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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, जेल में बंद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती

जेल में बंद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। सोनम वांगचुककी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की याचिका पर यह सुनवाई होगी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई है औरइसे गैर-कानूनी और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ इस मामले कीसुनवाई कर सकती है। इससे पहले 29 अक्टूबर को, सुप्रीम कोर्ट ने अंगमो की संशोधित याचिका पर केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा था।हालांकि केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अंगमो द्वारा दायर याचिका पर जवाब देने के लिए कुछसमय मांगा था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 24 नवंबर को इस मामले पर सुनवाई को टाल दिया था। सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका में कहागया है, ‘सोनम वांगचुक को पुरानी एफआईआर, अस्पष्ट आरोपों और अंदाजों के आधार पर हिरासत में रखा गया है। इसलिए इसका कोई कानूनीवजह नहीं है। निंदा की और साफ तौर पर कहायाचिका में कहा गया, ‘रोकथाम की शक्तियों का इस तरह मनमाना इस्तेमाल अधिकारों का उल्लंघन है, जो संवैधानिक आजादी पर चोट करता है।याचिका में सोनम वांगचुक की हिरासत को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह पूरी तरह से बेतुका है कि लद्दाख और पूरेभारत में शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में अपने योगदान के लिए राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने के बाद वांगचुक कोअचानक निशाना बनाया गया। अंगमो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा की घटनाओं को किसी भी तरह से वांगचुक के कामों याबयानों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अंगमो ने कहा कि वांगचुक ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल के ज़रिए हिंसा की निंदा की औरसाफ तौर पर कहा कि हिंसा से लद्दाख की तपस्या और पांच साल की शांतिपूर्ण कोशिश नाकाम हो जाएगी। वांगचुक ने हिंसा को लेकर कहा, ‘यहउनकी ज़िंदगी का सबसे दुखद दिन था’। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेवांगचुक को 26 सितंबर को सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठे शेड्यूलमें शामिल करने की मांग को लेकर हुए लेह में हिंसक प्रदर्शन हुए, जिनमें चार लोग मारे गए और 90 लोग घायल हुए थे। हिंसा के दो दिनों के बादसोनम वांगचुक को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। लेह हिंसा के मामले में जेल में बंद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक कीगिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका सोनम की पत्नी ने दायर की है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।

पूर्व CJI बीआर गवई ने कहा क्रीमी लेयर सिद्धांत अनुसूचित जातियों पर लागू होना चाहिए, सकारात्मक कार्रवाई का मूल उद्देश्य सामाजिक न्याय

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने कहा है कि अनुसूचित जाति में क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू करने का समर्थन करने पर उनके हीसमुदाय के लोगों ने उनकी आलोचना की। जस्टिस गवई ने कहा डॉ. आंबेडकर मानते थे कि सकारात्मक कार्रवाई (अफर्मेटिव एक्शन) ऐसा है, जैसेकिसी पीछे छूटते व्यक्ति को साइकिल देना। गवई ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को फिर कभी साइकिल नहीं छोड़नी चाहिए, तो मुझे नहीं लगता किआंबेडकर ऐसा चाहते। जस्टिस गवई हाल ही में मुख्य न्यायाधीश के पद से रिटायर हुए हैं। जस्टिस गवई शनिवार को मुंबई यूनिवर्सिटी में ‘समानअवसर को बढ़ावा देने में अफर्मेटिव एक्शन की भूमिका’ पर भाषण दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने डॉ. आंबेडकर को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देतेहुए कहा कि आंबेडकर न केवल भारतीय संविधान बल्कि उसमें शामिल अफर्मेटिव एक्शन के भी आर्किटेक्ट थे। पिछड़े समुदाय के सदस्य होंउन्होंने कहा, ‘बाबासाहेब का मानना था कि जहां तक अफर्मेटिव एक्शन की बात है, यह उन लोगों को साइकिल देने जैसा है जो पीछे रह गए हैं….मानलीजिए कोई दसवें किलोमीटर पर है और कोई जीरो किलोमीटर पर है, तो उसे (बाद वाले को) साइकिल दी जानी चाहिए, ताकि वह दसवेंकिलोमीटर तक तेजी से पहुंच सके। वहां से, वह पहले से मौजूद व्यक्ति के बराबर आ सकता है और वहां से दोनों साथ चल सकते हैं। क्या उन्होंने(अंबेडकर ने) सोचा नहीं होगा कि अब इन व्यक्तियों को साइकिल छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए ताकि जीरो किलोमीटर पर मौजूद अन्य लोगों भी आगेआ सकें?’ पूर्व CJI ने कहा, ‘मेरे हिसाब से, बाबासाहेब आंबेडकर असल में सामाजिक और आर्थिक न्याय लाना चाहते थे, न कि औपचारिक तौरपर।’ गवई ने कहा कि इंदिरा साहनी और अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में क्रीमी लेयर का सिद्धांत बताया गया था, और एक दूसरे केस में, उन्होंने खुद कहा था कि क्रीमी लेयर सिद्धांत को अनुसूचित जातियों पर भी लागू किया जाना चाहिए। इस सिद्धांत के मुताबिक, जो लोग आर्थिक औरसामाजिक रूप से काफी आगे हैं, उन्हें अफरमेटिव एक्शन का फायदा नहीं मिलना चाहिए, भले ही वे उस पिछड़े समुदाय के सदस्य हों जिसके लिए यहबनाया गया है। सकारात्मक भूमिका निभाईगवई ने कहा कि इस फैसले के लिए उनके अपने समुदाय के लोगों ने ही उनकी बहुत आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन पर खुद आरक्षण का फायदाउठाकर सुप्रीम कोर्ट का जज बनने और फिर क्रीमी लेयर में आने वालों को बाहर करने की वकालत करने का आरोप लगाया गया। लेकिन इन लोगोंको यह भी नहीं पता कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के संवैधानिक पद के लिए कोई रिजर्वेशन नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या भारत के मुख्यन्यायाधीश या मुख्य सचिव के बेटे और ग्राम पंचायत स्कूल में पढ़े मजदूर के बेटे पर एक ही पैमाना लागू करने से संविधान में दी गई बराबरी कीकसौटी पूरी हो सकती है? हालांकि, गवई ने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले 75 वर्षों में इसमें कोई शक नहीं कि अफरमेटिव एक्शन ने एकसकारात्मक भूमिका निभाई है।

विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, शेख हसीना का भारत में रहना उनका निजी फैसला, बांग्लादेश-भारत संबंधों पर ध्यान

बांग्लादेश सरकार की तरफ से अपनी पूर्व पीएम शेख हसीना को भारत से ढाका प्रत्यर्पित करने की मांग की जा रही है। अब इसे लेकर भारतीय विदेशमंत्री डॉ. एस जयशंकर ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा भारत में रहना शेख हसीना का निजी फैसला है और इस फैसले की वजह बांग्लादेश केहालात हैं। शेख हसीना को बीते महीने ही बांग्लादेश में मानवता के खिलाफ अपराध के दोष में मौत की सजा सुनाई गई है। भारत सरकार ने अभी तकबांग्लादेश सरकार की मांग पर कोई जवाब नहीं दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मेलन के दौरान जब विदेश मंत्री से पूछा गया कि क्या शेखहसीना जब तक चाहें, तब तक भारत में रह सकती हैं? इसके जवाब में विदेश मंत्री ने कहा, ‘यह एक अलग सवाल था, वे यहां कुछ खास परिस्थितियोंके चलते आईं, लेकिन उन्हें ही ये तय करना होगा।’ विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत, बांग्लादेश का शुभचिंतक है। बांग्लादेश और भारत के रिश्तोंपर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा बांग्लादेश के मौजूदा लीडरशिप ने पिछले चुनावों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि अगर मुद्दा चुनाव था, तोसबसे पहले निष्पक्ष चुनाव कराए जाने चाहिए। विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत बांग्लादेश में स्थिरता और लोकतांत्रिक मान्यता चाहता है। लेकर अहम बयान दियाजयशंकर ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जो भी निकलेगा, वह भारत के साथ संबंधों के बारे में ‘संतुलित औरपरिपक्व नजरिया दिखाएगा, जिससे हालात बेहतर होने की संभावना है। गौरतलब है कि शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत औरबांग्लादेश के रिश्तों में थोड़ी खटास आई है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे से अमेरिका के साथ संबंधों पर असर के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा , हमने हमेशा साफ कहा है कि हमारे कई संबंध हैं और हमारे पास विकल्पों की आजादी है। अभी हमारे लिए अमेरिका के साथ व्यापार समझौता अहमहै। पुतिन के दौरे से भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत मुश्किल होने की बात को विदेश मंत्री ने खारिज कर दिया। रूसी राष्ट्रपतिपुतिन के भारत दौरे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, भारत जैसे बड़े और तेजी से उभरते देश के लिए जरूरी है कि सभी अहम देशों के साथ अपनेसंबंधों को मजबूत रखा जाए और जहां तक हो हमारे पास विकल्प चुनने की आजादी हो। एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एसजयशंकर ने बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को लेकर अहम बयान दिया और कहा कि भारत में रहना उनका निजी फैसला है। साथ ही उन्होंनेरूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे और अमेरिका के साथ संबंधों पर भी अपनी राय जाहिर की।

नवजोत कौर सिद्धू का बड़ा बयान, यदि कांग्रेस चाहती है, तो नवजोत सिंह सिद्धू लौटेंगे पंजाब की राजनीति में

पूर्व दिग्गज क्रिकेटर और अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले नेता नवजोत सिंह सिद्धधू की फिर से राजनीति में सक्रिय होने की बात को लेकर चर्चा तेजहो रही है। हालांकि इस बात में भी कोई दोहराई नहीं कि इन बातों को हवा खुद उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने ही दी हैं। शनिवार को नवजोत कौरसिद्धू ने सिद्धू के राजनीति में वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने कांग्रेस पार्टी में चल रहे गुटबाजी की राजनीति को भीउजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करती है, तो वे दोबारा सक्रियराजनीति में लौट आएंगे। बता दें कि नवजोत कौर ने यह बात तब कही जब वे शनिवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात केबाद पत्रकारों से बातचीत कर रहीं थीं। कौर ने आरोप लगाया कि पंजाब कांग्रेस में अभी भी जबर्दस्त अंदरूनी खींचतान चल रही है। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर पहले से ही पांच नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं और वे नहीं चाहते कि सिद्धू आगे बढ़ें। प्रियंका गांधी से भावनात्मक रूप से जुड़े हुएनवजोत कौर ने आगे कांग्रेस पार्टी पर ही हमला करते हुए कहा कि उनके परिवार के पास किसी पार्टी को देने के लिए पैसा नहीं है, लेकिन वे पंजाब कोसोने की चिड़िया जैसा राज्य बना सकते हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि हमारे पास 500 करोड़ रुपए नहीं हैं कि हम मुख्यमंत्री की कुर्सी खरीद लें।जिसने 500 करोड़ की सूटकेस दे दी, वही मुख्यमंत्री बन जाता है। इसके साथ ही जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी ने उनसे पैसे मांगे, तो उन्होंनेकहा कि हमसे किसी ने नहीं मांगा, लेकिन राजनीति में ऐसे ही होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सिद्धू कांग्रेस और प्रियंका गांधी से भावनात्मक रूप सेजुड़े हुए हैं। अंदरूनी खींचतान और कुर्सी के लिए पैसे की राजनीतिदूसरी ओर नवजोत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस में चल रही गुटबाजी उन्हें आगे बढ़ने ही नहीं देगी। उन्होंने कहा कि अगर हाई कमांड समझेतो बात अलग है। इस दौरान जब पूछा गया कि क्या भाजपा यह जिम्मेदारी दे तो सिद्धू वापस भाजपा में जाएंगे? इस पर उन्होंने कहा कि वे अपने पतिकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं कर सकतीं। अंत में उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करती है तो वह राजनीति में लौट आएंगे, वरना वह अपनी कमाई में खुश हैं। राजनीति के नाम पर पंजाब का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं पूर्व क्रिकेटर और नेता नवजोत सिंह सिद्धू? इस बात कोलेकर चर्चा तब तेज हो गई जब खुद उनकी पत्नी ने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें पंजाब का सीएम उम्मीदवार घोषित करती है, तो वे सक्रिय राजनीति मेंलौट आएंगे। उन्होंने पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान और कुर्सी के लिए पैसे की राजनीति पर भी तीखा तंज किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटद्वार के सिद्धबली मंदिर में किया माथा टेक, बहन कौशल्या देवी से की शोक संवेदना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटद्वार स्थित सिद्धबली मंदिर में माथा टेककर सिद्धबली बाबा का आशीर्वाद लिया। इससे पहलेलैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत ने मंदिर प्रांगण में पहुंचने पर उनका स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ हेलिकॉप्टर से कोटद्वार पहुंचे थे।ग्रास्टनगंज में हेलीपैड पर उतरकर कार से दोपहर 2:45 बजे सिद्धबली मंदिर पहुंचे। सिद्धबली बाबा के समक्ष नतमस्तक होकर करबद्ध प्रार्थना की।सीएम योगी आदित्यनाथ के कोटद्वार आगमन से पूर्व ही पौड़ी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्थ चाकचौबंद कर दी थी। मुख्यमंत्री के मंदिर प्रांगण में पहुंचने सेकुछ देर पहले ही एक क्षेत्र को खाली कराते हुए सुरक्षा घेरा बना लिया गया था। योगी आदित्यनाथ के कार से उतरते ही लैंसडौन विधायक महंतदिलीप रावत ने उनका अभिवादन किया। महंत दिलीप रावत योगी आदित्यनाथ को बाबा के दर्शन के लिए लेकर गए। देवी के आवास पर पहुंचेइसके बाद योगी आदित्यनाथ कोटद्वार के गाड़ीघाट क्षेत्र में अपनी बहन कौशल्या देवी के आवास पर पहुंचे। उन्होंने जीजा ओमप्रकाश रावत के निधनपर शोक संवेदना व्यक्त कर बहन को ढांढस बंधाया। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से गाड़ीघाट क्षेत्र में भी कुछ मार्गों पर रूट डायवर्ट कियाहुआ था। कई जगहों पर अवरोधक रखे थे और वाहनों की आवाजाही को रोका गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटद्वार पहुंचकर सिद्धबलीबाबा का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह कोटद्वार के गाड़ीघाट क्षेत्र में अपनी बहन कौशल्या देवी के आवास पर पहुंचे। उन्होंने जीजा ओमप्रकाशरावत के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त कर बहन को ढांढस बंधाया।

इंडिगो उड़ानों में गड़बड़ी के बाद सरकार ने हवाई किराए पर लगाया नियंत्रण, पी. चिदंबरम ने किया स्वागत “जानें क्या है पूरा मामला”

इंडिगो उड़ानों में हाल ही में हुई बड़ी अव्यवस्था और टिकटों की बढ़ी कीमतों के बाद सरकार ने हवाई किराए पर नियत्रंण लगाने का फैसला किया है।इस कदम का स्वागत करते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि जब तक एयरलाइन सेक्टर में केवल दो बड़ी कंपनियों कादबदबा है, तब तक किराए पर नियंत्रण जारी रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडिगो की उड़ानों में आई गड़बड़ी की वजह से देशभर में सैकड़ों उड़ानें रद्दहुईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। चिदंबरम ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- ‘मैं खुश हूं कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय नेआखिरकार दखल दिया और इकोनॉमी क्लास किराए पर नियंत्रण लगाया है। जब तक एयरलाइन बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा नहीं होती, तब तककिराए पर नियंत्रण रहना जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि अगर बाजार में केवल दो बड़ी कंपनियां हों तो उपभोक्ताओं को बचाने का एकमात्र तरीका कीमतोंपर नियंत्रण है, क्योंकि हवाई यात्रा करने वाले अधिकांश लोग महंगी टिकटें वहन नहीं कर सकते। नियमों को फिलहाल रोक दियावरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने इंडिगो में आई समस्या को केवल कंपनी की गलती नहीं बल्कि सरकार और डीजीसीए की भी विफलता बताया।उन्होंने कहा कि नए पायलट ड्यूटी टाइम नियम जनवरी 2024 में लागू किए गए थे, लेकिन पिछले 23 महीनों में सरकार एयरलाइन को इन नियमों केअनुसार ढालने में नाकाम रही। उनके मुताबिक, ‘संकट बढ़ता गया और सरकार कुछ नहीं कर सकी। आखिरकार उसे पीछे हटना पड़ा।’ सरकार नेशुक्रवार को नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम (एफडीटीएल) नियमों को फिलहाल रोक दिया है। देर से उठाया गया कदम बताया जा रहानागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हवाई किराए पर लगाम लगाने का कारण बताते हुए कहा कि इंडिगो में परिचालन की गड़बड़ी के चलते उड़ानें कम हो गईंऔर कम सीटों की वजह से टिकटों की कीमतें अचानक बहुत बढ़ गईं। शनिवार को एयरलाइन ने लगभग 1500 उड़ानें चलाईं, जबकि करीब 800 उड़ानें रद्द रहीं। रविवार तक स्थिति सुधर रही है, लेकिन फिर भी 650 उड़ानें रद्द हुईं। इंडिगो रोजाना लगभग 2300 उड़ानें संचालित करती है। वरिष्ठकांग्रेस नेता पी चिदंबरम का कहना है कि जब तक बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं आती, तब तक ऐसा नियंत्रण जरूरी है ताकि आम यात्री महंगीटिकटों का बोझ न झेलें। वहीं सरकार के इस फैसले को यात्रियों को राहत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर इसे देर से उठायागया कदम बताया जा रहा है।

अमेरिकी अधिकारी एलिसन हुकर का भारत दौरा, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग पर चर्चा

अमेरिका की अंडर सेक्रटरी ऑफ स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स एलिसन हुकर 7 से 11 दिसंबर तक भारत के दौरे पर रहेंगी। अमेरिकी दूतावास द्वाराजारी बयान के अनुसार, उनका यह दौरा भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और व्यापार, रक्षा और उभरती तकनीकों में सहयोगबढ़ाने पर केंद्रित रहेगा। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि एलिसन हुकर की प्राथमिकताओं में अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देना, आर्थिक संबंधोंको और गहरा करना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अंतरिक्ष अनुसंधान तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करना शामिल है। इस दौरे के दौरानएलिसन हुकर नई दिल्ली में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से मुलाकात करेंगी। वह विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ ‘फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन’ मेंहिस्सा लेंगी, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, आपसी हितों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। आतंकवाद के सभी रूपों और स्वरूपों की कड़ी निंदाइसके बाद वह बंगलूरू जाएंगी, जहां भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का दौरा करेंगी और भारत के अंतरिक्ष व तकनीकी क्षेत्र केप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच अनुसंधान, नवाचार और ऊर्जा क्षेत्र में संभावित नए सहयोग पर चर्चा होगी। अमेरिकाके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं के तहत यह दौरा ‘मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी’ और ‘मुक्त व खुले इंडो-पैसिफिक’ की दिशा में एकऔर कदम माना जा रहा है, बयान में कहा गया। इस दौरे से पहले 6 दिसंबर को भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के सभी रूपों और स्वरूपों की कड़ीनिंदा की है। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र, क्वाड और एफएटीएफ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग मजबूत करने का संकल्प दोहराया। समर्थन नहीं मिलना चाहिए3 दिसंबर को यहां आयोजित हुई भारत-अमेरिका संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की 21वीं बैठक और 7वीं डेजिग्नेशन डायलॉग में दोनों पक्षों नेआईएसआईएस, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत उनके समर्थकों और सहयोगियों पर संयुक्त राष्ट्र के 1267 प्रतिबंध सूचीमें और नाम जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों ने पहलगाम (22 अप्रैल) और दिल्ली के लाल किला क्षेत्र (10 नवंबर) में हुए आतंकीहमलों की निंदा करते हुए कहा कि आतंकवादियों को सजा मिलनी चाहिए और उन्हें किसी भी प्रकार का समर्थन नहीं मिलना चाहिए। विदेश मंत्रालयकी ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह बैठक भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की भावना और उसके दायरे को दर्शाती है।

दिल्ली में हुई स्वराज कौशल की शोकसभा, बेटी बांसुरी स्वराज सहित राजनीतिक और कानूनी हस्तियों नेताओं ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता, वरिष्ठ वकील और पूर्व मिजोरम राज्यपाल स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे।स्वराज कौशल का जन्म 12 जुलाई 1952 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। अपने जीवन में उन्होंने कानून और राजनीति के क्षेत्र मेंउल्लेखनीय योगदान दिया और समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई।स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता थे। उन्होंने वर्षों तक वकालत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया और कानून के प्रति उनकी गहरी समझऔर न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशेष बनाती थी। वे केवल एक कुशल वकील ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और देशभक्ति के क्षेत्र में भीसक्रिय रहे। स्वराज कौशल स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति थे, जो भारत की पूर्व विदेश मंत्री रही हैं। उनके परिवार में उनकी बेटी बांसुरी स्वराज भीशामिल हैं, जो वर्तमान में भाजपा सांसद हैं। भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बनेउनके निधन से राजनीतिक और कानूनी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया (एक्स) पर अपने संदेश मेंलिखा: श्री स्वराज कौशल जी के निधन से दुख हुआ है। वे भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और मिजोरम के लोगों पर अपने कार्यकाल केदौरान गहरा प्रभाव छोड़ा। एक सांसद के रूप में उनके विचार भी महत्वपूर्ण रहे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनकी बेटी बांसुरी और परिवार केअन्य सदस्यों के साथ हैं। ॐ शांति। निधन से देश ने एक संवेदनशील, ईमानदार और प्रभावशाली व्यक्तित्व खो दियास्वराज कौशल का राजनीतिक जीवन भी अत्यंत सक्रिय और प्रभावशाली रहा। वे भारत के सबसे कम उम्र के राज्यपाल बने और मिजोरम के लोगों केबीच अपने कार्यकाल के दौरान गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्होंने अपने प्रशासनिक कौशल और दूरदर्शिता के जरिए राज्य में कई महत्वपूर्ण पहल की। उनकीशोकसभा समारोह आज यानी 7 दिसंबर को दिल्ली के PSOI क्लब, चाणक्यपुरी में आयोजित की गई. यह शोकसभा दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजेतक चली। इस अवसर पर उनके परिवारजन, करीबी मित्र और विभिन्न राजनीतिक व कानूनी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में उनकेयोगदान और व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए उपस्थित लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। स्वराज कौशल ने अपने जीवन में कानून और राजनीति केक्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके निधन से देश ने एक संवेदनशील, ईमानदार और प्रभावशाली व्यक्तित्व खो दिया है। उनकी उपलब्धियों औरउनके व्यक्तित्व की छवि हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की सबसे बड़ी मुहिम — पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की बड़ी कार्रवाई

सरकार का सख़्त आदेश गैर–अनुरूपित इंडस्ट्रीज़ और प्रदूषण फैलाने वालों पर ज़ीरो टॉलरेंसदिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में राजधानी की हवा को साफ़ करने के लिए अब तक की सबसे बड़ी मुहिम शुरू कर दी है। पर्यावरणमंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने साफ़ कहा है कि दिल्ली में कोई भी ऐसी इंडस्ट्री, निर्माण साइट या एजेंसी जो प्रदूषण फैलाती पाई जाएगी उस पर तुरंतऔर कड़ी कार्रवाई होगी। सरकारी हो या निजी, सभी को नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।इंडस्ट्रीज़ का 7 दिन में सर्वे सभी डीसी, डीएम और DSIIDC अधिकारियों को सख़्त निर्देशबैठक में मंत्री सिरसा ने सभी ज़िलों के डीसी, डीएम और DSIIDC अधिकारियों को आदेश दिया कि हर इंडस्ट्री का पूरा सर्वे सिर्फ़ 7 दिनों में पूराकिया जाए। इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कौन सी फैक्ट्रियाँ गैर-अनुरूपित इलाकों में चल रही हैं, कौन-सी इकाइयाँ नियम तोड़ रही हैं औरप्रदूषण फैला रही हैं। सर्वे के बाद ऐसे सभी यूनिट्स पर तुरंत जुर्माना, सीलिंग और बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। MCD को आदेश नॉन–कनफॉर्मिंग एरिया और निर्माण स्थलों का मैदान–स्तर सर्वेसिरसा ने MCD के डिविजनल कमिश्नर को यह भी निर्देश दिया कि दिल्ली के सभी नॉन-कनफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल एरिया और निर्माण स्थलों का विस्तृतसर्वे कराया जाए। जहाँ धूल प्रबंधन, कचरा निस्तारण या कंस्ट्रक्शन वेस्ट के निपटारे में लापरवाही मिले वहाँ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उनका कहनाहै कि प्रदूषण रोकने के लिए डेटा और ज़मीनी जानकारी सबसे ज़रूरी है। टूटी सड़कें और खाली प्लॉट्स की रिपोर्ट तुरंत तैयार करने का निर्देशदिल्ली में धूल फैलने का सबसे बड़ा कारण टूटी सड़कें, गड्ढे और बिना विकसित पड़े प्लॉट हैं। इसलिए सरकार ने सभी विभागों को आदेश दिया है किइन सभी का पूरा अपडेट तुरंत तैयार किया जाए। इस साल अब तक 42,000 से ज़्यादा गड्ढे भरे जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भीज़्यादा है। यह कदम दिल्ली में धूल और पीएम-10 को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। DPCC की अब तक की कार्रवाई भारी जुर्माना, नोटिस और निर्माण स्थल बंदपिछले दिनों DPCC ने 1,756 साइट्स का निरीक्षण किया और 556 को नोटिस जारी किए। कुल ₹7 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया गया है और48 निर्माण साइट्स को तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया है। सरकारी एजेंसियाँ भी नियम तोड़ते मिले—DDA, DSIIDC, MCD, PWD औरDMRC जैसी एजेंसियों पर ₹1 करोड़ का नोटिस जारी किया गया है। मंत्री सिरसा ने कहा कि नियम सबके लिए समान हैं, चाहे सरकारी विभाग होया निजी कंपनी। रिहायशी इलाकों में गैर–कानूनी इंडस्ट्रीज़ पर अभियान तेज़दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में अवैध तरीके से चल रही इंडस्ट्रीज़ प्रदूषण का बड़ा कारण हैं। DPCC लगातार सर्वे कर इनकी पहचान कर रहाहै। जहाँ भी अवैध यूनिट मिल रही है, उसे तुरंत बंद कराया जा रहा है। सिरसा का कहना है कि दिल्ली की हवा साफ़ रखने के लिए अवैध इंडस्ट्रीज़ कोहर हाल में हटाया जाएगा। सड़क निर्माण, बेहतर सफ़ाई और EV नीति से हवा में सुधार का लक्ष्यदिल्ली में सड़क सुधार और EV को बढ़ावा देना भी इस मुहिम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नवंबर 2025 तक दिल्ली में 4.54 लाख इलेक्ट्रिक वाहनपंजीकृत हो चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में बड़ी वृद्धि है। इसके अलावा 350 नए मिस्ट-स्प्रे सिस्टम लगाए जा चुके हैं, 100 नई मैकेनिकलस्वीपर मशीनें और 1,000 लिटर-पिकर्स जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि दिल्ली की सड़कों पर धूल कम हो सके। खुले में कचरा या बायोमास जलाने पर सख़्त रोक 10,000 इलेक्ट्रिक हीटर वितरितखुले में कचरा या बायोमास जलाना दिल्ली की हवा को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाता है। सरकार ने DPCC की 1,823 टीमें तैनात की हैं, जिनमेंसे 633 टीमें सिर्फ़ ओपन बर्निंग रोकने का काम कर रही हैं। मजदूरों की ठंड को देखते हुए अब तक 3,377 इलेक्ट्रिक हीटर 1,407 RWAs को दिएजा चुके हैं। कुल 10,000 हीटर दिए जा रहे हैं ताकि मजदूर आग न जलाएँ और प्रदूषण न बढ़े। विज्ञान आधारित नीति IIT Delhi और IITM के साथ बड़ा अध्ययन शुरूदिल्ली सरकार वैज्ञानिक तरीकों से प्रदूषण को समझने और रोकने की दिशा में काम कर रही है। जल्द ही IIT Delhi और IITM के साथ नई सोर्सएपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू होगी। इससे यह पता चलेगा कि दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने वाले मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं। इसके आधार पर आनेवाले समय में और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। सरकार ने एक इनोवेशन चैलेंज भी शुरू किया था, जिसमें 278 सुझाव आए हैं। इनमें से 200 समाधान को आगे की समीक्षा के लिए चुना गया है। विशेषज्ञों की समिति इनका मूल्यांकन कर रही है। जनरेटर रेट्रोफिटिंग अनिवार्य उल्लंघन पर भारी जुर्मानादिल्ली में अब कोई भी BS-IV या उससे नीचे का जनरेटर बिना एंटी-पॉल्यूशन डिवाइस के नहीं चलेगा। चाहे वह घरेलू जनरेटर हो या व्यावसायिक—सभी में रेट्रोफिटिंग अनिवार्य है। उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाएगा। पर्यावरण मंत्री सिरसा ने हाल ही मेंसैदुलाजाब वार्ड का निरीक्षण भी किया, जहाँ उन्होंने DMRC की एक निर्माण साइट पर कई खामियाँ पाईं और अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देशदिए। दिल्ली की हवा साफ़ करना सिर्फ़ सर्दियों का काम नहींसिरसा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ़ घोषणाएँ करना नहीं, बल्कि ज़मीन पर वास्तविक बदलाव लाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में पूरेसाल प्रदूषण के खिलाफ़ रणनीति चलेगी। सभी मंत्री, सभी विभाग और पूरी टीमें मैदान में हैं, ताकि दिल्ली की हवा में सुधार नागरिक रोज़ महसूस करसकें।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर 10 दिसंबर से बातचीत शुरू, टैरिफ के मुद्दे को सुलझाने के लिए बनेगा व्यापार ढांचा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर 10 दिसंबर से बातचीत शुरू होगी। यह बातचीत तीन दिन चलेगी। भारत और अमेरिका के बीचव्यापार समझौते के लिए इस बातचीत को अहम माना जा रहा है। दोनों पक्षों की बातचीत 12 दिसंबर तक चलेगी और अभी यह बातचीत काऔपचारिक राउंड नहीं है।अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए दिल्ली आएगा और उसका नेतृत्व अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जरकरेंगे। अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिकी अधिकारियों का व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए यह दूसराभारत दौरा होगा। इससे पहले 16 सितंबर को अमेरिकी अधिकारियों ने भारत का दौरा किया था। इसके बाद 22 सितंबर को केंद्रीय वाणिज्य एवंउद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक दल अमेरिका गया था। इससे पहले मई में भी पीयूष गोयल अमेरिका दौरे पर थे। हाल ही में वाणिज्यसचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि अमेरिका के साथ इस साल ही व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बन जाएगी। मुद्दे को सुलझाने के लिए एक व्यापार ढांचाव्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को टैरिफ से राहत मिल सकती है। भारत और अमेरिका टैरिफ के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक व्यापार ढांचाबनाने और एक पूर्ण व्यापार समझौते पर समानांतर बातचीत कर रहे हैं। अब तक छह राउंड की बातचीत हो चुकी है। इस समझौते का मकसद 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को मौजूदा 191 अरब से दोगुना करके 500 अरब डॉलर करना है। अमेरिका 2024-25 में लगातार चौथे साल भारतका सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बना रहा और दोनों देशों के बीच का व्यापार 131.84 अरब डॉलर रहा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका कीहिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात 6.22 प्रतिशत रहा। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए एक अमेरिकीप्रतिनिधिमंडल जल्द ही भारत आएगा। हाल ही में वाणिज्य सचिव ने एक बयान में कहा है कि इस साल तक व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बनसकती है।