देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या पर सियासी घमासान, राहुल गांधी ने बताया ‘नफरती अपराध’, कपिल सिब्बल ने सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इसे ‘नफरती अपराध’ करार देते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एंजेल चकमा की हत्या की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोमवार को भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने नफरत को सामान्य बना दिया है, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। खिलाफ आवाज उठाने की अपील भीइसको लेकर राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह नफरत का एक भयावह उदाहरण है। नफरत रातों-रात पैदा नहीं होती, बल्कि इसे रोज बढ़ावा दिया जा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि हमारे युवाओं को जहरीले कंटेंट और गैर-जिम्मेदार कहानियों के जरिए प्रभावित किया जा रहा है, जिससे ऐसी हिंसा को समाज में सामान्य बनाया जा रहा है। भारत की नींव सम्मान और एकता पर टिकी है, डर और नफरत पर नहीं। हम विविधता और प्रेम का देश हैं। हमें एक ऐसा मूक दर्शक समाज नहीं बनना चाहिए जो अपने ही साथी भारतीयों को निशाना बनते देखे और चुप रहे। आज हमें यह सोचने की जरूरत है कि हम अपने देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं। मेरी संवेदनाएं चकमा परिवार और त्रिपुरा सहित पूरे उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ हैं। हमें आपको अपना भारतीय भाई-बहन कहने पर गर्व है।” वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे नफरत भरे अपराधों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “एंजेल चकमा की हत्या नफरत भरे अपराध और कट्टरता का एक चौंकाने वाला उदाहरण है। यह मामला सरकार और उन नेताओं की चुप्पी का सबूत भी है, जो अपनी निष्क्रियता से इसमें शामिल हैं।’ सिब्बल ने गृह मंत्री अमित शाह से नफरत भरे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की। खुद मणिपुर का रहने वालापुलिस के मुताबिक, यह घटना 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई बाजार में हुई थी। त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल का कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था। इस दौरान आरोपियों ने उन पर चाकू और पीतल के नकल से हमला किया। इस हमले में 24 वर्षीय एंजेल चकमा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद 26 दिसंबर को अस्पताल में इलाज के दौरान एंजेल की मौत हो गई। एंजेल के पिता तरुण चकमा, जो सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में तैनात हैं, ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके बेटे को ‘चीनी मोमो’ कहकर नस्लीय गालियां दीं। जब एंजेल ने विरोध करते हुए कहा कि वह भी भारतीय है, तो उस पर हमला कर दिया गया। हालांकि, पुलिस ने नस्लीय हमले के एंगल से इनकार किया है। देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने तर्क दिया कि आरोपियों में से एक खुद मणिपुर का रहने वाला है।
असम दौरे पर अमित शाह का बड़ा बयान,1 लाख बीघा जमीन घुसपैठियों से मुक्त, शंकरदेव की धरती को अतिक्रमण से कराया आज़ाद

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को असम के एक दिन के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले असम के नगांव जिले में वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान बटाद्रवा का उद्घाटन किया। बटाद्रवा को 227 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकसित किया गया है। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और पवित्र मार्गेरिटा और राज्य के संस्कृति मंत्री बिमल बोरा मौजूद रहे। गृह मंत्री ने असम दौरे की शुरुआत गुवाहाटी में ‘शहीद स्मारक क्षेत्र’ में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। इसके बाद बटाद्रवा पहुंचने पर गृह मंत्री का ‘गायन-बयान’ (गायक और ढोल वादक) द्वारा पारंपरिक स्वागत किया गया। शाह ने संत शंकरदेव के जन्मस्थल का पुनर्विकास के बाद उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद शाह केंद्रीय भवन में भी गए जहां ‘गुरु आसन’ (पूजनीय संत की सीट) रखी है। ‘महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव आविर्भाव क्षेत्र’ नाम की इस जगह को फिर से विकसित करने का फैसला सबसे पहले 2021-22 के राज्य बजट में प्रस्तावित किया गया था। ज्यादा जमीन खाली करवाईइस परियोजना को न केवल ऐतिहासिक स्थल बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने के लिए भी डिजाइन किया गया है। यहां महापुरुष शंकरदेव से जुड़े जीवन, आदर्शों और कलात्मक विरासत और राज्य की व्यापक सांस्कृतिक परंपराओं को भी दर्शाया गया है। सरमा ने कहा कि यह परियोजना (आविर्भाव क्षेत्र), महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की विरासत का सम्मान करते हुए, ‘असम के सत्रों, नामघरों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की हमारी प्रतिबद्धता’ को मजबूत करती है। बोरदुरवा में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव ने ‘एक भारत’ का आह्वान किया था, जिसका अब पीएम नरेंद्र मोदी पालन कर रहे हैं। अमित शाह ने दावा किया कि असम में हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों से 1 लाख बीघा से ज्यादा जमीन खाली करवाई है। हम न सिर्फ असम से बल्कि पूरे भारत से सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करेंगे। उन्होंने कहा, हमने उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौते किए, इन समझौतों की 92% शर्तें पूरी हो चुकी हैं। बसने का कानूनी रास्ता बनायाशाह ने कहा, ‘बीजेपी पूरे देश से सभी घुसपैठियों को हटाने का संकल्प लेती है। क्या यह सही था कि शंकरदेव की इस जगह पर बांग्लादेशी घुसपैठिए थे? मैं हिमंत बिस्वा सरमा को यहां से घुसपैठियों को हटाने और नामघर को फिर से स्थापित करने के लिए बधाई देता हूं। एक लाख बीघा से ज्यादा जमीन घुसपैठियों से आजाद कराई गई है। कांग्रेस ने इतने वर्षों तक राज किया, लेकिन उसने असम आंदोलन में जान देने वालों के लिए कुछ नहीं किया। कांग्रेस पार्टी वर्षों तक घुसपैठियों को आगे बढ़ाती रही और 1983 में आईएमडीटी एक्ट लाकर उन्होंने घुसपैठियों को यहां बसने का कानूनी रास्ता बनाया।’
अरावली पर डबल इंजन सरकार का वार? कांग्रेस का आरोप, नई परिभाषा से 90% अरावली खतरे में, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार पर अरावली पर्वत श्रृंखला को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि सरकार की नीतियों के कारण अरावली का अस्तित्व खतरे में है। कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ खनन ही नहीं, बल्कि जिस तरह से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह अरावली के पहले से तबाह हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र में और तबाही मचाएगा। इसको लेकर कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा ‘ इस समय देश अरावली को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के ताजा निर्देशों का इंतजार कर रहा है। यहां इस बात के और सबूत हैं कि अरावली की नई परिभाषा पहले से ही बर्बाद हो चुके इस पारिस्थितिकी तंत्र में और ज्यादा तबाही मचाएगी। मुद्दा सिर्फ खनन का नहीं है-फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की सिफारिशों के खिलाफ, नई दिल्ली और जयपुर की डबल इंजन सरकार रियल एस्टेट डेवलपमेंट के दरवाजे भी खोल रही है।’ जमीन से 100 मीटर या उससे ज्यादा होमामले में कांग्रेस ने अरावली की नई परिभाषा का विरोध किया। कांग्रेस का आरोप है कि इस नई परिभाषा के लागू होने से अरावली का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह होगा कि इन इलाकों को खनन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खोलकर उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे पर्वत श्रृंखला के अंदर नई खनन लीज न दें। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने भी अरावली की परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद पर खुद संज्ञान लिया है। इस मसले पर आज सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पिछले फैसले पर रोक लगा दी है। इससे पहले 20 नवंबर को शीर्ष अदालत ने अरावली पहाड़ियों और श्रृंखलाओं की एक समान परिभाषा स्वीकार की थी। कोर्ट ने विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले अरावली क्षेत्र में नई खनन लीज देने पर रोक लगा दी थी। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति ने सिफारिश की थी कि अरावली जिलों में किसी भी ऐसी भू-आकृति को ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाए जिसकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे ज्यादा हो। वहीं, ‘अरावली श्रृंखला’ उसे माना जाएगा जहां 500 मीटर के दायरे में ऐसी दो या दो से अधिक पहाड़ियां मौजूद हों।
विजय हजारे ट्रॉफी में फिर दिखेगा विराट कोहली का जलवा, रेलवे के खिलाफ दिल्ली के लिए खेलेंगे तीसरा मैच

भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली विजय हजारे ट्रॉफी में एक और मैच खेलेंगे। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने सोमवार को बताया कि कोहली रेलवे के खिलाफ छह जनवरी को होने वाले मैच में दिल्ली के लिए खेलेंगे। मालूम हो कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने केंद्रीय अनुबंध हासिल करने वाले सभी खिलाड़ियों के लिए विजय हजारे ट्रॉफी के कम से कम दो मैचों में भाग लेना अनिवार्य किया था। कोहली विजय हजारे ट्रॉफी के दो मैचों में हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन वह न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले दिल्ली के लिए तीसरा मैच भी खेलना चाहते हैं। डीडीसीए के अध्यक्ष रोहन जेटली ने न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में कहा, ‘फिलहाल वह खेल रहे हैं। विराट ने तीन मैचों के लिए अपनी उपलब्धता की पुष्टि की है।’ कोहली दिल्ली के लिए शुरुआती दो मैचों में शानदार लय में थे। उन्होंने क्रमशः 131 और 77 रन बनाए। अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीजकोहली ने इस दौरान लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे कम पारियों में 16,000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड भी कायम किया। कोहली ने 330वीं पारी में इस मुकाम को हासिल कर दिग्गज सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया था। तेंदुलकर ने 391 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी। बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया कि न्यूजीलैंड सीरीज के लिए भारतीय वनडे टीम आठ जनवरी तक वडोदरा में पहुंचेगी, लेकिन कोहली अभ्यास के लिए एक दिन पहले यहां पहुंच सकते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज 11 जनवरी को इसी मैदान पर शुरू होगी। इसके लिए फिलहाल टीम घोषित नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि जनवरी के पहले सप्ताह में भारतीय टीम का एलान हो सकता है। कोहली इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में खेले थे।
पिंपरी-चिंचवाड़ चुनाव में पवार परिवार की एकजुटता, अजित पवार का ऐलान—NCP और NCP(SP) साथ आए, ‘परिवार फिर एक हुआ

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनाव के लिए अपनी पार्टी एनसीपी और अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के बीच गठबंधन की घोषणा की है। गठबंधन का एलान करते हुए अजित पवार ने कहा कि परिवार एक साथ आ गया है। अजित पवार ने यह एलान तब किया, जब वह रविवार को 15 जनवरी को होने वाले चुनावों के लिए प्रचार करने के लिए पिंपरी-चिंचवाड़ में थे। अजित पवार ने जनसभा के दौरान कहा, ‘पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों के लिए घड़ी और तुतारी (तुरही) एक साथ आ गए हैं। परिवार एक साथ आ गया है।’ पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कड़ी मेहनत करने और रैलियों के दौरान कोई भी विवादित टिप्पणी करने से बचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘हम ही हैं जो विकास के लिए काम करते हैं। हम उन लोगों को बाहर कर देंगे जिन्होंने इस नगर निगम को कर्ज में डालने की कोशिश की।’ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में व्यस्तअजित पवार ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘गठबंधन को लेकर लोगों के मन में सवाल हो सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के विकास के हित में कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं। दोनों पक्षों के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा हो चुकी है और इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी।’ इस बीच, पुणे नगर निगम चुनावों के लिए भी दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है। इससे पहले दिन में, पवार परिवार बारामती में था, जहां उद्योगपति गौतम अडानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया। पिंपरी-चिंचवाड़ और पुणे नगर निकायों सहित महाराष्ट्र भर के 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे, और वोटों की गिनती अगले दिन होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 दिसंबर है। कुछ समय पहले अजित पवार और शरद पवार के बीच तनातनी थी और दोनों ही गुट एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में व्यस्त थे, लेकिन अब निकाय चुनाव के लिए दोनों पार्टियां साथ आ गई हैं। अजित पवार ने एलान किया कि परिवार साथ आ गया है।
डॉक्टरों की वापसी पर बोले CM सुक्खू, करियर खराब नहीं करेगी सरकार, मनरेगा नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस का सत्याग्रह

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने डॉक्टरों के वापस काम पर आने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राघव नरूला का टर्मिनेशन रिव्यू करने के लिए नई कमेटी का गठन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी डॉक्टर का करियर खराब नहीं करना चाहती है। टर्मिनेशन सरकार ने नहीं, बल्कि हॉस्पिटल की रिपोर्ट के आधार पर विभाग की ओर से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में भाजपा ने सिर्फ राजनीति की। भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी में सिर्फ राजनीति की। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक विधायक इस पूरे मामले में डॉक्टर के साथ जबकि दूसरा विधायक के मरीज के साथ देता नजर आया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के हित में काम कर रही है। सरकार किसी का भी बुरा नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों पर तो कोई प्रतिक्रिया देने का अर्थ ही नहीं है, क्योंकि वे रोज़ाना कुछ न कुछ कहते ही रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों के वापस काम पर लौटने से आम जनता को राहत मिलेगी। मनरेगा योजना से उन्होंने महात्मा गांधी का नाम हटा दियाकेंद्र सरकार की ओर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने के विरोध में सोमवार को कांग्रेस ने शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। शिमला में रिज पर लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार समेत अन्य मंत्रियों और विधायकों ने शांतिपूर्वक धरना देकर विरोध दर्ज करवाया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा बदले की भावना के साथ-साथ बदलने की भावना से काम कर रही है। भाजपा सरकार देश के इतिहास से छेड़छाड़ कर रही है। कांग्रेस के शासनकाल में शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को नाम बदलने के साथ उनमें संशोधन करके कमजोर करने का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना भाजपा की संकीर्ण सोच को दर्शाता है मनरेगा का सिर्फ नाम ही नहीं बदला, बल्कि इसकी गारंटी को भी सरकार ने खत्म कर दिया है। केंद्र सरकार देश से महात्मा गांधी की पहचान मिटाने का काम कर रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के समय में शुरू मनरेगा योजना से उन्होंने महात्मा गांधी का नाम हटा दिया। कांग्रेस को जब शासन चलाना नहीं आताउपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है। केंद्र सरकार को गांधी सरनेम से दिक्कत है, इसलिए मनरेगा का नाम बदला गया। यह कानून गरीबों को कुचलने और उन्हें दबाने के लिए है। मनरेगा सिर्फ योजना नहीं थी, यह अधिकारों का सिद्धांत था। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने शिमला के रिज मैदान पर कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा मनरेगा को लेकर किए गए धरने को पूरी तरह झूठ, भ्रम और राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। सत्ती ने कहा कि कांग्रेस को जब शासन चलाना नहीं आता, तो वह तथ्यों को तोड़–मरोड़ कर जनता को गुमराह करने के लिए धरनों का सहारा लेती है।
मनरेगा से VB-G RAM-G अधिनियम में बदलाव पर संसदीय समिति की चिंता, छह महीने के ट्रांजिशन पर उठे सवाल

एक संसदीय समिति ने सोमवार को यूपीए सरकार में लागू हुई ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के विभिन्न पहलुओं की जांच की। इस योजना को अब मोदी सरकार ने अधिनियम के जरिये विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) में बदल दिया है। संसदीय समिति ने यह भी विचार किया कि नए कानून में सुचारू रूप से परिवर्तन के लिए अगले छह महीनों में क्या किया जाए। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति के ज्यादातर सदस्य इस बात को लेकर चिंतित थे कि अगले छह महीनों में सरकार की ओर मनरेगा से वीबी-जी राम जी अधिनियम में कार्य नीतियों को स्थानांतरित करने के दौरान यह परिवर्तन कैसे होगा। इस अवधि के दौरान लाभार्थियों को भुगतान कैसे किया जाएगा और अतिरिक्त बजटीय सहायता की व्यवस्था कैसे की जाएगी। शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के जोरदार विरोधसूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान किसी भी सदस्य ने वीबी-जी राम जी अधिनियम का विरोध नहीं किया। हालांकि उनमें से कई ने चिंता जताई की कि पुराने कानून के तहत कई राज्यों में नामांकन केवल लगभग 50 प्रतिशत था। सदस्यों ने यह भी कहा कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम को लागू करने में कम से कम छह महीने लगेंगे, क्योंकि इसे नियमों के तैयार होने के बाद ही लागू किया जाएगा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2005 में पारित किया था। विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) विधेयक को हाल ही में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच संसद में पारित किया गया। नए अधिनियम में ग्रामीण श्रमिकों के लिए 125 दिनों के मजदूरी रोजगार का प्रावधान है। विकास का समाधान नहीं कर पा रहासोमवार को हुई संसदीय समिति की बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई प्रणाली और ढांचा कैसा होगा। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के कुछ सदस्यों ने स्वीकार किया कि मनरेगा में कुछ कमियां थीं, जिनके लिए समिति ने पहले कुछ सिफारिशें की थीं। कुछ विपक्षी सदस्यों ने कहा कि उन्होंने पहले कार्य दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 करने का सुझाव दिया था। सूत्रों के अनुसार उन्होंने यह भी मांग की कि वीबी जी राम जी अधिनियम के नियम तैयार करते समय समिति की ओर से पहले की गई सभी सिफारिशों पर विचार किया जाना चाहिए। भाजपा सांसदों ने कहा कि नए कानून की जरूरत थी क्योंकि मौजूदा कानून गांवों की मौजूदा समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का समाधान नहीं कर पा रहा था। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान कुछ सांसदों ने वीबी-जी राम जी अधिनियम लाने के कारणों के बारे में बात की।
₹80 हजार करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी, भारतीय सेना की ताकत और निगरानी क्षमता होगी कई गुना मजबूत

2025 भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की युद्धक क्षमता और निगरानी तंत्र को अभूतपूर्व मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद) ने करीब ₹80,000 करोड़ की लागत वाले सैन्य उपकरणों और हथियारों की खरीद के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ प्रदान कर दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों के बीच स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दे रहा है। इस मंजूरी का एक बड़ा हिस्सा आपातकालीन खरीद फ्रेमवर्क के तहत है, जिसका उद्देश्य सेना की तत्काल परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करना है। रिपोर्टों के अनुसार, इस निवेश का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा: इसमें एम्ब्रेयर आधारित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम की खरीद और स्वदेशी ‘नेत्रा’ सिस्टम का एकीकरण शामिल है। इससे हवाई सीमाओं की निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। T-90 टैंकों के ओवरहॉल और आधुनिकीकरण के प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है, जो जमीनी युद्ध क्षमता के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहा है ₹79,000 करोड़ का आवंटन केवल सैन्य मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़े उत्प्रेरक ) के रूप में कार्य करेगा। ‘बाय (इंडियन-IDDM)’ श्रेणी के तहत इन प्रस्तावों को प्राथमिकता मिलने से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और मझगांव डॉक जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों और स्टार्टअप्स को बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के निवेश से डिफेंस सप्लाई चेन में शामिल हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर प्राप्त होंगे। DAC की इस बैठक और संभावित मंजूरी की खबरों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। मिश्रा धातु निगम के शेयरों में लगभग 11% का उछाल आया, जबकि मझगांव डॉक, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और के शेयर भी 2-3% की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में निरंतर पूंजीगत व्यय निवेशकों के भरोसे को और मजबूत कर रहा है।
शशि थरूर के बयान पर कांग्रेस में मतभेद, हनुमंत राव बोले– यह निजी राय, पार्टी की सोच नहीं

पीएम नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बयान को लेकर पार्टी में नई बहस छिड़ गई है, जिसे उनकी ही पार्टी के नेता वी. हनुमंत राव ने कांग्रेसकी सोच से अलग बताया। हनुमंत राव ने कहा कि यह थरूर की निजी राय हो सकती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसा नहीं सोचती। हनुमंत राव ने कहा किकांग्रेस में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, इसलिए हर किसी को अपनी राय रखने की आजादी है। उन्होंने कहा, हमारे यहां लोकतंत्र है, इसलिए लोग अपनेविचार सामने रखते हैं। अगर किसी दूसरी पार्टी में ऐसा बयान दिया जाता, तो तुरंत कार्रवाई होती। यह उनकी सोच हो सकती है, लेकिन पार्टी ऐसानहीं सोचती। उन्हें बहादुर बतायाइससे पहले दोपहर में भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शशि थरूर के बयान की तारीफ करते हुए उन्हें बहादुर बताया। उन्होंने उम्मीद जताई किकांग्रेस थरूर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। पूनावाला ने कहा, एक बार फिर शशि थरूर ने राहुल गांधी को आईना दिखाने का साहस दिखायाहै। उन्होंने कहा कि विदेश नीति किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश की होती है। मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगी।लेकिन हो सकता है कि वे उनके खिलाफ फतवा जारी कर दें, क्योंकि वे राष्ट्रीय हित को पारिवारिक हित से ऊपर नहीं रख पाते।
उत्तरी बेंगलुरु अतिक्रमण कार्रवाई पर सियासी घमासान, डीके शिवकुमार ने पिनरई विजयन को दी दखल न देने की सलाह

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को केरल के मुख्यमंत्री को उत्तरी बंगलूरू में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान में हस्तक्षेप नकरने की सलाह दी। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने शुक्रवार को कर्नाटक की राजधानी में मुस्लिम आवासीय क्षेत्रों को कथित तौर पर ध्वस्तकिए जाने की कड़ी निंदा करते हुए इस कार्रवाई को चौंकाने वाला और पीड़ादायक बताया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा था कि फकीर कॉलोनी औरवसीम लेआउट में वर्षों से रह रहे मुस्लिम परिवारों के घर गिराए जाना दर्दनाक और चौंकाने वाला है। पूरी तरह एक राजनीतिकइस पर प्रतिक्रिया देते हुए डी के शिवकुमार ने कहा, ‘यह पूरी तरह एक राजनीतिक बयान है। बिना तथ्य जाने पिनरई विजयन को हमारे राज्य केमामलों में दखल नहीं देना चाहिए। यह चुनाव के समय किया गया राजनीतिक हथकंडा है।’ शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर झुग्गियां बनीथीं, वह ठोस कचरा प्रबंधन के लिए नौ साल पहले अधिसूचित की गई थी। उन्होंने कहा कि यह जगह एक पुरानी खदान और कचरा डंपिंग साइट है, जो बेहद खतरनाक और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा ‘कुछ लोगों ने रातों-रात अवैध रूप से कब्जा कर लिया। यह जमीन हड़पने कामामला है। इसमें किसी समुदाय को निशाना बनाने की बात बिल्कुल गलत है।’ बुलडोजर का इस्तेमाल नहीं कियाउपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस कार्रवाई में किसी भी तरह के बुलडोजर का इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘हमने सिर्फ सार्वजनिकजमीन की रक्षा की है। यह शहर के बीचों-बीच स्थित कचरा प्रबंधन की जगह है। हम ऐसे अवैध स्लम को बढ़ावा नहीं दे सकते।’ उन्होंने यह भी भरोसादिलाया कि कांग्रेस सरकार मानवीय दृष्टिकोण रखती है और नियमों के तहत पात्र लोगों को वैकल्पिक आवास दिया जाएगा। डीके शिवकुमार ने आगेकहा कि ‘जो लोग वास्तव में जरूरतमंद और पात्र हैं, उन्हें राजीव गांधी आवास योजना के तहत घर दिए जाएंगे। लेकिन बिना कारण सरकारी जमीनपर कब्जा करने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा।’ शिवकुमार के अनुसार, अधिकतर अतिक्रमणकारी बाहरी लोग हैं और कुछ ही स्थानीय हैं। उन्होंनेबताया कि यह इलाका ब्यातरायनपुरा विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा विधायक हैं। उन्होंने कहा, ‘वह वरिष्ठ औरअनुभवी नेता हैं और उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए थे कि किसी भी तरह की भूमि हड़पने की कोशिश न होने दी जाए।’