ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्लेस की भारत यात्रा, रणनीतिक साझेदारी को मिली नई मजबूती

ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस भारत के दौरे पर हैं। बुधवार को उन्होंने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से नई दिल्ली मेंमुलाकात की। इस अहम बैठक में दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करने पर जोर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नेपहलगाम में हुए आतंकी हमले के खिलाफ भारत की सख्त प्रतिक्रिया का समर्थन करने के लिए ऑस्ट्रेलिया का आभार जताया। इससे पहले, रिचर्डमार्लेस ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और मानेकशॉ सेंटर में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। दक्षिण एशिया के चार देशों की यात्रा पर हैं मार्लेसरिचर्ड मार्लेस इस समय दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के चार देशों—भारत, मालदीव, श्रीलंका और इंडोनेशिया—के दौरे पर हैं। यह दौरा 2 जून सेशुरू हुआ है और इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों के साथ ऑस्ट्रेलिया के रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करना है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्तके अनुसार, मार्लेस का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी की पांचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हो रहा है, जिससे विशेष रूप से समुद्रीसहयोग को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद हुआ है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र और आतंकवाद पर गहन बातचीतराजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंनेकहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी अब द्विपक्षीय संबंधों की रीढ़ बन चुकी है। रिचर्ड मार्लेस ने भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत केसाथ एकजुटता दिखाई और स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया इस लड़ाई में भारत और अन्य देशों के साथ खड़ा है। भारत के साथ संबंध प्राथमिकता में: मार्लेसमार्लेस ने कहा कि भारत के साथ रणनीतिक सहयोग ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता रखता है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान केबीच संघर्ष विराम का भी स्वागत किया और भरोसा जताया कि दोनों देश आतंकवाद की चुनौती से निपटने में मिलकर आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने यहभी जोड़ा कि यह समय दोस्तों के साथ मिलकर काम करने का है और ऑस्ट्रेलिया भारत को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर सियासी घमासान, भाजपा ने बताया सेना का अपमान

भोपाल में एक जनसभा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका के पूर्वराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फोन कॉल के बाद मोदी ने “सरेंडर” कर दिया। यह बयान उस समय आया जब देश हाल ही में संपन्न हुए ‘ऑपरेशनसिंदूर’ पर गर्व कर रहा था, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर 300 किलोमीटर अंदर घुसकर 11 एयरबेस और 9 आतंकी ठिकानोंको तबाह किया था। इस ऑपरेशन में 150 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने की पुष्टि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई थी। राहुल गांधीके इस बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे भारतीय सेना और 140 करोड़ देशवासियों का घोर अपमान बताया।उन्होंने कहा कि यदि ऐसा बयान किसी पाकिस्तानी से आता तो भी लोग हँसते, लेकिन एक भारतीय नेता द्वारा सेना के शौर्य को ‘सरेंडर’ कहनाराष्ट्रविरोध जैसा है। जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को ‘सरेंडर’ की परंपरा की याद दिलाते हुए कांग्रेस के अतीत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1948 में कश्मीर मसले पर, 1962 में चीन के सामने, 1971 की जीत के बावजूद शिमला समझौते में, हाजी पीर दर्रे की वापसी में और सिंधु जल संधि जैसे मामलों में कांग्रेस नेदेश के हितों के साथ समझौता किया। उन्होंने कहा कि ‘सरेंडर’ शब्द कांग्रेस की डिक्शनरी में है, भारत की नहीं। इसके जवाब में राहुल गांधी ने भाजपाऔर संघ को ‘कायर’ करार देते हुए कहा कि हल्का सा दबाव पड़ते ही ये भाग जाते हैं। उन्होंने 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि इंदिरागांधी ने अमेरिका के सेवंथ फ्लीट की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। राहुल ने यह भी कहा कि कांग्रेस झुकती नहीं, लड़तीहै – जैसा नेहरू, पटेल और गांधी ने करके दिखाया था। इस बयान को लेकर भाजपा नेताओं में तीखा आक्रोश फैल गया। प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर सेना का अपमान करने का आरोप लगायाऔर यहां तक कहा कि क्या वे किसी विदेशी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस सरकार की 26/11 के बाद की प्रतिक्रिया को निष्क्रिय बतायाऔर दावा किया कि अब मोदी सरकार डोजियर नहीं, ठोस जवाब देती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल को ‘पप्पू’ कहते हुए कहा कि ऐसेगैरजिम्मेदार बयान उन्हें गंभीरता से लेने लायक नहीं छोड़ते। वहीं, भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने राहुल गांधी की राजनीतिक परिपक्वता परसवाल उठाया। भोपाल में जहां कांग्रेस ने ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत की थी, वहीं यह बयान अब कांग्रेस के उस कार्यक्रम से भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनगया है। राहुल गांधी ने इस अभियान के तहत कार्यकर्ता-आधारित नेतृत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बात की, लेकिन भाजपा ने इसे भी व्यंग्य कानिशाना बनाते हुए कहा कि पहले “बुद्धि का सृजन करो, फिर संगठन की बात करो।” कुल मिलाकर, राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ वाले बयान ने न केवलराजनीतिक भूचाल खड़ा किया बल्कि एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा को राष्ट्रवाद और सैन्य सम्मान की बहस में आमने-सामने ला खड़ा किया है।
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक, केंद्र ने की तारीखों की घोषणा

विपक्ष की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर लगातार संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की जा रही थी। इन मांगोंके बीच केंद्र सरकार ने संसद के आगामी मानसून सत्र की तारीखों का एलान कर दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया किमानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा। बीमा संशोधन विधेयक हो सकता है पेशइस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया जाएगा। उनमें से सबसे अहम बीमा संशोधन विधेयक माना जा रहा है। सरकार इस विधेयक केमाध्यम से बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना बना रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका मसौदातैयार है और इसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। उसके बाद यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। ‘इंडिया’ गठबंधन की विशेष सत्र की मांगविपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने भी सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने कहा किविपक्ष जनता की आवाज उठा रहा है और सरकार को विशेष सत्र बुलाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ परसरकार स्वयं एक विशेष सत्र बुला सकती है। पिछला बजट सत्र दो चरणों में हुआ था आयोजितइससे पहले संसद का बजट सत्र दो हिस्सों में आयोजित किया गया था। पहला चरण 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चला, जबकि दूसरा चरण 10 मार्च से 4 अप्रैल तक चला। राज्यसभा में रिकॉर्ड कामकाजराज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने जानकारी दी थी कि बजट सत्र के दौरान तीन अप्रैल को राज्यसभा की अब तक की सबसे लंबी बैठक हुई थी, जो अगले दिन सुबह 4:02 बजे तक चली। इस सत्र में कुल 159 घंटे काम हुआ और उत्पादकता 119 प्रतिशत रही। इस दौरान 49 निजी सदस्यों केविधेयक भी प्रस्तुत किए गए। लोकसभा में भी उल्लेखनीय कार्यलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि निचले सदन की कुल 26 बैठकें हुईं, जिनकी औसत उत्पादकता 118 प्रतिशत रही। बजट सत्र के दौरानकुल 10 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 16 विधेयक पारित किए गए, जिनमें वक्फ संशोधन विधेयक भी शामिल था।
लखनऊ में IRS अधिकारियों के बीच झड़प, असिस्टेंट कमिश्नर योगेंद्र मिश्रा सस्पेंड, जांच की मांग तेज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इनकम टैक्स विभाग के कार्यालय में दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई झड़प के मामले ने अब तूल पकड़लिया है। विवाद में शामिल असिस्टेंट कमिश्नर योगेंद्र मिश्रा को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्हें अब बंगाल-सिक्किम रीजन से अटैच कर दिया गया हैऔर निर्देश दिए गए हैं कि वह मुख्यालय पूर्व अनुमति के बिना नहीं छोड़ सकते। एफआईआर दर्ज, गंभीर आरोपलखनऊ के हजरतगंज थाने में योगेंद्र मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला तब सामने आया जब 29 मई को नरही स्थित इनकम टैक्स दफ्तर में डिप्टी कमिश्नर गौरव गर्ग के साथ एक बैठक के दौरान विवाद हो गया, जो बाद में हाथापाई में बदल गया। बताया गया है कि झगड़े में गौरव गर्ग के नाक से खून बहने लगा, जिसके बाद उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। योगेंद्र मिश्रा ने लगाया पक्षपात का आरोपएफआईआर दर्ज होने के बाद योगेंद्र मिश्रा ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गौरव गर्ग की पत्नी आईपीएस अधिकारी रवीना त्यागी लखनऊ में ही तैनात हैं और पुलिस उन्हीं के दबाव में कार्रवाई कर रही है। मिश्रा ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लखनऊ पुलिस से सीसीटीवी फुटेज खंगालने की अपील की है। छवि खराब करने की साजिश का आरोपयोगेंद्र मिश्रा का दावा है कि उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत भी दी, लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। मिश्रा का कहना है कि सच सामने लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
स्पेन में डीएमके सांसद कनिमोझी का अनोखा जवाब, “भारत की राष्ट्र भाषा है , “विविधता में एकता”

विदेश में भारत का पक्ष रखने गईं कनिमोझी को मिला जोरदार समर्थनडीएमके सांसद कनिमोझी ने स्पेन में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की राष्ट्र भाषा से जुड़े एक जटिल सवाल का ऐसा जवाब दिया कि हॉल देर तकतालियों से गूंजता रहा। वे एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही थीं, जो ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद पर भारतका पक्ष विभिन्न देशों में रख रहा है। इसी दौरान मैड्रिड में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में उनसे पूछा गया कि भारत की राष्ट्र भाषा क्या है? “विविधता में एकता” को बताया भारत की असली पहचानकनिमोझी ने बेहद हाजिरजवाबी से जवाब देते हुए कहा, “आप भारत की राष्ट्र भाषा के बारे में जानना चाहते हैं… भारत की राष्ट्र भाषा है – विविधता मेंएकता।” उनके इस जवाब को न केवल स्थानीय भारतीय समुदाय ने सराहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह तेजी से वायरल हो गया है। उन्होंने आगेकहा कि यही संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचाया जा रहा है और आज के दौर में यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों में एक कर रही है नेतृत्वभारत सरकार ने 33 देशों में पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी साझा करने के लिए सात बहुदलीयप्रतिनिधिमंडल भेजे हैं। कनिमोझी स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया, लातविया और रूस यात्रा पर गए प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रही हैं। इस दल मेंसमाजवादी पार्टी से राजीव राय, नेशनल कॉन्फ्रेंस से मियां अल्ताफ अहमद, बीजेपी से बृजेश चौटा, आरजेडी से प्रेम चंद गुप्ता, आप पार्टी से अशोककुमार मित्तल, और पूर्व राजनयिक मंजीव सिंह पुरी व जावेद अशरफ शामिल हैं। तीन-भाषा नीति पर डीएमके का विरोध जारीडीएमके लंबे समय से केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विरोध करती रही है। पार्टी का आरोप है कि केंद्रहिंदी को गैर-हिंदी भाषी राज्यों पर थोपने की कोशिश कर रहा है। कनिमोझी ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को फंड रोक कर शिक्षाप्रणाली को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जो बच्चों के भविष्य को नुकसान पहुँचा सकती है। संघवाद और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा में डीएमके का रुख स्पष्टडीएमके की नीति दो-भाषा प्रणाली (तमिल और अंग्रेज़ी) पर आधारित है और वह क्षेत्रीय भाषाओं की रक्षा को संघीय ढांचे की आत्मा मानती है। पार्टीका यह मानना है कि तीन-भाषा नीति से राज्यों की स्वायत्तता पर आघात होता है और यह क्षेत्रीय अस्मिता के खिलाफ है।
वक्फ संपत्तियों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम, ‘उम्मीद’ पोर्टल 6 जून को होगा लॉन्च

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर रोक लगाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने वक्फ से जुड़ी पारदर्शिता और प्रबंधनसुधार की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 6 जून को ‘उम्मीद’ नामक एक डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने जा रही है, जिसकाउद्देश्य देशभर की वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।क्या है ‘उम्मीद’ पोर्टल?‘उम्मीद’ का पूर्ण नाम Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development Act है। यह पोर्टल वक्फसंपत्तियों के पंजीकरण को डिजिटल रूप से अनिवार्य बनाता है और इसके माध्यम से संपत्तियों की पहचान, निगरानी और प्रबंधन की प्रक्रिया पारदर्शीकी जाएगी। इस पोर्टल में संपत्तियों को आधार, भू-राजस्व रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के डेटा से जोड़ने की योजना है। महिलाओं की संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं किया जाएगाएक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत महिलाओं के नाम पर दर्ज संपत्तियों या ऐसी संपत्तियों जिनमें महिलाएं उत्तराधिकारी हैं, उन्हें वक्फ संपत्ति घोषित नहींकिया जा सकेगा। इससे महिला संपत्ति अधिकारों को सुरक्षा देने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है।जियो-टैगिंग और विवरण अनिवार्यअब प्रत्येक वक्फ संपत्ति का जियो-टैगिंग करना और उसकी पूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे संपत्तियों का गलत उपयोग याअवैध कब्जा रोकने में मदद मिलेगी। रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी मुतवल्ली परसंपत्तियों का रजिस्ट्रेशन संबंधित राज्य वक्फ बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें मुतवल्ली (प्रबंधक) की जिम्मेदारी होगी कि वह यह प्रक्रियापूरी करें। वक्फ बोर्ड तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा।6 महीने की समय सीमा और अतिरिक्त मौकासरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सभी वक्फ संपत्तियों को 6 महीने के भीतर रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य होगा। हालांकि, यदि किसी तकनीकी बाधा याअन्य गंभीर कारण से रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं हो पाए, तो उन्हें 1 से 2 महीने का अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है।
I.N.D.I.A गठबंधन ने उठाई संसद के विशेष सत्र की मांग, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सरकार से पारदर्शिता की अपेक्षा

पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। दिल्ली स्थितकॉन्स्टिट्यूशन क्लब में I.N.D.I.A गठबंधन से जुड़े प्रमुख दलों की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी) सहितकुल 16 विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र भेजा गया, जिसमें संसद का विशेष सत्र बुलाने कीमांग की गई है। सरकार को संसद में जवाब देना होगाकांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि सभी 16 दलों ने मिलकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हमले के बाद विपक्षने सरकार को पूरा समर्थन दिया, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर संसद में विस्तार से जानकारी दे। उन्होंने कहा कि संसदविशेष सत्र का मंच ऐसा होना चाहिए जहां सभी सांसद मिलकर सेना का आभार जता सकें और सरकार की ओर से हर पहलू पर पारदर्शी जानकारी दीजा सके। ट्रंप के बयानों ने भारत को आहत कियाआरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते 15 दिनों में 13 बयान दिए हैं, जिनमें से कई भारत की भावनाओं को ठेसपहुंचाने वाले थे। उन्होंने कहा कि यह केवल विपक्ष या सत्ता पक्ष का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय आत्मसम्मान और जवाबदेही का मामला है। क्या ट्रंप से सत्र बुलाने की अनुमति लें?शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि 16 दलों के नेताओं के हस्ताक्षर वाला पत्र प्रधानमंत्री को भेजा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जबअमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कहने पर युद्धविराम हो सकता है, तो फिर विपक्ष की मांग पर विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा रहा? क्या अब हमें संसदबुलाने के लिए ट्रंप के पास जाना पड़ेगा? डेरेक ओ ब्रायन: “सरकार को संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए”टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि पत्र में पुंछ, उरी और राजौरी में हुई घटनाओं पर स्वतंत्र चर्चा की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि संसदजनता की प्रतिनिधि संस्था है और सरकार को उसकी जवाबदेही निभानी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने भी कहा है कि वह अलग से प्रधानमंत्री को पत्रभेजेगी। रामगोपाल यादव: “सैनिकों को सलाम, कूटनीति पर सवाल”समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि हमारी सेना ने उत्कृष्ट कार्य किया है, उन्हें धन्यवाद और बधाई दी जानी चाहिए। लेकिनसवाल यह है कि इतने अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद भारत को खुला समर्थन किसी भी देश से नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति परसवाल उठाते हुए कहा कि संसद को अंधेरे में रखना उचित नहीं है।
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में मोदी सरकार पर कसा तंज, ट्रंप के फोन और जातिगत जनगणना पर जताई आपत्ति

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, 3 मई 2025 को मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र की मोदी सरकार परकड़ी आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान के साथ चल रहे सीजफायर पर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के बयान का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार कोसवालों के घेरे में लिया। राहुल गांधी ने कहा, “ट्रंप के एक फोन के बाद नरेंद्र मोदी तुरंत हार मान गए। इतिहास इस बात का गवाह है कि बीजेपी-आरएसएस हमेशा दबाव में झुकती है।” 1971 की जंग और कांग्रेस की बहादुरी पर जोरराहुल गांधी ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वक्त अमेरिका की धमकियों के बावजूद भारत ने साहस दिखाया था।उन्होंने कहा, “कांग्रेस के नेताओं ने सुपरपावर के सामने कभी झुका नहीं। इंदिरा गांधी के समय फोन कॉल नहीं बल्कि सातवां बेड़ा आया था, लेकिनउन्होंने हिम्मत दिखाई और जो करना था किया। कांग्रेस कभी सरेंडर नहीं करती। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल सभी ऐसे नेता थेजिन्होंने हमेशा साहस से सामना किया।” बीजेपी-आरएसएस पर संविधान के खिलाफ आरोपराहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के संविधान की रक्षा करती है, जबकि बीजेपी-आरएसएस इसे खत्म करने में लगे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार कीजातिगत जनगणना को लेकर नीति की भी आलोचना की। राहुल गांधी ने कहा, “बीजेपी और आरएसएस दबाव में आकर जातिगत जनगणना की बातकर रहे हैं, लेकिन असल में वे इसे नहीं कराना चाहते क्योंकि वे देश में न्याय नहीं चाहते।” जातिगत जनगणना पर मोदी सरकार को फटकारनेता प्रतिपक्ष ने कहा, “हमने साफ कर दिया था कि सामाजिक न्याय के लिए लड़ेंगे और लोकसभा में जातिगत जनगणना को पास कराएंगे। इसकेबाद प्रधानमंत्री मोदी, मोहन भागवत और नितिन गडकरी ने इस मुद्दे पर अपनी बातें रखीं। लेकिन जब थोड़ा दबाव पड़ा तो ये लोग झुक गए औरजातिगत जनगणना के समर्थन से पीछे हट गए। यह साबित करता है कि बीजेपी-आरएसएस देश में समानता और न्याय को आगे बढ़ाना नहीं चाहते।”
प्रधानमंत्री मोदी 9-10 जून को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सांसदों से करेंगे मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 9 और 10 जून को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विदेशों में भारत का पक्ष रखने गए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकातकरने वाले हैं। इस बैठक में भारत-पाक सीमा पर आतंकवाद और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत की गई सैन्य कार्रवाई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां औरसबूत साझा किए जाएंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं, जो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का असलीचेहरा दुनिया के सामने लाने का काम कर रहे हैं। संसद का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भारत का पक्ष रख चुका हैकांग्रेस के शशि थरूर के नेतृत्व में भारत का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका दौरे पर भी गया था। इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद, तेलुगुदेशम पार्टी के जीएम हरीश बालयोगी, भाजपा के शशांक मणि त्रिपाठी और भुवनेश्वर कालिता, शिवसेना के मिलिंद देवड़ा, भाजपा के तेजस्वी सूर्याऔर भारत के पूर्व अमेरिकी राजदूत तरनजीत सिंह संधू शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने औरभारत पर इसके प्रभाव को विश्व स्तर पर उजागर करना था। प्रतिनिधिमंडलों का मकसद: दुनिया को आतंकवाद की सच्चाई बतानादोनों प्रतिनिधिमंडलों ने विदेशों में जाकर पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजित गतिविधियों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। भारत चाहताहै कि वैश्विक समुदाय आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि वह इस खतरे को बंद करे। भारत की उम्मीद है किअंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर गंभीरता बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। पहली मंत्रिपरिषद बैठक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बादप्रधानमंत्री मोदी इसी सप्ताह केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। यहबैठक पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें आतंकवाद से निपटने कीरणनीति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा होगी। भारत-पाक तनाव के बीच सुरक्षा रणनीतियों पर चर्चा‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बीच यह बैठक खास अहमियत रखती है। भारत ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीकहवाई हमले कर अपनी जवाबी कार्रवाई की थी। अब इस कार्रवाई और उसके प्रभावों को लेकर रणनीति तय करने के लिए मंत्रिपरिषद एकजुट होगी।प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह बैठक भारत की सुरक्षा नीति को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने की दिशा में निर्णायकसाबित होगी।
पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन का कहर, अब तक 36 मौतें, 5.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य: असम में हालात गंभीरपूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश के चलते बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है। अब तक इन प्राकृतिक आपदाओं में 36 लोगों की जान जा चुकीहै, जबकि 5.5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर असम में देखा गया है, जहां 22 जिलों में 5.35 लाख से अधिक लोग बाढ़की चपेट में आ चुके हैं। राज्य में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 15 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। अन्य राज्यों में भी भारी नुकसानअसम के बाद सबसे ज्यादा मौतें अरुणाचल प्रदेश में हुई हैं, जहां अब तक 10 लोगों की जान गई है। मेघालय में 6, मिजोरम में 5, सिक्किम में 3 और त्रिपुरा में 1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। विभिन्न राज्यों में बाढ़ के साथ-साथ भूस्खलन की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। सिक्किम में सेना पर आपदा की मारसिक्किम के छतेन क्षेत्र में एक सैन्य शिविर भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें तीन सैनिकों की मौत हो गई और छह अन्य सैनिक लापता हैं। रक्षाअधिकारियों के अनुसार, राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं। मणिपुर में हालात भयावह, हजारों घर प्रभावितमणिपुर में भारी बारिश और बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। अब तक राज्य में 3,365 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1,599 लोगों को सुरक्षितस्थानों पर पहुंचाया गया है। लगभग 11.8 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। प्रदेशभर में 47 स्थानों पर भूस्खलन हुआ है, जिससेजनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर, बांध टूटे, गांवों में पानी भरामणिपुर की प्रमुख नदियां—इंफाल और इरिल खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई क्षेत्रों में बांध टूटने के कारण बाढ़ का पानी तेजी से आसपासके इलाकों में फैल गया है। हालांकि कुछ स्थानों पर जलस्तर में मामूली गिरावट आई है, लेकिन अधिकतर नदियां अभी भी उच्च बाढ़ स्तर से ऊपरबनी हुई हैं।