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कांग्रेस के संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत की विदेश नीति में एक व्यापक बदलाव की जरूरत है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी से कहा कि उन्हें अपना अहंकार छोड़कर 1970 के दशक में जिस तरह इंदिरा गांधी अमेरिका के सामने डटकर खड़ी हुई थीं, उससे प्रेरणा लेनीचाहिए.
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप अब भी खुद को मोदी का दोस्त बताते हैं. लेकिन भारत को अनुचितऔर भारी चोट पहुंचा रहे हैं. उन्होंने जो टैरिफ और जुर्माने लगाए हैं वो बिल्कुल भी स्वीकार करने योग्य नहीं हैं. लेकिन सच्चाई यह भी है कि ये सबमोदी की व्यक्तिगत छवि चमकाने वाली ‘हग-लोमेसी’ (गले मिलने की रणनीति) की विफलता को दिखाते हैं. उन्होंने आगे लिखा, भारत ने 1970 केदशक में अमेरिका की दबंगई का डटकर सामना किया था, खासकर जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं. मोदी को इंदिरा गांधी को बदनाम करने, उनकीछवि बिगाड़ने और उनका अपमान करने के बजाय – अगर संभव हो तो – अपना अहंकार छोड़ना चाहिए और यह समझना चाहिए कि इंदिरा गांधी नेअमेरिका के सामने कैसे मजबूती से भारत का पक्ष रखा था. आज भारत की विदेश नीति और प्रशासन में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत है.

लगाए गए कम टैरिफ
जयराम रमेश ने मोदी सरकार के पुराने कदमों को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सितंबर 2019 में अमेरिका गए थे और ह्यूस्टन में ‘हाउडीमोदी’ नाम का कार्यक्रम किया था. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे और मोदी ने परंपरा तोड़ते हुए मंचसे कहा था – अबकी बार, ट्रंप सरकार. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, ट्रंप का 50% टैरिफ आर्थिक ब्लैकमेल है – भारत को एक अनुचित व्यापारसमझौते के लिए डराने-धमकाने की कोशिश है. उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री मोदी को अपनी कमजोरी को भारत की जनता के हितों पर हावी नहीं होनेदेना चाहिए. शशि थरूर ने कहा, मुझे नहीं लगता कि यह हमारे लिए कोई अच्छी खबर है अगर कुल मिलाकर टैरिफ 50 प्रतिशत हो जाते हैं, तो इससेहमारे उत्पाद अमेरिका में बहुत से लोगों के लिए महंगे हो जाएंगे। जब आप इन प्रतिशतों को देखते हैं तो तुलना करनी होती है कि हमारे प्रतिस्पर्धियोंपर कितने टैरिफ लगाए गए हैं. उन्होंने आगे कहा, अगर आप वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस, यहां तक कि बांग्लादेश और पाकिस्तान को देखें, तोउन पर हमसे कम टैरिफ लगाए गए हैं.

नहीं है अच्छा संकेत
ऐसे में अमेरिकी बाजार में लोग हमारे सामान नहीं खरीदेंगे, अगर उन्हें वही चीज कहीं और सस्ती मिल रही है. ये हमारे अमेरिकी निर्यात के लिए अच्छासंकेत नहीं है. उन्होंने कहा हमें अब गंभीरता से सोचना होगा कि और किन देशों और बाजारों में हम अपने उत्पाद बेच सकते हैं. अब हमारे पास ब्रिटेन केसाथ मुक्त व्यापार समझौता है. हम यूरोपियन यूनियन (ईयू) से भी बात कर रहे हैं उम्मीद है, कई देशों के साथ हम नए रास्ते खोल पाएंगे लेकिनफिलहाल यह हमारे लिए एक झटका है. थरूर ने आगे कहा, यूरेनियम, पैलेडियम …अमेरिका रूस से बहुत सी चीजें आयात कर रहा है. इसमें एक तरहका दोहरा मापदंड है। उन्होंने चीन को 90 दिन की छूट दी है, जबकि चीन हमसे कहीं ज्यादा रूसी तेल खरीद रहा है। उन्होंने कहा, यह फैसला उस देशसे आया है जिसे हमने अपना दोस्त समझा था. इसलिए हमें इसके हिसाब से कदम उठाने होंगे और इस अनुभव से सीख लेनी होगी. उन्होंने कहा, अबभारत में भी यह मांग उठ सकती है कि हम अमेरिका से आने वाले सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएं. हमें अब नए व्यापारिक साझेदारों की ओर गंभीरतासे देखना होगा, खासकर ऐसी परिस्थिति में.

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