उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इसे ‘नफरती अपराध’ करार देते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एंजेल चकमा की हत्या की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोमवार को भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने नफरत को सामान्य बना दिया है, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी
इसको लेकर राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह नफरत का एक भयावह उदाहरण है। नफरत रातों-रात पैदा नहीं होती, बल्कि इसे रोज बढ़ावा दिया जा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि हमारे युवाओं को जहरीले कंटेंट और गैर-जिम्मेदार कहानियों के जरिए प्रभावित किया जा रहा है, जिससे ऐसी हिंसा को समाज में सामान्य बनाया जा रहा है। भारत की नींव सम्मान और एकता पर टिकी है, डर और नफरत पर नहीं। हम विविधता और प्रेम का देश हैं। हमें एक ऐसा मूक दर्शक समाज नहीं बनना चाहिए जो अपने ही साथी भारतीयों को निशाना बनते देखे और चुप रहे। आज हमें यह सोचने की जरूरत है कि हम अपने देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं। मेरी संवेदनाएं चकमा परिवार और त्रिपुरा सहित पूरे उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ हैं। हमें आपको अपना भारतीय भाई-बहन कहने पर गर्व है।” वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे नफरत भरे अपराधों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “एंजेल चकमा की हत्या नफरत भरे अपराध और कट्टरता का एक चौंकाने वाला उदाहरण है। यह मामला सरकार और उन नेताओं की चुप्पी का सबूत भी है, जो अपनी निष्क्रियता से इसमें शामिल हैं।’ सिब्बल ने गृह मंत्री अमित शाह से नफरत भरे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की।
खुद मणिपुर का रहने वाला
पुलिस के मुताबिक, यह घटना 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई बाजार में हुई थी। त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल का कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था। इस दौरान आरोपियों ने उन पर चाकू और पीतल के नकल से हमला किया। इस हमले में 24 वर्षीय एंजेल चकमा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद 26 दिसंबर को अस्पताल में इलाज के दौरान एंजेल की मौत हो गई। एंजेल के पिता तरुण चकमा, जो सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में तैनात हैं, ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके बेटे को ‘चीनी मोमो’ कहकर नस्लीय गालियां दीं। जब एंजेल ने विरोध करते हुए कहा कि वह भी भारतीय है, तो उस पर हमला कर दिया गया। हालांकि, पुलिस ने नस्लीय हमले के एंगल से इनकार किया है। देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने तर्क दिया कि आरोपियों में से एक खुद मणिपुर का रहने वाला है।