नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी औरराहुल गांधी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट के आधार पर जारी किया गया है। अब कोर्ट 8 मई कोअगली सुनवाई में तय करेगा कि आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जाए या नहीं।
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
इस केस की जड़ें 2014 में उस वक्त पड़ीं, जब बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने एक आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने आरोप लगायाकि कांग्रेस पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को अवैध तरीके से Young Indian नाम की कंपनी के जरिए अपने कब्जे में लिया। इसकंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 38-38% हिस्सेदारी है।
सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि कांग्रेस पार्टी ने AJL को करीब 90 करोड़ रुपये का बिना ब्याज का कर्ज दिया, जिसे बाद में Young Indian कोमात्र 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया गया। इस डील के जरिए Young Indian को AJL की करोड़ों की संपत्तियों का मालिकाना हक मिलगया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने साफ किया कि आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी दी जाएगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा। विशेष न्यायाधीश विशालगोगने ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का हक है। अभी केस की मेरिट पर बात करना जल्दबाज़ी होगी।”
कोर्ट की इस टिप्पणी को कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि यह पूरा मामला केंद्र सरकार द्वारा जांचएजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “सरकार विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम इससे डरने वाले नहीं हैं।सोनिया और राहुल गांधी पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और सच्चाई जल्द सामने आएगी।”
ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में गहन जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। ED का दावा है कि यह केवल आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्किमनी लॉन्ड्रिंग का एक जटिल मामला है, जिसमें राजनीतिक लाभ लेने की भी कोशिश की गई है।
ED ने राहुल और सोनिया गांधी से कई बार पूछताछ की है। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज़, लेन-देन और कंपनी की शेयर होल्डिंग से जुड़े सवालों परविस्तार से जवाब मांगे गए।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें 8 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट यह तय करेगा कि आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू हो या उन्हें राहत दीजाए। इस फैसले का कांग्रेस की साख और 2024 के बाद की राजनीतिक रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।