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कांग्रेस में असंतोष की गूंज, पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम का सोनिया गांधी को तीखा पत्र, नेतृत्व पर उठाए गंभीर सवाल

ओडिशा के पूर्व कांग्रेस विधायक मोहम्मद मोकिम ने पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर सोनिया गांधी को एक तीखा पत्र लिखा है। उन्होंने राहुलगांधी की अनुपलब्धता, 83 वर्षीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की नेतृत्व शैली और पार्टी में युवाओं से बढ़ती दूरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।बराबती-कटक से विधायक रह चुके मोकिम ने लिखा कि वह खुद लगभग तीन साल से राहुल गांधी से मिलने में असमर्थ रहे हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगतनहीं, बल्कि पूरे देश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनात्मक दूरी का प्रतीक बताया। कटक के कांग्रेस विधायक मोहम्मद मोकिम के बयान परप्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस विधायक रामचंद्र कदम ने कहा AICC ओडिशा में गठबंधन को लेकर पूरी तरह फोकस कर रही है। ओडिशा की जनताचाहती है कि आने वाले समय में कांग्रेस सत्ता में आए… इसलिए जरूरी है कि पार्टी के सभी नेता एकजुट होकर काम करें। कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती खाईमोकिम ने कहा नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती खाई ने पार्टी को कमजोर कर दिया है। एक विधायक होने के बावजूद मैं तीन साल तकराहुल गांधी से नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के समय में कार्यकर्ताओं को महत्व मिलता था, उनकीसुनी जाती थी, जिससे विश्वास और निष्ठा बनी रहती थी। मोकिम ने लिखा कि देश की 65 फीसदी आबादी युवा है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व युवाओं सेकनेक्ट नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा 83 वर्ष की आयु में खरगे की नेतृत्व शैली से पार्टी युवा वर्ग तक नहीं पहुंच पा रही है। नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहीमोकिम ने पत्र में स्पष्ट लिखा कि देश की युवा आबादी प्रियांका गांधी के नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रही है। उन्हें केंद्रीय और सक्रिय भूमिका मिलनीचाहिए। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में पार्टी का नेतृत्व सचिन पायलट, डीके शिवकुमार और शशि थरूर जैसे ऊर्जावान नेताओं को मिलनाचाहिए। पत्र में मोकिम ने उन युवा नेताओं का भी उल्लेख किया, जो लंबे समय तक सुने न जाने और लगातार नजरअंदाज किए जाने की वजह सेकांग्रेस से अलग हो गए। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, हिमंत बिस्वा सरमा और जयवीर शेरगिल जैसे प्रतिभाशाली नेता पार्टीछोड़कर चले गए, जो कांग्रेस के भीतर बढ़ रही गहरी असंगति और असंतोष को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

अमित शाह बोले—अंडमान-निकोबार ‘तपोभूमि’, वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण ऐतिहासिक क्षण

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के ‘सागरा प्राण तळमळला’ गीत के 115 वर्ष पूर्ण होने पर अंडमान और निकोबार के श्रीविजयपुरम में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। अमित शाह ने इस दौरान कहा कि अंडमान और निकोबार सिर्फ द्वीपों की एक श्रृंखला नहीं है। यहअसंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, समर्पण और देशभक्ति से बनी एक ‘तपोभूमि’ है। सावरकर की कविता 115 वर्ष पूरे होने पर गृह मंत्री ने कहा, ‘हम सब एक पवित्र भूमि पर एकत्रित हुए हैं। स्वतंत्रता से पहले, कोई भी यहां अपनी मर्जी से नहीं आता था। जिन्हें भी यहां लाया जाता था, उनकापरिवार उन्हें भूल जाता था। उस दौर में, कोई यह नहीं सोचता था कि ‘काला पानी’ में सजा काटने के बाद कोई वापस लौट भी सकता है।’ मन और आत्मा इतनी कमजोरउन्होंने आगे कहा, ‘जब तक वे लौटते, उनका शरीर, मन और आत्मा इतनी कमजोर हो जाती थी कि वे कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते थे। लेकिनआज, यह सभी भारतीयों के लिए एक तीर्थस्थल है क्योंकि वीर सावरकर ने अपने जीवन के सबसे कठिन वर्ष यहीं बिताए।’ अमित शाह ने कहा, ‘यहांकई लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। मैंने सेलुलर जेल के रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया है; केवल दो ही ऐसे प्रांत हैं जिनके स्वतंत्रतासेनानियों को यहां फांसी नहीं दी गई।’ तपोभूमि’ पर वीर सावरकर की आदमकद प्रतिमाउन्होंने कहा, ‘यह एक बहुत बड़ा अवसर है। इस ‘तपोभूमि’ पर वीर सावरकर की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण मोहन भागवत ने किया, जो उससंगठन के सरसंघचालक हैं जो सही मायने में सावरकर की विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। यह एक पवित्र भूमि है, वीर सावरकर की प्रतिमा भी पवित्रहै और मोहन भागवत के हाथों से इसका अनावरण और भी श्रेष्ठ है।’ उन्होंने कहा, ‘जब आजाद हिंद फौज ने भारत को आजाद कराने का प्रयास कियातो सबसे पहले अंडमान-निकोबार को ही आजाद कराया। यहां सुभाष चंद्र बोस दो दिन तक रुके थे। उन्होंने कहा कि बोस ने ही इन दोनों द्वीपों कोशहीद और स्वराज नाम देने का सुझाव दिया था। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमीन पर उतारा।’

रोहिणी आचार्य के समर्थन में उतरे तेज प्रताप यादव, बिहार की कानून–व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपनी बहनरोहिणी आचार्य के बयान का खुलकर समर्थन किया है। रोहिणी आचार्य के द्वारा सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद, तेज प्रताप ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राजद के कुछ करीबी लोगों पर दुर्व्यवहारहाल ही में, रोहिणी आचार्य ने कथित तौर पर राजद के कुछ करीबी लोगों पर दुर्व्यवहार और अपमान का आरोप लगाते हुए सुरक्षा की मांग की थी।इस पारिवारिक विवाद ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी थी। इसको लेकर रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप भी लगाए थे। फिर रोहिणी ने पार्टी और परिवार दोनों से नाता तोड़ लिया और मीडिया में आकार स्पष्ट रूप से इसका सारा ठीकरा तेजस्वी यादव पर फोड़ा था। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि मेरे मायके में यह सब कुछ सारे घर के बाकी सदस्य देखते रह गए लेकिन किसी ने भीतेजस्वी यादव के खिलाफ आवाज नहीं उठाई। स्थिति ऐसी हो गई कि तेजस्वी यादव मीडिया के सामने भी आने से कतराने लगे। यहां तक कि पार्टीके विधायकों के द्वारा नेता प्रतिपक्ष घोषित किए जाने के बाद भी तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से मुलाकात नहीं की और सवालों के डर से बचते नजरआए थे. समर्थन में पहले भी आवाज उठायी थीतेज प्रताप यादव ने रोहिणी आचार्य के समर्थन में पहले भी आवाज उठायी थी। उन्होंने कहा था कि हमारी बहन का जो अपमान करेगा उस पर अबकृष्ण का सुदर्शन चक्र चलेगा। इसके बाद गुरूवार को फिर रोहिणी आचार्य ने राजद अध्यक्ष लालू यादव के ‘परिवार’ पर वार करते हुए बेटियों के अधिकार पर सवाल खड़ा किया, जिसके बाद तेज प्रताप यादव ने रोहिणी आचार्य का समर्थन करते हुए कहा कि, “अगर मेरी बहन रोहिणी ने सुरक्षा की मांग की है, तो सरकार को तुरंत उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए”। तेज प्रताप यादव ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अपनी बहन के साथमजबूती से खड़े हैं और उनके समर्थन में आवाज उठाते रहेंगे। तेज प्रताप ने जोर देकर कहा कि बहन का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहाकि स्थिति इतनी चिंताजनक है कि “वे स्वयं यहां सुरक्षित महसूस नहीं करते”। तेज प्रताप ने सरकार से कानून-व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान देने कीअपील की।

तमिलनाडु में कार्तिगई दीपम विवाद पर संसद में घमासान, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने सरकार पर साधा निशाना

तमिलनाडु के मदुरै जिले में तिरुपरमकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में कार्तिगई दीपम त्योहार को लेकर उठा बवाल अबबढ़ता जा रहा है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को संसद में इस मुद्दे पर तमिलनाडु सरकार को घेरा। सांसद ठाकुर ने कहा, ‘भारत का एकराज्य सनातन धर्म-विरोध का चेहरा बन गया है। इस राज्य के मंत्रियों ने सनातन धर्म के खिलाफ बयान दिए हैं।’ अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाते हुएकहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तो तमिलनाडु के मंदिरों में इसके प्रसारण पर रोक लगा दी गई थी। मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिएभाजपा सांसद ने दावा किया कि इस दौरान मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ लोगों को कोर्ट का रुख करने केलिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। ठाकुर ने कहा किमदुरै पीठ ने ‘कार्तिगई दीपम’ को लेकर जारी निर्देशों को अधिकारियों की ओर से जानबूझकर पालन न करने के आरोप लगाए। लाठियां बरसाई गईंउन्होंने कहा, ‘हिंदू श्रद्धालुओं पर लाठियां बरसाई गईं। कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें महादीपम जलाने के अनुमति नहीं दी गई। मेरा सवाल है किपुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश क्यों नहीं माने? हिंदुओं को क्यों रोका गया?’ अनुराग ठाकुर ने कहा कि तमिलनाडु सरकार की ओर से हाईकोर्ट के निर्देशकी अवमानना की गई। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मामला हो या कार्तिगई दीपम का तमिलनाडु सरकार की ओर से हिंदू श्रद्धालुओं को क्यों रोकाजाता है?

असम में दो बड़े मामले सुर्खियों में: अली तौकीर शेख केस केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की तैयारी, जुबिन गर्ग मौत मामले में SIT ने दायर की12,000 पन्नों की चार्जशीट

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को दो बड़े मामलों पर महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीरशेख मामले को जल्द ही केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जाएगा। वहीं, जुबिन गर्ग मौत मामले में एसआईटी ने लगभग 12,000 पन्नों की चार्जशीटअदालत में दायर कर दी है। सीएम सरमा ने कहा कि केस में काफी जटिलताएं हैं, इसलिए राज्य की SIT अकेले पूरी सच्चाई सामने नहीं ला पाएगी।उन्होंने कहा जुबिन गर्ग केस के नियमित ट्रायल शुरू होते ही हम अली तौकीर शेख मामले को केंद्रीय एजेंसी को ट्रांसफर कर देंगे। महीने के अंत तकहम कुछ दस्तावेज भी सार्वजनिक करेंगे। अली तौकीर शेख के कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी से कथित लिंक की बात सामने आने के बादमामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप दीबता दें कि विशेष पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) मुन्ना प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में एसआईटी ने औपचारिक रूप से 10 सितंबर को मुख्यमंत्री को रिपोर्टसौंप दी। रिपोर्ट मिलने के बाद, मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार इसकी विस्तार से जांच करेगी और इसे सार्वजनिक करने से पहले मंत्रिमंडल केसमक्ष चर्चा के लिए रखेगी। सरमा ने पहले दावा किया था कि एसआईटी ने पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख की नापाक गतिविधियों में एकब्रिटिश नागरिक जिसने एक भारतीय सांसद से शादी की है की संलिप्तता स्थापित की है। उन्होंने दावा किया था कि जांच से यह भी पता चलता है किकैसे पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्रालय ने असम के एक सांसद की अपने देश में यात्रा को सुगम बनाया। गोगोई ने पूर्व में दावा किया था कि मुख्यमंत्रीद्वारा लगाए गए आरोप बॉलीवुड की किसी सी-ग्रेड फिल्म की तरह हैं, जो फ्लॉप हो जाएगी क्योंकि असम के लोग सब कुछ समझते हैं।

एनआईए ने अमेरिका से लौटे अनमोल बिश्नोई को गिरफ्तार, पटियाला हाउस कोर्ट में भेजा न्यायिक हिरासत में

पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष एनआईए न्यायाधीश ने अनमोल बिश्नोई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनके खिलाफ खतरे की आशंका कोदेखते हुए उन्हें वर्चुअल माध्यम से अदालत में पेश किया गया।गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई और उसके करीबी अनमोल बिश्नोई को अमेरिका सेलौटने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि अनमोल को अमेरिका ने मंगलवार को भारत डिपोर्ट कर दियाथा। इसके बाद दिल्ली पहुंचते ही एनआईए ने उसे पकड़ लिया। मिलकर काम करतेबिश्नोई गिरोह के विभिन्न सहयोगियों के साथ मिलकर काम करते हुए अनमोल ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के लिए अमेरिका से आतंकवादी सिंडिकेटचलाना और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना जारी रखा। इसके लिए उसने जमीनी स्तर पर उसके गुर्गों का इस्तेमाल किया। जांच से पताचला है कि अनमोल बिश्नोई ने गिरोह के शूटरों और जमीनी गुर्गों को आश्रय और रसद सहायता प्रदान की थी। वह अन्य गैंगस्टरों की मदद से विदेशीधरती से भारत में जबरन वसूली में भी शामिल था। मामले में आरोपीएनआईए, आतंकवादियों, गैंगस्टरों और हथियार तस्करों के बीच गठजोड़, जिसमें उनका बुनियादी ढांचा और धन स्रोत शामिल हैं, को नष्ट करने केअपने प्रयासों के तहत, आरसी 39/2022/एनआईए/डीएलआई (लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व में आतंकवादी-गैंगस्टर षड्यंत्र मामला) मामले की जांचजारी रखे हुए है। अनमोल बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में आरोपी है। सलमान खान के घर हुई फायरिंग और सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस से भीउसका कनेक्शन है।

जय राम रमेश का आरोप, पीएम मोदी और टीम ने इतिहास की किताबें पढ़ी ही नहीं “जानें क्या है पूरा मामला”

वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा और राज्यसभा में हुई चर्चा के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी ने गुरुवारको कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी टीम वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर सदन में हुई चर्चा में पूरी तरह बेनकाब औरगलत साबित हुई।कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रभारी जय राम रमेश ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में वंदे मातरम् पर तीन दिन तक चर्चाहुई। उन्होंने बताया कि चर्चा में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान पर भी चर्चा हुई। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनकी टीम ने दो प्रमुखइतिहासकारों द्वारा लिखी गई किताबें, रुद्रांगसु मुखर्जी की ‘भारत का गीत: राष्ट्रगान का एक अध्ययन’ और सब्यसाची भट्टाचार्य की ‘वंदे मातरम’ पढ़ीही नहीं हैं। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इतना उम्मीद करना ही बेकार है कि वे अपने झूठों के बेनकाब होने के बाद भी इसे पढ़ें। इसके साथ ही कांग्रेसनेता ने पहले इतिहासकार सुगता बोस के हवाले से बताया कि 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर ही पार्टी ने तय किया था कि राष्ट्रीय सभाओं मेंकेवल वंदे मातरम् का पहला भाग ही गाया जाएगा।’ प्रमुख इतिहासकारों की किताबें पढ़ी ही नहींरमेश ने कहा कि ये बातें मोदी सरकार की झूठी दलीलों को और उजागर करती हैं। इतना हीं नहीं रमेश ने यह भी कहा कि बहस का उद्देश्य पहलेप्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और स्वतंत्रता सेनानियों जैसे रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान करना था। गौरतलब है कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ परचर्चा में भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों ने राष्ट्रीयता, इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर अपनी-अपनी राय रखी। लोकसभा में सोमवार कोचर्चा शुरू हुई, जबकि राज्यसभा में यह बहस मंगलवार और बुधवार को चली। इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। हालांकि दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नेहरू ने वंदे मातरम् को धोखादिया, क्योंकि उन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना की आपत्ति के चलते इसे पूरा गाने से रोका और साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दिया। वंदे मातरम के150 साल पूरे होने पर लोकसभा और राज्यसभा में हुई तीन दिन की चर्चा के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। महासचिव जय राम रमेश नेकहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पूरी टीम बेनकाब और गलत साबित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने प्रमुख इतिहासकारों की किताबें पढ़ीही नहीं।

पुतिन की भारत यात्रा पर अमेरिकी संसद में बहस, ट्रंप की व्यापार नीति पर सवाल

अमेरिका और भारत के व्यापारिक संबंध ट्रंप की टैरिफ नीति के चलते बहुत बेहतर नहीं है। ऐसे में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौराअमेरिका में खूब चर्चा में है। इतना ही नहीं इस दौरे को आधार बनाकर विशेषज्ञ और अमेरिकी सांसद ट्रंप की व्यापार नीतियों को लेकर कई कठोरसवाल भी पूछते नजर आ रहे हैं। इस बात को ज्यादा हवा तब मिली जब डेमोक्रेट सांसद सिडनी कैमलेगर-डव ने पहले तो पुतिन और पीएम मोदी कीकार वाली सेल्फी को अमेरिकी संसद में बड़ा सा पोस्ट बनाकर दिखाया, फिर भारत और रूस के संबंध में बढ़ती नजदीकियां और अमेरिका और भारतके संबंध में खटास का जिक्र करते हुए ट्रंप और उनकी व्यापारिक नीति की खूब आलोचना भी की। भारत साझेदारी को फिर से मजबूत किया जा सकेडेमोक्रेट सांसद सिडनी कैमलाजर डोव ने संसद में संबोधन के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में आई तल्खियों को लेकर ट्रंप को जिम्मेदारबताया। साथ ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का भी जिक्र किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की कार वालीसेल्फी का बड़ा सा पोस्ट भी दिखाया। अमेरिकी सांसद कैमलेगर डव ने पुतिन और पीएम मोदी की सेल्फी का जिक्र करते हुए कहा कि यह तस्वीरहजारों शब्दों के बराबर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जबरदस्ती वाली नीतियों का भारी मूल्य चुकाना पड़ता है। उन्होंनेचेताया कि ट्रंप की नीतियों ने अमेरिका के रणनीतिक साझेदारों को हमारे प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेल दिया। डव ने इस बात पर जोर दिया कि हमे तुरंतकार्रवाई करनी होगी ताकि अमेरिका और भारत साझेदारी को फिर से मजबूत किया जा सके। इन मुद्दों का तुरंत समाधान नहीं हुआइस दौरान सांसद प्रमिला जयापल ने व्यापार और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के कारण भारत-अमेरिका आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों पर पड़रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में लगे टैरिफ कारोबार और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सांसद जयापल कीयह टिप्पणी ट्रंप के हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने भारत से चावल के आयात पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोपलगाया कि भारत अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचाते हुए सस्ते चावल निर्यात कर रहा है। इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद पैकेज की घोषणा भी की। बता दें कि बैठक में कई अमेरिकी किसानों ने शिकायत की कि भारत, वियतनाम और थाईलैंड सेसस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतें घट रही हैं। ट्रंप ने कहा कि इस समस्या का समाधान करने के लिए वे अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार करेंगे।कुल मिलाकार सांसदों का मानना है कि अगर इन मुद्दों का तुरंत समाधान नहीं हुआ, तो दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक सहयोग परनकारात्मक असर पड़ सकता है।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि,जनसेवा और संविधान की गहरी समझ के लिए याद किया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके साथ ही कहा कि संविधान कीउनकी गहन समझ ने सार्वजनिक पदों पर उनके कार्यकाल को परिभाषित किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट एक संदेश में कहा, “भारत के पूर्व राष्ट्रपतिप्रणब मुखर्जी जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। जनसेवा के प्रति समर्पित नेता मुखर्जी जी की संविधान की गहरी समझ ने सार्वजनिक पदों पर उनकेकार्यकाल को परिभाषित किया। उनका जीवन और कार्य हमारी लोकतांत्रिक यात्रा को प्रेरित करते रहेंगे।” इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने भी प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की दूरदृष्टि भारतीय लोकतंत्र के लिए एकअमूल्य धरोहर है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कियाकि पूर्व राष्ट्रपति ‘भारत रत्न’ प्रणब मुखर्जी की जयंती पर, उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि,” मुख्यमंत्री ने आगेकहा, “उनकी दूरदृष्टि, सादगी और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अमूल्य संपत्ति है।” सार्वजनिक पदों पर उनके कार्यकाल को परिभाषित कियाएक दिग्गज राजनेता, मुखर्जी ने भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। अपने लंबे और गौरवशाली राजनीतिक जीवन में उन्होंने विभिन्न समयोंपर विदेश, रक्षा, वाणिज्य और वित्त मंत्री सहित कई अन्य पदों पर भी कार्य किया। मुखर्जी ने 2012 से 2017 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप मेंकार्य किया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के रूप में, उन्होंने भारत सरकार में कई मंत्री पद भी संभाले। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को पूर्वराष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया। इसके साथ ही कहा कि संविधान की उनकी गहन समझ ने सार्वजनिक पदों परउनके कार्यकाल को परिभाषित किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मणिपुर दौरा शुरू, महिलाओं के संघर्ष को करेंगी याद “नागरिक स्वागत और ऐतिहासिक कार्यक्रमों में लिया हिस्सा”

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार से मणिपुर का दो दिवसीय दौरा शुरू करेंगी। इस दौरान वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ महिलाओं के संघर्ष कोयाद करने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगी और संभवत मणिपुर के प्रसिद्ध श्री गोविंदाजी मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगी। यह राष्ट्रपति मुर्मू का पहलादौरा है, जब से वे भारत की राष्ट्रपति बनी हैं। उनका दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सितंबर 2025 में मणिपुर दौरे के तीन महीने बाद हो रहा है। राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मू सबसे पहले दोपहर में इंफाल पोलो ग्राउंड में युवा मामले और खेल विभाग द्वारा आयोजित पोलो कार्यक्रम में शामिल होंगी। इसके बाद वेसंभवतः श्री गोविंदाजी मंदिर में पूजा करेंगी, जो मणिपुर में वैष्णव धर्म का प्रमुख केंद्र है। शाम को वे सिटी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नागरिक स्वागतसमारोह में भाग लेंगी और रात को लोक भवन में ठहरेंगी। पोस्टर और अस्थायी प्रवेश द्वार भी लगाए गएवहीं बात अगर दूसरे दिन की करें तो शुक्रवार को वे नूपी लान समारोह में शामिल होंगी। यह समारोह हर साल महिलाओं द्वारा 1904 और 1939 मेंब्रिटिश शासन के खिलाफ किए गए आंदोलनों की याद में मनाया जाता है। इसके अलावा वे नागा बहुल सेनापति जिले में आयोजित कार्यक्रम में भीशामिल हो सकती हैं। राष्ट्रपति दौरे के चलते मणिपुर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कारण है कि कई आंतरिक सशस्त्र संगठन और प्रतिबंधित समूहों नेराष्ट्रपति दौरे के विरोध में बंद बुलाया है। इस कारण इंफाल घाटी में बाजार, स्कूल-कॉलेज बंद हैं और सड़कें सुनसान हैं। राष्ट्रपति के दौरे वाले स्थानोंपर कई पोस्टर और अस्थायी प्रवेश द्वार भी लगाए गए हैं। NRC के कार्यान्वयन पर भी जोरमणिपुर के मीतेई संगठन अरंबाई टेंगोल (एटी) ने राष्ट्रपति से अंतरविभागीय विस्थापितों की समस्या उठाने और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि कई विस्थापित परिवार केंद्र सरकार की योजनाओं के बावजूद कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं।उन्हें सभी अधिकारों और लाभों की निष्पक्ष और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने अवैध सीमा पार आंदोलन और NRC केकार्यान्वयन पर भी जोर दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज से दो दिन के मणिपुर यात्रा पर जा रही है। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला यात्रा है।आइए जानते हैं इस यात्रा के दौरान वह कौन-कौन से कार्यक्रम में शामिल होंगी।