दिल्ली एयरपोर्ट पर धूल भरी आंधी से मची अफरा-तफरी, 50 से अधिक फ्लाइटें प्रभावित

आंधी से उड़ा एयरपोर्ट का संचालनशनिवार शाम दिल्ली में आई तेज धूल भरी आंधी ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर संचालन व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावितकिया। मौसम की खराबी के चलते 50 से अधिक घरेलू उड़ानों में देरी हुई, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों को 12 घंटे तकएयरपोर्ट पर रहना पड़ा। टर्मिनल-3 पर भारी भीड़, यात्रियों को परेशानीफ्लाइट्स में देरी के कारण टर्मिनल-3 पर भारी भीड़ जमा हो गई। यात्रियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अव्यवस्था और बदइंतजामी की शिकायतकी। भीड़भाड़ के हालात को देखते हुए टर्मिनल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। फ्लाइट्स लेट, रद्द और डायवर्टसूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह तक 50 से ज्यादा उड़ानें देरी से चलीं। करीब 25 विमानों को दूसरे रूट पर डायवर्ट करना पड़ा और 7 उड़ानों को रद्दकर दिया गया। यात्रियों ने एयरलाइंस के खराब प्रबंधन को इस संकट का जिम्मेदार बताया। सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सायात्रियों ने ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भीड़भाड़ और अव्यवस्था के वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। एक यूजर ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरइंडिया को टैग करते हुए लिखा, “यह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट नहीं, बस स्टैंड से भी बदतर है।” एयर इंडिया का जवाबएयर इंडिया ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी कि मौसम की खराबी के कारण उड़ानों में बाधा आई है और उनकी टीम यात्रियों की मदद के लिएकाम कर रही है। इंडिगो फ्लाइट को छह बार किया गया रिशेड्यूलइंडिगो एयरलाइंस को भी यात्रियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने शिकायत की कि उड़ानों को बार-बार रिशेड्यूल किया गया। एक यूजरने लिखा कि कोलकाता से दिल्ली आने वाली फ्लाइट 6E 2198 को छह बार बदला गया, लेकिन यात्रियों को कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। यात्रियों की मांग – पैसा वापस करेंबार-बार उड़ान टालने से परेशान यात्रियों ने कंपनियों से रिफंड की मांग की और कहा कि यात्रियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राष्ट्रपति को विधेयकों पर निर्णय के लिए तीन महीने की सीमा

तमिलनाडु राज्यपाल विवाद से जुड़ा मामलातमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा राज्य विधानसभा से पारित 10 विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट नेऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्यपाल की इस कार्रवाई को अनुचित ठहराते हुए कहा कि राष्ट्रपति को भी विधेयकों पर निर्णय लेने केलिए सीमित समय के भीतर कार्य करना होगा। राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर करना होगा निर्णयजस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति को तीनमहीने के भीतर निर्णय देना आवश्यक है। यदि इस अवधि से अधिक समय लगता है, तो इसके लिए वैध कारण दर्ज करने होंगे और राज्य सरकार कोसूचित करना होगा। पूर्ण वीटो की अवधारणा अस्वीकार्यपीठ ने कहा कि राष्ट्रपति को भी राज्यपाल की तरह पूर्ण वीटो (indefinite withholding) का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी जोड़ा कि यदिराष्ट्रपति समयसीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लेते हैं, तो राज्य सरकारें उनके खिलाफ रिट याचिका दाखिल कर सकती हैं।संविधान के अनुच्छेद 201 पर टिप्पणीफैसले में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को किसी भी विधेयक पर मंजूरी देने या अस्वीकार करने का अधिकार है, लेकिन इसमें समय-सीमा नहीं दी गई थी। कोर्ट ने इस शून्यता को संविधान के संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया और इसे मनमानी शक्तियों कासंकेत माना। संवादहीनता से बचने पर जोरसुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को राज्यों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर तत्परता से विचार करना चाहिए, वहीं राज्य सरकारों को केंद्र केसुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए। पारदर्शिता और संवाद केंद्र-राज्य संबंधों में विश्वास बनाए रखने में सहायक होंगे। संविधानिक सलाह और पारदर्शिता जरूरीन्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई विधेयक असंवैधानिकता के आधार पर रोका जा रहा हो, तो राष्ट्रपति को अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीमकोर्ट से सलाह लेनी चाहिए। साथ ही, निर्णय के कारणों को राज्य सरकार को सूचित किया जाना अनिवार्य है ताकि वे आवश्यक संशोधन कर सकें। सरकारिया और पुंछी आयोग की सिफारिशों का हवालाफैसले में सरकारिया आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007) की सिफारिशों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें अनुच्छेद 201 के तहत विधेयकोंपर निर्णय की समय-सीमा तय करने की आवश्यकता जताई गई थी।गृह मंत्रालय की 2016 की गाइडलाइन को कोर्ट ने माना आधारपीठ ने गृह मंत्रालय द्वारा 2016 में जारी एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि अध्यादेशों पर तीन सप्ताह और विधेयकों पर तीन महीने मेंनिर्णय लेने की सिफारिश को अब न्यायिक समर्थन प्राप्त है। संघीय ढांचे की रक्षा की दिशा में कदमइस ऐतिहासिक फैसले के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की शक्तियां भीसीमित और जवाबदेह हैं। यह निर्णय केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन और संविधान की मूल भावना की रक्षा करने में मील का पत्थर साबित हो सकताहै।
पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, सीएम ममता बनर्जी ने दी सफाई

राज्य के कई जिलों में भड़की हिंसापश्चिम बंगाल में वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ शुक्रवार को विभिन्न जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गए। मालदा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण 24 परगनाऔर हुगली जिलों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षाबलों पर पथराव किया। इसके साथ ही, कई जगहों परसड़कों को अवरुद्ध कर यातायात बाधित किया गया। ममता बनर्जी ने कानून को खारिज कियामुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्टकिया कि यह केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून है और इस पर जवाबदेही भी केंद्र की बनती है। जनता से शांति बनाए रखने की अपीलसीएम ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से सभी धर्मों के लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपीलकी। उन्होंने लिखा कि धर्म के नाम पर हिंसा न करें क्योंकि हर इंसान की जान अमूल्य होती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति के लिए समाज मेंअशांति फैलाना गलत है। हिंसा फैलाने वालों पर होगी कार्रवाईमुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार किसी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती है और जो लोग अशांति फैला रहे हैं उनके खिलाफकानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में यह कानून लागू ही नहीं हो रहा, तो फिर हिंसा क्यों? राजनीतिक साजिश का आरोपसीएम बनर्जी ने कुछ राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि वे धर्म के नाम पर जनता को भड़काकर हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लोगोंसे अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और शांति व सद्भाव बनाए रखें। बीजेपी ने ममता बनर्जी को ठहराया जिम्मेदारइस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह राज्य में हो रही हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं और वक्फ कानून के विरोध कोराजनीतिक रूप से भुना रही हैं।
किश्तवाड़ में मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी ढेर, सेना का अभियान जारी

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को मार गिराया है। यहकार्रवाई उस सर्च ऑपरेशन का हिस्सा है, जो 9 अप्रैल से इलाके के घने जंगलों में चलाया जा रहा है। गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुआ अभियानभारतीय सेना की 16 कोर और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से 9 अप्रैल को छत्रू जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन की शुरुआत की थी। यहऑपरेशन खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू किया गया था, जिसमें आतंकवादियों के जंगल में छिपे होने की सूचना थी। सेना और आतंकियों केबीच गोलीबारी भी हुई, जिसके बाद एक आतंकी को मार गिराया गया। मुश्किल हालातों में भी नहीं रुकी सेना की कार्रवाईइस अभियान को कठिन और चुनौतीपूर्ण मौसम में अंजाम दिया जा रहा है। इलाके में भारी बर्फबारी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के चलते सेना कोअभियान में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी भारतीय सैनिक पूरे साहस के साथ ऑपरेशन को आगे बढ़ा रहे हैं। तीन दिनों से जंगल में छिपे थे आतंकीसूत्रों के अनुसार, आतंकी बीते तीन दिनों से जंगल में छिपे हुए थे। सेना की लगातार निगरानी और दबाव के चलते आखिरकार मुठभेड़ हुई और एकआतंकी को मार गिराया गया। अभी भी इलाके में तलाशी अभियान जारी है और अन्य आतंकियों की तलाश की जा रही है। रामनगर में भी सुरक्षा बलों की कार्रवाईकिश्तवाड़ के अलावा जम्मू के उधमपुर जिले के रामनगर क्षेत्र में भी सुरक्षाबलों का सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन जारी है। यहां भी दो से तीन आतंकियोंके छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद इलाके को घेरकर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया, NIA करेगी पूछताछ

तहव्वुर हुसैन राणा, 26/11 मुंबई हमले का आरोपी और पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक, आखिरकार अमेरिका से प्रत्यर्पित होकर भारत लायागया। यह पहली बार है जब भारत को आतंकवाद के किसी मामले में अमेरिका से प्रत्यर्पण मिला है। राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कीनिगरानी में विशेष विमान से दिल्ली लाया गया, जहाँ उसे उतरते ही गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार कर लियागया। इसके बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ एनआईए ने 26 दिन की रिमांड की मांग की। 64 वर्षीय राणा पाकिस्तानी सेना का पूर्व डॉक्टर है और अमेरिका में इमिग्रेशन सेवाओं की आड़ में आतंकी नेटवर्क को समर्थन देता रहा है। वह लश्कर-ए-तैयबा और हरकत-उल-जिहादी इस्लामी (HUJI) जैसे संगठनों से भी जुड़ा रहा है। राणा ने डेविड हेडली को भारत में रेकी करने और हमले कीतैयारी के लिए सहयोग दिया था, जिसमें फंडिंग, दस्तावेज़ और अन्य सुविधाएं शामिल थीं। हमले से कुछ दिन पहले नवंबर 2008 में वह खुद भीभारत आया था, जहाँ उसने “इमिग्रेंट लॉ सेंटर” के बहाने अपने नेटवर्क को सक्रिय रखा। 26/11 के मुंबई हमले में आतंकवादियों ने ताज होटल, ओबेरॉय होटल, लियोपोल्ड कैफे, CST स्टेशन और चबाड हाउस जैसे स्थानों को निशानाबनाया था, जिसमें 166 लोगों की जान गई थी। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। राणा की भूमिका इस हमले में काफी अहम मानी जाती है, और एनआईए अब उससे पूछताछ कर लश्कर, आईएसआई और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी। अमेरिका में 2009 में एफबीआई ने उसे गिरफ्तार किया था और 2011 में अमेरिकी अदालत ने उसे 14 साल की सजा सुनाई थी। भारत ने 2012 मेंउसके प्रत्यर्पण की मांग की, लेकिन कानूनी लड़ाई के चलते यह प्रक्रिया लंबी चली। अंततः जनवरी 2025 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपीलखारिज की और 7 अप्रैल को अंतिम याचिका भी नामंज़ूर हुई। इसके बाद 10 अप्रैल को उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया। अब एनआईए उससे पूछताछ कर विस्तृत चार्जशीट तैयार करेगी और उसका ट्रायल दिल्ली की विशेष अदालत में चलेगा। यदि राणा दोषी पाया गया, तो उसे उम्रकैद या मौत की सजा हो सकती है। अभियोजन पक्ष की अगुवाई वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन करेंगे, जिन्होंने अमेरिका में भी भारत का पक्षरखा था।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिए जिलाधिकारियों को भ्रमण और सर्वे के निर्देश, कहा लोगों के पास जाकर लिया जाए जायजा

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंधी–बारिश,ओलावृष्टि के दृष्टिगत संबंधित जनपदों के अधिकारियों को पूरी तत्परता सेराहत कार्य संचालित करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारी क्षेत्र का भ्रमण कर सर्वे करें तथा राहत कार्य पर नज़र रखें. आकाशीय बिजली, आंधी तूफान,बारिश, वज्रपात आदि आपदा से जनहानि और पशुहानि होने की स्थिति में तत्काल प्रभावितों को राहत राशि का वितरण करें. घायलों कासमुचित उपचार कराया जाए.मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि वर्तमान में गतिमान गेहूं की सरकारी खरीद के दृष्टिगत मंडियों सहित सभी खरीद केंद्रों परगेहूं के सुरक्षित भंडारण का पूरा ध्यान रखा जाए. अधिकारीगण सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन करते हुए आख्या शासन को भेजें ताकि इससंबंध में अग्रेत्तर कार्यवाही की जा सके. उन्होंने निर्देशित किया कि जल जमाव की स्थिति होने पर प्राथमिकता पर जल निकासी की व्यवस्था कराईजाए.सीतापुर जिले में खराब मौसम ने दो जिंदगियां ले ली. खेत में काम कर रहे एक किसान पर बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. वहीं एक महिलाकी भी दीवार गिरने से मौत हो गई.बिजली गिरने से हुई किसान की मौतबिसवां के ग्राम पंचायत जनुवा के मजरा मोचखुर्द मे आकाशीय बिजली गिरने से किसान हरिश चंद्र भार्गव (23) की मौत हो गई. हरिश्चंद्र कुल तीनभाई थे. मृतक के बड़े भाई की शादी हो चुकी है. हरिश्चंद भार्गव की अभी शादी नही हुई थी. वह बृहस्पतिवार सुबह खेत में गन्ना छीलने गए थे तभीआकाशीय बिजली गिरने से उनकी मौत हो गई. राजधानी में बृहस्पतिवार को सुबह होते ही, घने काले बादलों और झोंकेदार हवाओं संग जमकरबरसात शुरू हुई। घने बादलों की मौजूदगी से दिन में ही अंधेरा छा गया. बारिश और हवाओं की वजह से तापमान गिरने से मौसम सुहाना हो गया औरलोगों को राहत महसूस हुई.वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने कहा कि सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से लखनऊ में पूर्वा और पछुआहवाओं के समागम होने की वजह से यह आंधी और बरसात देखने को मिली है. लखनऊ में सुबह 8:30 बजे तक 7 मिमी. बारिश दर्ज की गई. जबकिएयरपोर्ट के इलाके में यह 2 मिमी. रिकॉर्ड की गई लखनऊ व आसपास के जिलों बाराबंकी, रायबरेली,सीतापुर आदि में भी अच्छी बारिश देखने कोमिली.
सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर लगा बिजली चोरी का आरोप, अफसर बोले अंतिम रिपोर्ट हो रही तैयार वसूलेंगें जुर्माना

Sambhal News: संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर लगे बिजली चोरी के जुर्माने में बुधवार को सुनवाई हुई. सांसद के अधिवक्ता मोहम्मद नईमने प्रार्थना पत्र देकर समय देने का आग्रह किया है. हालांकि बिजली विभाग की ओर से समय अभी नहीं दिया गया है बिजली विभाग जुर्माने की अंतिमरिपोर्ट तैयार करने की तैयारी में है. संभल एक्सईएन नवीन गौतम ने कहा कि सांसद के अधिवक्ता बिजलीघर पहुंचे थे उन्होंने समय दिए जाने काआग्रह किया है. अब उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी. समय दिया जाएगा या नहीं इसको लेकर भी उच्च अधिकारियों सेवार्ता करेंगे. बताया कि इस जुर्माने के मामले में तीन बार नोटिस और तीन बार समय दिया जा चुका है. अब अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की कार्रवाई कीजानी है अंतिम रिपोर्ट के बाद जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जाएगी.19 दिसंबर को सांसद जियाउर्रहमान बर्क के दीपा सराय स्थित आवास परबिजली चोरी का मामला विभाग ने पकड़ा था. मौके पर 16 किलोवाट से ज्यादा भार की खपत मिली थी जबकि सांसद जियाउर्रहमान बर्क और पूर्वसांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के नाम से दो-दो किलोवाट के दो मीटर लगे थे. जिसमें कई महीने की खपत जीरो थी. मीटर की एमआरआई कराई गईतो उसमें बिजली चोरी की पुष्टि हुई थी. सांसद के आवास में हुए निर्माण की जांचइसके बाद से लगातार सुनवाई की जा रही है सांसद जियाउर्रहमान बर्क के दीपा सराय स्थित आवास के मामले में 15 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी. एसडीएम वंदना मिश्रा इस मामले में सुनवाई करेंगी सांसद के आवास में हुए निर्माण की जांच विनियमित क्षेत्र और पीडब्ल्यूडी के जेई ने की है. यहजांच रिपोर्ट एसडीएम को दे दी गई है इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जानी है.मालूम हो 11 दिसंबर 2024 को संभल नियतप्राधिकारी/उपजिलाधिकारी विनियमित क्षेत्र की ओर से सांसद को नोटिस जारी किया गया था. जिसमें कहा था कि सांसद ने अपने आवास में बिनाअनुमति के नवनिर्माण कराया है.ऑपरेशन एक्ट 1958 का है उल्लंघनजिसका नक्शा पास नहीं है यह उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट 1958 का उल्लंघन है इस मामले में सुनवाई जारी है.संभल डीएमन्यायालय में सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलुकुर्रहमान बर्क अपील दायर कर चुके हैं. पिछले शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी थी इसशुक्रवार को सुनवाई हो सकती है. सांसद के पिता का कहना है कि जिस निर्माण को अवैध बताते हुए सांसद के नाम नोटिस जारी किया गया है. वहनिर्माण का हिस्सा सांसद के नाम नहीं है बल्कि उनके नाम है.उनके पिता पूर्व सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन के बाद उनके नाम विरासत दर्जहो गई थी. जो पालिका में भी दर्ज है सांसद के पिता का कहना है कि उनके नाम से नोटिस जारी होना चाहिए था. जिससे वह अपना पक्ष रख सकेंविनियमित क्षेत्र से उनके सांसद बेटे के नाम से नोटिस जारी कर दिया गया है.
दो वजहों से तहव्वुर राणा का भारत प्रत्यर्पण हुआ सफल, भारत के बढ़ते कदमों का सबूत

तहव्वुर राणा का भारत प्रत्यर्पण देश की कूटनीति की बड़ी जीत है तहव्वुर राणा को लेकर एनआईए की टीम आज नई दिल्ली पहुंच जाएगी. कितहव्वुर राणा को भारत लाना काफी मुश्किल था. लेकिन दो तथ्यों ने आतंकी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को आसान बना दिया.पहला फैक्टर हैकानूनी दांव-पेच, दरअसल तहव्वुर राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दोहरे खतरे सिद्धांत (Double Jeopardy) का हवाला दियाथा. इसके तहत किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार सजा नहीं दी जा सकती. तहव्वुर राणा ने तर्क दिया कि मुंबई आतंकीहमले की साजिश रचने के आरोप में वह अमेरिका में सजा काट चुका है. ऐसे में उसे अब भारत प्रत्यर्पित करना दोहरे खतरे के सिद्धांत का उल्लंघनहोगा. हालांकि भारत का प्रतिनिधित्व एक मजबूत कानूनी टीम कर रही थी जिसने अपने तर्कों से तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण से बचने की हरकोशिश को नाकाम कर दिया. भारत का बढ़ता हुआ कूटनीतिक प्रभावदरअसल दूसरा फैक्टर है भारत का बढ़ता हुआ कूटनीतिक प्रभाव मीडिया तहव्वुर राणा का भारत प्रत्यर्पण भारत की बढ़ती हुई कूटनीतिक पहुंच इसकेअमेरिका के साथ मजबूत संबंधों का सबूत है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व की बाइडन सरकार या मौजूदा ट्रंप सरकारदोनों ने ही तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी. ट्रंप ने तो अपने एक बयान में साफ कर दिया था कि तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित कियाजाएगा. तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण में कई बार मुश्किलें भी आईं लेकिन भारत ने अमेरिका के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों का फायदा उठाते हुएउन मुश्किलों को समाप्त कर दिया.तहव्वुर राणा एक पाकिस्तानी-कनाडाई नागरिक है जो पाकिस्तानी सेना में भी काम कर चुका है. तहव्वुर राणा कोआतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के लिए काम करने के लिए दोषी पाया गया था वह साल 2009 से अमेरिका की जेल में बंद था. अब भारत लाकरउसे 2008 के मुंबई हमले के मामले में न्याय के कटघरे में लाया जाएगा. केंद्र सरकार ने नरेंद्र मान को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है. जोएनआईए की तरफ से सुनवाई में शामिल होंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया बड़ा झटका,टैरिफ को 90 दिन तक टालने की दी सहमति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रोज सुबह उठकर दुनिया को चौंकाने का मन बना रखा है दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद टैरिफ से जुड़ी हर दिन नई-नईघोषणाएं करने वाले ट्रंप ने बुधवार को फिर ऐसा कुछ किया. जिससे लोग बोल उठे “मिस्टर प्रेसिडेंट इनफ नाऊ” दरअसल जिस टैरिफ का एलान करट्रंप ने दो अप्रैल 2025 को अमेरिका के लिए मुक्ति का दिन बताया था. 9 अप्रैल को उसी टैरिफ के एलान को 90 दिन के लिए टाल दिया गया(केवल चीन को छोड़कर) टैरिफ पर ट्रंप की अब तक की बयानबाजी को देखते हुए इसे 90 दिनों तक टालने का फैसला एक बड़ा उलटफेर साबितहुआ और शेयर बाजार में भी इसके बाद उछाल नजर आया. हालांकि दुनिया के बाकी देशों को टैरिफ से राहत देते हुए ट्रंप ने चीन पर 125% टैरिफलगाने का एलान कर दिया. जिससे बाजार में अनिश्चतता बरकरार है.ट्रंप ने जैसे ही अपने नए कदम की जानकारी अपने ट्रुथ सोशल मीडिया खाते पर दीवॉल स्ट्रीट और एशिया भर के बाजारों में मजबूती दिखी. ट्रंम्प ने किया पोस्टट्रंम्प ने पोस्ट किया मैंने टैरिफ को 90 दिन के लिए टालने को सहमति दी है. इस फैसले का कारण 75 से अधिक देशों की ओर से व्यापार वार्ता केलिए आगे आना और जवाबी कार्रवाई से परहेज करना है.टैरिफ वापस लेने के ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकएसएंडपी 500 में 9.5% की वृद्धि दर्ज की गई. एसएंडपी के लिहाज से बुधवार का दिन बाजार में 1940 के बाद से तीसरा सबसे अच्छा दिन रहा. ट्रंप के फैसले के बाद डॉव जोन्स भी लगभग 3,000 अंक तक उछाला। इससे टैरिफ के एलानों के बाद बाजार में हुए नुकसान की थोड़ी ही सहीभरपाई होने में मदद मिली. हालांकि टैरिफ वापस लेने के फैसले से दुनिया के ज्यादातर देशों ने राहत की सांस ली. लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया किचीन पर सितम जारी रहेगा उस पर सिर्फ दबाव बढ़ेगा. सरकार का नियम केवल आर्थिक ही नहींटैरिफ के जरिए चीन को अलग-थलग करने का ट्रम्प सरकार का निर्णय केवल आर्थिक ही नहीं है. यह अत्यंत व्यक्तिगत और रणनीतिकभी है ट्रंप नेअमेरिकी वस्तुओं पर चीन की ओर से 84% के नए टैरिफ के एलान के बाद कहा. वे बहुत अपमानजनक थे उन्होंने सही जवाब नहीं दिया उन्होंनेजवाबी कार्रवाई की. ट्रंप लंबे समय से चीन को आर्थिक मोर्चे पर मुख्य खलनायक के रूप में देखते रहे हैं उन्होंने बीजिंग पर सस्ते माल की डंपिंग करनेमुद्रा बाजार में हेरफेर करने और अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी करने का आरोप लगाया है. उन्होंने बार-बार यह भी दावा किया है कि चीनी नेता यहनहीं समझ पा रहे हैं कि उनके साथ कैसे बातचीत की जाए. वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बातचीत महीनों से रुकी हुई है ट्रंप ने अपने बयानों में कहाहै चीन एक सौदा
सी.आर. पार्क विवाद,भाजपा ने महुआ मोइत्रा पर समाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा सोशल मीडिया पर एक अनाम वीडियो रीपोस्ट करने को लेकरकड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो रीपोस्ट कर उन्होंने राजधानी के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने का प्रयास किया है। पार्टी विवाद से ध्यान हटाने की साजिशसचदेवा ने दावा किया कि महुआ मोइत्रा का यह कदम या तो बंगाल में पार्टी के अंदर चल रही कलह से ध्यान हटाने की कोशिश है, या फिर यहउनकी पुरानी आदत के अनुरूप एक सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश है। पुलिस को शिकायत करने के बजाय सोशल मीडिया पर फैलाई सनसनीउन्होंने यह भी कहा कि एक जिम्मेदार सांसद होने के नाते महुआ मोइत्रा को सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने के बजाय सीधे दिल्ली पुलिस सेशिकायत करनी चाहिए थी, जिससे उचित कार्रवाई हो पाती। सी.आर. पार्क की सामाजिक एकता को ठेस पहुंचाने की कोशिशसचदेवा ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस सी.आर. पार्क की बात हो रही है, वह दिल्ली का एक सौहार्दपूर्ण क्षेत्र है, जहां हर वर्ष दुर्गा पूजा में दिल्ली औरआसपास के इलाकों से लोग भाग लेते हैं और बंगाली संस्कृति का आनंद लेते हैं। मछली बाज़ार वैध, दुकानदार स्थानीय और नियमों के पालनकर्ताभाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सी.आर. पार्क स्थित मछली बाज़ार के अधिकांश दुकानदार हिन्दू हैं और वर्षों से डी.डी.ए. द्वारा अधिकृत दुकानों मेंव्यवसाय कर रहे हैं। ये दुकानदार स्वच्छता नियमों का पालन करते हैं और क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। पुलिस से कार्रवाई की मांगसचदेवा ने मांग की कि दिल्ली पुलिस उस वीडियो को बनाने वाले युवकों के खिलाफ कार्रवाई करे, साथ ही महुआ मोइत्रा की भूमिका की भी जांचकरे जिन्होंने इसे रीपोस्ट कर सनसनी फैलाने का प्रयास किया। विधायक शिखा रॉय का बयानक्षेत्र की विधायक शिखा रॉय ने कहा कि सी.आर. पार्क एक सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है और वहां की मछली मार्केट पूरी तरह से वैध औरव्यवस्थित है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता दुकानदारों के साथ खड़े हैं और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान जरूरी – भाजपा मीडिया प्रमुखदिल्ली भाजपा मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दिल्ली में पूरे देश के लोग रहते हैं और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हैं।भाजपा सरकार सुनिश्चित करेगी कि दिल्ली में सभी समुदाय सुरक्षित महसूस करें और उनकी संस्कृति का सम्मान हो।