उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर की गहन जांच, फर्जी प्रविष्टियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

प्रदेश में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च स्तरीय बैठक में सीएम धामी ने प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी के पास सुरक्षित रखे जाने के लिए कहा गया, जिससे अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न हो। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच सीडीओ/ एडीएम स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया। सीएम धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान हो सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अंतर्गत संचालित होतीसीएम धामी ने परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण तथा नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में निहित है, जिसे अब और अधिक सख़्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है। पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए. निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जीएक अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत तथा 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन एवं अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है, जिसके दृष्टिगत प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किए जाने का भी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बांग्लादेश: शरियतपुर में हिंदू व्यापारी खोकन दास को पेट्रोल डालकर जलाया, इलाज के दौरान मौत

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शरियतपुर जिले के बाजार में मेडिकल स्टोर चलाने वाले हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की शनिवार सुबह ढाका के नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट में इलाज के दौरान मौत हो गई। नए साल की पूर्व संध्या पर हमलावरों ने उन पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था। डॉक्टरों के मुताबिक, खोकन दास के शरीर का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था। उनके चेहरे और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था। अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. शौन बिन रहमान ने बताया कि सुबह करीब 7:20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। केउरभांगा बाजार के पास हुईस्थानीय अखबार प्रथम आलो के अनुसार, यह घटना 31 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे दामुदिया उपजिला के कोनेश्वर यूनियन स्थित केउरभांगा बाजार के पास हुई। दुकान बंद कर घर लौट रहे खोकन दास को रास्ते में बदमाशों ने रोका, धारदार हथियारों से हमला किया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग से बचने की कोशिश में खोकन दास पास के तालाब में कूद गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हमलावर फरार हो गए। गंभीर हालत में उन्हें पहले शरियतपुर सदर अस्पताल और फिर ढाका रेफर किया गया था। फूट-फूटकर रोती नजर आईंखोकन दास की पत्नी सीमा दास, गोद में छोटे बच्चे को लिए फूट-फूटकर रोती नजर आईं। उन्होंने कहा मेरे पति रोज की तरह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके पति ने दो हमलावरों को पहचान लिया था, इसी वजह से बदमाशों ने उनकी हत्या की नीयत से पेट्रोल डालकर आग लगा दी। उन्होंने कहा कि परिवार की किसी से दुश्मनी नहीं है और किसी तरह का कोई विवाद भी नहीं था, फिर भी इस तरह का हमला क्यों हुआ, यह समझ से बाहर है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। खोकन दास के रिश्तेदार प्रांतो दास ने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। दामुदिया थाने के प्रभारी मोहम्मद रबिउल हक के अनुसार, पुलिस ने दो आरोपियों रब्बी और सोहाग की पहचान कर ली है। दोनों स्थानीय निवासी हैं और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अन्य संभावित आरोपियों की भी तलाश जारी है।
पढ़ाई पर फोकस: पंजाब सरकार ने 3,000 स्पेशल एजुकेटरों की नियुक्ति की घोषणा, सभी स्कूलों में प्रधानाचार्य होंगे और शिक्षकों को केवल पढ़ाई से जुड़े काम दिए जाएंगे

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारें अपने चहेतों का ही ख्याल रखती थीं और नौकरियां में उन्हीं को तरजीह दी जाती थीं। मौजूदा सरकार ने स्पेशल एजुकेटर के लिए अलग कैडर बनाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अमीर वही माना जाएगा, जिसके बच्चे पढ़े-लिखे होंगे ना कि जिसके पास शोरूम हों या बैंक में पैसा होगा। केवल पढ़ाई से जुड़ा कामसीएम मान ने कहा कि शिक्षकों को केवल पढ़ाई से जुड़ा काम ही देने की बात कही और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर सख्ती करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने पहले 26–27 प्रतिशत तक शिक्षा बजट रखा था। पंजाब के आने वाले बजट में भी शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे। शिक्षा सचिव अनिंदिता मित्रा ने जानकारी दी कि शिक्षा स्तर ऊंचा उठाने के लिए 350 करोड़ रुपये के वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। इसके साथ ही एक साल के भीतर 3,000 स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति की जाएगी. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि राज्य के 28 लाख विद्यार्थियों में से करीब 4 लाख बच्चे पहले जमीन पर बैठते थे, लेकिन अब सभी स्कूलों में बाद बदलाव किया गया है।99.9 प्रतिशत स्कूल परिसरों की बाउंड्री कवर कर दी गई है। स्पेशल एजुकेटर की पदोन्नति की जा रही है, ताकि नए पद बहाल हो सकें। उन्होंने दावा किया कि 100 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल की नियुक्ति होगी। बैंस ने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा 10 हजार करोड़ रुपये रोके जाने के बावजूद ग्रामीण विकास कार्य जारी हैं और सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।
સોશિયલ મીડિયા એપ પર દરેક મુદ્દા ઉપર ભાજપા વિરુદ્ધ પાયાવિહોણી આક્ષેપબાજી કરવી એ જ જમીન સાથેનું જોડાણ ગુમાવી ચૂકેલી કોંગ્રેસનું એકમાત્ર કામ – ડૉ. અનિલભાઈ પટેલ

બગદાણામાં થયેલ ઘટના એ બે વ્યક્તિઓ વચ્ચેનો મામલો છે જે અંગે તંત્ર દ્વારા ફરિયાદના આધારે કાર્યવાહી થઈ રહી છે – ડૉ. અનિલભાઈ પટેલ મુખ્યમંત્રીશ્રી ભુપેન્દ્રભાઈ પટેલ અને નાયબ મુખ્યમંત્રીશ્રી હર્ષભાઈ સંઘવીના નેતૃત્વ હેઠળની ભાજપા સરકાર ગુનેગારોને બક્ષવામાં નહિ, ઝીરો ટોલરન્સ અને ‘ઓનલી પ્રોસિક્યુશન, નો પોલિટિકલ પ્રોટેક્શન’ની નીતિથી ચાલે છે – ડૉ. અનિલભાઈ પટેલ ગુજરાત પ્રદેશ ભાજપા મીડિયા વિભાગની અખબારી યાદી જણાવે છે કે, પ્રદેશ ભાજપના મુખ્ય પ્રવક્તા ડૉ. અનિલભાઈ પટેલે કોંગ્રેસના પ્રદેશ અધ્યક્ષ દ્વારા બગદાણામાં થયેલ ઘટના અંગે સોશિયલ મીડિયા એપ ‘X‘ પર મુકેલ પોસ્ટ અંગે પ્રતિક્રિયા આપતા જણાવ્યું છે કે, કોંગ્રેસની રાજનીતિ માત્ર સોશિયલ મીડિયા એપ પર દરેક મુદ્દા ઉપર ભારતીય જનતા પાર્ટી વિરુદ્ધ પાયાવિહોણી આક્ષેપબાજી કરવા સુધી જ સીમિત થઈ ગઈ છે. વાસ્તવિક રીતે કોંગ્રેસનું જમીન સાથેનું જોડાણ છૂટી ગયું છે, માટે જનતા કોંગ્રેસને સતત જાકારો આપે છે. ડૉ. અનિલભાઈ પટેલે કહ્યું કે, બગદાણામાં થયેલ ઘટના એ બે વ્યક્તિઓ વચ્ચેનો મામલો છે જે અંગે તંત્ર દ્વારા ફરિયાદના આધારે એફ.આઈ.આર નોંધી આગળની કાર્યવાહી કરાઇ રહી છે. બે વ્યક્તિ વચ્ચેના મુદ્દે પણ કોંગ્રેસ રાજનીતિ સાથે જોડી રહી છે. મુખ્યમંત્રીશ્રી ભુપેન્દ્રભાઈ પટેલ અને નાયબ મુખ્યમંત્રીશ્રી હર્ષભાઈ સંઘવીના નેતૃત્વ હેઠળની ભાજપા સરકાર ગુનેગારોને બક્ષવામાં નહિ, કાયદો વ્યવસ્થાના સંદર્ભમાં ઝીરો ટોલરન્સ નીતિ સાથે ગુનેગારને કાયદા આધારિત સજા મળે તેમાં માને છે. ગુનેગાર કોઈપણ હોય, ભાજપા સરકાર ‘ઓનલી પ્રોસિક્યુશન, નો પોલિટિકલ પ્રોટેક્શન’ની નીતિથી ચાલે છે.
इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा” 15 मौतों पर राहुल गांधी का तीखा हमला, PM की चुप्पी पर सवाल

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी की वजह से हुई 15 मौतों के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक्स पर साझा पोस्ट में कहा, ‘इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं – और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की – फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं – ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है। मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है – कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।’ इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाएकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में खरगे ने लिखा, ‘जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाली प्रधानमंत्री मोदी हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं।’ खरगे ने लिखा, ‘इंदौर के पास सबसे साफ शहर का खिताब है, लेकिन भाजपा के निकम्मेपन के चलते लोग साफ पानी के मोहताज हैं।’ खरगे ने बिफरते हुए लिखा, ‘देश 11 साल से खोखले दावे और डबन इंजन की डींगे सुन रहा है। जब मंत्री जी से सवाल पूछा जाता है तो वे गाली गलौज पर उतर आते हैं। उल्टा पत्रकार पर हावी हो जाते हैं। जल जीवन मिशन समेत हर योजना में भ्रष्टाचार और धांधली है। मोदी सरकार देश को न साफ पानी मुहैया करा पा रही है और न ही स्वच्छ हवा। आम जनता भुगत रही है।’ राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एमपी की सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया और साथ ही इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 100 से ज्यादा बीमार, CM मोहन यादव का सख्त एक्शन, साजिश की आशंका

इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। कई अन्य लोग भी बीमार पड़े हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया है। इस गंभीर घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर नगर निगम आयुक्त से जवाब मांगा है, जबकि अपर आयुक्त और प्रभारी अधीक्षण यंत्री पर कड़ा एक्शन लिया है। इधर, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने घटना को लेकर साजिश की आशंका जताई है। वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को लेकर सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा कि आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की। साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकताउन्होंने आगे लिखा कि इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए। इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए। पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि मामले की जांच अभी चल रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इतनी अधिक मौतों का वास्तविक कारण क्या था। उन्होंने यह भी कहा कि केवल गंदे पानी से इतनी मौतें होना संभव नहीं लगता और इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। घटना को लेकर आयुक्त से जवाब मांगाक्षेत्र के संजीवनी क्लीनिक के डॉक्टर जितेंद्र सिलावट ने बताया कि पानी में मौजूद कोई भी बैक्टीरिया आमतौर पर इतना खतरनाक नहीं होता कि उसकी वजह से सीधे मौत हो जाए। उन्होंने कहा कि उल्टी, दस्त और घबराहट के साथ अन्य कारणों से मृत्यु हो सकती है, लेकिन गंदगी में पनपने वाले बैक्टीरिया स्वयं मृत्यु का कारण नहीं बनते। घटना को लेकर विभिन्न स्तरों पर जांच जारी है। प्रशासन और सरकार की ओर से गठित टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 मौतों और 100 से अधिक लोगों के बीमार होने के मामले में जांच जारी है। सीएम मोहन यादव ने घटना को लेकर आयुक्त से जवाब मांगा है और अपर आयुक्त तथा प्रभारी अधीक्षण यंत्री पर एक्शन लिया है। वहीं, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय और पार्षद ने साजिश की आशंका जताई है।
आतंकवाद पर भारत का साफ संदेश: आत्मरक्षा में क्या करना है, यह भारत तय करेगा बोले एस. जयशंकर

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने शुक्रवार को अपने एक बयान में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और कोई भी दूसरा देश ये तय नहीं कर सकता कि भारत अपने बचाव में क्या करेगा और क्या नहीं। आईआईटी मद्रास में आयोजित ‘शस्त्र 2026- आईआईटी मद्रास टेक्नो-एंटरटेनमेंट फेस्ट’ के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा के लिए वो सबकुछ किया जाएगा, जो भी करने की जरूरत होगी। कार्यक्रम के दौरान डॉ. जयशंकर से भारत की विदेश नीति को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ‘आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं। अगर हम पश्चिम की तरफ देखें तो पता चलता है कि दुर्भाग्य से हमारे साथ भी ऐसा है। अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद फैलाता है तो हमारे पास भी आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार मौजूद है और हम उसका इस्तेमाल भी करेंगे, लेकिन ये हम पर है कि हम इसका कैसे इस्तेमाल करते हैं। कोई हमें ये नहीं बता सकता कि क्या करना चाहिए या क्या नहीं। अपनी सुरक्षा के लिए हम वो सबकुछ करेंगे, जो हमें करना चाहिए।’ पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगेविदेश मंत्री ने कहा, ‘कई साल पहले हम जल बंटवारा समझौते पर सहमत हुए थे, लेकिन अगर आप दशकों तक आतंकवाद फैलाते हैं तो ये अच्छे पड़ोस वाली बात नहीं है और अगर आप अच्छे पड़ोसी नहीं है तो आप को इसके फायदे भी नहीं मिलेंगे। आप ये नहीं कह सकते कि कृपया हमारे साथ पानी साझा करें, लेकिन हम आतंकवाद जारी रखेंगे। ये नहीं हो सकता।’ भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ‘जब हम अपने पड़ोसी देशों को देखते हैं, तो जो भी हमारे अच्छे पड़ोसी देश हैं, हम वहां निवेश करते हैं, उन देशों की मदद करते हैं। कोरोना के समय में भी हमारे पड़ोसियों को सबसे पहले वैक्सीन की मदद हमने ही की थी। श्रीलंका भी जब आर्थिक संकट से घिरा तो भारत ने ही उसकी मदद की और उसे चार अरब डॉलर की आर्थिक मदद दी। हमारे अधिकतर पड़ोसी देश ये मानते हैं कि भारत का विकास उनके लिए अच्छा है। अगर भारत विकास करेगा तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगे। यही बात मैं बांग्लादेश के लिए कहना चाहता हूं।’
सोनिया गांधी के पास कैसे पहुंचा मुख्य आरोपी? केरल CM ने अदूर प्रकाश पर उठाए सवाल

सबरीमाला सोना चोरी मामले को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) संयोजक और कांग्रेस सांसद अदूर प्रकाश पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दरअसल, एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, सबरीमला चोरी मामले के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी और अदूर प्रकाश एक साथ नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री विजयन ने पूछा कि पोट्टी, सोनिया गांधी तक कैसे पहुंचा। उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि आरोपी के अदूर प्रकाश से करीबी संबंध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अदूर प्रकाश का नाम इस मामले में तब सामने आया, जब यह तस्वीर सार्वजनिक हुई। विजयन ने कहा कि पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने इस तस्वीर का जिक्र किया था, जिसमें सोनिया गांधी के साथ पथनमथिट्टा से जुड़े दो लोग और उस समय के सांसद अदूर प्रकाश मौजूद थे। सभी लोग एक साथ कैसे इकट्ठा हुएविजयन ने कहा कि सोनिया गांधी के पास खड़े लोगों में से एक पोट्टी था, जो अब इस मामले में मुख्य आरोपी बनकर सामने आया है। कहा गया था कि पोट्टी को वहां ‘लाया गया’ था। सवाल यह है कि उसे पहली बार कहां लाया गया। उस मौके पर पोट्टी अकेला नहीं था, बल्कि उसके साथ अन्य लोग भी थे, जिनमें एक कारोबारी शामिल था, जिसे जांच टीम ने सोना खरीदने वाला व्यक्ति बताया है। मुख्यमंत्री ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि इतने कड़े सुरक्षा घेरे में रहने वाली सोनिया गांधी तक ये दोनों लोग एक साथ कैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि अदूर प्रकाश यह कहते हैं कि उनकी इसमें कोई भूमिका नहीं थी और वे केवल बुलावे पर वहां गए थे। प्रकाश ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर आरोप लगाए थे। विजयन ने सवाल किया कि क्या अदूर प्रकाश ऐसे व्यक्ति हैं जो पोट्टी के बुलाने पर हर जगह पहुंच जाते हैं और आखिर ये सभी लोग एक साथ कैसे इकट्ठा हुए। जांच के असली मुद्दों से ध्यान भटकानायह घटनाक्रम उस दावे के बाद सामने आया, जिसमें कांग्रेस सांसद अदूर प्रकाश ने कहा था कि सबरीमला सोना चोरी मामले में विशेष जांच की ओर से उन्हें पूछताछ के लिए बुलाए जाने से जुड़ी खबरों के पीछे मुख्यमंत्री कार्यालय और विजयन के राजनीतिक सचिव पी. सासी का हाथ है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आरोप बार-बार लगाए जाते हैं और इनका मकसद जांच के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना है।
ईवीएम पर जनता का भरोसा, कर्नाटक सर्वे ने कांग्रेस नेताओं के सवालों को किया खारिज

कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव पर सर्वे में ईवीएम पर जनता ने मजबूत भरोसा दिखाया है। राज्य सरकार की एजेंसी का सर्वे के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। सर्वे का शीर्षक ‘नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार पर किए गए अंतिम सर्वे का मूल्यांकन’ था। इसमें 83.61 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा है। कुल मिलाकर 69.39 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि ईवीएम सही नतीजे देती है, जबकि 14.22 फीसदी ने इस बात से पूरी तरह सहमति जताई। यह सर्वे 5,100 प्रतिभागियों के बीच 102 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। इसमें बंगलूरू, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूर प्रशासनिक क्षेत्रों को शामिल किया गया। सिद्धारमैया सरकार कर्नाटक को पीछे ले जा रहीआंकड़ों में सबसे अधिक भरोसा कलबुर्गी में देखा गया, जहां 83.24 फीसदी ने सहमति और 11.24 फीसदी ने पूरी सहमति जताई कि ईवीएम भरोसेमंद हैं। मैसूर में 70.67 फीसदी ने सहमति और 17.92 फीसदी ने पूर्ण सहमति जताई। बेलगावी में 63.90 फीसदी ने सहमति और 21.43 फीसदी ने पूरी सहमति जताई। बंगलूरू में पूर्ण सहमति सबसे कम 9.28 फीसदी रही। हालांकि 63.67 फीसदी ने सहमति जताई। बंगलूरू में तटस्थ मत सबसे अधिक 15.67 फीसदी रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई बार भाजपा और केंद्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर ईवीएम में हेराफेरी और ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। इस सर्वे के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने एक्स पर लिखा, वर्षों से राहुल गांधी पूरे देश में यही कहानी सुनाते रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र ‘खतरे’ में है, ईवीएम ‘अविश्वसनीय’ हैं और हमारे संस्थानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। लेकिन कर्नाटक ने बिल्कुल अलग कहानी बताई है। भाजपा ने कहा कि राज्यव्यापी सर्वे ने यह दिखाया कि लोग चुनाव, ईवीएम और भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा, यह कांग्रेस के मुंह पर ‘एक तमाचा’ है। भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव मतपत्रों का उपयोग कर रही कर्नाटक सरकार की आलोचना की। पार्टी ने कहा, जनता का स्पष्ट भरोसा होने बावजूद सिद्धारमैया सरकार कर्नाटक को पीछे ले जा रही है। स्थानीय चुनावों में के मतपत्रों की घोषणा कर रीह है, जो हेरफेर, देरी और दुरुपयोग के लिए जाना जाता है।
मुख्यमंत्री योगी ने बजट व्यय की समीक्षा, विभागों को समय पर खर्च के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार सुबह वित्तीय वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा विभिन्न विभागों को जारी बजट के व्यय को लेकर वित्त विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में वर्तमान वित्तीय वर्ष में विभागों के बजट प्राविधान के सापेक्ष शासन द्वारा जारी स्वीकृतियों, विभागाध्यक्ष द्वारा आवंटन, व्यय आदि की अद्धयावधिक प्रगति पर अधिक बजट प्राविधान वाले प्रमुख 20 विभागों का प्रस्तुतिकरण किया गया। देरी से समय से बजट व्यय नहीं हो पातामुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख 20 विभागों के प्रस्तुतिकरण की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी प्रमुख विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी विभाग समय से आवंटन बजट का इस्तेमाल करें ताकि परियोजनाएं और योजनाएं समय से पूरी हो सकें और प्रदेशवासी इन योजनाओं लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट को समय से खर्च करने के लिए अधिकारी निर्णय लेने का सामर्थ्य विकसित करें। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, वह इसमें तेजी लाएं। साथ ही बजट को समय से खर्च करने के लिए हर स्तर पर एक-एक अधिकारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सभी विभाग के अधिकारी तुंरत निर्णय लें। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने में देरी से समय से बजट व्यय नहीं हो पाता है। ऐसे में निर्णय लेने में तेजी दिखाएं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र जारी करेंमुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है। इसमें तेजी लाने के लिए विभागीय मंत्री और अधिकारी आपस में समन्वय बनाकर हर माह बैठक करें। उन्होंने ने वित्त विभाग को निर्देश दिये कि जिन विभागों के आवंटन बजट के कुछ अंश को अभी तक किंहीं कारणों से जारी नहीं किया गया है, उन विभागों को तत्काल बजट आवंटित करें। उन्होंने सभी प्रमुख 20 विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन विभागों को विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से बजट जारी किया जाता है। इसके लिए विभाग के मंत्री, अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए पैरवी करें। इसके साथ ही केंद्र सरकार को पत्र लिखें और फोन से फालोअप करें। इसको लेकर मुख्य सचिव भी पहल करें। उन्होंने अपने कार्यालय को निर्देश दिये कि जिन विभागों में बजट व्यय की प्रगति धीमी है, उनको चिह्नित करें और उनके विभाग के मंत्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पत्र जारी करें।