भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं द्वारा भारतीय सेना और वायुसेना के खिलाफ की जा रही विवादित टिप्पणियों का सिलसिला थमने का नामनहीं ले रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उधमपुर ईस्ट से भाजपा विधायक आर.एस. पठानिया ने भारतीय वायुसेना को “नालायक” कहकर एक नईबहस को जन्म दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पाकिस्तान ने उधमपुर एयरबेस को निशाना बनाया, तब वायुसेना सो रही थी। यह बयान नकेवल वायुसेना की प्रतिष्ठा पर आघात है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाता है।
बीते कुछ समय में कई भाजपा नेताओं ने सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीऔर भाजपा खुद को राष्ट्रवाद का प्रतीक बताते हैं, दूसरी ओर उनकी पार्टी के नेता सेना की कुर्बानी और क्षमता पर सवाल खड़े करते हैं। ऐसे में यहसवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भारतीय सेना पर संदेह प्रकट करना अब भाजपा में सामान्य बात हो चुकी है?
प्रधानमंत्री अक्सर विपक्ष के बयानों पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन जब उनके अपने दल के नेता सेना के खिलाफ बोलते हैं, तो वे चुप्पी साधलेते हैं। यह मौन कई लोगों के मन में संदेह पैदा करता है कि कहीं यह चुप्पी उनकी सहमति का संकेत तो नहीं? क्या भाजपा में शीर्ष नेतृत्व द्वारा ऐसेबयानों को नजरअंदाज करना किसी रणनीति का हिस्सा है?
भारतीय वायुसेना ने कारगिल युद्ध से लेकर बालाकोट एयर स्ट्राइक तक, कई अवसरों पर देश के लिए बहादुरी और पराक्रम का प्रदर्शन किया है। ऐसेमें किसी जनप्रतिनिधि द्वारा उन्हें “नालायक” कहना न केवल अनुचित है, बल्कि बेहद अपमानजनक भी है। यह स्पष्ट करता है कि सेना जैसे गंभीर विषयका उपयोग भी अब राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
आज की राजनीति में सेना को निशाना बनाकर या उसके नाम पर बयान देकर जनभावनाओं को भड़काना एक आम रणनीति बनती जा रही है। इससे नकेवल सैनिकों के मनोबल पर असर पड़ता है, बल्कि देश की सुरक्षा और अखंडता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
देश की जनता यह जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसे बयानों पर अपनी चुप्पी क्यों नहीं तोड़ते। क्या भारतीय सेना की आलोचना अब भाजपाकी विचारधारा का हिस्सा बन चुकी है? क्या राजनीति में सैनिकों की छवि धूमिल करना किसी बड़ी योजना का हिस्सा है? यह समय है कि इन सवालोंके जवाब दिए जाएं और सेना के सम्मान की रक्षा की जाए।