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“मैं हिंदी बोलूंगा” कहने पर विरार में ऑटो ड्राइवर से मारपीट, शिवसेना (UBT) और MNS कार्यकर्ताओं पर आरोप, भाषा विवाद पर महाराष्ट्रमें एक बार फिर बढ़ा तनाव

महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार इलाके में भाषा को लेकर एक और विवाद सामने आया है। एक ऑटो रिक्शा चालक को सिर्फ इसलिए निशानाबनाया गया क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में कहा था मैं हिंदी बोलूंगा”। इस बयान के वायरल होते ही शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कुछ कार्यकर्ताओं ने मिलकर उस ड्राइवर को घेरकर सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारे। वीडियो वायरल होने के बाद हुआ हमलाबताया गया है कि कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक व्यक्ति भावेश पडोलिया और रिक्शा चालक के बीच मराठी भाषा कोलेकर बहस हो रही थी। जब भावेश ने पूछा कि वह मराठी में क्यों नहीं बोल रहा, तो ड्राइवर ने जवाब दिया, “मैं हिंदी बोलूंगा, भोजपुरी बोलूंगा, मराठीनहीं।” यही वीडियो विवाद की जड़ बन गया। शनिवार को वायरल वीडियो के आधार पर शिवसेना (UBT) और मनसे के कार्यकर्ताओं ने विरार स्टेशन के पास ड्राइवर की पहचान की और उसकेसाथ सरेआम मारपीट की। वीडियो में यह भी देखा गया कि इस घटना में महिलाएं भी शामिल थीं। शिवसेना नेता का बयान, मराठी अस्मिता के अपमान पर देंगे जवाबघटना के वक्त शिवसेना (UBT) के विरार शहर प्रमुख उदय जाधव भी मौजूद थे। उन्होंने मीडिया से कहा, “अगर कोई महाराष्ट्र, मराठी भाषा या मराठीमानुष का अपमान करेगा, तो शिवसेना उसका जवाब देना जानती है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ड्राइवर ने मराठी अस्मिता का अपमान किया, इसलिएउसे सबक सिखाना जरूरी था। अब तक पुलिस में कोई मामला दर्ज नहींइस घटना को लेकर अभी तक कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं हुई है। हालांकि, पालघर पुलिस का कहना है कि उन्हें वीडियो मिला है और वे इसकीजांच कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, जब तक कोई पक्ष औपचारिक शिकायत नहीं करता, तब तक FIR दर्ज नहीं की जा सकती। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएंयह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र में भाषा को लेकर हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। 1 जुलाई को ठाणे में मनसे कार्यकर्ताओं ने एक स्ट्रीट फूड वेंडरको भी इसलिए मारा था क्योंकि वह मराठी में बात नहीं कर रहा था। उस घटना के बाद व्यापारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। सोशल मीडिया पर घटना की निंदाघटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भाषा की विविधता पर हमला बतारहे हैं। हालांकि, स्थानीय राजनीतिक दल इस घटना को ‘मराठी अस्मिता’ से जोड़ रहे हैं।

अमरनाथ यात्रा के दौरान तीन बसों की टक्कर, 10 श्रद्धालु घायल,कुलगाम में हादसा, सभी की हालत स्थिर, खुदवानी क्षेत्र में तीर्थयात्रियों के काफिले की बसों की आपस में भिड़ंत

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार को अमरनाथ यात्रा में शामिल तीर्थयात्रियों के काफिले की तीन बसें एक-दूसरे से टकरा गईं। यह हादसाजम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के खुदवानी क्षेत्र में टाचलू क्रॉसिंग के पास उस समय हुआ, जब बालटाल की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा काफिलाअचानक रुका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बस के अचानक ब्रेक लगाने पर पीछे आ रही दो अन्य बसें उससे टकरा गईं। कुछ खबरों में यह भीबताया गया है कि दुर्घटना ओवरटेक करने की कोशिश के दौरान हुई। स्थानीय प्रशासन ने संभाला मोर्चा, घायलों को मिली मददघटना की सूचना मिलते ही राहत दल और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और घायलों को तुरंत पास के अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल केडॉक्टरों ने बताया कि सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग रेफर कर दिया गया है। डॉक्टरों केअनुसार, उन्हें सामान्य चोटें आई हैं और सभी की हालत फिलहाल स्थिर है। एहतियातन, काफिले की आवाजाही को कुछ समय के लिए रोका गयाऔर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। तीव्र गति से जारी है अमरनाथ यात्रागौरतलब है कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और अब तक लगभग 1.63 लाख श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। शनिवारको भी जम्मू से 6,639 तीर्थयात्रियों का नया जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। दो मार्गों से होती है यात्रा, हेलीकॉप्टर सेवा नहींतीर्थयात्री दो मुख्य मार्गों से यात्रा करते हैं पहलगाम और बालटाल। पहलगाम रूट पर चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए श्रद्धालु 46 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं, जिसे पूरा करने में लगभग चार दिन लगते हैं। वहीं, बालटाल मार्ग अपेक्षाकृत छोटा है, जिसमें 14 किलोमीटर की यात्रा कर श्रद्धालु उसी दिन वापस आधार शिविर लौट आते हैं। इस बार सुरक्षा कारणों से यात्रियों को हेलीकॉप्टर सुविधाउपलब्ध नहीं कराई गई है। 9 अगस्त को यात्रा का समापनइस वर्ष की अमरनाथ यात्रा 38 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के दिन होगा। प्रशासन की ओर सेयात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। हादसे के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है और यात्रा कासिलसिला जारी है।

तिरुवल्लूर में डीजल से भरी मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, आग लगने से मची अफरातफरी, रेलवे ट्रैक में दरार से हादसे की आशंका, जांच जारी

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में रविवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा हुआ, जब डीजल से भरी मालगाड़ी पटरी से उतर गई और उसकी चार बोगियों में भीषणआग लग गई। रेलवे अधिकारियों और पुलिस को घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर रेलवे ट्रैक पर दरार मिली है, जिसे लेकर जांच की जा रही है किक्या यह हादसा इसी वजह से हुआ। दमकल और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर तैनातट्रेन में आग लगने की खबर मिलते ही कांचीपुरम, चेंगलपेट और चेन्नई समेत आसपास के जिलों से 25 से अधिक दमकल वाहन घटनास्थल पर भेजेगए। अग्निशमन विभाग की टीमें आग पर काबू पाने में जुटी हैं। साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की दो टीमें भी राहत और बचावकार्य में लगी हुई हैं। आग बहुत विकराल थी, लोगों को हटाया गयाएनडीआरएफ के टीम कमांडर संजीव जायसवाल ने बताया कि उन्हें सुबह 7 बजे घटना की सूचना मिली। ट्रेन चेन्नई से अरक्कोणम की ओर जा रहीथी, तभी तिरुवल्लूर के पास उसमें आग लग गई। स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने के बाद जानकारी मिली कि आग बहुत तेज़ी से फैल रही थी, इसलिए एनडीआरएफ की टीमें मौके पर भेजी गईं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, ईंधन रिसाव भी हुआजिला कलेक्टर एम. प्रताप ने बताया कि आग और ईंधन रिसाव की गंभीरता को देखते हुए आसपास के घरों को खाली कराया गया है। राजस्व विभागऔर नगर पालिका ने लोगों के रहने और खाने-पीने की वैकल्पिक व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि आग को फैलने से रोकने के लिए ट्रेन के बाकीहिस्से से 47 बोगियों को अलग कर दिया गया है। रेल सेवाएं प्रभावित, कई ट्रेनें रद्द और डायवर्टइस हादसे का असर चेन्नई आने-जाने वाली ट्रेनों पर भी पड़ा है। दक्षिण रेलवे ने आठ ट्रेनों को रद्द कर दिया है, पांच ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गयाहै और आठ ट्रेनों को बीच रास्ते में ही रोका गया है। रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों से जुड़ी सभी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है। स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं अधिकारीपूरे घटनाक्रम पर रेलवे, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त निगरानी बनी हुई है। फिलहाल आग पर नियंत्रण के प्रयास जारी हैंऔर पटरी की तकनीकी जांच की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हादसे की असल वजह क्या थी।

ओडिशा कॉलेज यौन उत्पीड़न मामला: खुद को आग लगाने वाली छात्रा की हालत नाजुक, एम्स में इलाज जारी, 95% तक झुलसी छात्रा, अगले 48 घंटे बेहद अहम

ओडिशा के बालासोर जिले में कॉलेज परिसर में कथित यौन उत्पीड़न से परेशान होकर आत्मदाह करने वाली 20 वर्षीय छात्रा की हालत बेहद गंभीरबनी हुई है। एम्स भुवनेश्वर में भर्ती इस छात्रा का शरीर लगभग 95 प्रतिशत तक जल चुका है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि पीड़िता की हालत मेंकोई सुधार नहीं हो रहा है और आने वाले 48 घंटे उसके जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। गंभीर अंग क्षति, विशेषज्ञ टीम निगरानी में जुटीएम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष बिस्वास के अनुसार, पीड़िता के फेफड़े और गुर्दे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और वह फिलहाल गहनचिकित्सा इकाई में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। अस्पताल ने आठ विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम गठित की है, जिसमें एनेस्थीसिया, नेफ्रोलॉजी, बर्न एंडप्लास्टिक, पल्मोनोलॉजी सहित कई विभागों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम लगातार छात्रा की स्थिति पर नजर रख रही है। मुख्यमंत्री ने एम्स पहुंचकर जानी स्थिति, परिवार से की मुलाकातरविवार को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने एम्स भुवनेश्वर जाकर छात्रा की हालत की जानकारी लीऔर परिजनों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीज की हालत बेहद नाजुक है और मेडिकल टीम लगातार इलाज में जुटी है। उन्होंने प्रार्थना कीकि छात्रा जल्द स्वस्थ हो। घटना के विरोध में बीजेडी नेताओं का प्रदर्शनइस हृदयविदारक घटना को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। बीजेडी नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन कियाऔर सरकार से जवाबदेही की मांग की। विपक्ष ने प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रिंसिपल निलंबित, आरोपी शिक्षक गिरफ्तारबालासोर स्थित फकीर मोहन (स्वायत्त) कॉलेज की द्वितीय वर्ष की बीएड छात्रा ने कॉलेज के एक शिक्षक द्वारा यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़नाका आरोप लगाते हुए शनिवार को आत्मदाह किया था। इस घटना के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज के प्रिंसिपल को उनके कर्तव्यों के निर्वहन मेंविफल रहने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही, पुलिस ने आरोपी शिक्षक समीरा कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है। छात्रा की हालत पर पूरे राज्य की नजरएम्स प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रा को बचाने के लिए हरसंभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन फिलहाल उसकी हालत बेहदनाजुक बनी हुई है। इस दुखद घटना ने राज्यभर में छात्र सुरक्षा, यौन उत्पीड़न पर कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करदिए हैं।

देशभर में वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण, दस्तावेज़ी प्रक्रिया पर उठे सवाल, बिहार से शुरू हुआ मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

बिहार में चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकरराजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इसप्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन इस बात पर चिंता जरूर जताई है कि यदि चुनाव से पहले किसी व्यक्ति का नाम लिस्ट से हटगया, तो उसके मतदान का अधिकार छिन सकता है। अब पूरे देश में दोबारा होगी वोटर लिस्ट की जांचसिर्फ बिहार तक सीमित न रहकर, चुनाव आयोग ने अब पूरे देश के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि वे 1 जनवरी 2026 को आधार मानकर मतदाता सूची की समीक्षा की तैयारी शुरू करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उस दिन तक 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकेसभी नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो। हालांकि, इस अभियान की स्पष्ट समयसीमा अब तक तय नहीं हुई है। हाशिए पर खड़े तबकों में भय का माहौलइस प्रक्रिया को लेकर सबसे ज़्यादा चिंता हाशिए पर खड़े समुदायों में देखी जा रही है। दलित, ईबीसी, मुस्लिम और गरीब वर्ग के लोगों में यह डर हैकि कहीं उनके नाम मतदाता सूची से न हटा दिए जाएं। कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठनों ने इसे “परोक्ष रूप से लागू किया गया एनआरसी” करारदिया है। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट रूप से नागरिकता की बात किए, दस्तावेज़ों के ज़रिए नागरिकता की पुष्टि करवाई जा रही है। आयोग की सफाई और राजनीतिक पृष्ठभूमिचुनाव आयोग का तर्क है कि शहरी इलाकों में लोगों का पलायन बढ़ गया है, जिससे एक ही व्यक्ति का नाम कई स्थानों पर दर्ज हो जाता है। इसेसुधारने के लिए यह पुनरीक्षण जरूरी है। आयोग ने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने फर्जी मतदान को लेकर कई बार शिकायतें की हैं।हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। आयोग का कहना है कि इन समस्याओं के समाधानके लिए ही यह कदम उठाया गया है। पहले से दर्ज मतदाताओं से भी मांगे जा रहे दस्तावेज़हालांकि भारत में मतदाता सूची का पुनरीक्षण पहले भी कई बार हो चुका है 1950 के दशक से लेकर 2004 तक कई उदाहरण मिलते हैं लेकिन इसबार की प्रक्रिया दो मायनों में अलग है। पहली बार पहले से पंजीकृत मतदाताओं से भी नए सिरे से दस्तावेज़ मांगे जा रहे हैं। दूसरी बात यह किआयोग खुद अपनी ही पुरानी मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है। मतदाताओं को फिर से करनी होगी खुद की पहचान की पुष्टिइस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के चलते देशभर में मतदाता सूची को लेकर बड़ा बदलाव होने वाला है। आम नागरिकों को एक बार फिर खुद कोमतदाता के रूप में प्रमाणित करने के लिए तैयार रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग को सलाह दी है कि दस्तावेजी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शीबनाया जाए, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम बिना कारण मतदाता सूची से न हटाया जाए।

अनंगपुर को बचाने की हुंकार, गांव-देहात की एकजुटता से झुकेगी सरकार, बोले सौरभ भारद्वाज

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित ऐतिहासिक अनंगपुर गांव की विरासत को बचाने के लिए रविवार को आयोजित महापंचायत में आम आदमी पार्टी केएक प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। यह प्रतिनिधिमंडल पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर पहुंचा था, जिसका नेतृत्व पार्टी केदिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने किया। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि 1300 साल पुरानी इस विरासत को मिटाने कीसाजिश के खिलाफ अब गांव और देहात एकजुट हो चुके हैं। उन्होंने चेताया कि जब लोग एक साथ खड़े होंगे, तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा। किसानों की तरह एकजुटता से मिलेगी जीतसौरभ भारद्वाज ने तीन साल पहले हुए किसान आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि जैसे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों ने कालेकानूनों के खिलाफ एकजुट होकर लंबी लड़ाई लड़ी थी और आखिरकार केंद्र सरकार को कानून वापस लेने पड़े थे, वैसे ही अनंगपुर की लड़ाई भी धैर्यऔर एकता से जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन अगर लोग संगठित रहें तो अंततः सरकार को झुकना होगा। सरकार की मंशा पर सवाल, कोर्ट के आदेश का बहानाभारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार कोर्ट के आदेश का हवाला देती है, जबकि अदालत में मुकदमा सरकार ने ही गांव वालों के खिलाफदाखिल किया था। उन्होंने कहा कि जब सरकार ही अदालत में गांव वालों के विरोध में जाएगी, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? सरकारको जनता की ओर से मुकदमे लड़ने चाहिए, न कि उनके खिलाफ। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के पास जब इच्छा होती है, तो वह सुप्रीम कोर्टके आदेश को अध्यादेश के ज़रिए पलट देती है, जैसा कि दिल्ली सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के मामलों में देखा गया है। इसलिए सरकार चाहेतो अनंगपुर को बचाने के लिए भी अध्यादेश ला सकती है। जिस दिन बुलडोजर आएगा, पूरी पार्टी अनंगपुर में खड़ी होगीसौरभ भारद्वाज ने लोगों से वादा किया कि जिस दिन अनंगपुर गांव में बुलडोजर चलेगा, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और विधायक दिल्ली सेआकर गांव में खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि अगर हम सब बुलडोजर के सामने खड़े हो गए, तो कोई भी ताकत हमें हिला नहीं सकती। उन्होंने विशेष रूपसे गुर्जर समाज और ग्रामीण समुदाय की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि लाखों लोगों का अस्तित्व दांव पर है, जिसेकेंद्र सरकार और हरियाणा सरकार उजाड़ना चाहती है। सभी को साथ लेकर लड़ाई लड़ने का संकल्पमहापंचायत में आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ-साथ ब्रह्म सिंह तंवर, महाबल मिश्रा, सहीराम पहलवान, रमेश पहलवान और कृष्ण जाखड़ जैसेगुर्जर समाज के प्रमुख प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सौरभ भारद्वाज ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भी लिखा कि अनंगपुर गांव की 1300 साल पुरानी विरासतको मिटाने की साजिश के खिलाफ गांव-देहात एकजुट हैं और आम आदमी पार्टी इस लड़ाई में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी है।

अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर लोकदल की चिंता, हादसा या कोई साजिश?

अहमदाबाद में हाल ही में घटी विमान दुर्घटना को लेकर लोकदल ने गहरी चिंता जाहिर की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने कहा कियह हादसा सिर्फ एक मानवीय भूल या तकनीकी त्रुटि नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक प्रशिक्षित पायलट गंभीर चूक करता है औरविमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी जैसी अहम हस्ती सवार होती है, तो क्या इस घटना को साधारण मान लेना उचित होगा? लोकदलका मानना है कि यह दुर्घटना किसी साजिश, राजनीतिक दबाव या व्यवस्था में बड़ी खामी का नतीजा भी हो सकती है। स्वतंत्र और गहन जांच की मांगचौधरी सुनील सिंह ने मांग की है कि इस घटना की एक उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और बहुआयामी जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह पतालगाया जाना चाहिए कि क्या विमान में सवार कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण खुलासे या साक्षात्कार की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही DGCA, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और संबंधित एयरलाइन कंपनी की भूमिका की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। साक्ष्य सार्वजनिक करने की अपीललोकदल ने यह भी मांग की है कि विमान का ब्लैक बॉक्स डेटा, पायलट के संवाद, और तकनीकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि देश कीजनता सही जानकारी से अवगत हो सके। पार्टी का कहना है कि इस मामले को केवल एक तकनीकी भूल कहकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। यहजरूरी है कि हर पहलू की जांच हो, ताकि यदि कोई गहरी साजिश या लापरवाही हो, तो वह उजागर की जा सके। जनता को चाहिए सचलोकदल का स्पष्ट मत है कि लोकतंत्र में नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि किसी घटना के पीछे क्या कारण थे। अगर यह दुर्घटना एक बड़ीसाजिश या प्रशासनिक विफलता का हिस्सा है, तो उसे हर हाल में सामने लाया जाना चाहिए।

आम आदमी पार्टी की अपील, सीलमपुर में इमारत गिरने की घटना पर जताया शोक, कार्यकर्ताओं को राहत कार्य में जुटने के निर्देश

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में शनिवार सुबह चार मंजिला इमारत के गिरने की घटना को आम आदमी पार्टी ने अत्यंत दुखद बताते हुए इसपर गहरी संवेदना व्यक्त की है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, नेता प्रतिपक्ष आतिशी और एमसीडी में विपक्ष के नेता अंकुश नारंगसहित कई नेताओं ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति शोक व्यक्त किया है। केजरीवाल की अपील, कार्यकर्ता प्रशासन की सहायता करेंइस घटना की सूचना मिलते ही अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह हादसा बेहद दुखद है और इसमें जान गंवाने वालों के परिजनोंके प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। उन्होंने कहा कि गली संकरी होने की वजह से राहत और बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करनापड़ रहा है। उन्होंने पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मौके पर जाकर प्रशासन को हरसंभव सहयोग प्रदान करें। आतिशी ने जताई संवेदना, राहत कार्य में सहयोग की अपीलदिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी इस हादसे को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने परिजन खोए हैं, उनके प्रति मैंसंवेदना प्रकट करती हूं। उन्होंने बताया कि इमारत एक तंग गली में स्थित थी, जिससे बचाव अभियान में परेशानी हो रही है। उन्होंने भी कार्यकर्ताओं सेप्रशासन की मदद करने की अपील की। अंकुश नारंग ने दी जानकारी, साझा किया वीडियोएमसीडी में ‘आप’ के नेता विपक्ष अंकुश नारंग ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर घटनास्थल का वीडियो साझा करते हुए जानकारी दी कि हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ। उन्होंने बताया कि चार मंजिला इमारत गिरने से करीब 12 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। अब तक दमकल विभाग औरस्थानीय लोगों की मदद से सात लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा जा चुका है। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। उन्होंने ‘आप’ कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मौके पर पहुंचें और हरसंभव सहायता करें। आप कार्यकर्ताओं की तत्परताघटना की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने लगे। पार्टी नेएकजुटता दिखाते हुए कहा कि इस कठिन समय में हम पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।

बिहार की वोटर लिस्ट जांच पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए गंभीर सवाल चुनाव आयोग की जांच प्रक्रिया पर सवाल

बिहार में इन दिनों मतदाता सूची की व्यापक जांच की जा रही है, जिसमें नागरिकता की पुष्टि के नाम पर वोटरों से प्रमाण मांगे जा रहे हैं। कांग्रेस नेताऔर वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने इस जांच को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यह तरीका न केवल असंवैधानिक है, बल्किलाखों नागरिकों के मताधिकार को छीन सकता है। 2003 के बाद जुड़े वोटर को ‘संदिग्ध’ मानना अनुचितसिंघवी ने बताया कि चुनाव आयोग 2003 से पहले मतदाता सूची में दर्ज नामों को सुरक्षित मान रहा है, लेकिन 2003 के बाद जुड़े वोटरों से उनकीनागरिकता साबित करने को कहा जा रहा है। भले ही वह व्यक्ति 15 वर्षों से लगातार मतदान करता आया हो, यदि वह दस्तावेज नहीं दिखा सका, तोउसका नाम हटा दिया जाएगा। प्रमाणों की जटिल मांग बना रही है मुश्किलइस प्रक्रिया में वोटरों से तीन तरह के कठिन दस्तावेज मांगे जा रहे हैं खुद का जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता का जन्म प्रमाणपत्र या दोनों के प्रमाणपत्र।सिंघवी ने कहा कि यह ग्रामीण, गरीब, प्रवासी, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए अत्यंत कठिन है, जिनके पास आमतौर पर ऐसे दस्तावेज नहीं होते। बिना कानून बदले शुरू हुई यह प्रक्रियासुप्रीम कोर्ट में सिंघवी ने तर्क दिया कि इस प्रकार की जांच किसी विधायी संशोधन के बिना नहीं की जा सकती। लेकिन चुनाव आयोग ने सिर्फ एकआंतरिक आदेश के आधार पर इतनी व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी, जो न्यायसंगत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले की अनदेखीसिंघवी ने कोर्ट को याद दिलाया कि पूर्व में शीर्ष अदालत कह चुकी है कि मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने से पहले कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिएयानी नोटिस, सुनवाई और उचित जांच। लेकिन बिहार में ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा, जिससे लाखों वोटर बिना मौका दिए सूची से बाहर किए जा सकतेहैं। 5 करोड़ वोटर ‘संदिग्ध’, लोकतंत्र को खतराडॉ. सिंघवी के मुताबिक, बिहार में कुल 8 करोड़ वोटर हैं, जिनमें से 5 करोड़ को संदिग्ध घोषित कर दिया गया है। यदि इनमें से केवल 2 करोड़ भीवोट देने से वंचित रह जाते हैं, तो यह लोकतंत्र की गंभीर क्षति होगी। यह प्रक्रिया सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग परडालेगी। आधार और वोटर कार्ड भी नहीं मान्य? सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान में सभी जगह मान्य दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को नागरिकता के प्रमाण केतौर पर अस्वीकार किया जा रहा है। अब सिर्फ जन्म प्रमाणपत्र ही मान्य माना जा रहा है, जो हर किसी के पास नहीं होता। बाढ़ और पलायन के समय क्यों लागू हुई यह प्रक्रिया?सिंघवी ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब बिहार के अनेक जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और लाखों लोग पलायन कर चुके हैं, ऐसे समय में इस प्रक्रिया कीशुरुआत क्यों की गई? क्या गरीब मजदूर अपनी जान बचाएं या दस्तावेज ढूंढें? सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांगसिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी नागरिक को उसकेसंवैधानिक मताधिकार से वंचित न किया जाए। यह मामला लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ा है और अदालत को इसमें संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में बड़ी सफलता

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले मे सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है।शनिवार को 23 नक्सलियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल मिलाकर 1.18 करोड़ रुपये काइनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में कई वरिष्ठ माओवादी कमांडर शामिल हैं। भीमा सहित कई शीर्ष माओवादी नेताओं का सरेंडरआत्मसमर्पण करने वालों में पोडियम भीमा उर्फ लोकेश का नाम खास तौर पर शामिल है, जो डिवीजनल कमेटी का सदस्य था। उस पर 8 लाख रुपयेका इनाम था और वह 2012 में कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण सहित कई बड़ी वारदातों में शामिल रहा है। इसके अलावा रमेश उर्फ कमलू, माओवादी कमांडर हिडमा का गार्ड भी सरेंडर करने वालों में शामिल है। आत्मसमर्पण से माओवादियों को गहरा झटकापुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठनों के लिए बड़ा झटका है, खासकर बस्तर जैसे इलाकों में जहां ये संगठनों कीगहरी पकड़ मानी जाती थी। आत्मसमर्पण करने वालों में एक डीवीसीएम, छह पीपुल्स पार्टी कमेटी सदस्य, चार एरिया कमेटी सदस्य और अन्य 12 निचले स्तर के कार्यकर्ता शामिल हैं। हिंसा छोड़ने के पीछे मोहभंग और गुटबाजी कारणपुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों ने माओवादी विचारधारा से मोहभंग, संगठन में बढ़ती गुटबाजी और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों सेतंग आकर हथियार डाले हैं। इनमें से कई माओवादी पीएलजीए की बटालियन नंबर 1 के सक्रिय सदस्य रहे हैं, जिसे माओवादियों की सबसे ताकतवरसैन्य इकाई माना जाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रतिक्रियामुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटनाक्रम को ‘बस्तर में बदलाव की लहर’ बताया। उन्होंने कहा कि अब गोलियों की जगह लोकतंत्र की आवाज गूंजरही है। उन्होंने बताया कि पिछले 15 महीनों में 1,521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। नारायणपुर में हाल ही में हुए आत्मसमर्पण को मिलाकरपिछले 24 घंटे में 45 नक्सली हिंसा छोड़ चुके हैं। पुनर्वास योजना के तहत मिलेगा सहयोगराज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को ₹50,000 की तत्काल आर्थिक सहायता दी गईहै। इसके अलावा उन्हें आवास, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। यह योजना माओवाद प्रभावित इलाकों मेंशांति स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।