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बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता डॉ. सिद्धारमैया ने आज एक विवादित घटना में शामिल होकर राज्य राजनीति में नयाउथल-पुथल मचा दिया। सोमवार दोपहर को बेंगलुरु में आयोजित एक जनहित शिविर में अचानक सिद्धारमैया ने ASP (सहायक पुलिस अधीक्षक) श्रीमती रेखा प्रसाद को थप्पड़ मारने का प्रयास किया, जिससे वहां मौजूद लोग सकते में आ गए। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिकनैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिद्धारमैया ने बताया कि वे शिविर स्थल पर बिजली कटौती की समस्या और पानी की कमी को लेकर ASP से बातचीत कर रहे थे। ASP नेजानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय अधिकारियों को शिकायत के बाद समस्या का समाधान कर दिया गया है, लेकिन कई शिकायतें निस्तारित नहोने पर भी बंद हैं। इसी पर सिद्धारमैया ब्रस्त्र हो उठे और ASP को चेतावनी देने के अंदाज में हाथ बढ़ाकर थप्पड़ मारने का प्रयास किया। पास खड़ेसमर्थकों ने तुरंत उन्हें रोका, जबकि ASP को तुरंत वहां से सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

ASP ने दर्ज कराई शिकायत
घटना के तुरंत बाद ASP रेखा प्रसाद ने पुलिस कंट्रोल रूम में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने सिद्धारमैया के खिलाफ फोर्स का उपयोगकरने का आरोप लगाया। शिकायत में ASP ने कहा है कि एक वरिष्ठ नेता द्वारा इस तरह की शारीरिक हरकत निंदनीय है और इस पर कड़ी कार्रवाईहोनी चाहिए। उनके अनुसार, “मैं जनहित में काम कर रही थी, लेकिन मुझे अप्रत्याशित रूप से शिकायत नहीं सुनने का दंड भुगतना पड़ा।” पुलिस नेइस मामले में दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं और जांच जारी है।

बेलगावी में रेल दुर्घटना
इसी बीच, कर्नाटक के बेलगावी जिले के पास गोदंबा स्टेशन के समीप एक यात्री ट्रेन और मालगाड़ी के बीच टक्कर की खबर ने क्षेत्र में नया तनावबढ़ाया है। मंगलवार तड़के हुए इस हादसे में स्टेशन मास्टर के अनुसार दो डिब्बे पटरी से उतर गए और पीछे आने वाली मालगाड़ी पीछे से टकरा गई।इसके चलते कम से कम 15 यात्री घायल हो गए, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्तीकराया गया है, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।

प्राथमिक जांच में पाया गया है कि रात में सिग्नल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण दोनों ट्रेनों को एक ही लाइनों पर भेज दिया गया। दक्षिणपश्चिम रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, “हमने हादसे के बाद सिग्नल सिस्टम रोक दिया और तकनीकी टीम को बुलाकर मरम्मत कार्य शुरू कर दियाहै।” रेल यातायात कुछ समय के लिए रोक दिया गया था, लेकिन अब मरम्मत के बाद एक ट्रैक पर यात्री सेवा बहाल कर दी गई है।

स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता की नाराज़गी
बेलगावी रेल दुर्घटना और सिद्धारमैया की घटना के बीच भाजपा के एक स्थानीय कार्यकर्ता, श्रीमती रेनू देशपांडे ने दोनों मुद्दों पर सरकार की उदासीनताऔर पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब रेल सुरक्षा प्रणाली खराब हो और जनप्रतिनिधि खुद कानून को दरकिनार करनेका प्रयास करें, तो आम जनता का भरोसा किस पर रहेगा?” रेनू ने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन वर्षों से मालगाड़ी और यात्री ट्रेन के शेड्यूल मेंतालमेल नहीं बिठा पा रहा, जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं। उनके अनुसार, “सरकार सिर्फ आंकड़ों पर बात करती है, हकीकत में पटरी सुरक्षा औरसिग्नलिंग में निवेश नगण्य है।”

राजनीतिक हलकों में बढ़ा विवाद
सिद्धारमैया की ASP पर हमले की कोशिश और बेलगावी रेल हादसे का राजनीतिकरण पहले ही शुरू हो गया है। कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा किसिद्धारमैया का व्यवहार “अत्यधिक भावुक” था, लेकिन ASP पर हमला करने की सलाह नहीं दी जा सकती। वहीं, भाजपा ने इस मामले को ‘अपराध’ करार देते हुए राज्य सरकार से न्‍यायिक जाँच की मांग की है। रेल दुर्घटना को लेकर दोनों बड़े राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहेहैं।

कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “कानून सबके लिए एक समान है। अगर कोई भी नेता कानून तोड़ता है, तो उस पर कार्रवाई होगी।” वहीं, रेल राज्य मंत्रीने घटनास्थल पर अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे दोषियों को नम्‍यता से बख्‍शें नहीं और सिग्नलिंग सिस्टम की दोषपूर्ण कड़ी की तुरंत मरम्मतकराएं।

आगे की कार्यवाही और निष्कर्ष
ASP की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति तीनदिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। दूसरी ओर, रेलवे बोर्ड ने भी गोदंबा स्टेशन की पूरी सिग्नल प्रणाली की अद्यतन समीक्षा के निर्देश दिए हैं। भाजपाके नाराज़ कार्यकर्ता रेनू देशपांडे ने आश्वासन मिलने के बावजूद अधिकारीयों पर भरोसा कम दिखाई, और कहा, “हमें मैदान पर बदलाव दिखाई नहीं देरहा।”

ये तीनों घटनाएं—सिद्धारमैया का ASP पर हमले का प्रयास, बेलगावी रेल दुर्घटना, और भाजपा कार्यकर्ता की नाराज़गी—कर्नाटक की राजनीति औरप्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आगे देखना होगा कि जांच प्रक्रिया से क्या सच्चाई सामने आती है, और क्या प्रशासन वराजनैतिक नेतृत्व से जनता का विश्वास बहाल हो पाता है।

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