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भारत के शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान, Ax-4 मिशन से वैज्ञानिक शोध और नए स्पेस स्टेशन की नींव

10 जून 2025 को भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अपने तीन साथियों के साथ स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) कीओर उड़ान भरेंगे। यह मिशन Ax-4 के अंतर्गत आता है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ भविष्य के स्पेस स्टेशन के निर्माण के लिए भी महत्वपूर्णभूमिका निभाएगा। ISS का इतिहास और विशेषताएँअंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, जिसे दुनिया का सबसे महंगा सरकारी परियोजना माना जाता है, पर लगभग 100 अरब डॉलर का निवेश किया गया है।इसे लगभग 13 वर्षों में तैयार किया गया था और 2000 से लगातार इसमें अंतरिक्ष यात्री रह रहे हैं। ISS पृथ्वी की कक्षा में 400 से 450 किलोमीटरकी ऊंचाई पर है और इसका आकार एक फुटबॉल मैदान जितना बड़ा है। हालांकि, इसमें एक समय में केवल छह अंतरिक्ष यात्री ही रह सकते हैं। यहस्टेशन 2030 तक काम करता रहेगा, उसके बाद इसे समुद्र में गिरा दिया जाएगा क्योंकि इसकी उम्र पूरी हो जाएगी। Ax-4 मिशन के उद्देश्यAx-4 मिशन 14 दिनों का होगा, जो ISS पर लंबे समय तक रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों की तुलना में कम अवधि का है, लेकिन इस दौरान टीम 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग और गतिविधियां करेगी। इस मिशन में 31 देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनमें भारत, अमेरिका, पोलैंड, हंगरी, सऊदीअरब, नाइजीरिया, यूएई और यूरोप के कई देश शामिल हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा अनुसंधान होगा जो एक्सिओम स्पेस मिशन के तहत ISS परकिया जाएगा। प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रइस मिशन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर अध्ययन होगा, जिनमें सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण का मस्तिष्क पर प्रभाव, हृदय और मांसपेशियों का अंतरिक्ष मेंअनुकूलन, आंख और हाथ के बीच समन्वय, डायबिटीज मरीजों के लिए रक्त ग्लूकोज प्रबंधन और कैंसर अनुसंधान शामिल हैं। खासतौर पर ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पर ध्यान दिया जाएगा, जो पिछले मिशन Ax-2 में कोलोरेक्टल कैंसर के अध्ययन के बाद एक नया विषय है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्रू सदस्यAx-4 मिशन वैश्विक सहयोग का भी प्रतीक है। इस मिशन की कमान अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन संभालेंगी, जबकि शुभांशु शुक्ला (भारत), स्लावोस उज्नांस्की (पोलैंड) और टिबोर कापू (हंगरी) मिशन के सदस्य हैं। ये देश लंबे समय बाद अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। भविष्य का स्पेस स्टेशनAx-4 मिशन नए स्पेस स्टेशन के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। एक्सिओम स्पेस 2027 में पहला मॉड्यूल लॉन्च करेगा, जो पावर, तापमाननियंत्रण और भंडारण की सुविधा देगा। इसके बाद अगले तीन वर्षों में एयरलॉक, आवास और अनुसंधान से संबंधित अन्य मॉड्यूल भी लॉन्च किएजाएंगे। ISS के 2030 में समाप्त होने के बाद, नया एक्सिओम स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में स्वतंत्र प्रयोगशाला के रूप में कार्य करेगा।

ECI का राहुल गांधी को करारा जवाब, आरोपों को बताया आधारहीन

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को लेकर चुनाव आयोग (ECI) ने एकबार फिर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया है। आयोग से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी आयोग की ओर से दिए गए बिंदुवार खंडन केबाद असमंजस में हैं। अपने ही पार्टी एजेंट्स पर उठाए संदेहचुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के आरोपों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस पार्टी द्वारा नियुक्त बूथलेवल एजेंट (BLA), पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है। ये एजेंट मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया केदौरान उपस्थित रहे और उन्होंने अपने हस्ताक्षर द्वारा प्रक्रिया की पुष्टि की। लाखों चुनाव कर्मियों की निष्ठा पर सवालदेशभर में कार्यरत 10.5 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी, 50 लाख पोलिंग स्टाफ और 1 लाख काउंटिंग सुपरवाइज़र राहुल गांधी के आरोपों सेआहत महसूस कर रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया में उनकी मेहनत और निष्पक्षता पर इस तरह के आरोप उनके मनोबल को प्रभावित कर सकते हैं। सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश करने की अनुमतिसूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदान केंद्रों की CCTV रिकॉर्डिंग को ज़रूरत पड़ने पर सक्षम उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कियाजा सकता है। ऐसे में मतदाता गोपनीयता की सुरक्षा को लेकर राहुल गांधी की शंका समझ से परे है। आयोग ने सवाल किया है कि क्या राहुल गांधीअब न्यायपालिका पर भी भरोसा नहीं कर रहे? अब कांग्रेस पार्टी के पीछे छिप रहे राहुल गांधी?चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि शुरू में राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से मीडिया और सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग पर सवालउठाते थे, लेकिन जब उन्हें व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा, तो अब उन्होंने कांग्रेस पार्टी को सामने कर दिया है, जो कि अब उनके बचाव मेंबयान जारी कर रही है। न कोई पत्र, न समय मांगा – चुनाव आयोग का तंजचुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब तक राहुल गांधी की ओर से आयोग को कोई औपचारिक पत्र नहीं लिखा गया है और न ही उन्होंनेबैठक का समय मांगा है। आयोग ने यह रेखांकित किया कि किसी भी संवैधानिक संस्था से संवाद स्थापित करने का यही स्वीकार्य तरीका होता है। राष्ट्रीय दलों की बैठक में भी कांग्रेस ने दिखाया अनिच्छा का रुख15 मई 2025 को सभी राष्ट्रीय दलों को आयोग से चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था। उस अवसर पर भी कांग्रेस पार्टी ने सक्रिय भागीदारी केबजाय समय मांगा और कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी, जो आयोग के अनुसार गंभीर मुद्दों पर पार्टी की संजीदगी पर सवाल खड़े करता है।

ठाणे में लोकल ट्रेन से गिरने पर बड़ा हादसा, पांच यात्रियों की मौत

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें लोकल ट्रेन से गिरने के कारण पांच यात्रियों की जान चली गई। यह हादसादीवा और मुंब्रा स्टेशनों के बीच हुआ जब ट्रेन भारी भीड़ से भरी हुई थी। दरवाजे पर लटकते हुए कर रहे थे सफरप्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, 10 से 12 यात्री चलती ट्रेन से नीचे गिर गए। इनमें से पांच की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रेन में भारी भीड़ के चलतेकई यात्री दरवाजे पर लटककर सफर कर रहे थे, जिससे असंतुलित होकर हादसा हो गया। पीड़ितों की उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच बताई गई है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गयाघटना के तुरंत बाद, घायलों को नजदीकी कलवा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस मौकेपर पहुंच गई है और स्थिति का जायजा ले रही है। ट्रेन में अधिक भीड़ हादसे की वजह?रेलवे अधिकारियों का मानना है कि दुर्घटना का मुख्य कारण ट्रेन में अत्यधिक भीड़ थी। मुंब्रा स्टेशन पर पहले से ही भीड़ अधिक रहती है और सुबह केसमय यात्री बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं। हादसे के दौरान ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे कुछ लोग असंतुलन के चलते पटरी पर गिर पड़े।रेल सेवाएं प्रभावित, जांच शुरूसेंट्रल रेलवे ने एक बयान में बताया कि CSMT की ओर जा रही लोकल ट्रेन में यह हादसा हुआ। दुर्घटना के बाद लोकल सेवाएं बाधित हुई हैं। रेलवेने मामले की जांच शुरू कर दी है और यात्रियों से संयम बरतने की अपील की है।

हनीमून के बहाने हत्या,मेघालय में पति की हत्या की साजिश में पत्नी गिरफ्तार

मेघालय पुलिस ने इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस की गुत्थी सात दिनों के भीतर सुलझाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनगिरफ्तारियों में राजा की पत्नी सोनम भी शामिल है, जो इस मामले की मुख्य साजिशकर्ता बताई जा रही है। डीजीपी ने दी जानकारी, पत्नी समेत चार आरोपी गिरफ्तारमेघालय पुलिस के महानिदेशक आई. नोंगरांग ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में उनकी पत्नीसोनम समेत चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सोनम ने हत्या की योजना पहले से बना रखी थी औरइसके लिए उसने पेशेवर हत्यारों को बुलाया था। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने की पुष्टिमेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि सात दिनों के भीतर पुलिस ने हत्या में शामिल मध्यप्रदेश के तीनहमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। एक महिला ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश अब भी जारी है। हनीमून पर आया था नवविवाहित जोड़ाराजा और सोनम की शादी 11 मई को इंदौर में धूमधाम से हुई थी। इसके बाद 20 मई को दोनों मेघालय हनीमून पर पहुंचे थे। 23 मई को उन्हेंआखिरी बार शिलांग के नोंग्रियाट गांव में डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज के पास देखा गया था। इसके बाद दोनों लापता हो गए थे। हत्या और गायब होने की गुत्थीशुरुआत में सोनम के भी लापता होने की खबर थी, लेकिन बाद में हत्या की जांच ने नया मोड़ ले लिया। सोनम के परिजनों को शुरुआत से ही इसमामले में गहरी साजिश का शक था। अब सोनम की गिरफ्तारी के बाद यह साफ होता जा रहा है कि हत्या पूर्व नियोजित थी। सीबीआई जांच की सिफारिशमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस सनसनीखेज हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सिफारिश कीथी। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और मेघालय प्रशासन के साथ लगातार समन्वय में है।

चिराग पासवान का संकल्प, बिहार की सभी 243 सीटों से लड़ने का ऐलान, आरा रैली में विपक्ष पर साधा निशाना

रविवार को आरा के वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने ‘नव संकल्प महासभा’ का आयोजन किया। इस मौके पर पार्टीप्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों को संबोधित किया। रैली में भोजपुर समेत पटना, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और अरवल जैसे जिलों से हजारों लोग जुटे।विपक्ष पर निशाना, एनडीए सरकार की तारीफअपने भाषण में चिराग पासवान ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और एनडीए सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि एनडीए ने सदैवदलितों और वंचितों के हक में काम किया है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और कर्पूरी ठाकुर को सम्मान देने के उदाहरण दिए। चिराग ने प्रधानमंत्रीमोदी की सराहना करते हुए उन्हें “सबको सम्मान देने वाला नेता” बताया। कहां से लड़ूंगा चुनाव, यह आप तय करेंचिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि वे बिहार से ही चुनाव लड़ेंगे और राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर उनकी पार्टी उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने मंच सेकहा, “मैं बिहार और बिहारियों के लिए लड़ूंगा, लेकिन कहां से लड़ूंगा, यह आप सब तय करेंगे।” बिहार को विकसित राज्य बनाना ही लक्ष्यचिराग ने दोहराया कि जब तक बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में नहीं लाया जाएगा, तब तक वे चैन की सांस नहीं लेंगे। उन्होंने अपनी’बिहार फर्स्ट’ सोच का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है। प्रवासी छात्रों के लिए चिंताप्रवासी बिहारी युवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए चिराग ने कहा कि उनका सपना है कि किसी भी छात्र को पढ़ाई के लिए बिहार से बाहर न जानापड़े। उन्होंने कहा कि उनकी सोच को कमजोर करने की कई साजिशें रची गईं, लेकिन वे झुकेंगे नहीं। न झुकूंगा, न टूटूंगाभावुक होते हुए चिराग ने कहा, “मैं शेर का बेटा हूं, मुझे तोड़ने की कोशिशें की गईं, परिवार और पार्टी को बांटने की साजिशें रची गईं, लेकिन मैं तबतक नहीं रुकूंगा जब तक विरोधियों का नामोनिशान मिटा न दूं।” युवाओं से की ‘चिराग बनने’ की अपील चिराग पासवान ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे खुद को चिराग बनने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने युवा जोश को बिहार के भविष्य की नींवबताया और कहा कि “आपका साथ ही मेरी ताकत है।” विधानसभा चुनाव की तैयारी का बिगुलइस जनसभा को आगामी विधानसभा चुनाव की शुरुआत माना जा रहा है। चिराग पासवान ने न सिर्फ बिहार से चुनाव लड़ने की घोषणा की बल्कि यहभी संकेत दिया कि लोजपा (रामविलास) पूरे राज्य में दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रही है।

गैस योजना की जानकारी न देने पर नाराज हुई मंत्री सविता, कार्यक्रम में DM पर फेंका गुलदस्ता, वीडियो वायरल

आंध्र प्रदेश की पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री सविता एस का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी परगुलदस्ता फेंकती नजर आ रही हैं। यह घटना तीन दिन पुरानी है, लेकिन इसका वीडियो रविवार को सामने आया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैलगया। क्या था मामला?यह घटना एक पेंशन वितरण समारोह के दौरान हुई, जहां मंत्री सविता एस ने उपस्थित जिलाधिकारी प्रभावती से फ्री गैस सिलेंडर वितरण कीजानकारी मांगी। जब जिलाधिकारी यह स्पष्ट नहीं बता सकीं कि पहले चरण में कितने सिलेंडर बांटे गए, तो मंत्री ने उसी गुलदस्ते को गुस्से में वापसउनकी ओर फेंक दिया जो स्वागत के समय उन्हें दिया गया था। मंत्री का गुस्सामंत्री का गुस्सा देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। मंत्री ने अन्य लोगों द्वारा दिए जा रहे गुलदस्ते भी स्वीकार करने से मना कर दिया। इस पूरेघटनाक्रम को लेकर अब तक न तो मंत्री सविता और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियावीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों ने मंत्री के इस आचरण कोअनुचित और असभ्य बताया, तो कई अन्य ने जिलाधिकारी की तैयारी पर सवाल उठाए। नैतिक सवालइस घटना ने एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपने गुस्से और व्यवहार को नियंत्रित रखने कीज्यादा जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद की कमी और संवेदनशीलता की कमी प्रशासन और नेताओं के बीच टकराव काकारण बन सकती है।

जली नकदी कांड: न्यायमूर्ति वर्मा पर महाभियोग की तलवार, संसद में कार्रवाई की तैयारी

मार्च माह में दिल्ली में स्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी निवास पर आग लगने की एक गंभीर घटना सामने आई थी। इसहादसे के दौरान उनके निवास परिसर के आउटहाउस से नकदी से भरी कई बोरियां जली हुई हालत में बरामद की गईं, जिससे इस मामले ने सनसनीखेजमोड़ ले लिया। सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने ठहराया दोषीइस मामले की तह तक जाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने तीन न्यायाधीशों की एक विशेष समिति गठित की थी। जांच के दौरान कई गवाहों केबयान दर्ज किए गए और तमाम सबूतों के आधार पर समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा को इस पूरे प्रकरण में दोषी करार दिया। इसके पश्चात उन्हें दिल्ली उच्चन्यायालय से स्थानांतरित कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेजा गया, जहां फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इस्तीफा ही बचा एकमात्र रास्तासंवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि अब न्यायमूर्ति वर्मा के पास संसद में महाभियोग की कार्रवाई से बचने का एकमात्र रास्ता पद से इस्तीफा देनाहै। संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश राष्ट्रपति को पत्र लिखकर त्यागपत्र दे सकता है, जिसके लिएकिसी औपचारिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। त्यागपत्र देने पर मिलेंगे सेवा लाभयदि न्यायमूर्ति वर्मा स्वयं पद छोड़ते हैं, तो उन्हें सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश के रूप में पेंशन सहित अन्य भत्तों का लाभ प्राप्त होगा। लेकिनयदि उन्हें संसद द्वारा उनके पद से हटाया जाता है, तो वे इन सुविधाओं से वंचित रहेंगे। संसद में कैसे होता है न्यायाधीश को हटाने का प्रस्तावभारतीय संसद के किसी भी सदन में न्यायाधीश को पद से हटाने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों कासमर्थन आवश्यक होता है, जबकि लोकसभा में 100 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। प्रस्ताव पास होने के बाद, एक तीन सदस्यीय समिति गठितकी जाती है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक ख्यातिप्राप्त विधिवेत्ता होते हैं। यह समितिन्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करती है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामलेऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पूर्व जस्टिस वी. रामास्वामी और जस्टिस सौमित्र सेन पर भी महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि, दोनोंने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही इस्तीफा देकर पद छोड़ दिया था। मानसून सत्र में हो सकती है कार्रवाईसूत्रों के मुताबिक, संसद का अगला मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा, और इसी सत्र में जस्टिस वर्मा के खिलाफमहाभियोग की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। यह कार्यवाही नए संसद भवन में पहली बार होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विषय मेंयह संकेत दिया है कि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिया जाएगा।

दिल्ली में 9 साल की बच्ची से रेप और मर्डर, सूटकेस में मिला शव

दिल्ली के नेहरू विहार में 9 साल की बच्ची से रेप और मर्डर का मामला सामने आया है। पुलिस ने बताया कि बच्ची का शव सूटकेस में मिला था औरउसके शरीर पर चोट के कई निशान थे। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार, बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी और वह घर से बाहर खेलने गई थी। जब वह देर रात तक घर नहीं लौटी, तो परिवार केलोगों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन सुबह एक सूटकेस में बच्ची का शव मिला। पुलिस ने बताया कि बच्ची के शरीर पर चोट के कई निशान थे और उसके साथ रेप किया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियोंकी तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है और लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय निवासियों ने पुलिस से मांग की है किआरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों को पकड़ने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों का विश्लेषण किया जा रहाहै। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी के पास इस मामले में कोई जानकारी है, तो वह पुलिस को सूचित करें। इस घटना ने एक बार फिर से दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे को उठाया है। लोगों ने मांग की है कि सरकार को इस मुद्दे पर कड़ेकदम उठाने चाहिए और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं और सरकार को इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। लोगों नेमांग की है कि सरकार को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिक पुलिस बल तैनात करना चाहिए और अपराधियों के खिलाफ कड़ीकार्रवाई करनी चाहिए। इस घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है और लोगों ने मांग की है कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दीजाए। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लोगों ने मांग की है कि सरकार को इस मुद्दे पर कड़े कदम उठाने चाहिए और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। सरकार को चाहिए किवह सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिक पुलिस बल तैनात करे और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। इस घटना से यह साफ हो गया है कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार और पुलिस को इस मुद्दे पर कड़े कदम उठानेचाहिए और शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, बिष्णुपुर में कर्फ्यू, पांच जिलों में इंटरनेट बंद

मणिपुर में एक बार फिर तनाव और हिंसा का माहौल देखने को मिला। शनिवार को अरामबाई तेंगगोल संगठन के कुछ सदस्यों की गिरफ्तारी के बादकई जिलों में हिंसा भड़क उठी। इसके बाद प्रशासन ने बिष्णुपुर जिले में पूर्ण कर्फ्यू लगा दिया, जबकि अन्य जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दीगई। सड़कों पर आगजनी और तोड़फोड़गिरफ्तारी के विरोध में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने इंफाल के कई हिस्सों में सड़कें जाम कर दीं, टायर जलाए और सरकारी संपत्तियों को नुकसानपहुंचाया। खुराई लामलॉन्ग इलाके में बसों को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा बलों के साथ झड़पें भी हुईं। प्रदर्शनकारियों की आत्मदाह की धमकीउग्र होते हालात के बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह की चेतावनी दी। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमेंप्रदर्शनकारी खुद पर पेट्रोल डालते नजर आ रहे हैं। एयरपोर्ट के बाहर डटे प्रदर्शनकारीप्रदर्शनकारियों को आशंका थी कि हिरासत में लिए गए नेताओं को राज्य से बाहर ले जाया जा रहा है। इसी को लेकर बड़ी संख्या में लोग तुलिहालएयरपोर्ट के गेट के बाहर जमा हो गए। उन्होंने सड़क जाम कर दी और रातभर वहीं डटे रहे। बल प्रयोग और एक मौत की सूचनाराजधानी इंफाल में बिगड़ते हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान एक व्यक्ति कीमौत की खबर सामने आई है, जो कथित तौर पर पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुआ था। प्रशासन की कड़ी कार्रवाईबिष्णुपुर जिले में पूरी तरह से कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। साथ ही इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल और काकचिंग जिलों में पांच से अधिक लोगोंके एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन सभी जिलों में एहतियातन इंटरनेट सेवाएं भी स्थगित कर दी गई हैं। आतंकी गतिविधियों पर कार्रवाईहिंसा के बीच, पुलिस ने दो प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। इसके अतिरिक्त, तेंगनौपाल जिले से एक आईईडी भीबरामद किया गया है।

जिग्नेश मेवाणी ने पत्रकारों को किया संबोधित,बोले आरएसएस ने 10 सालों से लोगों पर मचाया उत्पाद जानें क्या है पूरा मामला

जिग्नेश मेवाणी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 सालों से कमजोर लोगों के ऊपर आरएसएस के लोगों ने जिस प्रकार से उत्पातमचाया है जिस प्रकार की मोदी, अमित शाह, भाजपा की राजनीति हम लोगों ने देखी है. जितने भी इस मुल्क में संविधान को मानने वाले लोग हैं, प्रगतिशील विचारधारा से सरोकार रखने वाले लोग हैं. विशेष तौर पर दलित, आदिवासी, ओबीसी समुदाय से आने वाले लोग हैं. उनको इस बात कोलेकर कोई कंफ्यूजन नहीं कि मोदी, अमित शाह, आरएसएस और भाजपा बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान में नहीं, केवल मनुस्मृति के संस्कारों में, मनुस्मृति के मूल्यों में यकीन रखते हैं. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को समंदर में दो फेकपास्ट में वह यह कह भी चुके हैं कि डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को समंदर में फेंक दो। यह लिख भी चुके हैं कि हमें भारत का संविधाननहीं, मनुस्मृति चाहिए. यह संघ परिवार के लोगों ने बकायदा लिखा हुआ है और इसी सोच के कारण पिछले कुछ सालों के दौरान हम लोगों ने देखाकि दिल्ली की सड़कों पर संविधान की कॉपी को जलाया गया. हमने देखा कि किस प्रकार से रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया. जिसको हम संस्थानिक हत्या कहते हैं हमने देखा कि किस प्रकार से बलात्कार का शिकार बनी हाथरस की बेटी का शव अंतिम दर्शन के लिए उसकेपरिवारजनों को नसीब नहीं हुआ। हम लोगों ने देखा कि किस प्रकार से गुजरात के ऊना में गाड़ी के साथ बांधकर चार दलित युवकों को तब तक पीटागया जब तक उनकी चमड़ी ना उतर जाए. नेक्सलाइट बोलकर भीमा कोरेगांव के केस में प्रतिबद्ध, कमिटेड, कर्मठ अंबेडकराइट्स को तीन-तीन सालतक जेलों में डाला। मोदी जी के खिलाफ एक ट्वीट करने पर गुजरात से असम. ढाई हजार किलोमीटर दूर की जेल में डालकर, महिला पुलिस को मेरेबगल में बिठाकर मोलेस्टेशन का फर्जी केस करवाया.‘अंबेडकरनामा’ चलाने वाले प्रोफेसर रतन लाल जैसे साथियों के ऊपर भी फर्जी मुकदमे हुए. पार्लियामेंट में बोले अमित शाहइसी सोच के कारण पार्लियामेंट के मंच से अमित शाह ने भी कहा – कि अंबेडकर-अंबेडकर-अंबेडकर करना आजकल फैशन बन गया है. मानो एकबहुत ही डीप रूटेड कोई घृणा हो, नफरत हो… उस प्रकार के भाव और टोन के साथ अमित शाह ने बाबा साहब अंबेडकर के लिए इस प्रकार के शब्दोंका प्रयोग किया था। मतलब कि यह दिखाता है कि उनकी रगों में सिंदूर हो ना हो, इन संघी भाजपाइयों की रगों में मनुस्मृति की धारा जरूर बहती हैऔर यही कारण है कि हम देखते हैं कि बिहार में 11 साल की दलित समाज की बेटी पर बलात्कार होता है. चाकू से उसका गला काटने की, उसकेअंगों को काटने की कोशिश होती है, वह जीवन-मरण के बीच में तड़प रही है और फिर भी उसको एक बेड नसीब नहीं होता.5 घंटे तक उसको एंबुलेंसमें बैठे रहना पड़ता है। उसी प्रकार गुजरात के अमरेली जिले में 10 दिन पहले की घटना है – 19 साल के दलित समाज के नीलेश राठौड़ को दौड़ा-दौड़ा कर सड़क पर… भरे बाजार, भरे चौराहे जातिवादी लोग हाथ में कुल्हाड़ी, डंडे, पाइप, स्टिक्स लेकर दिन दहाड़े उसकी हत्या कर देते हैं। इसीगुजरात के पाटन जिले में उसी हफ्ते में 60-65 साल के दलित समाज के इस बुजुर्ग को इस प्रकार से जिंदा जला दिया जाता है. यह उसकी तस्वीर हैऔर इन तमाम घटनाओं को लेकर आज आपके बीच में दिल्ली इसलिए आया हूं कि 7-8 साल पहले जब ऊना की घटना हुई, तब मोदी जी ने कहाथा – कि मारना है तो मुझे मारो. बड़े नाटकीय अंदाज में कहा था कि मारना है तो मुझे मारो, मेरे दलित भाइयों को मत मारो।