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फरीदाबाद की ‘क्षमता निर्माण कार्यशाला’ को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, 8 सितंबर।

कांग्रेस ने फरीदाबाद के सूरजकुंड में राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘क्षमता निर्माण कार्यशाला’ को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि महिला विधायकों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं से जुड़े जरूरी और गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।
कांग्रेस ने कहा कि जिस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें बदलाव की अगुवाई करने के लिए तैयार करना था, वहां घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा, नीति निर्माण, नए कानून, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा नहीं हुई। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों से आई महिला जनप्रतिनिधियों के साथ भाषाई भेदभाव किया गया। पार्टी ने कहा कि कार्यक्रम में हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओं और अंग्रेजी में अपनी बात रखने वाली महिला प्रतिनिधियों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

कांग्रेस मुख्यालय में हुई पत्रकार वार्ता
फरीदाबाद में आयोजित कार्यशाला को लेकर कांग्रेस ने नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में पत्रकार वार्ता की। इस पत्रकार वार्ता में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक बसोया, केरल सरकार की मंत्री बिंदु कृष्णा और छत्तीसगढ़ की विधायक अनिला भेंडिया मौजूद रहीं। तीनों नेताओं ने राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि महिलाओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में ही महिलाओं की आवाज को पर्याप्त जगह नहीं दी गई।

रागिनी नायक बसोया ने महिला आयोग पर लगाया बड़ा आरोप
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक बसोया ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने देश की महिला विधायकों के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया था। कार्यक्रम का मोटो ‘शी द चेंजमेकर’ रखा गया था। रागिनी नायक बसोया ने सवाल उठाया कि अगर कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को बदलाव का नेतृत्व करने के लिए तैयार करना था, तो इसमें महिलाओं की अपनी बात को ज्यादा महत्व क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के मंच पर अलग-अलग राज्यों की महिला जनप्रतिनिधियों को बैठाया गया था। इसके बावजूद कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कराया गया। रागिनी नायक बसोया के अनुसार, उद्घाटन के समय मंच पर अलग-अलग राज्यों की पांच महिला मंत्री मौजूद थीं, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम का उद्घाटन करने के लिए क्या देश में कोई योग्य महिला नेता, उद्यमी, वकील या विचारक नहीं मिली?

‘महिला सशक्तिकरण का यह कैसा तरीका?’
डॉ. रागिनी नायक बसोया ने कहा कि जब किसी कार्यक्रम का विषय ही महिला सशक्तिकरण हो, तो उसमें महिलाओं की आवाज को सबसे ज्यादा महत्व मिलना चाहिए।:उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंच पर महिला मंत्री मौजूद थीं, तो उन्हें अपनी बात रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। कांग्रेस प्रवक्ता ने इसे महिला सशक्तिकरण की भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि महिला आयोग का काम महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाना और उनकी आवाज को मजबूत करना है।

महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर भी सवाल
कांग्रेस ने कार्यशाला में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने का भी आरोप लगाया। डॉ. रागिनी नायक बसोया ने कहा कि महिला विधायकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में यह एक बहुत महत्वपूर्ण विषय था। देश में महिला प्रतिनिधित्व और चुनावी क्षेत्रों के परिसीमन का महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर क्या असर पड़ेगा, इस पर चर्चा होनी चाहिए थी। कांग्रेस के अनुसार, जब केरल से आई महिला विधायकों ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखने की कोशिश की, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। रागिनी नायक बसोया ने कहा कि महिला आयोग को महिलाओं की आवाज सुननी चाहिए और किसी भी महत्वपूर्ण सवाल को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

‘महिला आयोग सरकार का मुखपत्र नहीं’
डॉ. रागिनी नायक बसोया ने राष्ट्रीय महिला आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आयोग का काम सरकार का प्रचार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों और उनकी समस्याओं के लिए काम करने वाली संस्था है। ऐसे में आयोग को महिलाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कार्यशाला में सरकार की उपलब्धियों पर ज्यादा जोर दिया गया, जबकि महिलाओं की वास्तविक समस्याओं पर पर्याप्त बातचीत नहीं हुई।

बिंदु कृष्णा ने उठाया भाषाई भेदभाव का मुद्दा
केरल सरकार की मंत्री बिंदु कृष्णा ने पत्रकार वार्ता में कार्यशाला के दौरान भाषा से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। बिंदु कृष्णा ने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों से आई महिला जनप्रतिनिधियों के साथ भाषा के स्तर पर भेदभाव किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का संचालन मुख्य रूप से हिंदी भाषा में किया गया। उनके अनुसार, महिला प्रतिनिधियों को अपनी बात समझने और रखने में परेशानी हुई।

अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में सामग्री नहीं मिलने का आरोप
बिंदु कृष्णा ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाली महिला जनप्रतिनिधियों को अध्ययन सामग्री और जरूरी दस्तावेज हिंदी में दिए गए। उनका आरोप है कि इन दस्तावेजों को अंग्रेजी या संबंधित राज्यों की स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली महिला जनप्रतिनिधियों की भाषाएं अलग हैं। ऐसे में सभी को अपनी बात समझने और रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।

अनुवाद की मांग पर भी सवाल
बिंदु कृष्णा के अनुसार, दक्षिण भारत की महिला प्रतिनिधियों ने जब अंग्रेजी में अपनी बात रखने या अनुवाद की सुविधा देने की मांग की, तो उनकी मांग को उचित तरीके से नहीं सुना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला प्रतिनिधियों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई। बिंदु कृष्णा ने कहा कि भारत अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों वाला देश है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर के किसी भी कार्यक्रम में सभी राज्यों की प्रतिनिधियों को बराबर सम्मान और बोलने का अवसर मिलना चाहिए।

अनिला भेंडिया ने महिला विधायकों की कम भागीदारी पर उठाया सवाल
छत्तीसगढ़ की विधायक अनिला भेंडिया ने भी कार्यशाला को लेकर कई सवाल उठाए। अनिला भेंडिया ने कहा कि देश में लगभग 400 महिला विधायकों के बीच इस कार्यक्रम में करीब 40 प्रतिशत महिला विधायक ही शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि महिला प्रतिनिधियों की इतनी कम भागीदारी को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। अनिला भेंडिया ने यह संभावना जताई कि कुछ महिला विधायकों को पहले से आशंका रही होगी कि कार्यक्रम महिलाओं के गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सरकार के प्रचार का मंच बन सकता है।

पुरुषों को आगे और महिलाओं को पीछे बैठाने का आरोप
अनिला भेंडिया ने कार्यशाला की शुरुआत में बैठने की व्यवस्था को लेकर भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में पुरुषों को आगे और महिलाओं को पीछे बैठाया गया था। अनिला भेंडिया के मुताबिक, महिला प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था का विरोध किया। इसके बाद बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया। कांग्रेस ने इस घटना को भी महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम की भावना के विपरीत बताया।

घरेलू हिंसा और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश में महिलाओं के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं। इनमें घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, कानूनों की जानकारी और राजनीतिक भागीदारी जैसे विषय शामिल हैं। कांग्रेस का कहना है कि महिला विधायकों के लिए आयोजित क्षमता निर्माण कार्यशाला में इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए थी। पार्टी ने सवाल किया कि अगर महिला प्रतिनिधियों को ही महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा करने का मौका नहीं मिलेगा, तो ऐसे कार्यक्रम का उद्देश्य क्या रह जाएगा?

नए कानूनों की जानकारी भी जरूरी: कांग्रेस
कांग्रेस ने कहा कि देश में समय-समय पर महिलाओं से संबंधित कानूनों में बदलाव होते हैं। ऐसे में महिला विधायकों को नए कानूनों और उनके प्रभाव के बारे में जानकारी देना भी जरूरी है। पार्टी के अनुसार, महिला जनप्रतिनिधियों को कानूनों की जानकारी होगी तो वे अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं की समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा सकेंगी।vकांग्रेस ने आरोप लगाया कि कार्यशाला में इस तरह के जरूरी विषयों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।

महिला आरक्षण पर भी होनी चाहिए गंभीर चर्चा
कांग्रेस नेताओं ने महिला आरक्षण को लेकर भी चर्चा की जरूरत बताई।:पार्टी का कहना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके साथ ही परिसीमन का विषय भी जुड़ा हुआ है। कांग्रेस ने कहा कि महिला प्रतिनिधियों को इस बात पर खुलकर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए कि भविष्य में परिसीमन का महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर की महिलाओं को समान अवसर देने की मांग
कांग्रेस ने विशेष रूप से दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों से आई महिला प्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार की मांग की। पार्टी ने कहा कि भारत की विविधता को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में केवल एक भाषा पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत के अनुसार अनुवाद और बहुभाषी सामग्री की व्यवस्था होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि भाषा किसी भी प्रतिनिधि की आवाज को रोकने का कारण नहीं बननी चाहिए।

कांग्रेस ने महिला आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। पार्टी का कहना है कि महिला आयोग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उनकी समस्याओं को सामने लाना है। कांग्रेस के अनुसार, आयोग को महिलाओं की शिकायतें, हिंसा, भेदभाव, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कानून से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि फरीदाबाद की कार्यशाला में इन मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।

सरकार के प्रचार का मंच बनाने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि महिला आयोग की कार्यशाला में महिलाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दों की बजाय केंद्र सरकार की उपलब्धियों और उसके कामकाज का प्रचार अधिक दिखाई दिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम को किसी भी राजनीतिक दल या सरकार के प्रचार का मंच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सभी राजनीतिक विचारों और सभी राज्यों की महिला प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का समान अधिकार मिलना चाहिए।

कांग्रेस ने पूछे कई सवाल
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल सामने रखे हैं। पार्टी का कहना है कि महिला विधायकों के कार्यक्रम में महिला नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका क्यों नहीं मिला। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों की महिला प्रतिनिधियों के लिए भाषा और अनुवाद की बेहतर व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इसके अलावा पार्टी ने पूछा कि महिला आरक्षण, परिसीमन, घरेलू हिंसा, नए कानून और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा क्यों नहीं हुई।

महिला प्रतिनिधियों की आवाज सुनने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश की महिला जनप्रतिनिधियां अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों की महिलाओं की समस्याओं को बेहतर तरीके से जानती हैं। इसलिए किसी भी क्षमता निर्माण कार्यक्रम में उनकी बात सुनना बेहद जरूरी है। कांग्रेस का कहना है कि महिला सशक्तिकरण केवल मंच पर महिलाओं को बैठाने से नहीं होगा, बल्कि उन्हें बोलने, सवाल पूछने और अपनी राय रखने का पूरा अधिकार देने से होगा।

क्या है कांग्रेस का मुख्य आरोप?
कांग्रेस के पूरे बयान का मुख्य केंद्र यह है कि महिला विधायकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं के वास्तविक मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। डॉ. रागिनी नायक बसोया ने महिला आयोग पर सरकार का गुणगान करने का आरोप लगाया। बिंदु कृष्णा ने भाषा के आधार पर भेदभाव का मुद्दा उठाया। वहीं अनिला भेंडिया ने महिला विधायकों की कम भागीदारी और बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाया। कांग्रेस ने कहा कि महिला आयोग को महिलाओं की आवाज मजबूत करनी चाहिए और उनके गंभीर मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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