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जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी से सड़कें बंद,  हिमाचल में 6 cm बर्फ, MP के 6 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, यूपी समेत 12 राज्यों में कोहरा

उत्तर भारत में हालिया बर्फबारी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कई इलाकों में भारी बर्फबारीके कारण यातायात और अन्य गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ा है। जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी से मुश्किलें बढ़ींगुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे इलाकों में बर्फबारी के कारण सामान्य जनजीवन बाधित हो गया है। श्रीनगर-लेह हाईवे और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीयराजमार्ग को भूस्खलन और बर्फबारी के चलते बंद करना पड़ा है। फंसे हुए वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। हवाई सेवाएं प्रभावितश्रीनगर एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को कड़ाके की ठंड में लंबा इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रासे बचने की अपील की है। वहीं बर्फबारी के चलते स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को बंद कर दिया गया है। नागरिकों को घर के अंदर रहने औरसुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। हिमाचल प्रदेश में 6 सेंटीमीटर तक बर्फबारी दर्जकुल्लू, मनाली, शिमला और लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। ऊंचाई वाले इलाकों में जनजीवन ठहर सा गया है। पर्यटन स्थलों पर असरबर्फबारी देखने बड़ी संख्या में पर्यटक मनाली और शिमला पहुंचे हैं, लेकिन सड़कें बंद होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने से उन्हें परेशानियों कासामना करना पड़ रहा है। किसानों की चिंताएं बढ़ींकिसानों की फसलों पर बर्फबारी कानकारात्मक असर पड़ सकता है। सेब और अन्य फसलों को ठंड से नुकसान पहुंचने की आशंका है। मध्य प्रदेश में गिरा तापमान, ठंड का प्रकोप जारीमध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। वहींघने कोहरे ने यातायात को प्रभावित किया है। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम होने के कारण वाहन चालकों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।बता दें कि शीतलहर के कारण सर्दी-जुकाम और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। उत्तर भारत के कई राज्यों में कोहरे का असरउत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान सहित 12 राज्यों में घने कोहरे ने रेल और सड़क यातायात को बाधित किया है। बता दें कि कोहरेके कारण कई ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। वहीं कोहरे के चलते सड़क हादसों की घटनाओं में वृद्धि हुई है।प्रशासन ने वाहन चालकों को फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करने और धीमी गति से वाहन चलाने की सलाह दी है। प्रशासन की चेतावनी और तैयारियांमौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक भारी बर्फबारी की चेतावनी दी है। वहीं, उत्तर भारत के अन्य हिस्सों मेंशीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा। सावधानियां बरतने की अपीलबर्फबारी वाले क्षेत्रों में नागरिकों से अनावश्यक यात्रा न करने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों और हीटर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।वाहन चालकों को कोहरे में फॉग लाइट्स का उपयोग करने और बेहद सतर्कता के साथ गाड़ी चलाने की हिदायत दी गई है।

सांसद से मंत्री तक का सफर: समाज के हर वर्ग के लिए समर्पण : कमलेश पासवान

कमलेश पासवान, जो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में राज्य ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्यरत हैं, का राजनीतिक सफर बहुत हीप्रेरणादायक रहा है। वे पांच बार संसद सदस्य रहे और अपने क्षेत्र में हमेशा से सक्रिय रहे। संसद में रहते हुए, उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरोंको बढ़ावा दिया, बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इन कार्योंसे उन्होंने समाज के हर वर्ग में विश्वास और समर्पण को मजबूत किया। 2024 में राज्य ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद कदम से कदम मिलाकर बदलाव की ओर2024 में जब कमलेश पासवान ने राज्य ग्रामीण विकास मंत्री का पद संभाला, तो उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अपनी प्राथमिकता को औरभी मजबूती से तय किया। मंत्री पद संभालने के सिर्फ छह महीने के अंदर ही वे गांवों के विकास के लिए कई अहम योजनाओं पर काम कर रहे हैं।उनका मानना है कि देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब गांवों का सर्वांगीण विकास होगा। उनके नेतृत्व में बनाई जा रही योजनाएं गांवों केबुनियादी ढांचे में सुधार, रोजगार सृजन और शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता जैसे अहम पहलुओं पर केंद्रित हैं। जब देश के गांव बदलेंगे, तभी देश बदलेगाकमलेश पासवान का हमेशा से यह मानना रहा है कि गांवों का विकास ही देश के समग्र विकास का आधार है। वे कहते हैं, “जब तक हमारे गांव नहींबदलेंगे, तब तक देश नहीं बदल सकता।” उनके इस दृष्टिकोण से यह साफ है कि गांवों की समस्याओं का समाधान किए बिना, पूरे देश का विकाससंभव नहीं है। इसलिए, वे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर निरंतर प्रयास कर रहे हैं, ताकि गांवों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता हो और गांवके लोग अपने जीवन स्तर को सुधार सकें। प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट में युवा नेतृत्व की पहचानकमलेश पासवान, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट के एक युवा मंत्री हैं, ने अपने कार्यकाल में यह साबित किया है कि युवा नेतृत्व से बड़े बदलावआ सकते हैं। वे उन नेताओं में से एक हैं, जो सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ठोस कदम भी उठातेहैं। उनका समर्पण और मेहनत उनके नेतृत्व की ताकत है, जो गांवों के लिए सकारात्मक बदलाव ला रही है। कमलेश पासवान का ग्रामीण विकास के प्रति समर्पणकमलेश पासवान का दृष्टिकोण और उनके द्वारा उठाए गए कदम यह दर्शाते हैं कि वे केवल मंत्री नहीं, बल्कि एक सशक्त नेतृत्व हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों केविकास के लिए दृढ़ नायक की तरह कार्य कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि गांवों का विकास न केवल देश की समृद्धि के लिए आवश्यक है, बल्कि यहएक मजबूत और समावेशी समाज की नींव भी रखता है। उनके प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारतीय गांवों में एक बड़ाबदलाव आएगा, जो देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। ‎

गुजरात में नगरपालिका- पंचायत चुनाव का ऐलान, जानिए पूरी अनुसूची

गुजरात राज्य चुनाव आयोग ने मंगलवार को जूनागढ़ नगर निगम और राज्य की 66 नगर पालिकाओं में चुनावों की घोषणा की। यह चुनाव 16 फरवरी2025 को आयोजित होंगे, और मतगणना 18 फरवरी 2025 को होगी। इन चुनावों को लेकर राज्य भर में राजनीतिक दल और आम जनता दोनों हीउत्साहित हैं। राज्य चुनाव आयोग ने चुनावों के लिए विस्तृत कार्यक्रम और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चुनाव कार्यक्रम की प्रमुख तिथियांआधिकारिक चुनाव घोषणाचुनाव आयोग ने 20 जनवरी 2025 को इन चुनावों की आधिकारिक घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई, जिसके तहतउम्मीदवारों और पार्टियों को कई प्रतिबंधों का पालन करना होगा। नामांकन पत्र दाखिल करने की तिथियांउम्मीदवार 23 से 30 जनवरी 2025 तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच31 जनवरी 2025 को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उम्मीदवारों ने आवश्यक शर्तों का पालनकिया है। अगर कोई उम्मीदवार अपना नामांकन वापस लेना चाहता है, तो इसे 2 फरवरी 2025 तक करना होगा। वहींमतदान 16 फरवरी 2025 को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। मतगणना और परिणाम मतगणना 18 फरवरी 2025 को की जाएगी, और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। जूनागढ़ नगर निगम और 66 नगर पालिकाओं का चुनावजूनागढ़ नगर निगमगुजरात के प्रमुख शहरों में से एक जूनागढ़ में नगर निगम चुनाव को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यहां 60 वार्ड हैं, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों केउम्मीदवारों की प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलेगी। 66 नगर पालिकाओं में चुनावइसके अतिरिक्त, राज्य की अन्य 66 नगर पालिकाओं में भी चुनाव होंगे। इस चुनाव में 800 से अधिक वार्डों के लिए मतदान किया जाएगा। आचार संहिता और चुनाव व्यवस्थाआचार संहिता लागूचुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इस व्यवस्था के तहत किसी भी नई सरकारी योजना, परियोजनाया उद्घाटन पर रोक लगाई गई है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम)इस बार चुनावों में ईवीएम का उपयोग किया जाएगा, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। सुरक्षा इंतजामचुनाव के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। विशेष रूप से संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्तसुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियांBJP की तैयारियां राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने का अवसर है। पार्टी ने चुनाव प्रचार केलिए अपने प्रमुख नेताओं को मैदान में उतारा है। कांग्रेस पार्टी की रणनीतिकांग्रेस पार्टी भी अपने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकने में लगी है। पार्टी जमीनी मुद्दों पर केंद्रित होकर मतदाताओं से समर्थन जुटाने की कोशिश कररही है। आम आदमी पार्टी का उत्थानआम आदमी पार्टी (आप) ने भी राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसेमुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। मतदान प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाएंमतदान केंद्रों की संख्याराज्य चुनाव आयोग ने इस बार कुल 10,000 मतदान केंद्रों की व्यवस्था की है, जहां मतदाताओं को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रावधानदिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि वे बिना किसी कठिनाई के अपना मताधिकार इस्तेमाल कर सकें। मतदाता जागरूकता अभियानमतदान प्रतिशत को बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक मतदाता जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। प्रमुख चुनावी मुद्दे?स्थानीय निकाय चुनावों में शहरी विकास, जल आपूर्ति, सफाई, सड़कों की मरम्मत और सीवेज व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, छोटे औरमध्यम आकार के शहरों में रोजगार के अवसरों की कमी और स्थानीय उद्योगों का विकास भी प्रमुख चिंता का विषय बन चुका है। कई वार्डों मेंजलभराव, कचरे के सही निपटान और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी चुनाव के एजेंडे में शामिल हैं। बता दे कि इन चुनावों को आगामी विधानसभाचुनावों का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है, और राजनीतिक दल इसे अपनी साख साबित करने का एक बड़ा अवसर मानते हैं।

हिंदू राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक और कदम: 22 जनवरी को लखनऊ से प्रारंभ होगी यात्रा

सनातनी समाज के युवा ह्रदय सम्राट अंशुमान त्रिवेदी और पंकज तिवारी के नेतृत्व में हिंदू राष्ट्र निर्माण यात्रा की शुरुआत 22 जनवरी 2025 कोलखनऊ से होगी। इस यात्रा का उद्देश्य सनातन संस्कृति और हिंदू राष्ट्र के निर्माण के प्रति जागरूकता फैलाना है। यात्रा की शुरुआत प्रभु श्री राम कीप्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर की जाएगी।यात्रा का आरंभ और मार्गयह यात्रा इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के सामने से कुर्सी रोड लखनऊ से शुरू होकर हनुमान सेतु तक जाएगी। यात्रा का शुभारंभ माननीय पवन सिंह चौहान जी, विधान परिषद सदस्य द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया जाएगा। यात्रा में शामिल होने के लिए सनातनी समाज से जुड़े सभी लोग आमंत्रित हैं, ताकिएकजुटता का परिचय दिया जा सके और सनातन संस्कृति की शक्ति को सशक्त किया जा सके।सनातनी समाज की एकता का प्रतीकयात्रा का उद्देश्य न केवल हिंदू राष्ट्र निर्माण की दिशा में लोगों को जागरूक करना है, बल्कि यह सनातनी समाज की एकजुटता का भी प्रतीक बनेगी।अंशुमान त्रिवेदी के नेतृत्व में यह यात्रा समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास करेगी और सनातन धर्म के महत्व को समाज में जागरूक करेगी।सनातनी समाज से अपीलयात्रा के आयोजकों ने सनातनी समाज से अपील की है कि वे इस गौरवपूर्ण अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर यात्रा का हिस्सा बनेंऔर हिंदू राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान दें। यह यात्रा न केवल एक धार्मिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए है, बल्कि यह समाज के एकजुट होने काभी एक महत्त्वपूर्ण क्षण होगा। 

70 घंटे कम करने वाले बयान पर नारायण मूर्ति ने दी सफाई, बोले- ये सबकी व्यक्तिगत पसंद

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख बिजनेस टाइकून और इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने सोमवार को अपनी 70 घंटे के वर्किंगआवर संबंधी विवादास्पद टिप्पणी पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विचार उनकी व्यक्तिगत पसंद थी और इसे किसी अन्य परलागू नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले यह टिप्पणी कई लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई थी, विशेषकर उन व्यक्तियों के लिए जो कार्य-जीवन संतुलन के महत्व को समझते हैं। विवादास्पद टिप्पणी का सारहाल ही में नारायण मूर्ति ने एक सार्वजनिक मंच पर सुझाव दिया था कि एक पेशेवर को हर सप्ताह 70 घंटे काम करना चाहिए। यह बयान कई लोगोंके लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि आजकल कामकाजी घंटों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ गई है और लोग कार्य-जीवन संतुलन के महत्व पर जोर देरहे हैं। मूर्ति का यह विचार, जो एक प्रतिष्ठित कारोबारी नेता के रूप में उनकी राय को दर्शाता था, खासकर युवाओं और विभिन्न उद्योगों के कर्मचारियोंमें चर्चा का कारण बन गया था। इसके बाद उनकी टिप्पणी पर तीव्र आलोचनाएं आईं, क्योंकि कई लोगों का मानना था कि अत्यधिक कामकाजी घंटेमानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। मूर्ति का स्पष्टीकरणअपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए, नारायण मूर्ति ने कहा कि उनका यह विचार केवल उनकी व्यक्तिगत पसंद पर आधारित था। उन्होंने इसे अपनेअनुभवों से साझा किया था और इसका उद्देश्य किसी अन्य व्यक्ति पर दबाव डालना नहीं था। मूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति इस तरहके कार्य-घंटे को अनिवार्य रूप से नहीं अपनाए, यह पूरी तरह से उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। उन्होंने यह बताया कि कुछ लोग अपने काम में गहरीडूबने और अतिरिक्त समय देने की इच्छा रखते हैं, जबकि दूसरों के लिए काम और व्यक्तिगत जीवन का संतुलन अधिक महत्वपूर्ण होता है। कार्य-जीवन संतुलन का महत्वमूर्ति के बयान के बाद कार्य-जीवन संतुलन पर काफी चर्चा हुई। आजकल के समय में, कार्य-जीवन संतुलन कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दाबन चुका है। लगातार लंबे घंटों तक काम करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विभिन्न शोधों में यह साबितहुआ है कि अत्यधिक काम से तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके विपरीत, पर्याप्त विश्राम और व्यक्तिगतसमय कर्मचारियों की मानसिक स्थिति और उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं। भारतीय कारोबारी संस्कृति में मूर्ति का योगदाननारायण मूर्ति का बयान भारतीय कारोबारी संस्कृति को भी दर्शाता है। भारत में पारंपरिक रूप से कामकाजी घंटों का लंबा होना सामान्य था, और यहविशेषकर प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप उद्योगों में देखा जाता था। मूर्ति ने अपनी कंपनी की शुरुआत के समय में कठिन परिश्रम और लंबे घंटे काम करनेकी आवश्यकता को महसूस किया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब कार्य-जीवन संतुलन को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है, औरयह हर व्यक्ति की व्यक्तिगत प्राथमिकता होनी चाहिए कि वह कितने घंटे काम करना चाहता है। बता दें कि नारायण मूर्ति की टिप्पणी और उनकेस्पष्टीकरण ने भारतीय कार्य संस्कृति में एक महत्वपूर्ण विमर्श को जन्म दिया है। यह बात स्पष्ट है कि हर व्यक्ति का काम करने का तरीका अलग होसकता है, और यह उनकी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। हालांकि, कार्य-जीवन संतुलन को महत्व देना आवश्यक है ताकि कर्मचारियोंकी मानसिक और शारीरिक भलाई सुनिश्चित हो सके। मूर्ति का बयान इस बहस को एक नई दिशा में ले गया है, जहां कामकाजी घंटों और कार्य-जीवनसंतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करना जरूरी हो गया है।

कर्नाटक में महात्मा गांधी की स्मृति में कांग्रेस का विशेष आयोजन, सिद्धरमैया बोले- गांधी सच्चे हिन्दू, मरते वक्त हे राम कहा

कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस ने महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के 100 वर्ष पूरे होने पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसरपर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस ऐतिहासिकआयोजन का उद्देश्य गांधीजी के आदर्शों को याद करना और उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना था। महात्मा गांधी और बेलगावी का ऐतिहासिक संबंधमहात्मा गांधी ने 1924 में बेलगावी में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी। यह उनके जीवन में कांग्रेस अध्यक्ष के रूपमें एकमात्र अवसर था। यह अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसी ऐतिहासिक घटना के 100 साल पूरेहोने पर कांग्रेस ने इस आयोजन को एक विशेष श्रद्धांजलि के रूप में मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत और नेता गण का स्वागतमंगलवार को मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली से बेलगावी पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनकास्वागत किया। हवाई अड्डे पर कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ मौजूद थी, जिन्होंने पार्टी के नेताओं का जोरदार अभिनंदन किया। इसके बाद नेता कार्यक्रमस्थल की ओर रवाना हुए। प्रियंका गांधी का संबोधनप्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि गांधीजीने अपने विचारों और कर्मों से स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। प्रियंका ने युवाओं से अपील की कि वे गांधीजी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज मेंसकारात्मक बदलाव लाएं। मल्लिकार्जुन खड़गे का वक्तव्यकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गांधीजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि शांति और अहिंसा के माध्यम सेहर संघर्ष जीता जा सकता है। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा समय में गांधीजी के विचारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिनकांग्रेस उनके आदर्शों को संरक्षित और प्रचारित करती रहेगी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयानमुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस आयोजन को गांधीजी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकारगांधीजी के आदर्शों को अपनी नीतियों और योजनाओं में शामिल कर रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष प्रदर्शनकार्यक्रम में गांधीजी के जीवन पर आधारित एक नाट्य प्रस्तुति हुई, जिसमें उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया गया। इसके अलावा, स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत के माध्यम से गांधीजी के आदर्शों को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के उद्देश्य और प्रासंगिकताइस आयोजन का मुख्य उद्देश्य गांधीजी के आदर्शों और कांग्रेस के मूल्यों को जनता के बीच पुनर्जीवित करना था। कांग्रेस नेताओं ने जोर दिया किगांधीजी के विचार आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने स्वतंत्रता संग्राम के समय थे। सुरक्षा प्रबंध और समापनकार्यक्रम स्थल पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। समारोह का समापन गांधीजी के प्रिय भजन “रघुपति राघव राजा राम” के सामूहिक गायन औरगांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ। बता दें कि महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की शताब्दी पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम नेन केवल उनके योगदान को सम्मानित किया बल्कि उनकी शिक्षाओं को वर्तमान समय में भी प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया। कांग्रेस ने इस आयोजन केमाध्यम से जनता और कार्यकर्ताओं के बीच गांधीजी के आदर्शों की महत्ता को दोबारा उजागर किया।

*महाकुंभ 2025 में गौतम अदाणी की सहभागिता, श्रद्धालुओं की सेवा में अदाणी समूह*

21 जनवरी 2025 को अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले में हिस्सा लिया। उन्होंने त्रिवेणी संगम मेंपूजा-अर्चना की, बड़े हनुमान जी के दर्शन किए और इस्कॉन पंडाल में आयोजित भंडारा सेवा में श्रमदान किया। इस मौके पर उन्होंने अपनी प्रसन्नताव्यक्त करते हुए कहा, “महाकुंभ के लिए यहां आकर मैं अत्यधिक उत्साहित हूं।” श्रद्धालुओं के लिए विशेष पहल: महाप्रसाद सेवाअदाणी समूह ने महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए कई प्रयास किए हैं। इस्कॉन के सहयोग से उन्होंने “महाप्रसाद सेवा” की शुरुआत की, जिसके तहत प्रतिदिन लगभग 1 लाख भक्तों को भोजन कराने का लक्ष्य है। इस सेवा में रोटी, दाल, चावल, सब्जियां और मिठाई शामिल हैं। इसपहल में 18,000 सफाई कर्मियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। गीता प्रेस के साथ साझेदारीअदाणी समूह ने गीता प्रेस के साथ मिलकर ‘आरती संग्रह’ की एक करोड़ प्रतियां तैयार की हैं, जिन्हें महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरितकिया जाएगा। इस संग्रह में शिव, विष्णु, गणेश, लक्ष्मी, दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की आरतियां शामिल हैं। गौतम अदाणी ने इस पहल के बारे मेंकहा, “महाकुंभ भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। गीता प्रेस के सहयोग से ‘आरती संग्रह’ वितरित करना हमारे लिए सम्मान की बात है।” उत्तर प्रदेश के विकास में अदाणी समूह की प्रतिबद्धतामहाकुंभ में अदाणी समूह की सक्रिय भागीदारी न केवल उनकी सामाजिक सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि उत्तर प्रदेश में विकास के अवसरोंके प्रति उनकी रुचि को भी प्रकट करती है। गौतम अदाणी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं, और अदाणी समूह राज्य के विकासमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।” समाज सेवा और धार्मिक आयोजनों में योगदानमहाकुंभ 2025, जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है, में अदाणी समूह की पहलें लाखों श्रद्धालुओं को सुविधाप्रदान करेंगी। ये प्रयास अदाणी समूह की सामाजिक सेवा और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं। 

कोलकाता रेप और मर्डर केस: सियालदाह कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट पहुंची बंगाल सरकार, ममता बनर्जी बोलीं- आरोपी को फांसी हो

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए बलात्कार और हत्या के मामले में सियालदह अदालतके निर्णय को लेकर असंतोष व्यक्त किया है। वहीं इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी अब हाइ कोर्ट पहुंच गई हैं। बता दें कि बंगाल सरकार कीओर से एडवोकेट जरनल किशोर दत्ता ने सियालदाह कोर्ट के खिलाफ याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि आरोपी संजय रॉय को उम्रकैद कीसजा सही नहीं है, उसे फांसी होनी चाहिए। घटना का विवरणयह घटना 9 अगस्त 2024 को कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में घटी। एक 27 वर्षीय महिला डॉक्टर, जो पोस्टग्रेजुएटप्रशिक्षु थी, अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाई गई। बाद में जांच में सामने आया कि अस्पताल के एक पूर्व कर्मचारी संजय रॉय ने उसके साथबलात्कार करने के बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। अगली सुबह जब सहकर्मियों ने पीड़िता से संपर्क करने की कोशिश की और कोई जवाब नहीं मिला, तो वे उसके कमरे में पहुंचे। वहां उसका शवमिला, जिससे पूरे अस्पताल में भय और आक्रोश फैल गया। मामले की जांच और अदालती फैसलाघटना के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कोलकाता पुलिस द्वारा की गई। बाद में इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया। सियालदहअदालत के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने आरोपी को दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने इसे “दुर्लभतम में से दुर्लभतम” कीश्रेणी में नहीं माना, जो मृत्युदंड का आधार हो सकता है। इसलिए आरोपी को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं की प्रतिक्रियामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि यह मामला राज्य पुलिस के हाथ में रहता, तो आरोपी को मृत्युदंड दिलानासंभव होता। उन्होंने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे असंतोषजनक बताया। भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार न्याय चाहता है, न किमुआवजा। मजूमदार ने यह भी दावा किया कि इस मामले में और गहराई से जांच की जानी चाहिए। पीड़ित परिवार और प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रियाअदालत ने मृतका के परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। हालांकि, मृतका के पिता ने इस मुआवजे को अस्वीकार करतेहुए कहा कि उन्हें न्याय चाहिए, न कि धनराशि। इस फैसले के विरोध में जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य संगठनों ने सियालदह अदालत के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोषी के लिए मृत्युदंडकी मांग की और अदालत के फैसले पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली पर सवालयह मामला न केवल पश्चिम बंगाल में बल्कि पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना ने न्याय प्रणाली और जांचप्रक्रियाओं की प्रभावशीलता को लेकर बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि वह दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग को लेकर उच्च न्यायालय मेंअपील करेंगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं चाहती। संदेश और भविष्य की दिशायह मामला एक बार फिर यह संदेश देता है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपराधियों को कठोरतम सजा देने के लिए एक ठोस औरप्रभावी प्रणाली की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में तेजी से और कठोर न्यायिक फैसले ही समाज में बदलाव ला सकते हैं।

छत्तीसगढ़- ओडिशा बॉर्डर पर 15 नक्सली ढेर, 1 करोड़ का इनामी भी मारा गया, सर्च अभियान जारी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया, जिसे राज्य के सबसे सफल अभियानों में गिना जारहा है। मंगलवार को हुई इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 15 नक्सलियों को ढेर कर दिया। इनमें से 10 के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य कीतलाश जारी है। मारे गए नक्सलियों में 1 करोड़ रुपये का ईनामी नक्सली भी शामिल है, जिसे कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। संयुक्त अभियान की शुरुआतयह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर पिछले कुछ दिनों से चल रहा था। खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि इस क्षेत्र मेंनक्सलियों का एक बड़ा समूह सक्रिय है और वे सुरक्षाबलों पर हमला करने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा पुलिस नेमिलकर एक संयुक्त अभियान की रूपरेखा तैयार की। इस ऑपरेशन में राज्य की विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ), जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की कुल 10 टीमें शामिल की गईं। घटनाक्रम: चार घंटे चली मुठभेडमंगलवार को सुरक्षाबलों ने गरियाबंद के जंगलों में नक्सलियों के ठिकाने को घेर लिया। उन्हें आत्मसमर्पण करने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंनेजवाब में गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद लगभग चार घंटे तक मुठभेड़ चली। इस संघर्ष में सुरक्षाबलों ने 15 नक्सलियों को मार गिराया। मुठभेड़स्थल से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद हुए हैं। इनामी नक्सली की मौत: बड़ी कामयाबीमारे गए नक्सलियों में 1 करोड़ रुपये का ईनामी नक्सली भी शामिल था। यह नक्सली संगठन में एक अहम पद पर था और कई बड़े हमलों कीसाजिश में शामिल रहा था। उसकी मौत को नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दुर्गम क्षेत्र में ऑपरेशन की चुनौतियांघने जंगलों और दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन चलाना सुरक्षाबलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नक्सलियों ने इलाके में बारूदी सुरंगें बिछा रखी थीं, जिससेबचते हुए सुरक्षाबलों ने यह अभियान पूरा किया। अभियान के दौरान कई खतरनाक हथियार और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जो नक्सलियों कीरणनीति को उजागर कर सकते हैं। स्थानीय जनता और प्रशासन की प्रतिक्रियाइस अभियान के बाद गरियाबंद और आसपास के क्षेत्रों में राहत का माहौल है। लंबे समय से नक्सलियों के आतंक का सामना कर रहे स्थानीय लोगों नेसुरक्षाबलों के प्रयासों की सराहना की है। प्रशासन ने भी इस सफलता को क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है। नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाईयह अभियान नक्सलवाद के खिलाफ एक मजबूत प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। सुरक्षाबलों ने न केवल नक्सलियों को बड़ी संख्या में नुकसानपहुंचाया है, बल्कि उनके संसाधनों और रणनीति को भी कमजोर किया है। इस सफलता के बाद राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और अधिकसघन अभियान चलाने की योजना बनाई है। आगे की रणनीति: विकास और सुरक्षा का समन्वय*मुख्यमंत्री ने सुरक्षाबलों को इस सफलता के लिए बधाई दी है और नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसकेसाथ ही, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को तेज करने और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। बता दें किगरियाबंद जिले में हुआ यह ऑपरेशन सुरक्षाबलों की कुशल रणनीति और समर्पण का प्रमाण है। 1 करोड़ रुपये के ईनामी नक्सली समेत 15 नक्सलियों का खात्मा नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता है। हालांकि, नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सैन्य अभियानों केसाथ-साथ शिक्षा, विकास और रोजगार पर भी जोर देना जरूरी है।

मनु भाकर की नानी- मामा की सड़क दुर्घटना में ही हुई मौत- हादसे का CCTV फुटेज आया सामने, खेल जगत में शोक की लहर

हरियाणा के चरखी दादरी में 19 जनवरी 2025 को हुए दर्दनाक सड़क हादसे की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। फुटेज में तेज़ रफ्तार ब्रेज़ा कार कोस्कूटी से टकराते हुए देखा जा सकता है। इस हादसे में स्कूटी सवार मनु भाकर की नानी सावित्री देवी (65) और मामा युद्धवीर सिंह (50) की मौके परही मौत हो गई। फुटेज में हादसे का विवरणसीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि ब्रेज़ा कार तेज़ गति से गलत दिशा में आ रही थी। यह टक्कर उनके घर से महज 150 मीटर दूर, कलियाणा मोड़के पास हुई। पुलिस के लिए यह फुटेज एक अहम सबूत बन गया है, जिससे फरार चालक की पहचान करने में मदद ली जा रही है। पुलिस जांच में प्रगतिपुलिस ने फुटेज के आधार पर कार और उसके चालक की पहचान करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द हीआरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। टक्कर के बाद चालक मौके से फरार हो गया था। स्थानीय निवासियों का गुस्साहादसे के बाद स्थानीय लोगों ने यातायात नियमों की अनदेखी पर प्रशासन की लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में तेज़ रफ्तारऔर गलत दिशा में चलने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए। खेल जगत में शोकइस दुर्घटना ने ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है। मनु भाकर, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 मेंऐतिहासिक पदक जीता था, इस दुखद घटना के बाद मानसिक और भावनात्मक संघर्ष का सामना कर रही हैं। खेल जगत की कई हस्तियों ने सोशलमीडिया पर संवेदना व्यक्त की है।ड्यूटी पर जा रहे थे युद्धवीर सिंह युद्धवीर सिंह, जो हरियाणा रोडवेज में चालक के रूप में कार्यरत थे, हादसे के वक्त अपनी ड्यूटी पर जा रहे थे। उनकी मां सावित्री देवी भी उनके साथस्कूटी पर थीं और अपने छोटे बेटे के घर जा रही थीं। प्रशासन से सड़क सुरक्षा की मांगस्थानीय लोगों ने इस हादसे को लेकर प्रशासन से सड़क सुरक्षा के लिए सख्त उपाय लागू करने की मांग की है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में कईदुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें तेज़ रफ्तार और लापरवाही प्रमुख कारण रहे हैं। इस हादसे ने सड़क सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर उजागर किया है।प्रशासन से अपेक्षा है कि वह ठोस कदम उठाएगा ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।