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विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को तत्कालीन आप सरकार की ओर से बनाए गए फांसी घर को फर्जी करार देते हुए तत्काल हटाने केनिर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस कक्ष को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा. उन्होंने पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंपी है. उन्होंने कहा कि यह निर्माण न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ है बल्कि देश की जनता की भावनाओं के साथ किया गया गंभीर छल है.विधानसभाअध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को तत्कालीन आप सरकार की ओर से बनाए गए फांसी घर को फर्जी करार देते हुए तत्काल हटाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस कक्ष को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा. अगस्त 2022 में भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर इस कथित फांसीघर का उद्घाटनकिया गया जिसमें यह संदेश दिया गया कि यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी और एक सुरंग लाल किले तक जाती थी.

सदन से किया बहिष्कार
लेकिन राष्ट्रीय अभिलेखागार, आईसीएचआर, आईजीएनसीए, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू के इतिहासकारों और एमसीडी की हेरिटेज सेल से प्राप्तदस्तावेज के आधार पर यह प्रमाणित हो गया कि ऐसा कोई फांसी घर या सुरंग कभी इस परिसर में मौजूद नहीं थी. तीन दिनों की चर्चा के बावजूदविपक्ष की ओर से इस निर्माण को लेकर कोई तर्कसंगत आधार या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. यह एक इरादतन फर्जीवाड़ा है जिसमें करोड़ोंरुपये खर्च कर जनता को गुमराह किया गया और विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई. विजेंद्र गुप्ता के संबोधन के दौरान आप विधायकों नेविरोध किया और नारेबाजी की। इसके बाद आतिशी के नेतृत्व में सदन से बहिष्कार कर दिया.

विश्वासघात जैसा हो रहा है महसूस
विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि अब भवन को उसके 1912 के मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा. दोनों टिफिन रूम का मूल नक्शा स्थापित किया जाएगा. अगस्त 2022 को लगाए गए शिलापट्ट को हटाकर पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति करेगी, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्रीअरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल और उपाध्यक्ष राखी बिड़लान को समन किया जाएगा. इसऐतिहासिक धरोहर के साथ जो छल किया गया, वह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक अपराध है. इससे मेरी ही तरह हजारों लोगों की भावनाएंआहत हुईं हैं. देश कभी इस तरह के कुकृत्य को माफ नहीं करेगा. जब यह फांसी घर बनाया गया था तब वे और विपक्ष के अन्य नेता भावनात्मक रूपसे इससे जुड़ गए थे. हमें लगा कि यह कोई शहादत स्थल है लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो विश्वासघात जैसा महसूस हुआ.

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