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प्रधानमंत्री मोदी 9-10 जून को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सांसदों से करेंगे मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 9 और 10 जून को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद विदेशों में भारत का पक्ष रखने गए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकातकरने वाले हैं। इस बैठक में भारत-पाक सीमा पर आतंकवाद और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत की गई सैन्य कार्रवाई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां औरसबूत साझा किए जाएंगे। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं, जो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का असलीचेहरा दुनिया के सामने लाने का काम कर रहे हैं। संसद का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भारत का पक्ष रख चुका हैकांग्रेस के शशि थरूर के नेतृत्व में भारत का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका दौरे पर भी गया था। इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरफराज अहमद, तेलुगुदेशम पार्टी के जीएम हरीश बालयोगी, भाजपा के शशांक मणि त्रिपाठी और भुवनेश्वर कालिता, शिवसेना के मिलिंद देवड़ा, भाजपा के तेजस्वी सूर्याऔर भारत के पूर्व अमेरिकी राजदूत तरनजीत सिंह संधू शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने औरभारत पर इसके प्रभाव को विश्व स्तर पर उजागर करना था। प्रतिनिधिमंडलों का मकसद: दुनिया को आतंकवाद की सच्चाई बतानादोनों प्रतिनिधिमंडलों ने विदेशों में जाकर पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजित गतिविधियों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया। भारत चाहताहै कि वैश्विक समुदाय आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि वह इस खतरे को बंद करे। भारत की उम्मीद है किअंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर गंभीरता बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। पहली मंत्रिपरिषद बैठक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बादप्रधानमंत्री मोदी इसी सप्ताह केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। यहबैठक पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें आतंकवाद से निपटने कीरणनीति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा होगी। भारत-पाक तनाव के बीच सुरक्षा रणनीतियों पर चर्चा‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बीच यह बैठक खास अहमियत रखती है। भारत ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीकहवाई हमले कर अपनी जवाबी कार्रवाई की थी। अब इस कार्रवाई और उसके प्रभावों को लेकर रणनीति तय करने के लिए मंत्रिपरिषद एकजुट होगी।प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह बैठक भारत की सुरक्षा नीति को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने की दिशा में निर्णायकसाबित होगी।

पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन का कहर, अब तक 36 मौतें, 5.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य: असम में हालात गंभीरपूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश के चलते बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है। अब तक इन प्राकृतिक आपदाओं में 36 लोगों की जान जा चुकीहै, जबकि 5.5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा असर असम में देखा गया है, जहां 22 जिलों में 5.35 लाख से अधिक लोग बाढ़की चपेट में आ चुके हैं। राज्य में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 15 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। अन्य राज्यों में भी भारी नुकसानअसम के बाद सबसे ज्यादा मौतें अरुणाचल प्रदेश में हुई हैं, जहां अब तक 10 लोगों की जान गई है। मेघालय में 6, मिजोरम में 5, सिक्किम में 3 और त्रिपुरा में 1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। विभिन्न राज्यों में बाढ़ के साथ-साथ भूस्खलन की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। सिक्किम में सेना पर आपदा की मारसिक्किम के छतेन क्षेत्र में एक सैन्य शिविर भूस्खलन की चपेट में आ गया, जिसमें तीन सैनिकों की मौत हो गई और छह अन्य सैनिक लापता हैं। रक्षाअधिकारियों के अनुसार, राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण कार्य में बाधाएं आ रही हैं। मणिपुर में हालात भयावह, हजारों घर प्रभावितमणिपुर में भारी बारिश और बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। अब तक राज्य में 3,365 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1,599 लोगों को सुरक्षितस्थानों पर पहुंचाया गया है। लगभग 11.8 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। प्रदेशभर में 47 स्थानों पर भूस्खलन हुआ है, जिससेजनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नदियां उफान पर, बांध टूटे, गांवों में पानी भरामणिपुर की प्रमुख नदियां—इंफाल और इरिल खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई क्षेत्रों में बांध टूटने के कारण बाढ़ का पानी तेजी से आसपासके इलाकों में फैल गया है। हालांकि कुछ स्थानों पर जलस्तर में मामूली गिरावट आई है, लेकिन अधिकतर नदियां अभी भी उच्च बाढ़ स्तर से ऊपरबनी हुई हैं।

तमिलनाडु: राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव फिर चर्चा में, सुप्रीम कोर्ट के दबाव में मिली विधेयकों को मंजूरी?

तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच तनाव के चलते सुर्खियों में है। हाल ही मेंराज्यपाल ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दी है, जिनमें एक ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी पर नियंत्रण से जुड़ा है, जबकि दूसरा शिक्षा क्षेत्र में सुधारोंसे संबंधित है। ये दोनों विधेयक लंबे समय से राज्यपाल की स्वीकृति के इंतजार में थे, जिससे डीएमके सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव लगातारबढ़ रहा था। मुख्यमंत्री स्टालिन ने राज्यपाल की मंजूरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से उपजा दबाव करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्यपाल ने पहले हीसंवैधानिक मर्यादाओं का पालन किया होता, तो मामला अदालत तक नहीं पहुंचता। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन ने तीखे शब्दों मेंकहा, “राज्यपाल को अब जाकर संवैधानिक जवाबदेही का एहसास हुआ है।” सुप्रीम कोर्ट में लंबित था मामलाराज्य सरकार ने पहले ही आरोप लगाया था कि राज्यपाल संविधानिक प्रक्रियाओं में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। विधेयकों को मंजूरी न मिलने परसरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन इसी बीच राज्यपाल द्वारा विधेयकों को मंजूरी देनाराजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। राज्यपाल की सफाई, विपक्ष की नाराज़गीराजभवन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि विधेयकों की मंजूरी किसी भी दबाव में नहीं, बल्कि संवैधानिक समीक्षा के बाद दी गई है।बयान में यह भी कहा गया कि राज्यपाल ने विधेयकों के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की और उन्हें संविधान के अनुरूप पाए जाने के बाद हीमंजूरी दी। हालांकि, डीएमके और विपक्षी दलों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह कदम सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में जवाबदेही सेबचने की रणनीति है। डीएमके नेताओं और समर्थकों ने इसे “जनता की जीत” बताया, वहीं बीजेपी ने राज्यपाल का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंनेपूरी तरह से संवैधानिक मर्यादा का पालन किया है। केंद्र-राज्य संबंधों पर फिर छिड़ी बहसइस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारों के बंटवारे की बहस को एक बार फिर हवा दे दी है। डीएमके और बीजेपी के बीचपहले से ही वैचारिक मतभेद रहे हैं, और राज्यपाल-विधेयक विवाद ने इन मतभेदों को और गहरा कर दिया है। क्यों अहम हैं ये विधेयक?ऑनलाइन सट्टेबाजी नियंत्रण विधेयक राज्य में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल जुए के मामलों को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। यह कानून खासकरयुवाओं को इस लत से बचाने के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, शिक्षा सुधार विधेयक विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं औरपारदर्शिता को बढ़ाने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

कोविड-19 मामलों में फिर से तेजी, केरल और महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित; सरकार और ICMR ने सतर्कता बरतने की अपील की

देश में एक बार फिर कोविड-19 का खतरा बढ़ता दिख रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में सक्रिय कोरोना मामलों कीसंख्या 4,026 तक पहुंच गई है। सबसे अधिक मामले केरल (1,416) में दर्ज किए गए हैं, जबकि महाराष्ट्र (494), गुजरात (397) और दिल्ली(393) भी प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना से पांच लोगों की मौत हुई है इनमें केरल का एक 80 वर्षीय बुजुर्ग, महाराष्ट्र कीदो बुजुर्ग महिलाएं, तमिलनाडु की 69 वर्षीय महिला और पश्चिम बंगाल की 43 वर्षीय महिला शामिल हैं। सभी को पहले से गंभीर बीमारियां थीं जैसेडायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, पार्किंसन और किडनी फेल्योर। राज्यवार स्थिति पर नज़र डालें तो महाराष्ट्र में 1 जनवरी से अब तक 873 नए मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 20 केवल मुंबई में हैं। पश्चिम बंगालमें कुल 331 सक्रिय केस हैं, कर्नाटक में 87 नए मामलों के साथ कुल संक्रमितों की संख्या 311 हो गई है। दिल्ली में हालांकि थोड़ी राहत देखने कोमिली है, जहां बीते 24 घंटे में एक्टिव केसों में 90 की गिरावट दर्ज की गई है। ICMR के मुताबिक, इस बार का संक्रमण ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट NB.1.8.1 के कारण हो रहा है, जो तेज़ी से फैलता है लेकिन इसके लक्षणअपेक्षाकृत हल्के हैं। इनमें बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, थकान, नाक बहना और भूख की कमी शामिल हैं—जो सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं।विशेषज्ञों ने इस मौके पर टीकाकरण और हर्ड इम्युनिटी की अहमियत पर फिर ज़ोर दिया है। वैक्सीन न केवल संक्रमण से बचाती है बल्कि बड़े स्तर पररोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मदद करती है। केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क हो गई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा है कि सरकार कोविड से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।ऑक्सीजन प्लांट, ICU बेड्स और दवाओं के स्टॉक की समीक्षा कर उन्हें और मजबूत किया जा रहा है। देशभर के अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गयाहै और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। हालांकि इस बार के वेरिएंट के लक्षण हल्के हैं, लेकिन इसके तेज़ी से फैलने की वजह से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियांपूरी तरह चौकस हैं और नागरिकों से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन कोविड गाइडलाइंस जैसे मास्क पहनना, हाथ धोना और भीड़ सेबचना जरूर अपनाएं।

कमल हासन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ की कर्नाटक में रिलीज पर रोक, हाई कोर्ट ने बयान पर जताई नाराज़गी

साउथ के सुपरस्टार कमल हासन ने अपनी फिल्म ‘ठग लाइफ’ को फिलहाल कर्नाटक में रिलीज न करने का फैसला किया है। यह निर्णय कन्नड़ भाषाको लेकर दिए गए उनके एक बयान के बाद उपजे विवाद और कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद आया है। कन्नड़ भाषा पर बयान को लेकर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणीकमल हासन ने हाल ही में कहा था कि “कन्नड़ भाषा की उत्पत्ति तमिल से हुई है”, जिसके बाद राज्य में विवाद खड़ा हो गया। इस बयान पर कर्नाटकहाई कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप कमल हासन हो सकते हैं, लेकिन किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को नहींहै।” माफी से किया इनकार, अदालत ने जताई असहमतिकमल हासन ने अदालत में स्पष्ट किया कि वह अपने बयान पर माफ़ी नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा कि बयान में कोई दुर्भावना नहीं थी। अदालत ने इस परअसहमति जताते हुए कहा कि “माफ़ी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक विनम्रता होनी चाहिए थी।” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “यह अहंकार से प्रेरितप्रतीत होता है।” ‘माफ़ी से मामला सुलझ सकता था‘ – कोर्टहाई कोर्ट ने वकीलों से सवाल किया कि अगर माफ़ी से मामला शांत हो सकता था, तो उसे क्यों नहीं अपनाया गया। कोर्ट ने पत्र को देखने के बादकहा कि “इसमें भावनाओं की अभिव्यक्ति है, पर स्पष्ट रूप से माफी नहीं है।”कमल हासन की कानूनी टीम का पक्षहासन के वकील ने अदालत में कहा कि यह बयान एक खास व्यक्ति के संदर्भ में दिया गया था, न कि किसी भाषा को नीचा दिखाने के लिए। उन्होंनेयह भी कहा कि कमल हासन लंबे समय से कन्नड़ संस्कृति और भाषा के प्रशंसक रहे हैं, और उनके दिल में इस भाषा के लिए गहरा सम्मान है। फिल्म रिलीज पर अस्थायी रोक, अगली सुनवाई 10 जून कोकमल हासन के वकील ने यह भी कहा कि वह स्थिति को देखते हुए अभी कर्नाटक में फिल्म रिलीज नहीं करेंगे। अदालत ने इस स्थिति को रिकॉर्ड मेंलेते हुए ‘ठग लाइफ’ की रिलीज पर अस्थायी रोक लगाने की याचिका को स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को दोपहर3:30 बजे होगी। फिल्म उद्योग की एकता की अपीलहासन की टीम ने अंत में यह स्पष्ट किया कि भाषा के नाम पर देश को बांटने का कोई प्रयास नहीं है। वकील ने कहा, “तमिल फिल्में कर्नाटक में औरकन्नड़ फिल्में तमिलनाडु में रिलीज होती रही हैं। हम सबको साथ मिलकर काम करना है। हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन साथही सम्मान की मर्यादा भी रखनी चाहिए।”

CDS जनरल अनिल चौहान का बड़ा खुलासा, पाकिस्तान का 48 घंटे का प्लान 8 घंटे में ढेर

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान के जवाबी हमले को लेकर कई अहम जानकारियों काखुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने भारत पर दबाव बनाने के लिए 48 घंटे का सैन्य अभियान तैयार किया था, लेकिन भारतीय सेना कीतगड़ी प्रतिक्रिया ने उसकी योजना को महज 8 घंटे में ध्वस्त कर दिया। 10 मई की रात शुरू हुआ पाकिस्तान का हमलाजनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की रात करीब 1 बजे पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आक्रामक अभियान की शुरुआत की थी। पाकिस्तान कोविश्वास था कि वह 48 घंटे के भीतर भारत को झुकने पर मजबूर कर देगा। लेकिन भारत की तरफ से की गई सख्त कार्रवाई ने उसके मंसूबों पर पानीफेर दिया।भारतीय जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान को भारी नुकसानभारत ने जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकी अड्डों पर प्रहार किया, तो पाकिस्तान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। लेकिन भारतीय वायुसेना कीप्रतिक्रिया इतनी तीव्र और सटीक थी कि पाकिस्तान के नूर खान, मुरीद और रफीकी जैसे अहम एयरबेस तबाह हो गए। जनरल चौहान के अनुसार, हालात बेकाबू होते देख पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ को फोन कर बातचीत की पेशकश की। पाकिस्तान को हुआ भारी नुकसान का अंदेशाभारत की प्रभावी जवाबी कार्रवाई से घबराकर पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि अगर वह संघर्ष को और आगे बढ़ाएगा, तो उसे व्यापक नुकसानउठाना पड़ेगा। इसी वजह से उसने जल्द ही युद्धविराम की पहल की, जिसे भारत ने भी स्वीकार कर लिया। 26 इलाकों में हमले, एयरफोर्स ठिकाने और सिविल टारगेट्स पर निशाना10 मई को पाकिस्तान ने सीमा से सटे 26 क्षेत्रों में हमले किए। इसके निशाने पर उधमपुर, पठानकोट, आदमपुर और भुज स्थित भारतीय वायुसेना केठिकाने थे। इसके अलावा एयरफोर्स से जुड़े स्कूलों और मेडिकल सेंटर को भी लक्ष्य बनाया गया। पाकिस्तानी सेना ने रात में हाई-स्पीड मिसाइलों सेहमला किया, लेकिन भारत ने अपनी एयर डिफेंस प्रणाली के जरिए अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। भारत ने सात पाकिस्तानी एयरबेस किए ध्वस्तभारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कुल सात एयरबेस को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। इस प्रभावशाली जवाब के बाद ही पाकिस्तान कोबातचीत और युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ना पड़ा।

India No Longer Safe for Women, Says Alka Lamba Citing Startling Crime Data

All India Mahila Congress (AIMC) president Ms. Alka Lamba today expressed deep concern over the deteriorating safety of women in India, highlighting distressing figures from the National Crime Records Bureau (NCRB) which show a surge in crimes against women and a high rate of acquittals for the accused. Delay in Treatment Led to Death of Minor Rape Survivor in BiharAddressing the media at the AICC headquarters alongside Congress leader Ms. Garima Mehra, Ms. Lamba strongly criticized the JDU-BJP government in Bihar for its handling of the case involving a 9-year-old rape victim in Muzaffarpur.She alleged that the child’s condition worsened due to a delay in transferring her to Patna for advanced medical care, a delay reportedly caused by Prime Minister Narendra Modi’s visit to the state. According to Lamba, the child’s transfer was held back until the PM’s departure, which critically affected her chances of survival. Rise in Acquittals Due to Weak Investigations, Political InterferenceMs. Lamba accused the BJP-JDU alliance in Bihar of fostering a climate of impunity, where perpetrators of sexual violence feel emboldened due to political protection. Citing NCRB statistics from 2020 to 2022, she pointed out that a vast majority of rape and sexual assault trials ended in acquittals. In 2022, out of 18,517 trials, only 5,067 led to convictions, while 12,086 ended in acquittals. In 2021, out of 11,783 cases, just 3,368 saw convictions, while 7,745 accused were acquitted. Similarly, in 2020, 3,814 convictions were recorded out of 9,713 trials, with 5,403 acquittals. Ankita Bhandari Case: Congress Questions Destruction of EvidenceCongress leader Ms. Garima Mehra from Uttarakhand raised serious questions about the investigation into the murder of Ankita Bhandari, who was killed at a resort owned by former BJP minister Vinod Arya.While the party welcomed the sentencing in the case, Mehra argued that the punishment could have been more severe had the prosecution presented a stronger case. She alleged that vital evidence was destroyed in the early days of the investigation. The section of the resort where Ankita lived was bulldozed on the Chief Minister’s orders, which she claimed was a deliberate act to eliminate proof. Additionally, Ankita’s bedding was allegedly found in the resort’s pool, possibly to wash away forensic evidence. Congress Demands Accountability and Systemic ReformsBoth leaders called for a complete overhaul of the investigation process in crimes against women and demanded accountability from state and central authorities. They emphasized that unless political interference ends and investigations are handled professionally, justice will remain elusive for many victims.

भाजपा ने निगम चुनावों में दिखाई मजबूती, दिल्ली मेंस अध्यक्ष का बयान, ‘आप’ में बढ़ता असंतोष

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सचदेवा ने आज दिल्ली नगर निगम की वार्ड समितियों और स्थायी समिति के चुनाव परिणामों को लेकर आमआदमी पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इन नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि आम आदमी पार्टी न केवल जन समर्थन खो चुकी है, बल्कि उसके अपने निर्वाचित जन प्रतिनिधि और पदाधिकारी भी अब पार्टी से दूरी बना रहे हैं।8 चेयरमैन, 9 डिप्टी चेयरमैन सीटों पर भाजपा का कब्जाश्री सचदेवा ने बताया कि दक्षिणी दिल्ली सहित 8 निगम क्षेत्रों में चेयरमैन और रोहिणी समेत 9 क्षेत्रों में डिप्टी चेयरमैन पद पर भाजपा की जीत आमआदमी पार्टी के अंदर गहराते असंतोष का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति में एक अतिरिक्त सदस्य की जीत इस बात का सबूत है किपार्टी के भीतर नेतृत्व के प्रति विश्वास टूट रहा है। स्थायी समिति में अगली जीत का भरोसाभाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि कल होने वाले स्थायी समिति के 11वें सदस्य के चुनाव में भी भाजपा की जीत तय है। उन्होंने कहा कि भाजपा शीघ्रही स्थायी समिति के चेयरमैन का चुनाव करवाएगी और निगम प्रशासन को सक्रिय करते हुए रुके हुए विकास कार्यों को गति देगी।

कर्नाटक के कोप्पल में भयावह हत्या, प्रॉपर्टी विवाद बना वजह

कर्नाटक के कोप्पल जिले के तावरेगेरे कस्बे में शनिवार को एक भयावह हत्या की घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। मुख्य क्षेत्र सिंधनूरसर्कल में हुई इस वारदात का कारण प्रॉपर्टी विवाद बताया जा रहा है। सात लोगों ने मिलकर चेनप्पा नारिनाल नामक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या करदी। यह वारदात लगभग दो मिनट के अंदर बेकरी के बाहर और अंदर हुई, जिसे सीसीटीवी कैमरे ने पूरी तरह कैद कर लिया है। घटना का वीडियो भीसार्वजनिक हो चुका है। हत्या कैसे हुई?पुलिस के मुताबिक, चेनप्पा नारिनाल उस समय बेकरी के बाहर था, जब उस पर हमला किया गया। जान बचाने के लिए वह बेकरी के अंदर भागा, लेकिन उसके पीछा करने वाले हमलावरों ने धारदार हथियारों से उस पर लगातार वार किए। केवल कुछ मिनटों में हमलावरों ने उसकी हत्या कर दीऔर फरार हो गए। पुलिस ने अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी वीडियो में क्या दिखा?सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि चेनप्पा अपनी जान बचाने के लिए चिल्ला रहा था और बेकरी के अंदर भाग रहा था। इस दौरान दो या अधिकहमलावरों ने उस पर चाकू से हमला किया, जबकि एक व्यक्ति ने उसके सिर पर लकड़ी के लट्ठे से वार किया। पीड़ित के शरीर पर कई जगह चाकू केघाव नजर आए। बेकरी के अंदर और बाहर चेनप्पा लगातार भागता रहा, लेकिन हमलावर लगातार उसके पीछे-पीछे दौड़ते हुए उस पर हमला करतेरहे। अंत में वह बेकरी से बाहर निकला, जहां दो-तीन हमलावरों ने उस पर कई बार चाकू से हमला किया।

लोकदल का संदेश, पंचायत चुनाव से तय होगा विधानसभा चुनाव का भविष्य

लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने एक कार्यक्रम में जोर देते हुए कहा कि पंचायत चुनाव केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं है, बल्कि यहआगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और दशा निर्धारित करने वाला एक अहम अवसर है। गाँव की सरकार यानी पंचायत सबसे करीब होती है जनताके, और यहीं से वास्तविक बदलाव की शुरुआत होती है।महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जूझ रही जनता के लिए पंचायत चुनाव एक अवसरसुनील सिंह ने कहा कि आज जब देश-प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्याएँ हैं, तब पंचायत चुनाव जनता के लिए अपनेप्रतिनिधियों को समझदारी से चुनने और एक मजबूत विकल्प को आगे बढ़ाने का अवसर है। लोकदल के कार्यकर्ता गाँव-गाँव जाकर यही संदेश पहुंचारहे हैं कि परिवर्तन की शुरुआत पंचायत से होनी चाहिए। पारदर्शिता और जनसेवा की प्राथमिकता के साथ उम्मीदवारों का चयनलोकदल पंचायत प्रतिनिधियों के चयन में पारदर्शिता, ईमानदारी और जनसेवा को सर्वोपरि रखेगा। पार्टी का मकसद है कि हर पंचायत में ऐसेउम्मीदवार चुने जाएं जो योग्य, निष्ठावान और जनता के बीच से हों, ताकि सच्चे लोकतंत्र और विकास की नींव मजबूत हो सके। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनसम्पर्क अभियान और चुनाव तैयारीलोकदल पार्टी आगामी पंचायत चुनाव में पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में पार्टी ने जनसम्पर्क अभियानतेज कर दिया है और सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की तैयारी में है। किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों की आवाज़ बनी लोकदललोकदल पार्टी हमेशा से किसानों, मजदूरों, युवाओं और ग्रामीण समाज की ओर से आवाज़ उठाती रही है। पंचायत चुनाव के माध्यम से पार्टी गाँवों मेंविकास, पारदर्शिता और जनहित की नीतियों को और मजबूत करने का संकल्प ले रही है। सुनील सिंह का स्पष्ट वक्तव्यराष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा, “हम चाहते हैं कि हर पंचायत में लोकदल की मजबूत हिस्सेदारी हो और वहाँ जनहित के फैसले पारदर्शिता औरमजबूती से लिए जाएं। हम ऐसे उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे जो न केवल जनसेवाभावी हों बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदार भी हों।” पंचायत चुनाव से उठेगा परिवर्तन का सशक्त कदमलोकदल पार्टी अपने मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ताओं और जनता के व्यापक समर्थन के साथ पंचायत चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाने के लिएपूरी तरह तैयार है। सुनील सिंह ने आशा जताई कि पंचायत चुनाव में मिले समर्थन से विधानसभा चुनाव में भी व्यापक बदलाव संभव होगा।