राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयकों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, मांगी संवैधानिक व्याख्या

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर मंजूरी के लिए समय-सीमा निर्धारित करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर गंभीरआपत्ति जताई है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सर्वोच्च न्यायालय से 14 अहम संवैधानिक प्रश्नों पर राय मांगी है। अप्रैल का ऐतिहासिक फैसलासुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा विधेयकों को लंबी अवधि तक लंबित रखने पर फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कियदि कोई विधेयक लंबे समय तक निर्णय के बिना राज्यपाल के पास पड़ा रहता है, तो उसे मंजूरी प्राप्त मान लिया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति जेबीपारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने दिया था। राष्ट्रपति ने मांगी संवैधानिक व्याख्याराष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को भेजे गए रेफरेंस में पूछा है कि-क्या संविधान में निर्दिष्ट समय-सीमा के अभाव में न्यायालय विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति या राज्यपाल को बाध्य कर सकता है? क्या अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल या राष्ट्रपति के विवेकाधिकार पर न्यायिक समीक्षा की जा सकती है? क्या अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को इतनी व्यापक शक्ति प्राप्त है कि वह संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार कर निर्णय दे सकता है? महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों की सूचीराष्ट्रपति द्वारा उठाए गए सवालों में राज्यपालों और राष्ट्रपति की विधायी भूमिका, न्यायिक समीक्षा की सीमाएं, अनुच्छेद 200, 201, 142, 143 और 145 की व्याख्या, तथा विधेयकों के कानून बनने से पूर्व की न्यायिक जांच शामिल हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति के विवेक पर सीमा तय कर सकता है?राष्ट्रपति ने यह बुनियादी सवाल उठाया है कि जब संविधान राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर निर्णय लेने का विवेकाधिकार देता है, तो क्या सर्वोच्चन्यायालय इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकता है? पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ करेगी सुनवाईसंविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत भेजे गए रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी और राष्ट्रपति को सलाह देगी।यह सुनवाई संवैधानिक मूल्यों, शक्तियों के सीमांकन और विधायी प्रक्रिया की प्रकृति को स्पष्ट कर सकती है।
त्राल में एनकाउंटर: जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी ढेर, ऑपरेशन अब भी जारी

नादेर गांव बना मुठभेड़ का केंद्रजम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा के त्राल इलाके के नादेर गांव में आज सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद संगठन के तीन आतंकियों को मार गिराया गया। फिलहाल इलाके में गोलीबारी जारी है और सुरक्षाबलों द्वारा तलाशी अभियान भी चल रहाहै, क्योंकि आशंका है कि कुछ आतंकी अभी भी छिपे हो सकते हैं। ड्रोन से मिली अहम जानकारीमुठभेड़ स्थल से सामने आए ड्रोन फुटेज में आतंकियों की छिपने की कोशिशें साफ दिखाई दे रही हैं। एक अन्य वीडियो क्लिप में एक आतंकी को ढेरहोते भी देखा जा सकता है। ढेर हुए आतंकियों की पहचानमारे गए आतंकियों की पहचान त्राल के ही रहने वाले आसिफ अहमद शेख, आमिर नजीर वानी और यावर अहमद बट्ट के रूप में हुई है। पिछले 48 घंटे में दूसरा बड़ा ऑपरेशनत्राल एनकाउंटर से पहले, पुलवामा जिले में पिछले 48 घंटों में यह दूसरा बड़ा ऑपरेशन है। इससे पहले मंगलवार को शोपियां जिले के जिनपथेरकेलर इलाके में ‘ऑपरेशन केलर’ के तहत लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया गया था। शोपियां ऑपरेशन: लश्कर के स्थानीय आतंकी ढेरइस अभियान में मारे गए आतंकियों में एक की पहचान शाहिद कुट्टे के रूप में हुई है, जो 8 मार्च 2023 को लश्कर में शामिल हुआ था और 18 मई2024 को शोपियां में भाजपा सरपंच की हत्या में शामिल था। दूसरे आतंकी अदनान शफी डार की पहचान वंडुना मेलहोरा के निवासी के रूप में हुईहै, जो 18 अक्टूबर 2024 को संगठन में शामिल हुआ था और एक प्रवासी मजदूर की हत्या में शामिल रहा था। पहलगाम हमले के दोषियों की तलाश जारीसुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकियों के पोस्टर जारी किए हैं। ये पोस्टर शोपियां के कईइलाकों में लगाए गए हैं। आतंकियों के बारे में सूचना देने पर 20 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पहलगाम हमले में मारे गए मासूमपर्यटकों की मौत के लिए जिम्मेदार आतंकियों की तलाश तेज कर दी गई है।
कर्रेगुट्टा जंगलों में 21 दिन तक चला ऑपरेशन, सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को किया ढेर

बीजापुर-कर्रेगुट्टा के घने जंगलों में 23 अप्रैल 2025 से शुरू हुआ सुरक्षा बलों और नक्सलियों का 21 दिन तक जारी संघर्ष मंगलवार को शांत होने केबाद सामने आया कि इस ऑपरेशन में कुल 31 नक्सली ढेर हुए। सुरक्षाबलों ने यह कार्वाई छत्तीसगढ़ पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), केंद्रीयरिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की कोबरा बटालियन, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और अन्य अर्धसैनिक दलों की संयुक्त टुकड़ी के साथ की थी।ऑपरेशन की तैयारी तब तेज हुई जब स्थानीय मुखबिरों और तकनीकी निगरानी से मिली सूचना में बताया गया कि नक्सलियों ने अपने कैंप मजबूत कररखे हैं और टॉप कमांडर हिडमा के नेतृत्व में बड़ी साजिश रची जा रही है। पहले कुछ दिन हल्की-फुल्की झड़पें हुईं, लेकिन जैसे-जैसे सुरक्षाबलों ने कर्रेगुट्टा क्षेत्र में तीन दिशाओं से कड़ी घेराबंदी की, विरोधी समूह की पटरीबिखरनी शुरू हुई। जंगल की दुर्गम पगडंडियों में कभी हमला, कभी घात लगाए जाने से पुलिस और सीआरपीएफ पर स्थितियां मुश्किल हो गईं, लेकिन आधुनिक उपकरणों और संवेदनशील मानवरहित जांबाज यंत्रों (ड्रोन) की मदद से सुरक्षाबलों को कई अहम ठिकानों पर सटीक निशाना लगानेमें सफलता मिली। मुठभेड़ों के बीच दोबाराहिरासत में लिए गए कई नक्सलियों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि संगठन ने अपने लॉजिस्टिक हब इलाके में कई तरह केहथियार और गोला-बारूद छुपा रखे थे। इसी आधार पर विशेष टीमों ने सर्च ऑपरेशन तेज किया और इधर-उधर छिपे नक्सलियों को तितर-बितर करदिया। 21 दिनों के इस अभियान के दौरान 31 शव बरामद किए गए, जिनमें कई जनमिलिशिया के ज़ोनल कमांडर, डिवीजनल कमांडर और महिलाविंग की वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। यह संगठन के लिए मर्माघात करने जैसा झटका है, क्योंकि उसकी रीढ़ मानी जाने वाली ये कमानियाँ टूट चुकी हैं। सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में असलहा भी मिला। बरामद हथियारों में सात एके-47 राइफलें, पांच इंसास राइफलें, तीन लाइट मशीन गन (एलएमजी), सैकड़ों राउंड कारतूस, आईईडी (इम्प्रूव्ड इन्हैंस्ड डिवाइस) बनाने का कच्चा माल, सैटेलाइट फोन, वायरलेस सेट, भारी राशन और मेडिकल किटशामिल है। साथ ही दस्तावेज और नक्शे भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि नक्सलियों ने आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी गोपनीय नेटवर्कतैयार कर रखा था। इन सूचनाओं का विश्लेषण केंद्रीय खुफिया एजेंसियां कर रही हैं, ताकि इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। बीजापुर रेंज के आईजी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस सफल ऑपरेशन का विवरण साझा किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान नसिर्फ सैनिक दक्षता बल्कि स्थानीय जनता के सहयोग का नतीजा है। ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ फैलाई जा रही गोलबारी और आतंक कीजानकारी पुलिस को समय रहते दी, जिससे दुश्मन को पकड़ने का असली मौका मिला। सुरक्षा बलों का मानना है कि अब इलाके में बनी स्थिरता सेविकास कार्यों को गति मिलेगी और नक्सलियों के कंट्रोल जोन को कमज़ोर करने में मदद मिलेगी। हालांकि इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। घने जंगलों में जगह-जगह लगी माइन्स और लोहे के तार, साथ हीनक्सलियों द्वारा विरचित झाड़ियों में छिपे आईईडी ने कई बार जगह-जगह दलों को पीछे हटने पर मजबूर किया। लेकिन एटीएस और कोबराबटालियन के विशेष प्रशिक्षण ने टीमों को सुरक्षित रुख अपनाने में मदद की। कई जवान घायल भी हुए, जिन्हें नजदीकी मेडिकल कैंपों में प्राथमिकइलाज के बाद रिकवर कराया गया। इस बड़े ऑपरेशन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि केंद्र और राज्य मिलकर जब एकठठा हों तो नक्सलवाद जैसीपुरानी चुनौती को भी नियंत्रित किया जा सकता है। गृह मंत्रालय ने इस उपलब्धि पर संतोष जताया है और पूरे देश में नक्सल प्रभावित इलाकों मेंसतर्कता बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही सुरक्षाबलों को आधुनिक हथियार और प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया और तेज करने का आश्वासन दियागया है। स्थानीय प्रशासन ने भी दावा किया है कि अब इलाके में विकास गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़कों का विकास, स्वास्थ्य केंद्रों काविस्तार और शिक्षा सुविधाओं का उन्नयन शुरू किया जाएगा, ताकि युवा दोबारा नक्सली गिरोहों की ओर न बढ़ें। ग्रामीणों का भरोसा बढ़ाने के लिएगांवों में साहसिक कार्य और आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। कर्रेगुट्टा ऑपरेशन में मिली यह बड़ी कामयाबी छत्तीसगढ़ में नक्सल संघर्ष को नियंत्रित करने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित होगी। सुरक्षा बलोंकी सतर्कता, जनता का सहयोग और कड़ी योजना ने मिलकर यह सफलता दिलाई, जिससे आने वाले समय में राज्य के भीतर और आसपास के जिलोंमें शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
पानीपत से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, सोशल मीडिया के जरिए भेजता था खुफिया जानकारी

हरियाणा पुलिस और खुफिया एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पानीपत जिले से एक संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया गयाहै, जो भारत की सैन्य और संवेदनशील जानकारियों को सोशल मीडिया और ऐप्स के माध्यम से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI तक पहुंचा रहाथा। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी पहचान के सहारे भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी गोपनीय जानकारी एकत्र की और उसेपाकिस्तान भेजा। गिरफ्तारी का घटनाक्रमगिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान शाहिद अली के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले का रहने वाला है लेकिन पिछलेकुछ वर्षों से पानीपत में किराये पर रह रहा था। वह पेशे से कंप्यूटर तकनीशियन बताया गया है और लोकल साइबर कैफे चलाता था। पुलिस को इसबात की भनक तब लगी जब खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध गतिविधियों का इनपुट मिला। एजेंसियों ने आरोपी की निगरानी शुरू की और साइबर ट्रेसिंग के माध्यम से उसके मोबाइल और लैपटॉप को ट्रैक किया गया। आखिरकार एक संयुक्तअभियान के तहत हरियाणा ATS और मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने आरोपी को पानीपत से हिरासत में लिया। कैसे करता था जासूसी?जांच में खुलासा हुआ है कि शाहिद अली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, WhatsApp, Telegram और कुछ डार्क वेब प्लेटफॉर्म्स केजरिए पाकिस्तान स्थित एजेंट्स के संपर्क में था। वह भारतीय सैन्य छावनियों, रेलवे मूवमेंट, रडार लोकेशन, सेना की यूनिट तैनाती और उपकरणों की आवाजाही से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेजपाकिस्तानी एजेंट्स को भेजता था। इसके लिए उसे डिजिटल पेमेंट और क्रिप्टो करेंसी के जरिए भुगतान मिलता था। सूत्रों के अनुसार, आरोपी को पाकिस्तानी महिला एजेंट ने ‘हनी ट्रैप’ में फंसाया था। महिला खुद को एक रिसर्च स्कॉलर बताकर आरोपी से संपर्क मेंआई और बाद में उसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया गया। आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और कईफर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। ISI से जुड़े थे तारपुलिस का कहना है कि शाहिद के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से सीधे संपर्क थे। उसे कोड भाषा में निर्देश दिए जाते थे और वह उसी शैली मेंजवाब देता था। मोबाइल फोन से मिली चैट और ईमेल से यह भी स्पष्ट हुआ है कि वह कई बार सीमावर्ती सैन्य ठिकानों की फोटोग्राफी कर चुका था। इसके अलावा वह रेलवे स्टेशन, सैन्य लॉजिस्टिक्स हब, और BSF की गतिविधियों पर भी निगाह रखता था। वह इन सूचनाओं को एक वर्चुअलप्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए पाकिस्तान भेजता था, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी। राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर खतराखुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। आरोपी की गतिविधियों से न केवल भारत की सैन्य तैयारियोंकी जानकारी दुश्मन देश को मिल रही थी, बल्कि इससे भविष्य की सैन्य योजनाओं को भी खतरा हो सकता था। यह आशंका भी जताई जा रही है किआरोपी के नेटवर्क में और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों का बयानपानीपत पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही उसे अदालत में पेश कर रिमांड लिया जाएगा। हरियाणा एटीएस, मिलिट्री इंटेलिजेंस, और IB की टीम मिलकर आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि उसके नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सके। पड़ोसी से मिली थी सूचनास्थानीय लोगों के मुताबिक शाहिद अली बेहद शांत स्वभाव का व्यक्ति था और किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इस तरह की देशविरोधीगतिविधियों में शामिल है। पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी कि वह देर रात तक कंप्यूटर और मोबाइल पर कुछ संदिग्धकाम करता है। इसी इनपुट के आधार पर एजेंसियों ने उस पर नजर रखी। अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा?सूत्रों का कहना है कि शाहिद सिर्फ एक मोहरा हो सकता है और इसके पीछे एक बड़ी जासूसी साजिश छुपी हो सकती है। एजेंसियां यह पता लगानेकी कोशिश कर रही हैं कि क्या वह केवल सूचनाएं भेज रहा था या फिर देश के भीतर किसी आतंकी गतिविधि में भी उसकी भूमिका रही है। फिलहाल, इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है और देशभर में संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर नजर बढ़ा दी गई है।सरकार की प्रतिक्रियागृह मंत्रालय ने इस गिरफ्तारी को गंभीरता से लिया है और हरियाणा सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही सभी राज्यों को भी सतर्क किया गया हैकि इस प्रकार के हनी ट्रैप और सोशल मीडिया आधारित जासूसी गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
बलिया में बीजेपी नेता का अश्लील वीडियो वायरल, नैतिकता पर बड़ा सवाल

उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बब्बन सिंह रघुवंशी का एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी सेवायरल हो रहा है। बब्बन सिंह रसड़ा चीनी मिल के चेयरमैन, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और बांसडीह से पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रह चुकेहैं। वीडियो में क्या है?इस वीडियो में बब्बन सिंह एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर बार बाला के साथ आपत्तिजनक हरकतें करते दिखाई दे रहे हैं। वह सार्वजनिक रूप सेनर्तकी के साथ बेहद अशोभनीय और अश्लील व्यवहार करते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरी घटना कई लोगों की मौजूदगी में हुई, लेकिन वहां किसी ने उन्हें रोका तक नहीं। पार्टी से संबंध और सवालबब्बन सिंह को प्रदेश के मंत्री दयाशंकर सिंह का करीबी माना जाता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा जैसी बड़ी पार्टी में टिकट वितरणऔर पदों की जिम्मेदारी देने से पहले किसी की पृष्ठभूमि और व्यवहार की जांच नहीं होती? क्या पार्टी की आंतरिक नैतिकता और अनुशासन सिर्फदिखावा बनकर रह गया है? महिला सम्मान और सामाजिक संदेशइस घटना के सामने आने के बाद भाजपा के महिला सम्मान के दावों पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आम जनता, खासकर महिलाएं, पूछ रही हैं किक्या यही है भाजपा का ‘नारी सम्मान’ मॉडल? क्या यही है ‘रामराज्य’ जिसकी बात भाजपा करती है, या फिर यह ‘रावणराज्य’ का उदाहरण है? सामाजिक प्रतिक्रियावीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने कहा है कि यह घटना समाज के लिए शर्मनाक है औरभाजपा को तत्काल इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। राजनीतिक दलों की ज़िम्मेदारी सिर्फ सत्ता में बने रहने की नहीं होती, बल्कि सामाजिक नैतिकता और उदाहरण प्रस्तुत करने की भी होती है। अगर ऐसेलोग पार्टी में ऊंचे पदों पर हैं और उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो यह लोकतंत्र और समाज दोनों के लिएखतरे की घंटी है। जनता की मांगलोग यह मांग कर रहे हैं कि भाजपा को इस पूरे प्रकरण पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, संबंधित नेता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए औरयह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पार्टी में इस प्रकार के व्यक्तियों के लिए कोई स्थान न हो।
दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर आम आदमी पार्टी का हमला,सौरभ भारद्वाज का आरोप – भाजपा सरकार में स्कूल बेलगाम, डीपीएसद्वारका ने 34 छात्रों को निकाला

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस वार्ता में दिल्ली की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।उन्होंने कहा कि राजधानी में भाजपा की सरकार बनने के बाद निजी स्कूलों ने बेहिसाब फीस वृद्धि शुरू कर दी है, जिससे अभिभावकों में गहरा आक्रोशहै। डीपीएस द्वारका में फीस न भरने पर 34 बच्चों को निकाला गयासौरभ भारद्वाज ने बताया कि द्वारका स्थित डीपीएस स्कूल ने फीस वृद्धि का विरोध करने वाले 34 छात्रों को स्कूल से निष्कासित कर दिया। उन्होंनेकहा कि जिन बच्चों के माता-पिता ने बढ़ी हुई फीस नहीं दी, उन्हें स्कूल में कक्षा में नहीं बैठने दिया गया और लाइब्रेरी में बैठाकर मानसिक रूप सेप्रताड़ित किया गया। अंततः इन बच्चों को स्कूल बस से लौटा दिया गया और कहा गया कि उनका नाम हटा दिया गया है। भाजपा सरकार की नीयत पर सवालउन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जनता का गुस्सा शांत करने के लिए फीस ऑडिट का दिखावा किया। शिक्षा विभाग ने एसडीएम के जरिएजांच की घोषणा की थी और कहा था कि 15 दिनों में रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, लेकिन कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आईहै। जांच रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहींसौरभ भारद्वाज ने बताया कि डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने स्पष्ट रूप से माना कि डीपीएस द्वारका बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहाहै। बावजूद इसके, दिल्ली सरकार ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। भाजपा और प्राइवेट स्कूलों की ‘सांठगांठ’ का आरोपआप नेता ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर कार्रवाई से बच रही है क्योंकि प्राइवेट स्कूलों के संगठन के अध्यक्ष भरत अरोड़ा भाजपा कीदिल्ली कार्यकारिणी में शामिल हैं। उन्होंने कहा, “जब संगठन का अध्यक्ष ही सरकार के साथ बैठा है तो कार्रवाई कैसे संभव होगी?” अखबारों पर भी सवालप्रेस वार्ता में भारद्वाज ने कुछ बड़े अंग्रेजी अखबारों को भी आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद उन्होंने खबरप्रकाशित नहीं की। उन्होंने कहा कि ये अखबार उन पाठकों के साथ भी धोखा कर रहे हैं, जिनके बच्चे इन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं। आप सरकार में कभी नहीं हुई थी ऐसी मनमानी पूर्व मंत्री ने कहा कि जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती से रोक थी। केजरीवाल सरकार केदौरान किसी स्कूल को मनचाही फीस बढ़ाने या बच्चों को प्रताड़ित करने की इजाजत नहीं थी।
जस्टिस बी.आर. गवई बने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ, हिंदी में ली शपथ, मां से लिया आशीर्वाद

नई दिल्ली में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। उन्होंनेजस्टिस संजीव खन्ना का स्थान लिया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में जस्टिस गवई ने हिंदी भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली।उनका कार्यकाल करीब साढ़े छह महीने का रहेगा और वे 23 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे। शपथ ग्रहण समारोह में गणमान्य लोग रहे मौजूदइस अहम समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई शीर्ष नेता उपस्थित थे। साथ ही जस्टिस गवई के परिवारजन और पूर्व राष्ट्रपतिरामनाथ कोविंद भी मौजूद रहे। शपथ के तुरंत बाद जस्टिस गवई ने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मां ने जताया गर्व, कहा- मेहनत और सेवा का फल है यह मुकामजस्टिस गवई की मां कमलताई गवई ने बेटे की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि यह सफलता उनके समर्पण और गरीबों की सेवा का परिणाम है।उन्होंने विश्वास जताया कि उनका बेटा न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर रहते हुए पूरी ईमानदारी से दायित्व निभाएगा। राजनीति और कानून दोनों से जुड़ा रहा है पारिवारिक पृष्ठभूमिजस्टिस गवई का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ था। उनके पिता आर.एस. गवई, जो ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया’ के नेता रहे हैं, बिहार, केरल और सिक्किम के राज्यपाल पद पर भी कार्य कर चुके हैं। जस्टिस गवई ने 1985 में वकालत की शुरुआत की थी और नागपुर तथा अमरावती केनगर निकायों सहित विश्वविद्यालयों के लिए स्थायी वकील के रूप में सेवाएं दीं। सुप्रीम कोर्ट में निभाई महत्वपूर्ण भूमिकाजस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक संविधान पीठों में भाग लिया है। वे उस पांच-न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा रहे, जिसने केंद्र सरकारके अनुच्छेद 370 हटाने के निर्णय को सर्वसम्मति से वैध ठहराया। इसके अलावा, वह इलेक्टोरल बॉन्ड केस और अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरणको लेकर दिए गए फैसले में भी शामिल थे। संक्षिप्त कार्यकाल लेकिन बड़ी जिम्मेदारियाँहालांकि जस्टिस गवई का कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन उनके अनुभव और न्यायिक दृष्टिकोण को देखते हुए न्यायपालिका और देश उनसेबड़ी उम्मीदें रख रहा है।
BSF कांस्टेबल पाकिस्तान से रिहा होकर लौटे वतन20 दिन बाद अटारी बॉर्डर से भारत आए जवान, पहलगाम हमले के अगले दिन गलती से सीमा पार कर गए थे

बीएसएफ कांस्टेबल पूर्णम कुमार साहू, जिन्हें 23 अप्रैल को गलती से सीमा पार कर जाने के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया था, आखिरकार भारत लौट आए हैं। उन्हें बुधवार को अटारी-वाघा बॉर्डर से भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया। पहलगाम हमले के बाद सीमा पर बढ़ा तनाव, उसी दौरान हुई चूकपूरणम कुमार साहू, जो पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले दिन यानी 23 अप्रैल को गलती सेपाकिस्तान की सीमा में चले गए थे। उस वक्त भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से तनावपूर्ण थे और इस चूक ने स्थिति को और गंभीर बना दियाथा। 20 दिन की चिंता, गर्भवती पत्नी ने की लगातार अपीलपश्चिम बंगाल के हुगली जिले की निवासी उनकी गर्भवती पत्नी रजनी को जब पति की गिरफ्तारी की खबर मिली, तो वह तुरंत अटारी बॉर्डर पहुंचीं।उन्होंने वहां अधिकारियों से लगातार अनुरोध किया कि उन्हें अपने पति की सुरक्षित वापसी चाहिए। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि जवानसुरक्षित हैं और उन्हें जल्द रिहा करवाया जाएगा। BSF और भारतीय अधिकारियों की सतत कोशिशों का नतीजाBSF और भारतीय विदेश मंत्रालय के लगातार प्रयासों के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने पूर्णम को रिहा कर दिया। भारत लौटने के बाद उन्होंने गहरे भावुकमाहौल में पत्नी से मुलाकात की और परिवार में खुशी का माहौल छा गया। रजनी की उम्मीद और संघर्ष ने दिलाई कामयाबीरजनी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने धैर्य नहीं छोड़ा। BSF अधिकारियों ने हर कदम पर हमारा साथ दिया। मुश्किल घड़ी में मैंने भारत सरकारपर विश्वास बनाए रखा और वह विश्वास आज जीत गया है।” सोशल मीडिया पर भारतीय सेना और सरकार की तारीफपूर्णम की वापसी की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर देशभक्ति की लहर दौड़ गई। लोगों ने भारतीय सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसाकरते हुए कहा कि यह नए भारत की ताकत है, जो अपने हर जवान को सुरक्षित वापस लाने का माद्दा रखता है।
Tell Modi….I Told Modi.

India has once again proven that it neither fears nor submits to any form of terrorism. The brutal terrorist attack in Pahalgam, Jammu & Kashmir on April 22, 2025, shook the entire nation, claiming the lives of 26 innocent civilians and leaving 17 seriously injured. The attack occurred while Prime Minister Narendra Modi was on a visit to the Saudi Arebia and U.S. Vice President JD Vance was visiting India. India’s response to this attack was recorded in history as “Operation Sindoor.” The Terrorist Attack: A Cowardly Act The primary targets of this attack were tourists vacationing in the picturesque valleys of Baisaran, often referred to as the “Mini Switzerland.” The assault was so meticulously planned and executed with such barbarity that it drew comparisons to the Pulwama attack of 2019. The attackers aimed not only to cause casualties but also to harm India’s security, integrity, and global image. Planning and Execution of Operation Sindoor The Indian government responded immediately. In the absence of the Prime Minister, the Home Minister, Defence Minister, and National Security Advisor (NSA) held high-level security meetings. During the night between May 6 and 7, the Indian Armed Forces launched “Operation Sindoor.” The operation targeted terrorist camps located in Pakistan and Pakistan-occupied Kashmir (PoK). In a joint mission by the Indian Air Force and special forces, 24 precise strikes were carried out on 9 different locations in just 25 minutes. These strikes focused on camps belonging to groups like Jaish-e-Mohammed, Lashkar-e-Taiba, and Hizbul Mujahideen. Defence Minister Rajnath Singh stated that the operation was executed with “precision, caution, and compassion” to ensure that only terrorist infrastructure was destroyed, without harming innocent civilians. He justified the move as India’s legitimate “right to respond.” Pakistan’s Reaction and India’s Counter Following Operation Sindoor, Pakistan attempted to target Indian military installations in Jammu, Pathankot, and Udhampur using drones and missiles. However, India’s air defence system, especially the S-400, intercepted and neutralised several Pakistani missiles and drones. India promptly retaliated by striking Pakistan’s air defense installations, particularly disabling a system located in Lahore. Shortly after, both nations agreed on May 10 to cease all firing and military actions. India’s Right Under International Law Article 51 of the United Nations Charter grants member states the right to self-defense in case of an armed attack. While the Charter does not define “armed attack” explicitly, the International Court of Justice (ICJ) refers to it as “the most grave form of the use of force.” India justified Operation Sindoor under Article 51, although Foreign Secretary Vikram Misri did not explicitly cite it. He described the attacks as “measured and non-provocative.” On May 8, he briefed ambassadors of 13 out of the 15 UN Security Council member states about the strikes. Pakistan’s ambassador was not invited. Right to Self-Defense Against Non-State Actors The UN Charter’s state-centric nature complicates action against non-state actors like terrorist groups. However, post-9/11, countries like the United States have argued that the right to self-defense also applies to terrorist organizations. The ICJ maintains a more restrictive interpretation, suggesting that Article 51 cannot be invoked unless a state can be directly held responsible. India presented concrete evidence of Pakistan’s collusion and support for terrorists, thus framing the attack as state-sponsored terrorism. Situation in Border Areas Due to Operation Sindoor and subsequent shelling, a climate of fear gripped border regions like Jammu, Rajouri, Poonch, Baramulla, and Kupwara. Pakistani shelling resulted in the deaths of at least 12 civilians and one soldier, with 51 others injured. Authorities set up temporary relief camps in these regions, and ₹5 crore was released for each border district. Chief Minister Omar Abdullah held emergency meetings via video conferencing with district commissioners to oversee relief and rescue operations. Terrorist Organizations and Their Role The camps targeted during Operation Sindoor were linked to major proscribed organizations: Jaish-e-Mohammed (JeM): Headquartered in Bahawalpur, Pakistan, and founded by Masood Azhar in 2000, this group has been involved in multiple attacks, including the Parliament attack and the Pulwama suicide bombing. Lashkar-e-Taiba (LeT): Responsible for the 2008 Mumbai attacks and the 2006 Mumbai train bombings, its headquarters are in Muridke near Lahore. India’s Military Capabilities and Proficiency India demonstrated its strategic and technological prowess during this entire operation. The S-400 air defense system successfully intercepted eight missiles and several drones launched by Pakistan. In its retaliatory strike, India shot down three Pakistani fighter jets — one F-16 and two JF-17s. Once again, India proved that it neither fears nor bows to terrorism. The April 22, 2025, attack in Pahalgam shocked the nation, claiming 26 innocent lives and injuring 17 seriously. Despite the Prime Minister’s absence during his U.S. visit and the U.S. Vice President’s presence in India, India’s response — Operation Sindoor — etched its name in history. India has made it clear that it does not seek war, but will not remain silent if its sovereignty and the safety of its citizens are threatened. The Defence Ministry emphasised that India’s response matched Pakistan’s aggression in scale and scope but was not aimed at escalation. India’s policy is clear: it neither initiates aggression nor ignores provocation. “Operation Sindoor” is proof — not just a military action but a diplomatic and legal message to the world that India is fully capable of defending itself while adhering to international norms. Trump’s ‘Peace Deal Policy’ and the Outrage in India Amidst the ongoing military conflict, U.S. President Donald Trump unexpectedly announced on social media on May 10 that India and Pakistan had agreed to a ceasefire. He claimed that this was made possible through American mediation and that both countries would now engage in talks at a neutral location. This announcement triggered widespread outrage in India. The Indian public saw Trump’s move as a soft stance towards Pakistan and an attempt to undermine India’s strong strategic posture. Experts argued that it went against India’s long-standing policy of not allowing third-party intervention in India-Pakistan matters. Trump’s Threat and the Opposition’s Aggressive Stance On May 12, another statement from Trump further
ભારત ન તો ડરે છે અને ન તો ડરશે, ન તો મોદીજી કોઈ ના દબાણ માં આવશે…દરેકભારતીય સેના અને સરકાર સાથે છે…

ભારતે ફરી એકવાર સાબિત કર્યું છે કે તે કોઈપણ પ્રકારના આતંકથી ડરતું નથી કે ઝૂકતું નથી. ૨૨ એપ્રિલ ૨૦૨૫ ના રોજ જમ્મુ અનેકાશ્મીરના પહેલગામમાં થયેલા ભયાનક આતંકવાદી હુમલાએ સમગ્ર દેશને હચમચાવી નાખ્યો હતો, જેમાં ૨૬ નિર્દોષ નાગરિકોના મોત થયાહતા અને ૧૭ લોકો ગંભીર રીતે ઘાયલ થયા હતા. આ હુમલો ત્યારે થયો જ્યારે દેશના વડા પ્રધાન નરેન્દ્ર મોદી સાઉદી અરેબિયાનીમુલાકાતે હતા અને અમેરિકાના ઉપરાષ્ટ્રપતિ જેડી વાન્સ ભારતની મુલાકાતે હતા. આ આતંકવાદી હુમલા પછી ભારતનો પ્રતિભાવઇતિહાસમાં “ઓપરેશન સિંદૂર” તરીકે નોંધાયેલો છે. આતંકવાદી હુમલો: કાયરતાનું કૃત્ય આ હુમલાના મોટાભાગના નિશાન એવા પ્રવાસીઓ હતા જેઓ ‘મીની સ્વિટ્ઝર્લૅન્ડ’ તરીકે ઓળખાતી બેઇસરની સુંદર ખીણોમાં રજાઓગાળવા આવ્યા હતા. આ હુમલો એટલો સુનિયોજિત અને ક્રૂર હતો કે તેની સરખામણી 2019ના પુલવામા હુમલા સાથે થવા લાગી. હુમલાખોરોનો ઉદ્દેશ્ય માત્ર જાનમાલનું નુકસાન કરવાનો જ નહોતો, પરંતુ ભારતની સુરક્ષા, અખંડિતતા અને વૈશ્વિક છબીને પણ નુકસાનપહોંચાડવાનો હતો. ઓપરેશન સિંદૂરનું આયોજન અને અમલીકરણ ભારત સરકારે તરત જ જવાબ આપ્યો. વડા પ્રધાનની ગેરહાજરીમાં, ગૃહ પ્રધાન, સંરક્ષણ પ્રધાન અને રાષ્ટ્રીય સુરક્ષા સલાહકાર (NSA) એ સંયુક્ત રીતે ઉચ્ચ સ્તરીય સુરક્ષા બેઠકો યોજી હતી. ૬ અને ૭ મેની રાત્રે, ભારતીય સશસ્ત્ર દળોએ “ઓપરેશન સિંદૂર” શરૂ કર્યું. આ ઓપરેશન હેઠળ, પાકિસ્તાન અને પાકિસ્તાન અધિકૃતકાશ્મીર (POK) માં સ્થિત આતંકવાદી કેમ્પોને નિશાન બનાવવામાં આવ્યા હતા. સંયુક્ત કાર્યવાહીમાં, ભારતીય વાયુસેના અને આર્મીસ્પેશિયલ ફોર્સે માત્ર 25 મિનિટમાં નવ અલગ અલગ લક્ષ્યો પર 24 ચોકસાઇવાળા હુમલા કર્યા. આ હુમલાઓ જૈશ-એ-મોહમ્મદ, લશ્કર-એ-તૈયબા અને હિઝબુલ-મુજાહિદ્દીન જેવા સંગઠનોના કેમ્પો પર કેન્દ્રિત હતા. સંરક્ષણ પ્રધાન રાજનાથ સિંહે કહ્યું કે ભારતે “ચોકસાઇ, સાવધાની અને કરુણા” સાથે કાર્યવાહી કરી જેથી ફક્ત આતંકવાદી માળખાને જનુકસાન થાય અને નિર્દોષ નાગરિકોને કોઈ નુકસાન ન થાય. તેમણે ભારતના “જવાબ આપવાના અધિકાર” હેઠળ આને યોગ્ય ઠેરવ્યું. પાકિસ્તાનની પ્રતિક્રિયા અને ભારતની પ્રતિક્રિયા ઓપરેશન સિંદૂર પછી, પાકિસ્તાને જમ્મુ, પઠાણકોટ અને ઉધમપુરમાં ભારતીય લશ્કરી થાણાઓને ડ્રોન અને મિસાઇલોથી નિશાનબનાવવાનો પ્રયાસ કર્યો. જોકે, ભારતીય હવાઈ સંરક્ષણ પ્રણાલીઓ, ખાસ કરીને S-400 એ આ હુમલાઓને નિષ્ફળ બનાવ્યા અને અનેકપાકિસ્તાની મિસાઇલો અને ડ્રોનને તોડી પાડ્યા. આ પછી તરત જ ભારતે પાકિસ્તાનના હવાઈ સંરક્ષણ સ્થળો પર હુમલો કરીને બદલો લીધો. ખાસ કરીને લાહોરમાં સ્થિત વાયુ સંરક્ષણપ્રણાલીને નિષ્ક્રિય કરવામાં આવી હતી. આ પ્રતિભાવ પછી જ બંને દેશો 10 મેના રોજ “બધી ગોળીબાર અને લશ્કરી કાર્યવાહી” બંધકરવા સંમત થયા. આંતરરાષ્ટ્રીય કાયદા હેઠળ ભારતના અધિકારો સંયુક્ત રાષ્ટ્ર ચાર્ટરની કલમ 51 સભ્ય દેશોને સશસ્ત્ર હુમલો કરવામાં આવે તો સ્વ-બચાવનો અધિકાર આપે છે. જ્યારે યુએન ચાર્ટરમાં”સશસ્ત્ર હુમલો” શું છે તે ખાસ જણાવવામાં આવ્યું નથી, આંતરરાષ્ટ્રીય ન્યાય અદાલત (ICJ) એ તેને “બળના ઉપયોગનું સૌથી ગંભીરસ્વરૂપ” ગણાવ્યું છે. વિદેશ સચિવ વિક્રમ મિશ્રીએ સ્પષ્ટપણે તેનો ઉલ્લેખ ન કર્યો હોવા છતાં, ભારતે કલમ 51 હેઠળ ઓપરેશન સિંદૂરને વાજબી ઠેરવ્યું. તેમણે આ હુમલાઓને “માપેલા અને બિન-ઉશ્કેરણીજનક” ગણાવ્યા. ૮ મેના રોજ તેમણે સંયુક્ત રાષ્ટ્ર સુરક્ષા પરિષદ (UNSC) ના ૧૫સભ્ય દેશોમાંથી ૧૩ ના રાજદૂતોને હુમલાઓ વિશે માહિતી આપી. પાકિસ્તાની રાજદૂતને આમંત્રણ આપવામાં આવ્યું ન હતું. બિન–રાજ્ય પરિબળો સામે સ્વ–બચાવનો અધિકાર યુએન ચાર્ટરની રાજ્ય-કેન્દ્રિત પ્રકૃતિ આતંકવાદી સંગઠનો જેવા બિન-રાજ્ય કલાકારો સામે કાર્યવાહીને જટિલ બનાવે છે. જોકે, ૯/૧૧પછી, અમેરિકા જેવા દેશોએ દલીલ કરી હતી કે આત્મરક્ષાનો અધિકાર આતંકવાદી સંગઠનોને પણ લાગુ પડે છે. ICJનો અભિપ્રાય વધુ પ્રતિબંધિત રહ્યો છે, જેમાં કહેવામાં આવ્યું છે કે જ્યાં સુધી કોઈ રાજ્યને સીધી રીતે જવાબદાર ન ઠેરવી શકાય ત્યાંસુધી કલમ 51 લાગુ કરી શકાતી નથી. ભારતે તેના નિવેદનોમાં આતંકવાદીઓને પાકિસ્તાનની સંડોવણી અને સમર્થનના નક્કર પુરાવાઆપ્યા, જેનાથી આ હુમલો રાજ્ય પ્રાયોજિત આતંકવાદનું ઉદાહરણ બન્યો. સરહદી વિસ્તારોમાં પરિસ્થિતિ ઓપરેશન સિંદૂર અને ત્યારબાદ થયેલા તોપમારાથી જમ્મુ, રાજૌરી, પૂંછ, બારામુલ્લા અને કુપવાડાના સરહદી વિસ્તારોમાં ભયનુંવાતાવરણ સર્જાયું. પાકિસ્તાની દળો દ્વારા કરવામાં આવેલા ગોળીબારમાં ઓછામાં ઓછા 12 નાગરિકો અને એક સૈનિક માર્યા ગયા હતાજ્યારે 51 અન્ય ઘાયલ થયા હતા. અધિકારીઓએ આ વિસ્તારોમાં કામચલાઉ રાહત શિબિરો સ્થાપ્યા અને દરેક સરહદી જિલ્લાને ₹5 કરોડની રકમ જારી કરી. મુખ્યમંત્રીઓમર અબ્દુલ્લાએ વીડિયો કોન્ફરન્સિંગ દ્વારા ડેપ્યુટી કમિશનરો સાથે કટોકટી બેઠક યોજી હતી અને રાહત અને બચાવ કામગીરીનાનિર્દેશ આપ્યા હતા. આતંકવાદી સંગઠનો અને તેમની ભૂમિકા જે આતંકવાદી શિબિરોને નિશાન બનાવવામાં આવ્યા હતા તે જૈશ-એ-મોહમ્મદ, લશ્કર-એ-તૈયબા અને હિઝબુલ-મુજાહિદ્દીન જેવા મુખ્યપ્રતિબંધિત સંગઠનો સાથે જોડાયેલા હતા. જૈશ-એ-મોહમ્મદ (JeM): પાકિસ્તાનના બહાવલપુરમાં મુખ્ય મથક ધરાવતી, તેની સ્થાપના 2000 માં મસૂદ અઝહર દ્વારા કરવામાં આવીહતી. આ સંગઠન સંસદ પરના હુમલાથી લઈને પુલવામા આત્મઘાતી હુમલા સુધીના ઘણા હુમલાઓમાં સામેલ રહ્યું છે. લશ્કર-એ-તૈયબા (LeT): આ સંગઠન 2008ના મુંબઈ હુમલા અને 2006ના મુંબઈ ટ્રેન વિસ્ફોટ માટે જવાબદાર હતું. તેનું મુખ્ય મથકપાકિસ્તાનના લાહોર નજીક મુરીદકેમાં છે. ભારતની લશ્કરી ક્ષમતાઓ અને કાર્યક્ષમતા આ સમગ્ર કામગીરીમાં ભારતે પોતાની લશ્કરી વ્યૂહરચના અને ટેકનિકલ કાર્યક્ષમતા દર્શાવી. S-400 વાયુ સંરક્ષણ પ્રણાલીએ પાકિસ્તાનદ્વારા છોડવામાં આવેલા આઠ મિસાઇલો અને અનેક ડ્રોનને સફળતાપૂર્વક નિષ્ક્રિય કર્યા. બદલામાં, ભારતે પણ ત્રણ પાકિસ્તાની લડાકુવિમાનોને તોડી પાડ્યા, જેમાંથી એક F-16 અને બે JF-17 હતા. ભારતે ફરી એકવાર સાબિત કર્યું છે કે તે કોઈપણ પ્રકારના આતંકથી ડરતું નથી કે ન તો ઝૂકતું છે. ભારતે સ્પષ્ટ કર્યું કે તે યુદ્ધ ઇચ્છતું નથી, પરંતુ જો તેની સાર્વભૌમત્વ અને તેના નાગરિકોની સલામતી જોખમમાં મુકાય તો તે શાંત નહીંબેસે. સંરક્ષણ મંત્રાલયે કહ્યું કે ભારતનો પ્રતિભાવ પાકિસ્તાન જેટલો જ તીવ્ર રહ્યો છે, પરંતુ ભારત તણાવ વધારવા માંગતું નથી. ભારતની નીતિ સ્પષ્ટ છે: તે ન તો પહેલો હુમલો કરે છે અને ન તો કોઈ ઉશ્કેરણીને અવગણે છે. “ઓપરેશન સિંદૂર” આનો પુરાવો છે. આમાત્ર લશ્કરી કાર્યવાહી નહોતી, પરંતુ એક રાજદ્વારી અને કાનૂની સંદેશ પણ હતો – કે ભારત પોતાનો બચાવ કરવા સક્ષમ છે અને આમકરવા માટે આંતરરાષ્ટ્રીય ધોરણોનું પાલન કરે છે. ટ્રમ્પની ‘સંધિ નીતિ‘ અને ભારતમાં ગુસ્સો આ લશ્કરી સંઘર્ષ વચ્ચે, યુએસ રાષ્ટ્રપતિ ડોનાલ્ડ ટ્રમ્પે 10 મેના રોજ અચાનક સોશિયલ મીડિયા પર જાહેરાત કરી કે ભારત અનેપાકિસ્તાન યુદ્ધવિરામ માટે સંમત થયા છે. તેમણે દાવો કર્યો કે અમેરિકાની મધ્યસ્થીથી આ શક્ય બન્યું છે અને હવે બંને દેશો તટસ્થસ્થળે વાટાઘાટો કરશે. આ જાહેરાતથી ભારતમાં વ્યાપક આક્રોશ ફેલાયો હતો. ભારતીય જનતાએ ટ્રમ્પના આ પગલાને પાકિસ્તાન પ્રત્યે નરમ વલણ અનેભારતની મજબૂત વ્યૂહાત્મક સ્થિતિને નબળી પાડવાનું પગલું ગણાવ્યું. નિષ્ણાતો માને છે કે આ ભારત-પાકિસ્તાન મુદ્દાઓમાં કોઈપણત્રીજા પક્ષને દખલ ન કરવાની ભારતની ઐતિહાસિક નીતિની વિરુદ્ધ છે. ટ્રમ્પની ધમકી અને વિપક્ષનું આક્રમક વલણ ૧૨ મેના રોજ, ટ્રમ્પના બીજા એક નિવેદને વિવાદને વધુ ઘેરો બનાવ્યો. તેમણે કહ્યું કે જો ભારત અને પાકિસ્તાન યુદ્ધ બંધ નહીં કરે તોઅમેરિકા તેમની સાથે વેપાર નહીં કરે. આ ધમકીભર્યા નિવેદનથી ભારતમાં વિપક્ષને વડા પ્રધાન મોદી પર નિશાન સાધવાની તક મળી. વિરોધ પક્ષોએ પ્રશ્ન ઉઠાવ્યો કે શું ભારત અમેરિકાના વ્યાપારિક હિતો માટે પોતાની વ્યૂહાત્મક સ્વતંત્રતાને ગીરવે મૂકશે? કોંગ્રેસ, આરજેડીઅને અન્ય પક્ષોએ સરકાર પાસે સંસદનું ખાસ સત્ર બોલાવવાની માંગ કરી હતી જેથી ટ્રમ્પના ‘સરદારી’ વિશે વિશ્વને સ્પષ્ટ સંદેશ આપીશકાય. આરજેડી સાંસદ મનોજ ઝાએ કડક શબ્દોમાં કહ્યું કે ટ્રમ્પને કાશ્મીર મુદ્દામાં દખલ કરવાનો અધિકાર કોણે આપ્યો? આ દરમિયાનઆરજેડી પ્રવક્તા પ્રિયંકા ભારતીએ મોદી પર કટાક્ષ કર્યો અને તેમને ’56 ઇંચની ભીની બિલાડી’ કહ્યા. બ્રહ્મા ચેલ્લાનીનું વિશ્લેષણ: નીતિ વિરુદ્ધ નેતૃત્વ વિદેશી બાબતોના નિષ્ણાત બ્રહ્મા ચેલ્લાનીએ ટ્રમ્પના વલણની ટીકા કરતા કહ્યું કે તેમણે પાકિસ્તાનને ભારતીય સેના દ્વારા સજાથીબચાવ્યું. તેમણે એમ પણ કહ્યું કે ટ્રમ્પનો આ હસ્તક્ષેપ વાસ્તવમાં પાકિસ્તાનના એજન્ડાને વેગ આપે છે જે કાશ્મીર મુદ્દાનેઆંતરરાષ્ટ્રીયકરણ કરવા માંગે છે. જોકે, ચેલેનીએ પીએમ મોદીની પ્રશંસા કરી હતી, જેમણે તેમના સંબોધનમાં ટ્રમ્પ સામે પરોક્ષ રીતે કરેલી ટીકા કરી હતી. મોદીએ સ્પષ્ટકર્યું કે ભારત પાકિસ્તાન સાથે ફક્ત બે મુદ્દાઓ પર વાત કરશે – પાકિસ્તાન કબજા હેઠળના કાશ્મીરની પરત ફરવા અને આતંકવાદનોખાત્મો. ભારતીય અમેરિકનોનો રોષ અમેરિકામાં રહેતા ભારતીયોએ પણ ટ્રમ્પની ટીકા કરી હતી. પ્રખ્યાત ભારતીય અમેરિકન લેખક અને વિવેચક વિભૂતિ ઝાએ ટ્રમ્પનેસંબોધતા કહ્યું કે તમે નરેન્દ્ર મોદી અને શાહબાઝ શરીફને એક જ ત્રાજવે તોલીને ‘મિત્રતા’ શબ્દનો અપમાન કર્યો છે. તેમણે કહ્યું કે જેનેતાઓ પોતાના સૈનિકો અને આતંકવાદીઓ વચ્ચે ભેદ કરી શકતા નથી તેમને સારા નેતા ન કહી શકાય. X (અગાઉ ટ્વિટર) પર મોહન સિંહા જેવા ભારતીય અમેરિકનોએ પણ ટ્રમ્પની અજ્ઞાનતા પર તીવ્ર પ્રતિક્રિયા આપી અને અમેરિકાનીદક્ષિણ એશિયા નીતિને એકતરફી અને ઐતિહાસિક રીતે પાકિસ્તાન તરફી ગણાવી. ટ્રમ્પના વલણમાં ફેરફાર: ચૂંટણી વ્યૂહરચના કે યુએસ નીતિ? એક મોટો પ્રશ્ન એ છે કે ટ્રમ્પે તેમના પહેલા કાર્યકાળમાં પાકિસ્તાનને આપવામાં આવતી લશ્કરી સહાય બંધ કરી દીધી હતી, ચીન સામેભારતને ટેકો આપ્યો હતો, તો પછી હવે તેમણે આ યુ-ટર્ન કેમ લીધો? વિશ્લેષકો માને છે કે ટ્રમ્પ આગામી ચૂંટણીઓમાં બતાવવા માંગે છેકે તેઓ વૈશ્વિક શાંતિ લાવવામાં સક્ષમ છે. ટ્રમ્પે રશિયા-યુક્રેન અને ઇઝરાયલ-હમાસ સંઘર્ષમાં પહેલાથી જ કોઈ મહત્વપૂર્ણ ભૂમિકા ભજવી નથી. તેમણે ભારત-પાકિસ્તાન સંઘર્ષનેતેમની રાજદ્વારી સક્રિયતા દર્શાવવાની તક તરીકે જોયો. આ તેમની ઘરેલુ છબીને ઉજ્જવળ બનાવવાનો પ્રયાસ હતો. તે જ સમયે, કેટલાક નિષ્ણાતો એવું પણ માને છે કે આ ટ્રમ્પનો વ્યક્તિગત નિર્ણય નથી પરંતુ અમેરિકાની પરંપરાગત રણનીતિ છે. પાકિસ્તાનનું ભૌગોલિક સ્થાન અને તેનું લશ્કરી માળખું હંમેશા અમેરિકા માટે વ્યૂહાત્મક રીતે મહત્વપૂર્ણ રહ્યું છે. ભારતીય હુમલાઓની અસર અને ‘પરમાણુ સંકટ‘નો ભય ૧૨ મેના રોજ, ભારતીય સેનાએ પાકિસ્તાન સામે આક્રમણ શરૂ કર્યું જેમાં મુખ્ય હવાઈ મથકોને નિશાન બનાવવામાં આવ્યા. આમાં રફીકીએરબેઝ (શોરકોટ), નૂરખાન એરબેઝ (રાવલપિંડી), મલીર કેન્ટોનમેન્ટ (કરાચી) અને કેટલીક રડાર સાઇટ્સનો સમાવેશ થાય છે. આનાથી સ્પષ્ટ થયું કે ભારતે પાકિસ્તાનના દરેક વ્યૂહાત્મક શહેરમાં લશ્કરી થાણાઓને સફળતાપૂર્વક નિશાન બનાવ્યા. એવા પણ દાવાઓ છે કે ભારતે પરમાણુ સુવિધા પર હુમલો કર્યો હતો, જેના કારણે અમેરિકાને તેનું પરમાણુ સુરક્ષા સહાયક વિમાન B350 AMS તૈનાત કરવાની ફરજ પડી હતી. જોકે, ભારતીય સેનાએ આ દાવાઓને ફગાવી દીધા કારણ કે તેનાથી તણાવની ગંભીરતાનોઅંદાજ આવી શકે છે. રાજદ્વારી અને રાષ્ટ્રીય ગૌરવનું સંતુલન આ સમગ્ર ઘટનાએ સ્પષ્ટ કરી દીધું કે ભારત હવે ૧૯૯૯ કે ૨૦૦૧નું ભારત રહ્યું નથી, જે બાહ્ય દબાણ સામે ઝૂકતું હતું. ભારત માટેઅમેરિકા જેવા દેશો સાથે વ્યૂહાત્મક સંબંધો જાળવવા જરૂરી છે, પરંતુ આ સંબંધો સાર્વભૌમત્વ ગુમાવવાની કિંમતે ન હોઈ શકે. ડોનાલ્ડ ટ્રમ્પની તાજેતરની ભૂમિકાએ અમેરિકા-ભારત સંબંધોની જટિલતાને ઉજાગર કરી છે. ભારતની વિદેશ નીતિ માટે આ એકપડકારજનક સમય છે – જ્યાં તેણે વૈશ્વિક રાજદ્વારી, પ્રાદેશિક સુરક્ષા અને સ્થાનિક રાજકારણ વચ્ચે સંતુલન જાળવવું પડશે. ટ્રમ્પ જેવાઅણધાર્યા નેતાઓનો સામનો કરવા માટે વડા પ્રધાન મોદીએ વધુ સક્રિય અને પારદર્શક રાજદ્વારી વલણ અપનાવવું જોઈએ જેથીભારતની ગરિમા અને સુરક્ષા સાથે ચેડા ન થાય.