मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश से हालात गंभीर, कई जिलों में बाढ़ का खतरा, 13 जिलों में बाढ़ अलर्ट, 5 पर रेड अलर्ट जारी

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 13 जिलों मेंअचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है, जबकि 5 जिलों में अत्यधिक वर्षा का रेड अलर्ट घोषित किया गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कईजिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया गया है। 24 घंटे में 4 इंच बारिश, शहर जलमग्नशहडोल जिले में बीते 24 घंटे में करीब 4 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर का लगभग 40 फीसदी हिस्सा पानी में डूब गया है। सड़कों पर नदीजैसा तेज बहाव देखने को मिला। रातभर हुई बारिश के चलते करीब 3,000 घरों में पानी घुस गया, जिससे रसोई से लेकर शयनकक्ष तक पानी भरगया। शहडोल जिला अस्पताल की हालत भी चिंताजनक रही। यहां के सर्जिकल और मेडिकल वार्ड सहित तीन वार्डों में पानी भर गया। अस्पताल के निचलेहिस्सों में तीन फीट तक पानी पहुंच गया। सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि भारी बारिश के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी औरबैकफ्लो से अस्पताल परिसर में जलभराव हो गया। प्लेटफॉर्म पर पानी भरने से रेलवे स्टेशन की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं और कई ट्रेनें घंटों देरी सेरवाना हुईं। अन्य जिलों में भी हालात बिगड़ेमंडला, श्योपुर और डिंडौरी में भी रविवार को बाढ़ जैसे हालात बने रहे। नर्मदा नदी के किनारे बसे इलाकों में खतरा अधिक बना हुआ है। प्रशासन नेवहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। उमरिया में सड़कों पर जलभराव की स्थिति रही, जबकि जबलपुर में बरगी डैम के 9 गेट खोलने पड़े। सिवनी और बालाघाट जिलों में सोमवार कोहालात और बिगड़ने की आशंका जताई गई है। यहां अगले 24 घंटों में 8 इंच से अधिक वर्षा हो सकती है। डिंडौरी की कलेक्टर नेहा मारव्या ने स्कूलोंऔर आंगनवाड़ी केंद्रों में सोमवार को अवकाश घोषित किया है। मौसम विभाग का अलर्ट और प्रशासन की तैयारियांपूर्वी मध्य प्रदेश के अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, दमोह, डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, मंडला, पन्ना, सागर, सिवनी, शहडोल और उमरिया जिलों मेंअचानक बाढ़ की आशंका के चलते अलर्ट जारी किया गया है। निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के उफान पर आने की संभावना को देखतेहुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट और दमोह जिलों में आगामी 48 घंटों में अति भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैंऔर सभी संबंधित विभागों को स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
मोदी राज में मेडिकल शिक्षा का महाघोटाला, NMC और PCI में करोड़ों की रिश्वतखोरी उजागर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक समय “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” का नारा दिया था, लेकिन हालिया घटनाएं दर्शाती हैं कि यहदावा अब केवल एक खोखला वादा रह गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा उजागर किए गए दो बड़े घोटाले राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)—ने सरकार की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये घोटाले व्यापम जैसी कुख्यात भर्ती धोखाधड़ीसे भी बड़े हैं, जिनकी जड़ें अब सिर्फ एक राज्य तक सीमित न होकर पूरे देश में फैल चुकी हैं, जिनमें राजस्थान, हरियाणा, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, इंदौर, वारंगल और विशाखापत्तनम शामिल हैं। व्यापम घोटाले की तरह भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने मेडिकल और फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में भी एक संगठित घोटाले की नींव रखी। पहलेपेपर लीक और फर्जी भर्ती परीक्षाएं और अब फर्जी मेडिकल कॉलेज इन सबके जरिए युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। NMC घोटाले में सामने आया है कि ₹3 से ₹5 करोड़ की रिश्वत लेकर देश के 40 से अधिक निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दी गई। निरीक्षण में हेरफेरकरने के लिए फर्जी दस्तावेज, क्लोन फिंगरप्रिंट्स और नकली फैकल्टी का सहारा लिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंदर ही अधिकारियों नेसंवेदनशील फाइलें निजी एजेंटों तक पहुंचाईं, जिन्होंने कॉलेजों को निरीक्षण में फर्जीवाड़ा करने में मदद की। इस पूरे घोटाले के केंद्र में डॉ. जीतू लाल मीना का नाम सामने आया है, जो NMC के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) के पूर्णकालिकसदस्य थे। आरोप है कि उन्होंने हवाला चैनलों के ज़रिए करोड़ों रुपये की रिश्वत ली और उस पैसे से सवाई माधोपुर में मंदिर निर्माण करवाया। ऐसा भीबताया जा रहा है कि डॉ. मीना को NMC तक पहुंचाने में नरेंद्र मोदी की सीधी भूमिका थी,
राजेश राम का आरोप, मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया में छिपा है बड़ा षड्यंत्र

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने रविवार, 6 जुलाई 2025 को पटना स्थित सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चुनावआयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने चुनाव आयोग के उस नवीनतम विज्ञापन को लेकर चिंता जताई जिसमें यह कहा गया है कि मतदाता सूची केपुनरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेजों और फोटो की अनिवार्यता नहीं है। राजेश राम ने इसे एक संभावित “राजनीतिक षड्यंत्र” करार दिया, जिससेमतदाताओं को धोखा देने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से जारी पोस्टर में स्पष्ट कियागया है कि यदि कोई व्यक्ति आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो वह केवल फॉर्म भरकर बूथ स्तर अधिकारी को सौंप सकता है। इसकेबाद निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) स्थानीय स्तर पर जांच कर यह तय करेगा कि फॉर्म भरने वाला व्यक्ति पात्र है या नहीं। राजेश राम ने सवाल उठाया कि जब ERO को दस्तावेजों के बिना भी नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार दे दिया गया है, तो फिर पूरी प्रक्रिया कीपारदर्शिता और प्रासंगिकता क्या रह जाती है? उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करके सत्ताधारी भाजपा-जेडीयू गठबंधन मतदातासूची से विपक्ष समर्थक नामों को हटाने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जनवरी 2025 में ही बिहार में विशेष मतदातापुनरीक्षण अभियान चलाया गया था, जिसमें घर-घर जाकर सर्वे, दस्तावेजों का सत्यापन, दावों और आपत्तियों का प्रदर्शन और अंतिम मतदाता सूचीका प्रकाशन हो चुका है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले दोबारा यही प्रक्रिया शुरू किया जाना संदेह पैदा करता है। राजेश राम ने चुनाव आयोग से यह मांग की कि वह इस प्रक्रिया को तत्काल रोके और स्पष्ट करे कि मतदाताओं की जानकारी और भागीदारी कोसुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों से खबरें आ रही हैं कि लोग फॉर्म भरने में सक्षम नहीं हैं, जिससे व्यापकभ्रम और असंतोष का माहौल बन रहा है। इस संवाददाता सम्मेलन में राजेश राम के साथ कांग्रेस विधान परिषद में दल के नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा, राष्ट्रीय मीडियापैनलिस्ट प्रेम चंद मिश्र, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सोशल मीडिया प्रमुख सौरभ सिंहा, असित नाथ तिवारी, मंजीत आनंद साहू और प्रो. विजय कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
Congress Slams Modi Govt for Misrepresenting Poverty Data, Cites 28.1% Rate in World Bank Report

On July 6, 2025, Congress leader and AICC General Secretary (Communications) Jairam Ramesh issued a strong statement criticizing the Modi government’s interpretation of the World Bank’s Poverty and Equity Brief for India, originally released in April 2025. He accused the government of attempting to mislead the public by selectively highlighting parts of the report to falsely claim that India ranks among the most equal societies in the world. Citing the report, he noted that poverty and inequality in the country remain deeply concerning. One of the most striking findings is that the top 10% of India’s earners make 13 times more than the bottom 10%, based on 2023-24 data. Moreover, changes in the government’s survey methodology and sampling in the Household Consumption Expenditure Survey 2022–23 have further obscured the actual extent of poverty, making year-on-year comparisons unreliable. According to the World Bank, if India is assessed using the internationally accepted poverty line of $3.65 per day applicable for lower-middle-income countries — the poverty rate in 2022 stands at 28.1%. Congress pointed out that such a high rate makes it indefensible for India to claim status as one of the world’s most equal societies. Ramesh further alleged that the Modi government has consistently suppressed data, particularly recalling how the earlier 2017–18 consumption survey was discarded because it revealed declining rural consumption. He argued that such suppression, along with outdated benchmarks and unreliable official statistics, contributes to the government’s attempts to understate poverty levels. The Congress party also reiterated policy suggestions made in April, emphasizing that large sections of India’s population remain just above the international poverty line and are extremely vulnerable to economic shocks. Social welfare programs like MGNREGA and the National Food Security Act, 2013 should be strengthened, not sidelined. The party also demanded an increase in MGNREGA wages, urgent completion of the delayed decadal population census (now expected in 2027), and inclusion of 100 million additional citizens under the food security scheme. Moreover, the party criticized the government for not updating the national poverty line since the Rangarajan Committee report in 2014, calling for immediate action to rectify this gap. Finally, the Congress statement argued that rising inequality is no longer incidental but is now embedded in India’s economic growth trajectory, exacerbated by the Modi government’s policies. It highlighted the growing divide between a small, privileged elite and a vast, dispossessed population. To address this, Congress called for comprehensive tax reforms to end the regressive impact of GST, reduce tax-related harassment, curb corporate favoritism, and provide direct support for families and incentives for household savings.
दिल्ली भाजपा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, मोदी सरकार ने उनके विचारों को नीतियों में किया परिवर्तित बोले-अश्विनी वैष्णव

6 जुलाई को जनसंघ के संस्थापक और कश्मीर के पूर्ण विलय के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती केअवसर पर दिल्ली भाजपा द्वारा दिल्ली गेट स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीयरेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उपस्थित लोगोंको संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने की। इस आयोजन में एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजनकिया गया, जिसमें मुखर्जी के जीवन पर आधारित चित्रों का प्रदर्शन हुआ, साथ ही वृक्षारोपण भी किया गया। अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुखर्जी को आधुनिक भारत के निर्माण में प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचारआज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीतियों में परिवर्तित होकर जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने तीन मुख्यविषयों पर प्रकाश डाला: पहला, शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं को सम्मान देने की उनकी पहल; दूसरा, धारा 370 को हटाने की दिशा में उनकासंघर्ष, जो 2019 में पूरा हुआ; और तीसरा, दिल्ली के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने की योजना, जिसके लिए बजट में 10 गुना वृद्धि की गईहै। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को समझना भारत की आत्मा को समझने के समान है। उन्होंने उनके छात्रजीवन से लेकर बंगाल में हिंदुओं के संरक्षण और मुस्लिम तुष्टीकरण के विरोध तक के योगदानों को रेखांकित किया। सचदेवा ने बताया कि भारतीयजनता पार्टी उसी विचार की परिणति है जिसे मुखर्जी ने अंकुरित किया था। उन्होंने यह भी बताया कि कश्मीर को लेकर डॉ. मुखर्जी की सोच स्पष्ट थीएक देश में दो विधान नहीं चल सकते। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद देश को सही दिशा में ले जाने के लिए मुखर्जी ने जो बलिदान दिया, वहआज़ाद भारत के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर में एक संविधान और एक झंडा पूरे देश में फहराया जा रहा है, यहडॉ. मुखर्जी की सोच और बलिदान का ही परिणाम है। उन्होंने वर्तमान कश्मीर के विकास कार्यों, विशेष रूप से वंदे भारत ट्रेन जैसी योजनाओं काउल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की एकता और प्रगति का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में सांसद मनोज तिवारी, बांसुरी स्वराज, संगठन महामंत्री पवन राणा, महापौर राजा इकबाल सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, पूर्वप्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता, विधायकगण मोहन सिंह बिष्ट, अभय वर्मा, अजय महावर, रवि नेगी सहित अनेक वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ताउपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संतोष ओझा ने किया और मोर्चा कार्यकर्ताओं ने संपूर्ण व्यवस्था संभाली।
हिंदी थोपने के खिलाफ महाराष्ट्र में विरोध, उद्धव-राज ठाकरे की संयुक्त रैली के बाद शिवसेना-यूबीटी ने दी सफाई

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा हिंदी थोपे जाने के खिलाफ शुरू की गई लड़ाई को समर्थन दिए जाने के एक दिन बाद, शिवसेना (यूबीटी) ने स्पष्ट किया कि उद्धव और राज ठाकरे का विरोध हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं बल्कि नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरीभाषा के रूप में अनिवार्य किए जाने के खिलाफ था। संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी सफाईशिवसेना-यूबीटी के प्रवक्ता संजय राउत ने प्रेस वार्ता में कहा, “दक्षिण भारत के राज्य हिंदी थोपे जाने के खिलाफ वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिनउनका रुख यह है कि वे हिंदी न बोलेंगे और न किसी को बोलने देंगे। महाराष्ट्र में हमारा रुख इससे अलग है। हम हिंदी बोलते हैं, हिंदी फिल्में औरथिएटर देखते हैं। हमारी आपत्ति केवल यह है कि प्राथमिक शिक्षा में हिंदी थोपना स्वीकार्य नहीं है।” त्रि-भाषा नीति के खिलाफ दिखाया विरोधउद्धव और राज ठाकरे ने नई शिक्षा नीति में शामिल त्रि-भाषा फॉर्मूले का विरोध करते हुए इसे मराठी भाषियों के अधिकारों के खिलाफ बताया था।इस नीति के तहत महाराष्ट्र के प्राथमिक स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के तौर पर अनिवार्य किया जा रहा था। इस फैसले के खिलाफ दोनों नेताओं नेमुंबई में बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। सरकार ने की नीति की समीक्षा, समिति का गठनमहाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार ने, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में, त्रि-भाषा नीति लागू करने से जुड़ी अधिसूचनाएं रद्द कर दीं और इस परपुनर्विचार के लिए शिक्षाविद् डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। ठाकरे बंधुओं ने इसे अपनी और मराठी अस्मिता की जीतबताया और इस उपलब्धि का जश्न 5 जून को संयुक्त रैली के जरिए मनाया। स्टालिन को समर्थन, लेकिन सीमित दायरे मेंसंजय राउत ने यह भी स्पष्ट किया कि उद्धव-राज की लड़ाई हिंदी बोलने या हिंदी संस्कृति के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “एमके स्टालिन ने हमेंबधाई दी और कहा कि वह इससे प्रेरणा लेंगे। हमने कभी किसी को हिंदी बोलने से नहीं रोका, लेकिन प्राथमिक स्तर पर हिंदी थोपने का विरोध जरूरकिया है।” स्टालिन ने महाराष्ट्र के आंदोलन को बताया प्रेरणास्रोतउद्धव और राज ठाकरे के लंबे समय बाद एक मंच पर आने के कुछ घंटों बाद, एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर महाराष्ट्र मेंहिंदी थोपे जाने के खिलाफ विरोध का समर्थन किया। उन्होंने लिखा,“द्रविड़ आंदोलन द्वारा शुरू की गई भाषा अधिकारों की लड़ाई अब सीमाओं से बाहर निकलकर महाराष्ट्र तक पहुंच गई है। मुंबई में भाई उद्धव ठाकरे केनेतृत्व में हुई विजय रैली और उसमें दिए गए प्रेरणादायक भाषणों ने हमें उत्साह से भर दिया है।”
दलाई लामा ने मनाया 90वां जन्मदिन, धर्मशाला में हुआ भव्य आयोजन, धार्मिक आस्था और वैश्विक सम्मान का प्रतीक बना समारोह

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने रविवार को अपना 90वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित तिब्बती मठ मेंभव्य आयोजन किए गए। समारोह में हजारों की संख्या में भक्त और अनुयायी शामिल हुए। यह आयोजन दलाई लामा के स्वस्थ और दीर्घ जीवन कीकामना, साथ ही उनके शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका ने दी शुभकामनाएंदलाई लामा को उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका की ओर से शुभकामनाएं प्राप्त हुईं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडियाप्लेटफॉर्म X पर शुभकामना संदेश देते हुए लिखा,“मैं 1.4 अरब भारतीयों के साथ मिलकर परम पावन दलाई लामा को उनके 90वें जन्मदिन की शुभकामनाएं देता हूं। वे प्रेम, करुणा, धैर्य और नैतिकअनुशासन के प्रतीक हैं। उनका संदेश सभी धर्मों में सम्मान और प्रेरणा का स्रोत है। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।” अमेरिका ने दलाई लामा के योगदान को सराहाअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दलाई लामा को एकता, शांति और करुणा का प्रेरक बताते हुए उनके जीवन और कार्यों की सराहना की।अमेरिका ने यह भी दोहराया कि वह तिब्बतियों के मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का पूरी तरह समर्थन करता है। अमेरिका का कहना है कितिब्बती समुदाय को अपने धार्मिक नेता चुनने की पूरी आज़ादी है और इसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उत्तराधिकारी को लेकर चीन-तिब्बत में विवाद जारीदलाई लामा की उत्तराधिकारी प्रक्रिया को लेकर चीन और तिब्बत की निर्वासित सरकार के बीच टकराव बना हुआ है। हालांकि, दलाई लामा ने स्पष्टकिया है कि उनकी मृत्यु के बाद ही उनके उत्तराधिकारी की घोषणा की जाएगी। जन्मदिन समारोह में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री शामिलधर्मशाला के मैक्लोडगंज में आयोजित दीर्घायु प्रार्थना समारोह में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, ललन सिंह और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडूने भाग लिया। इस अवसर पर किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत सरकार धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों में विश्वास रखती है और दलाई लामा की संस्था कोपूर्णतः धार्मिक मानतीहै। धार्मिक मामलों में किसी का हस्तक्षेप नहीं रिजिजू ने कहा, “भारत सरकार का मानना है कि धर्म से जुड़ी संस्थाओं में बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। दलाई लामा वैश्विक शांति के प्रतीक हैंऔर पूरी दुनिया उनके विचारों से लाभान्वित हो रही है।” हालांकि उन्होंने चीन की आपत्तियों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि यहसब कुछ परम पावन के निर्णय पर निर्भर करता है।
टेक्सास में भयंकर बाढ़ से तबाही: 50 से अधिक लोगों की मौत, दर्जनों अब भी लापता, ग्वाडालूप नदी में अचानक उफान से फैला हड़कंप

अमेरिका के टेक्सास राज्य में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्वाडालूप नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से कई इलाके पानी मेंडूब गए और सैकड़ों लोग फंस गए। अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लापता हैं। केर काउंटी सबसे अधिक प्रभावित, बच्चों की भी मौतइस बाढ़ से केर काउंटी को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। प्रशासन के मुताबिक, अब तक यहां 15 बच्चों सहित कुल 43 लोगों की जान चली गईहै। बाढ़ का पानी इलाके में स्थित लोकप्रिय क्रिश्चियन समर कैंप ‘कैंप मिस्टिक’ को तहस-नहस करते हुए अंदर घुस गया, जिससे 27 लड़कियां लापताहो गईं। रेस्क्यू टीमें लगातार इन लड़कियों की खोज में जुटी हैं। बचाव कार्य जारी, तलाश में लगी हवाई और जल टीमेंटेक्सास इमरजेंसी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के प्रमुख निम किड के अनुसार, हवाई, जमीनी और जल बचाव टीमें लगातार राहत कार्यों में जुटी हैं। उन्होंने कहाकि समय तेजी से निकल रहा है, लेकिन अभी भी उम्मीद है कि कुछ लोग जीवित मिल सकते हैं। नदी में पानी का स्तर केवल 45 मिनट में 8 मीटर तकबढ़ गया, जिससे स्थिति अचानक विकराल हो गई। CCTV वीडियो में कैद हुआ भयावह मंजरइस भयावह हादसे का एक CCTV वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे नदी का पानी अचानक तेज़ी से बढ़ा औरतबाही मचाई। वीडियो में जगह-जगह बर्बादी और सड़क किनारे मलबे के ढेर देखे जा सकते हैं। कई स्थानों पर लोग छतों और पेड़ों से रेस्क्यू किएगए। गवर्नर ने मांगी अतिरिक्त मदद, राष्ट्रपति ट्रंप ने दी सहमतिटेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने राज्य में आपदा घोषणा को विस्तारित कर दिया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अतिरिक्त सहायता का अनुरोध कियाहै। इस पर होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने आश्वासन दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस अनुरोध को स्वीकार करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप और फर्स्ट लेडी ने जताई संवेदनाराष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों के लिए संवेदना जताते हुए कहा कि वह और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप पीड़ितों के लिएप्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रथम प्रतिक्रिया टीमें मौके पर हैं और अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन कर रही हैं।
मनाली में बड़ा सड़क हादसा, अनियंत्रित कार खाई में गिरी, चार की मौत, एक घायल, रोहतांग दर्रे के पास राहनीनाला में हुआ दर्दनाक हादसा

हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल मनाली में रविवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक कार के खाई में गिरने से चार लोगों की मौत हो गईऔर एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है। हादसा मनाली से कुछ किलोमीटर दूर रोहतांग दर्रे के समीप राहनीनाला इलाके में हुआ। दुर्घटना में जानगंवाने वाले सभी लोगों की पहचान अभी नहीं हो सकी है, लेकिन जिस कार से हादसा हुआ वह टैक्सी के रूप में पंजीकृत थी। हादसे के समय गाड़ी फिसलकर खाई में गिरीप्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कार अनियंत्रित होकर सड़क से फिसलती हुई गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में कार में सवार पांच में से चार लोगोंकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है। पुलिस और राहत दल मौके पर मौजूदघटना की सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा और शवों को बाहर निकाला गया। फिलहाल घायलों का इलाज किया जा रहा है।डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। वीडियो में हादसे की भयावहता कैदघटना के बाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें हादसे की भयावहता साफ देखी जा सकती है। वीडियो में नजर आता है किकार सड़क के किनारे से स्किड होकर लगभग 10 मीटर तक फिसलती है, चालक ब्रेक लगाने की कोशिश करता है लेकिन नियंत्रण नहीं हो पाता औरवाहन सीधे खाई में गिर जाता है। वीडियो में सड़क पर टायरों के निशान भी साफ दिखाई दे रहे हैं।
बिहार चुनाव को लेकर चिराग पासवान का बड़ा ऐलान, बोले– हर सीट से लड़ूंगा चुनाव, छपरा रैली में चिराग का दमदार बयान

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और सांसद चिरागपासवान रविवार को छपरा पहुंचे और राजेंद्र स्टेडियम में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा, “जब मैं कहता हूं कि चिराग पासवान चुनाव लड़ेगा, तो मैं यह भी कहता हूं कि हर 243 सीट पर चिराग पासवान बनकर चुनाव लड़ेगा।” क्या सीट शेयरिंग से बाहर होंगे चिराग?चिराग पासवान के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या वह इस बार बीजेपी और जेडीयू के साथ सीट बंटवारे मेंशामिल नहीं होंगे? क्या लोजपा (रामविलास) बिहार की सभी 243 सीटों पर अलग चुनाव लड़ने जा रही है? उनके इस ऐलान ने बिहार की राजनीतिमें एक नई हलचल पैदा कर दी है। ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ है संकल्पचिराग पासवान ने अपने विजन को दोहराते हुए कहा कि वह ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ के लिए अपनी जान भी दांव पर लगा देंगे। उन्होंने स्पष्ट कियाकि आरक्षण को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक वह जिंदा हैं, कोई आरक्षण को खत्म नहीं करसकता। पलायन पर चिंता जताईबिहार से अन्य राज्यों में रोजगार के लिए हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए चिराग ने कहा कि ऐसी सरकार की जरूरत है जो बिहार में ही रोजगार केअवसर पैदा करे ताकि लोगों को अपने घर छोड़कर बाहर न जाना पड़े। डोमिसाइल नीति पर उठाए सवालउन्होंने 2023 में बनी गठबंधन सरकार पर सवाल खड़े किए और पूछा कि जब राजद के नेता डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री थे, तब डोमिसाइल नीतिक्यों लागू नहीं की गई? चिराग ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बिहार आने से बार-बार रोका गया। केंद्र नहीं, अब बिहार में करूंगा सक्रिय राजनीतिचिराग पासवान ने साफ कहा कि कुछ लोग उन्हें सिर्फ केंद्र की राजनीति तक सीमित रखना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने फैसला किया है कि अब वह बिहारकी सक्रिय राजनीति में उतरेंगे और जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। अपराध और सुशासन पर दो टूकराज्य में बढ़ते अपराध पर हमला बोलते हुए चिराग ने कहा कि यदि सुशासन की सरकार में भी अपराध रुक नहीं रहे हैं, तो इसका विरोध कियाजाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि वे ऐसी किसी भी घटना के खिलाफ आवाज उठाएंगे, भले ही वह सहयोगी दल की सरकार क्यों न हो।