिक शक्ति बनाकर वोटों की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है।” इस अभियान के तहत पार्टी गांव-गांव मेंलोगों को जागरूक करने का कार्य करेगी। खासकर उन लोगों को जो कांग्रेस, भाजपा और सपा जैसी पार्टियों के दलित और अन्य पिछड़े वर्ग विरोधीचेहरे को पहचानते हैं। बसपा ने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता में आना नहीं है, बल्कि वह बहुजन समाज के हित में काम करने का संकल्प ले चुकी है।इसके लिए पार्टी ने हर जिले और गांव में प्रचार प्रसार अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस संदेश से जुड़ सकें। कांग्रेस, भाजपा और सपा पर हमलाबसपा ने कांग्रेस, भाजपा और सपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन पार्टियों ने हमेशा बहुजन समाज के हितों की अनदेखी की है। पार्टी नेकहा, “गांधीवादी कांग्रेस, आरएसएसवादी भाजपा और सपा ने बहुजन समाज खासकर अन्य पिछड़ा वर्ग के करोड़ों लोगों का कभी भी सहीप्रतिनिधित्व नहीं किया।” इसके साथ ही, पार्टी ने दावा किया कि इन पार्टियों के द्वारा किए गए विकास कार्यों ने कभी भी बहुजन समाज के वास्तविकहितों की रक्षा नहीं की। बसपा के मुताबिक, इन पार्टियों का नेतृत्व अपने परिवारों और वर्गों तक सीमित रहा है, और बहुजन समाज के लिए उनके पास कोई ठोस योजना नहींथी। मायावती के नेतृत्व में बसपा का उद्देश्य इन सभी दलों से अलग होकर बहुजन समाज के लोगों के लिए एक सशक्त आवाज उठाना है। 14 अप्रैल को डॉ. अंबेडकर जयंती पर विशेष कार्यक्रममायावती ने आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती को परंपरागत रूप से पूरी मिशनरी भावना से मनाने का निर्देश भी दिया है। इसदिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बसपा के नेता और कार्यकर्ता डॉ. अंबेडकर की विचारधारा और उनके योगदान को सम्मानितकरेंगे। पार्टी इस दिन को एक अहम अवसर के रूप में देख रही है, ताकि बहुजन समाज के लोगों को एकजुट किया जा सके और उन्हें आगामी चुनावोंके लिए तैयार किया जा सके। बसपा की नई दिशा और आगामी चुनावों की तैयारीमायावती का यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बसपा की नई राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करता है। पार्टी अब सिर्फ दलितों तक हीसीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ओबीसी, मुस्लिम और सवर्ण जातियों को भी साथ लाकर एक मजबूत वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है। इसतरह की रणनीति से बसपा का उद्देश्य आगामी चुनावों में सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करना है।
राज्यसभा में राघव चड्ढा का AI पर बयान: भारत को AI में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर धनखड़ का उत्तर

नई दिल्ली, 25 मार्च: राज्यसभा में मंगलवार को आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढाने भारत के AI क्षेत्र में पिछड़ने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत को अपने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के साथ-साथ ‘मेक AI इन इंडिया’ पर भीध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि आने वाले समय में भारत इस क्षेत्र में सबसे आगे बढ़ सके। इस पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मुस्कुरातेहुए कहा, “विश्व गुरु तो भारत ही होगा,” जिससे इस मुद्दे पर हल्के-फुल्के तरीके से अपना विश्वास व्यक्त किया। भारत और AI: चड्ढा का चिंताजनक बयानराघव चड्ढा ने AI के विकास के संदर्भ में भारत के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि आज का दौर AI की क्रांति का है और दुनियाके प्रमुख देश इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका के पास ChatGPT, जेमिनी, एन्थ्रॉपिक ग्रॉक जैसे शक्तिशाली AI मॉडल हैं, वहीं चीन ने DeepSeek नामक AI मॉडल तैयार किया है जो सबसे ज्यादा क्षमता वाला और सबसे कम लागत वाला है। चड्ढा ने सवालउठाया, “भारत का अपना जनरेटिव AI मॉडल कहां है?” उनका कहना था कि दुनिया में जितने पेटेंट रजिस्टर्ड हुए हैं, उनका 60 प्रतिशत हिस्साअमेरिका और 20 प्रतिशत हिस्सा चीन ने हासिल किया, जबकि भारत ने मात्र 0.5 प्रतिशत ही हासिल किया है। भारत की AI दक्षता: तीसरी रैंक, लेकिन चुनौतीपूर्ण स्थितिचड्ढा ने यह भी बताया कि भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन AI के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी चुनौतीहै। उन्होंने कहा, “भारत के पास ब्रेन पॉवर है, डिजिटल अर्थव्यवस्था है, और 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपभोक्ता हैं, फिर भी हम AI उत्पादक बननेके बजाय उपभोक्ता बनकर रह गए हैं।” इसके बावजूद, भारत का AI दक्षता में तीसरी रैंक पर होना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी बताया किलगभग 15 फीसदी साढ़े चार लाख भारतीय AI के क्षेत्र में विदेशों में कार्य कर रहे हैं, जो इस बात को साबित करता है कि भारत के पास AI में बड़ीक्षमता है। ‘मेक AI इन इंडिया‘ की आवश्यकताAAP सांसद राघव चड्ढा ने भारत को AI के क्षेत्र में अपने दम पर आगे बढ़ने के लिए ‘मेक AI इन इंडिया’ के मंत्र को अपनाने की जरूरत पर जोरदिया। उनका मानना है कि AI के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम उठाने होंगे, ताकि आने वाले समय में भारत विश्व के सबसेप्रभावशाली AI उत्पादक देशों में शामिल हो सके। धनखड़ का जवाब: भारत को ‘विश्व गुरु’ बनने की ओरराघव चड्ढा के इस बयान पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मुस्कुराते हुए कहा, “विश्व गुरु तो भारत ही होगा,” और इस तरह से उन्होंने चड्ढाके बयान का हल्के-फुल्के अंदाज में उत्तर दिया। सभापति का यह जवाब इस बात का प्रतीक था कि भारत को AI के क्षेत्र में चाहे जितनी चुनौतियांहों, फिर भी भारत का भविष्य उज्जवल है और वह किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। भारत का AI वर्कफोर्स: विशाल, लेकिन अव्यक्तचड्ढा ने अपनी बात जारी रखते हुए बताया कि दुनिया के कुल AI वर्कफोर्स का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है। फिर भी, भारत के पास AI के क्षेत्र में पर्याप्त शोध और विकास (R&D) का निवेश नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से यह क्षेत्र भारत के लिए एक उपभोक्ता बाजार बनकर रहगया है। उन्होंने कहा कि यदि भारत इस क्षेत्र में खुद को अग्रणी बनाना चाहता है, तो उसे AI के शोध और विकास में निवेश को बढ़ाने के साथ हीस्थानीय AI मॉडल तैयार करने पर ध्यान देना होगा। आगे की राह: भारत को आत्मनिर्भर AI बनाना होगाचड्ढा के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के लिए AI क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ भारत की डिजिटलअर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी एक अहम भूमिका निभाएगा। AI के क्षेत्र में भारत कीसंभावनाएं बहुत बड़ी हैं, लेकिन इसके लिए उचित नीतियों, निवेश और शोध की आवश्यकता है।
दिल्ली भाजपा सरकार का 2025-26 बजट: चौमुखी विकास और बेहतर जीवन की ओर एक कदम और

नई दिल्ली, 25 मार्च: दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने दिल्ली की भाजपा सरकार के 2025-26 के बजट को लेकर बड़ी घोषणा की है।उनका कहना है कि यह बजट दिल्ली के चौमुखी विकास के साथ-साथ आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए समर्पित है। सचदेवा नेस्पष्ट किया कि इस बजट में दिल्ली के विकास को एक नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनमें से कुछ का प्रभाव आने वालेवर्षों में साफ तौर पर दिखाई देगा। बजट में 31.5% की वृद्धि: दिल्ली के विकास के लिए नई ऊर्जावीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री मती रेखा गुप्ता का पहला बजट दिल्ली के विकास के लिए एक बड़ी छलांग है। उन्होंने बताया किइस बजट में 31.5% की वृद्धि के साथ बजट की कुल राशि 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है। इसके अलावा, सरकार ने अपने कैपिटल खर्चको 15089.25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 28115.48 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है। इस वृद्धि से दिल्ली के शहरी विकास के साथ-साथ रखरखावके कार्यों में भी तेजी आएगी, जिससे शहर की अवसंरचना में सुधार होगा। महिला समृद्धि और सुरक्षा योजनाएं: भाजपा के संकल्प पत्र की पूर्तिसचदेवा ने बताया कि इस बजट में महिला समृद्धि योजना और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में डबल बीमे की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओंको बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 3.30 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह कदमदिल्ली की सुरक्षा को और भी मजबूत करेगा। इसके अलावा, डयूसिब (Delhi Urban Shelter Improvement Board) के बजट को तीन गुनाबढ़ाकर स्लम क्षेत्रों में सुधार के लिए बम्पर कदम उठाए गए हैं।होमगार्ड और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की संख्या में वृद्धिदिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सरकार ने होमगार्ड की संख्या को 10,285 से बढ़ाकर 25,000 करने का प्रस्ताव रखा है।इससे दिल्ली की सुरक्षा को और भी बेहतर बनाने के साथ-साथ सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को उनके द्वारा किए गए योगदान के लिए उचित आश्वासनभी मिलेगा। यह कदम दिल्ली में आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिए योजनाबद्ध बजटसचदेवा ने यह भी कहा कि दिल्ली की सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी योजनाबद्ध बजट आवंटित किया है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों औरअस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने और उनकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यह बजट दिल्लीवासियों कोबेहतर शैक्षिक और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। पर्यावरण सुधार की दिशा में ठोस कदमइस बजट में पर्यावरण सुधार के लिए भी विशेष ध्यान दिया गया है। यमुना सफाई, एस.टी.पी. (Sewage Treatment Plants) निर्माण औरपर्यावरण सुधार के लिए योजनाबद्ध बजट आवंटित किया गया है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने चुनाव संकल्प के तहत पर्यावरणसंरक्षण के लिए कदम उठाए हैं। इस बजट के माध्यम से दिल्ली में स्वच्छता और हरियाली बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं को लागू किया जाएगा, जिससे दिल्ली का पर्यावरण और अधिक स्वस्थ बनेगा।समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थरवीरेन्द्र सचदेवा ने इस बजट को भाजपा के संकल्प पत्र की पूर्ति करार दिया और कहा कि यह बजट दिल्ली के विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने यहभी कहा कि यह बजट आम नागरिकों के लिए एक बेहतर जीवन देने के लिए तैयार किया गया है, और यह दिल्ली के हर क्षेत्र को समग्र रूप से विकासकी ओर ले जाएगा। इस बजट के माध्यम से दिल्ली सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह दिल्लीवासियों के हर जरूरत के प्रति संवेदनशील है और आने वाले समय मेंदिल्ली का हर क्षेत्र – चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा या पर्यावरण हो – मजबूत और बेहतर होगा।
राहुल गांधी का जंतर-मंतर पर छात्रों को संबोधन: RSS और BJP पर जमकर हमला

कांग्रेस पार्टी के नेता और विपक्षी नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित इंडिया गठबंधन के स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन द्वारा किए गएप्रदर्शन में छात्रों को संबोधित किया। राहुल गांधी ने इस अवसर पर छात्रों से शिक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने की अपील कीऔर केंद्र सरकार, खासकर RSS और BJP, पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा, “RSS और BJP के लोग आज शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करने में लगे हुए हैं।” उनका यह बयान देशभर के विश्वविद्यालयोंमें हो रहे तथाकथित बदलावों और वाइस चांसलरों के चयन पर केंद्रित था। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों के वाइसचांसलर RSS से जुड़े हुए लोग हैं, और इस बात से छात्रों की स्वतंत्रता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर खतरा मंडरा रहा है। शैक्षणिक संस्थानों पर RSS का प्रभावराहुल गांधी ने कहा कि RSS और BJP ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिशें तेज कर दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों केसाथ भेदभाव किया जा रहा है, उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है, और शिक्षा के क्षेत्र में धांधली और भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंचचुका है। उनका आरोप था कि इस तरह के हालात में छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ें और हर प्रकार के अन्याय केखिलाफ आवाज उठाएं। राहुल गांधी ने दावा किया कि देश के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों में जो वाइस चांसलर नियुक्त किए जा रहे हैं, वे RSS से संबंधित हैं। उनके अनुसार, यह एक ऐसी स्थिति उत्पन्न कर रहा है, जहां शैक्षणिक संस्थानों में लोकतंत्र और स्वतंत्र विचार की गुंजाइश कम हो रही है। उन्होंने कहा कि इस तरहके नियुक्तियां शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता और विविधता की जगह एकतरफा विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास हैं। आरोप: पेपरलीक और भ्रष्टाचार का आरोपराहुल गांधी ने शिक्षा क्षेत्र में हो रहे अन्य संकटों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के समय में पेपरलीक की घटनाओंमें वृद्धि हुई है, और छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है, और यहस्थिति छात्रों और देश के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक है। उन्होंने कहा, “अगर हमारी शिक्षा व्यवस्था RSS के हाथों में चली गई, तो देश में न तो रोजगार मिलेगा और न ही देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा।” उनके अनुसार, RSS और BJP की नीतियों के कारण छात्रों की शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर गंभीर असर पड़ेगा, और इसका परिणाम देश कीसमृद्धि पर भी पड़ेगा। देश के लिए खतरा: RSS और BJP का एजेंडाराहुल गांधी ने यह भी कहा कि RSS और BJP का उद्देश्य भारत के भविष्य को नियंत्रित करना है और इसके एजुकेशन सिस्टम को अपनी विचारधाराके तहत ढालना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह प्रक्रिया जारी रही तो देश के लिए यह खतरनाक साबित होगा, क्योंकि इससे न केवल छात्रों काअधिकार छीना जाएगा, बल्कि इससे भारतीय समाज में वैचारिक विविधता और स्वतंत्रता भी खत्म हो सकती है। उन्होंने यह दावा किया कि आने वाले समय में राज्य विश्वविद्यालयों में भी वाइस चांसलरों की नियुक्ति RSS के चुने हुए लोगों द्वारा की जाएगी।उनका यह मानना था कि अगर इस प्रकार की प्रक्रिया को रोका नहीं गया, तो यह स्थिति देश की शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से RSS के अधीन करसकती है, और इससे देश की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना को भारी नुकसान होगा। छात्रों से अपील: संघर्ष और एकता की जरूरतराहुल गांधी ने छात्रों से एकजुट होने और इस लड़ाई में सामूहिक रूप से शामिल होने की अपील की। उनका कहना था, “आज के युवा और छात्र हमारेदेश के भविष्य के निर्माता हैं। इस समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है कि वे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं औरअपनी शक्ति का उपयोग करते हुए इस लड़ाई में शामिल हों।” उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को अपनी शिक्षा और अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा, ताकि एक ऐसा भारत बन सके जहां हर छात्र को समानअवसर मिले और शिक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपाती तत्वों का वर्चस्व न हो।
अरुणाचल प्रदेश: जनसंपर्क, ग्रामीण विकास, सहयोग और परिवहन मंत्री ओजिंग तासिंग ने सियांग जिले में प्राचीन चमगादड़ निवास गुफा’पोनरुंग’ का उद्घाटन किया

अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, जनसंपर्क, ग्रामीण विकास, सहयोग और परिवहन मंत्री ओजिंग तासिंग नेशुक्रवार को सियांग जिले के लोकपेंग गांव के पास स्थित प्राचीन और अद्भुत बैट रोस्ट गुफा ‘पोनरुंग’ का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में सियांग केउप आयुक्त पीएन थुंगन, जिला अधिकारी और स्थानीय समुदाय के सदस्य भी शामिल हुए। ‘पोनरुंग’ गुफा, जो अपनी आकर्षक स्टैलेक्टाइट संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है, एक प्राकृतिक चमत्कार के रूप में उभरी है। अब इस गुफा को ओजिंगतासिंग और पीएन थुंगन के समर्थन से और भी सुलभ बनाया गया है। इन दोनों नेताओं ने गुफा तक पहुंचने के लिए कंक्रीट की सीढ़ियों के निर्माण मेंमदद की, जिससे यह गुफा पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बन गई है। इस कदम से यह गुफा एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण के रूप में स्थापितहो सकती है। उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, ओजिंग तासिंग ने कहा, “लोकपेंग एक छिपा हुआ रत्न है, जिसमें पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि इसे पर्यटनस्थल के रूप में विकसित किया जाता है, तो न केवल हमारी समृद्ध प्राकृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिएनए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।” उन्होंने क्षेत्र की जैव विविधता की रक्षा के महत्व पर जोर दिया और स्थानीय समुदाय से अपील की कि वेशिकार की पारंपरिक प्रथाओं को छोड़कर वनस्पतियों और जीवों के सक्रिय संरक्षक बनें। गुफा के विकास के लिए ओजिंग तासिंग ने अतिरिक्त 20 लाख रुपये की निधि की घोषणा की। इस निधि का उपयोग बुनियादी ढांचे में सुधार, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के लिए किया जाएगा, ताकि पोनरुंग गुफा को और भी अधिक पर्यटकों के अनुकूल और आकर्षक बनाया जासके। सियांग के उप आयुक्त पीएन थुंगन ने अपने संबोधन में कहा, “पर्यटन केवल एक आकर्षण से संबंधित नहीं है; यह लोगों की गर्मजोशी और आतिथ्यपर निर्भर करता है। आगंतुकों का स्वागत करके और लोकपेंग की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हुए, समुदाय अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिकसंपदा को संरक्षित करते हुए एक स्थायी अर्थव्यवस्था विकसित कर सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय समुदायों और लोकपेंग वेलफेयरसोसाइटी के प्रयासों से पर्यटन स्थल को विकसित करने का कार्य संभव हुआ है। ‘पोनरुंग’ गुफा को पर्यटन स्थल के रूप में बदलने का काम लोकपेंग वेलफेयर सोसाइटी (LWS) ने किया है, जिसकी अध्यक्षता तालो पाजिंग कर रहेहैं। यह स्थान पहली बार सितंबर 2024 में LWS द्वारा खोजा गया था। इसके बाद, उनके समर्पित प्रयासों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से इसस्थल का संरक्षण और संवर्धन किया गया। लोकपेंग गांव और इसके आसपास के क्षेत्र में कई अद्वितीय आकर्षण हैं। इनमें पोनरुंग गुफा के अलावा, एक भव्य चट्टान है, जिसे ऐतिहासिक रूप सेभाग्य बताने के लिए उपयोग किया जाता था, जिसे स्थानीय रूप से ‘एलिंग पेटकोक’ कहा जाता है। इसके अलावा, यहाँ एक प्राकृतिक निकास भी है, जो सर्दियों में गर्म हवा और गर्मियों में ठंडी हवा प्रदान करता है, जिसे स्थानीय लोग ‘एसार अरुंग’ कहते हैं। इस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक युद्ध स्मारकस्थल भी है, जिसमें छिपी हुई गुफाएं और युद्धों की विरासत को देखा जा सकता है, जिसे ‘तम्ते टोकोम’ कहा जाता है। सियांग जिले केडीआईपीआरओ के क्षेत्राधिकारी-सह-प्रभारी नियांग पर्टिन ने एक विज्ञप्ति में इन सभी स्थानों का विवरण दिया है। इन स्थल के संरक्षण और उनके विकास के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता के साथ, लोकपेंग में अरुणाचल प्रदेश में इको-पर्यटन के लिए एक मॉडल बनने कीपूरी संभावना है। यह सभी विकास कार्य न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल प्रदान करेंगे, बल्कि इससे स्थानीय समुदाय के लिए भी नई आर्थिक संभावनाएं उत्पन्नहोंगी। पर्यटन उद्योग के इस विस्तार से क्षेत्र के सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिएइनकी महत्ता और सुंदरता बनी रहेगी। अरुणाचल प्रदेश में इको-पर्यटन के प्रति यह बढ़ती प्रतिबद्धता इस राज्य को देश के सबसे आकर्षक और पर्यटकों के अनुकूल स्थलों में से एक बनासकती है। लोकपेंग और इसके आसपास के क्षेत्र, जहां पोनरुंग जैसी अद्वितीय प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर हैं, आने वाले समय में पर्यटकों काध्यान आकर्षित करेंगे।
यूपी सरकार के 8 साल पूरे, सीएम योगी ने किया बदलावों का जिक्र

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के आठ साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के विकास की दिशा औरउसकी उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उनके नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सरकार सेवा, सुरक्षा और सुशासन के माध्यम से राज्य के विकास को नए आयाम दे रही है। साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता को उनके समर्थन के लिए धन्यवादभी दिया। 8 साल पहले उत्तर प्रदेश की स्थितिसीएम योगी ने कहा, “8 साल पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता का राज था और राज्य को पहचान का संकट था। लेकिन अब, जब सरकार बदली, तबसे सब कुछ बदल गया। पहले यूपी को बीमारू राज्य माना जाता था, जहां बेटियां और व्यापारी असुरक्षित महसूस करते थे। किसान आत्महत्या कर रहेथे। लेकिन अब यह सब बदल चुका है। आज यूपी कृषि के क्षेत्र में अव्वल है और किसान अब आत्महत्या नहीं कर रहे हैं।” यूपी का विकास: सेवा, सुरक्षा और सुशासनसीएम योगी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन चुका है। उन्होंने राज्य सरकार की 8 साल की उपलब्धियों कोरेखांकित करते हुए कहा कि सेवा, सुरक्षा और सुशासन की नीतियों के तहत यूपी में बड़ा बदलाव आया है। “उत्तर प्रदेश अब देश के विकास में एक नईदिशा दे रहा है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि डबल इंजन की सरकार में राज्य में विकास के कई अहम काम हुए हैं। पुलिस सुधार और भर्तीराज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में योगी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सीएम योगी ने कहा कि यूपी में देश का सबसे बड़ा पुलिसट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया गया है और 2 लाख 16 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है, जो राज्य में सुरक्षा की स्थिति को और मजबूत बनाएंगे। विकास उत्सव का आयोजनसीएम योगी ने यह भी ऐलान किया कि 25, 26 और 27 मार्च को प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर “विकास उत्सव” मनाया जाएगा, जिसमेंसमग्र विकास कार्यों की सराहना की जाएगी। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम विभिन्न सेक्टरों के लाभार्थियों, जैसे युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों केसम्मान में आयोजित किया जाएगा। 8 साल पहले की स्थिति और बदलावयोगी ने 8 साल पहले के यूपी की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय राज्य की अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति ठीक नहीं थी।”यही प्रदेश था जहां किसान आत्महत्या करता था, जहां युवा पहचान के संकट से जूझ रहे थे, और जहां दंगे और अराजकता फैली हुई थी। इन सबकोउत्तर प्रदेश ने झेला था,” उन्होंने कहा। सीएम ने कहा कि यही प्रदेश अब अपनी पहचान बदल चुका है। “प्रदेश वही है, तंत्र वही है, लेकिन सरकार बदलने से व्यापक बदलाव आया है। आजप्रदेश को हर सेक्टर में सकारात्मक बदलाव महसूस हो रहा है। उत्तर प्रदेश अब देश की विकास यात्रा में अहम भूमिका निभा रहा है।” कृषि क्षेत्र में बदलावउत्तर प्रदेश, जो पहले कृषि क्षेत्र में उपेक्षित था, अब कृषि के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 सेपहले राज्य में कृषि क्षेत्र की हालत बेहद खराब थी। किसानों की आत्महत्या की घटनाएं आम थीं और कृषि सेक्टर में कोई खास विकास नहीं हो रहाथा। लेकिन अब कृषि क्षेत्र में 13.5% की विकास दर हासिल की गई है और राज्य की जीडीपी में 28% की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि राज्यसरकार ने किसानों की मदद के लिए पहले ही 36,000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी की योजना शुरू की थी।योगी सरकार के आठ साल: बदलाव की मिसालसीएम योगी ने इन आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों को न केवल राज्य की तरक्की के रूप में देखा, बल्कि यह भी बताया कि कैसे एक सरकारके बदलने से व्यापक बदलाव संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले के शासन में, उत्तर प्रदेश को एक बीमारू राज्य माना जाता था, जहां लोगअसुरक्षित महसूस करते थे और राज्य का विकास ठप था। लेकिन अब वही उत्तर प्रदेश देश के विकास में अहम योगदान दे रहा है।
दिल्ली में हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण करने पहुंची विश्व हिंदू परिषद, औरंगजेब विवाद के बीच उठाए गए कदम

विश्व हिंदू परिषद (VHP) की एक टीम ने रविवार को दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण उस समय कियागया जब देश में औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद तेज हो चुका था। हालांकि, विश्व हिंदू परिषद ने इस निरीक्षण को लेकर किसी भी तरह के विवादसे इनकार किया और इसे दिल्ली के ऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन करने के उद्देश्य से किया गया एक सामान्य कदम बताया। हुमायूं के मकबरे का निरीक्षणविश्व हिंदू परिषद के सदस्यों द्वारा हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण ऐसे समय में हुआ है, जब औरंगजेब के मकबरे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।हुमायूं का मकबरा यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है, और यह दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। विश्व हिंदूपरिषद ने इस निरीक्षण के बाद स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल दिल्ली के ऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन करना था, न कि कोई विवाद उत्पन्नकरना। वर्तमान में हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण करने वाली विश्व हिंदू परिषद की टीम का नेतृत्व संगठन के दिल्ली इकाई के सचिव सुरेन्द्र गुप्ता ने किया। इसनिरीक्षण में शामिल प्रतिनिधिमंडल ने हुमायूं के मकबरे के ऐतिहासिक महत्व का अध्ययन किया और इसके योगदान को समझने की कोशिश की।संगठन ने इस निरीक्षण को दिल्ली प्रांत के ऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन करने का एक हिस्सा बताया।सफदरजंग मकबरे का निरीक्षण भी तयविश्व हिंदू परिषद ने यह भी बताया कि हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण करने के बाद उनका प्रतिनिधिमंडल जल्द ही सफदरजंग के मकबरे का निरीक्षणकरेगा। सुरेन्द्र गुप्ता ने यह स्पष्ट किया कि इस निरीक्षण का कोई विवादास्पद उद्देश्य नहीं था और इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों काअध्ययन करना था। गुप्ता ने इस बारे में बताया, “हम दिल्ली प्रांत के ऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य विभिन्न कालखंडों के शासकों के योगदानऔर उनकी भूमि के आवंटन का विश्लेषण करना है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस अध्ययन का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाना है औरकोई राजनीतिक या विवादास्पद एजेंडा नहीं है। इसके बाद, उन्होंने यह भी कहा कि निरीक्षण के बाद संगठन अपना विस्तृत अध्ययन केंद्र सरकार को सौंपेगा, जिससे कि ऐतिहासिक तथ्यों औरयोगदान के बारे में और अधिक स्पष्टता हो सके। औरंगजेब की कब्र को लेकर बढ़ता विवादविश्व हिंदू परिषद का हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण उस समय हुआ है जब महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विभिन्न हिंदूसंगठनों के विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन संगठनों का आरोप है कि 17वीं सदी के मुगल शासक औरंगजेब ने हिंदू धर्म के अनुयायियों पर अत्याचार किएथे, और इसलिए उसकी कब्र को हटाया जाना चाहिए।औरंगजेब के खिलाफ विरोध की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने एक बयान दिया था, जिसमेंउन्होंने औरंगजेब की तारीफ की थी। उन्होंने दावा किया था कि औरंगजेब कोई क्रूर शासक नहीं था और उसके शासन के दौरान भारत की जीडीपी24% थी, जिससे भारत सोने की चिड़ीया के रूप में उभरा था। अबू आजमी ने यह भी कहा था कि इतिहास में औरंगजेब के बारे में कई गलत बातेंबताई गई हैं।आजमी के बयान के बाद विवाद बढ़ गया और विभिन्न हिंदू संगठनों ने उनके बयान का विरोध करना शुरू कर दिया। इसके बाद, अबू आजमी केबयान को लेकर मामला दर्ज किया गया और उन्हें विधानसभा से निलंबित भी कर दिया गया। साथ ही, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थितऔरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग भी तेज हो गई है।विवाद का राजनीतिक आयामऔरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद ने राजनीति में भी नई हलचल पैदा की है। कुछ राजनीतिक दलों ने इस मामले को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भमें देखा है, जबकि कुछ ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों की गलत व्याख्या करार दिया है। औरंगजेब को लेकर विभिन्न दृष्टिकोणों के कारण यह मामलाराजनीतिक मंच पर भी गर्मा गया है।विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह के विवादों को धार्मिक आधार पर उठाना केवल समाज में विभाजन और अशांति को बढ़ावा देता है। वहीं, कुछहिंदू संगठन और नेता इसे एक ऐतिहासिक अन्याय के रूप में देखते हैं और मांग करते हैं कि औरंगजेब की कब्र को हटाया जाए, ताकि देश की हिंदूसंस्कृति और धरोहर की रक्षा की जा सके। विश्व हिंदू परिषद का ऐतिहासिक अध्ययनविश्व हिंदू परिषद ने इस विवाद के बीच हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण करने के बाद स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ दिल्ली केऐतिहासिक संदर्भ का अध्ययन करना है। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान शासकों के योगदान और उनके द्वारा दी गई भूमि पर आधारित था, और इसअध्ययन का उद्देश्य किसी भी तरह के विवाद को जन्म देना नहीं था। विश्व हिंदू परिषद ने यह भी कहा कि वे इस अध्ययन को पूरी तरह से ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर करेंगे और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे।इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया कि संगठन का उद्देश्य किसी भी ऐतिहासिक स्थल को विवादास्पद बनाना नहीं है, बल्कि उन स्थलों केऐतिहासिक महत्व को समझना है।
दिल्ली में बिजली संकट: भाजपा के खिलाफ आम आदमी पार्टी का तीखा हमला

नई दिल्ली, 24 मार्च 2025: आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में बिजली दरों को बढ़ाने की योजना को लेकर भाजपा पर तीखा हमला किया है।AAP का कहना है कि भाजपा दिल्ली को बिजली संकट में धकेल रही है और इस समय बिजली की दरें बढ़ाने के बजाय सरकार को इस संकट कोसुलझाने की जरूरत है। पार्टी का दावा है कि उनके 10 साल के शासन में दिल्लीवासियों को 24 घंटे की सस्ती और भरोसेमंद बिजली मिली थी, लेकिन अब भाजपा के शासन में यह स्थिति बदल चुकी है और बिजली कटौती आम हो गई है।10 साल में मुफ्त और 24 घंटे बिजलीAAP ने अपनी सरकार के दौरान दिल्ली में बिजली की स्थिति में किए गए सुधारों को गिनाते हुए बताया कि उनके शासन में दिल्लीवासियों को मुफ्तबिजली के साथ-साथ 24 घंटे की बिजली सेवा मिली थी। पार्टी के अनुसार, दिल्ली में बिजली की दरें देश भर में सबसे सस्ती थीं और बिजलीकंपनियों का प्रदर्शन भी शानदार था। आम आदमी पार्टी का दावा है कि उनकी सरकार ने बिजली क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए औरदिल्लीवासियों को उन बदलावों का सीधा लाभ मिला। AAP के नेताओं का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में बिजली कटौती का नामोनिशान तक नहीं था, लेकिन अब भाजपा की सरकार के तहत कईइलाकों में बिजली कटौती एक आम बात हो गई है। AAP ने आरोप लगाया कि भाजपा इस बिजली संकट को हल करने के बजाय बिजली की दरेंबढ़ाने का फैसला ले रही है, जो दिल्ली की जनता के लिए एक बड़ा संकट साबित होगा। भाजपा की बिजली नीति पर सवालAAP ने भाजपा की बिजली नीति को दिल्लीवासियों के साथ धोखा बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने अपनी नीतियों के जरिए दिल्ली मेंबिजली संकट पैदा किया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा ने अपने शासन में बिजली दरों में बढ़ोतरी की योजना बनाई है, जबकि बिजली कटौतीपहले ही दिल्ली में आम हो चुकी है। AAP ने यह भी कहा कि भाजपा बिजली संकट को हल करने में नाक
दिल्ली बजट 2025 पर आतिशी का हमला: क्या बीजेपी सरकार को बजट बनाना आता है?

दिल्ली का बजट 2025 एक बार फिर से राजनीति का केंद्र बन चुका है। इस बार दिल्ली सरकार की बजट प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आम आदमीपार्टी (AAP) की नेता आतिशी ने बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने बीजेपी सरकार के बजट निर्माण के तरीके को लेकर गंभीरसवाल उठाए हैं और यह भी पूछा है कि क्या दिल्ली सरकार को बजट बनाना आता है? आतिशी ने यह आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने इस बार इकोनॉमिक सर्वे को सदन पटल पर क्यों नहीं रखा। उनका कहना था कि इस बार, दिल्ली के बजट को पेश करने से पहले इकोनॉमिक सर्वे की प्रस्तुति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है, जो कि पहले सभी राज्यों में बजट सेपहले अनिवार्य रूप से पेश किया जाता था। इकोनॉमिक सर्वे का महत्वआतिशी ने अपनी बात रखते हुए बताया कि इकोनॉमिक सर्वे बजट के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करता है। सर्वे में State GDP, Per Capita Income, Tax Collection और देश की आर्थिक स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी जाती है, जो बजट निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यकहोती है। बिना इस डेटा के, बजट तैयार करना बहुत मुश्किल हो सकता है। “अगर इकोनॉमिक सर्वे पेश ही नहीं किया जाएगा, तो कैसे पता चलेगा कि per capita income के हिसाब से लोग कितना खर्च कर रहे हैं? लोगोंकी जरूरतें क्या हैं? कैसे यह निर्धारित किया जाएगा कि सरकार को किस क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश करने की आवश्यकता है?” आतिशी ने पूछा। क्या है इकोनॉमिक सर्वे का महत्व?इकोनॉमिक सर्वे को बजट से पहले इसलिए पेश किया जाता है, ताकि सरकार के लिए बजट बनाने के संदर्भ में एक मजबूत आधार तैयार हो सके। यहसरकार को अपने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नीति निर्धारण और निवेश के फैसले करने में मदद करता है। सर्वे में राज्य की आर्थिक स्थिति, करसंग्रहण, औद्योगिकीकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के आंकड़े शामिल होते हैं, जो बजट बनाने में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आतिशी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद इकोनॉमिक सर्वे पढ़ा है? उनका यह सवाल बीजेपी की सरकार कीनीयत और कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधता है। आतिशी का हमला: क्या बीजेपी सरकार को बजट बनाना आता है?आतिशी ने यह सवाल भी उठाया कि जब इकोनॉमिक सर्वे को पेश ही नहीं किया गया तो सरकार कैसे बजट बना सकती है? उनका कहना था किपिछले 10 वर्षों में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि बिना इकोनॉमिक सर्वे के कोई बजट पेश किया गया हो। इस पर उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखागुप्ता से पूछा कि क्या उन्हें बजट बनाने का सही तरीका आता है और क्या वे इसे बिना किसी ठोस आंकड़े और संदर्भ के बनाने का प्रयास कर रही हैं। आतिशी के इस हमले से साफ है कि आम आदमी पार्टी बीजेपी सरकार को घेरने के लिए किसी भी अवसर को छोड़ने को तैयार नहीं है। उनका कहनाथा कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और जनता के हित में सटीक और संपूर्ण बजट पेश करना चाहिए, जो इकोनॉमिक सर्वे के आधारपर सही तरीके से तैयार किया जाए। बजट की पारदर्शिता और जिम्मेदारीबजट देश की समृद्धि का सबसे अहम दस्तावेज होता है, और इसकी पारदर्शिता और सही संदर्भ में होना अत्यंत आवश्यक है। इकोनॉमिक सर्वे के बिनाबजट पेश करना न केवल सरकारी कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि बजट के निर्माण में गंभीरता की कमी हो सकती है। आतिशी ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि अगर सरकार को इकोनॉमिक सर्वे के बिना बजट बनाने की प्रक्रिया को सही मानती है, तो यह जनता कोगुमराह करने जैसा होगा और सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठेंगे। दिल्ली का बजट हमेशा से ही राजनीति का विषय रहा है, लेकिन इस बार बजट को लेकर उठ रहे सवाल इस बात को साबित करते हैं कि बजट केवलसंख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह सरकार की पारदर्शिता, कार्यशैली और जनता के प्रति जिम्मेदारी का परिचायक होता है।