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शक्तिसिंह गोहिल बोले- 84,084 करोड़ रुपये की योजना पर सरकार दे जवाब, ओएनजीसी को दी जाए तेल-गैस की खोज की जिम्मेदारी

नई दिल्ली, 31 अगस्त

कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ‘समुद्र मंथन’ योजना को लेकर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि 84,084 करोड़ रुपये की यह योजना देश के हित में नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्योगपति मित्र गौतम अडानी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस योजना को तत्काल समाप्त किया जाए और तेल एवं गैस की खोज के लिए प्रस्तावित पूरी राशि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी को दी जाए। सोमवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में शक्तिसिंह गोहिल ने केंद्र सरकार से ‘समुद्र मंथन’ योजना को लेकर कई सवाल पूछे। गोहिल ने कहा कि जब देश में तेल और गैस के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही ओएनजीसी जैसी अनुभवी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मौजूद है, तो इतनी बड़ी सरकारी राशि निजी कंपनियों को देने का औचित्य सरकार को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए।

84,084 करोड़ रुपये की योजना पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने 1 अगस्त को ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी है। योजना के पहले चरण में वर्ष 2031 तक 84,084 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही गई है। गोहिल ने कहा कि इतनी बड़ी राशि देश की जनता के पैसे से खर्च की जानी है। इसलिए सरकार को यह बताना चाहिए कि इस राशि का इस्तेमाल किस तरह होगा और इससे देश को कितना फायदा मिलेगा। कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि योजना के तहत समुद्र में तेल और गैस की खोज करने वाली निजी कंपनियों को सरकार की ओर से बड़ी आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी तेल या गैस के कुएं की खुदाई पर 675 करोड़ रुपये खर्च होते हैं तो सरकार उस कंपनी को खर्च की लगभग आधी राशि देगी। गोहिल ने सवाल किया कि जब सरकार के पास खुद की अनुभवी कंपनी ओएनजीसी है, तो निजी कंपनियों को सरकारी पैसा देने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

ओएनजीसी के अनुभव को नजरअंदाज करने का आरोप
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि ओएनजीसी देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी है और उसके पास इस क्षेत्र में दशकों का अनुभव है। तेल और गैस की खोज से लेकर उत्पादन तक ओएनजीसी का लंबा अनुभव रहा है। गोहिल ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद केंद्र सरकार ओएनजीसी को पीछे रखकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में देश में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाना चाहती है तो इतनी बड़ी राशि ओएनजीसी को दी जानी चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल ऐसी संस्था को मजबूत करने में किया जाना चाहिए जिसका सीधा लाभ देश और जनता को मिले।

अडानी वेलस्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड को लेकर कांग्रेस का आरोप
पत्रकार वार्ता में शक्तिसिंह गोहिल ने अडानी वेलस्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कंपनी समुद्र में तेल और गैस की खोज से जुड़ी है, लेकिन उसके पास इस क्षेत्र में बहुत कम अनुभव है और कंपनी पहले से घाटे में चल रही है। गोहिल ने बताया कि अडानी वेलस्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड में अडानी समूह की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी और वेलस्पन समूह की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘समुद्र मंथन’ योजना से ऐसी निजी कंपनियों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि योजना की घोषणा के बाद कंपनी के प्रबंधन की ओर से भी सरकार की नई नीति से कंपनी को होने वाले लाभ की बात कही गई थी।

वेलस्पन समूह के चुनावी बॉन्ड का भी किया जिक्र
शक्तिसिंह गोहिल ने पत्रकार वार्ता में वेलस्पन समूह की ओर से भाजपा को दिए गए चुनावी बॉन्ड के चंदे का भी जिक्र किया। गोहिल ने कहा कि वेलस्पन समूह ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 10 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। कांग्रेस नेता ने इस मामले को भी उठाते हुए सरकार से पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी निजी कंपनी को सरकारी योजना से बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है और उसी समूह की ओर से राजनीतिक दल को चंदा भी दिया गया है, तो सरकार को पूरी प्रक्रिया और नियमों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

मुंबई और कच्छ के तीन ब्लॉक का मुद्दा
शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि तेल और गैस की खोज की सामान्य प्रक्रिया में पहले समुद्री क्षेत्र में ब्लॉक हासिल किए जाते हैं और उसके बाद पर्यावरण सहित दूसरी जरूरी मंजूरियां ली जाती हैं। गोहिल ने दावा किया कि अडानी वेलस्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड के पास मुंबई और कच्छ में पहले से तीन ब्लॉक मौजूद हैं। कांग्रेस नेता के मुताबिक इन ब्लॉकों को जरूरी मंजूरियां भी पहले ही मिल चुकी हैं। गोहिल ने सवाल उठाया कि जब कंपनी के पास पहले से ब्लॉक और मंजूरियां मौजूद हैं तो ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत उसे किस तरह का लाभ मिलेगा, इसकी जानकारी सरकार को देश के सामने रखनी चाहिए।

प्रणव अडानी के ट्वीट का भी किया उल्लेख
कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने ‘समुद्र मंथन’ योजना की घोषणा के बाद प्रणव अडानी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ किए जाने का भी उल्लेख किया। गोहिल ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना की घोषणा के बाद अडानी समूह की ओर से सरकार की तारीफ किए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने राजनीतिक अंदाज में कहा कि इस ‘समुद्र मंथन’ में अगर सरकार की योजना का फायदा किसी निजी समूह को मिलता है तो इसका जवाब देश की जनता को दिया जाना चाहिए।

‘जनता के हिस्से में जहर और अडानी के हिस्से में अमृत’ का तंज
शक्तिसिंह गोहिल ने ‘समुद्र मंथन’ नाम को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि सरकार की इस योजना में ऐसा दिखाई दे रहा है कि देश की जनता के हिस्से में जहर और अडानी के हिस्से में अमृत आएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश की प्राकृतिक संपदा और सरकारी पैसा जनता की संपत्ति है। इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाला लाभ आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था को मिले।

समुद्र में कुओं की जांच को लेकर भी सवाल
शक्तिसिंह गोहिल ने समुद्र में तेल और गैस की खोज के लिए बनाए जाने वाले कुओं की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समुद्र के बीच बने कुओं की वास्तविक स्थिति और उनकी गहराई की जांच करना जमीन पर बने कुओं की तुलना में कठिन होता है। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसी स्थिति में अगर निगरानी की व्यवस्था मजबूत नहीं हुई तो सरकारी पैसे के इस्तेमाल में गड़बड़ी की आशंका बढ़ सकती है। गोहिल ने कहा कि सरकार को इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी पैसे से किए जाने वाले काम की निगरानी किस प्रकार होगी।

साझा पाइपलाइन को लेकर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने ‘समुद्र मंथन’ योजना में तेल और गैस के लिए साझा पाइपलाइन की व्यवस्था का भी जिक्र किया। गोहिल ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का फायदा भी निजी कंपनियों को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस पाइपलाइन व्यवस्था का खर्च कौन उठाएगा और इसका सबसे ज्यादा फायदा किसे मिलेगा। कांग्रेस ने योजना से जुड़ी सभी शर्तों और नियमों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

महाराष्ट्र में 6,600 मेगावाट के टेंडर का जिक्र
शक्तिसिंह गोहिल ने अडानी समूह को कथित रूप से दिए गए अन्य सरकारी लाभों का भी जिक्र किया। उन्होंने महाराष्ट्र में 6,600 मेगावाट बिजली से जुड़े टेंडर का मुद्दा उठाया। गोहिल ने आरोप लगाया कि यह टेंडर सीधे अडानी को मिला और इसमें सिंगल टेंडर की स्थिति थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को ऐसे सभी मामलों में पूरी प्रक्रिया और नियमों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

सिंगरौली में कोयला खनन का मामला उठाया
गोहिल ने मध्य प्रदेश के सिंगरौली में अडानी को दिए गए कोयला खनन ब्लॉक का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में नियमों की अनदेखी की गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्राम सभा से प्रस्ताव पास कराना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। गोहिल ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों और ग्राम सभाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए नियमों का पालन होना जरूरी है।

कच्छ में कॉपर कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी का मुद्दा
शक्तिसिंह गोहिल ने कच्छ में अडानी से जुड़ी एक कंपनी को कथित लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कॉपर के कच्चे माल के आयात पर लगने वाली 2.5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इस फैसले से किस कंपनी को कितना फायदा हुआ और सरकार ने यह फैसला किस आधार पर लिया।

जीएसपीसी मामले की न्यायिक जांच की मांग
कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के समय के गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन यानी जीएसपीसी के मामले का भी जिक्र किया। गोहिल ने आरोप लगाया कि जीएसपीसी में करीब 27 हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ था और कैग की रिपोर्ट में भी इस मामले को लेकर सवाल सामने आए थे। कांग्रेस नेता ने कहा कि उस समय समुद्र में तेल और गैस की खोज के लिए कई कुएं बनाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन जमीन पर तेल या गैस मिलने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। गोहिल ने मांग की कि जीएसपीसी से जुड़े पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

बेरोजगारी के बीच निजी कंपनियों को इतनी बड़ी राशि देने पर सवाल
शक्तिसिंह गोहिल ने देश में बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब देश में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में हैं, तब सरकार को ऐसी योजनाओं पर भी जवाब देना चाहिए जिनसे सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की स्पष्ट जानकारी नहीं है। कांग्रेस ने सवाल किया कि 84,084 करोड़ रुपये जैसी बहुत बड़ी राशि को निजी कंपनियों को देने के बजाय देश की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और रोजगार बढ़ाने वाले क्षेत्रों में क्यों नहीं लगाया जा रहा है।

घरेलू तेल और गैस उत्पादन में कमी पर भी सरकार से जवाब मांगा
कांग्रेस ने पिछले वर्षों में देश के घरेलू तेल और गैस उत्पादन में आई कमी को लेकर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा। शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि सरकार को देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर घरेलू तेल और गैस उत्पादन में कमी आ रही है तो सरकार को इसकी वजह और उसे दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देश के सामने रखनी चाहिए।

कांग्रेस की मांग- योजना खत्म कर ओएनजीसी को मिले जिम्मेदारी
कांग्रेस ने एक बार फिर मांग की कि ‘समुद्र मंथन’ योजना को तत्काल समाप्त किया जाए। कांग्रेस का कहना है कि तेल और गैस की खोज के लिए प्रस्तावित 84,084 करोड़ रुपये की राशि निजी कंपनियों को देने के बजाय ओएनजीसी को दी जानी चाहिए। शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि ओएनजीसी के पास तेल और गैस की खोज का लंबा अनुभव है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को मजबूत करके देश की ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकता है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से ‘समुद्र मंथन’ योजना से जुड़े सभी दस्तावेज, खर्च का विवरण, निजी कंपनियों की भूमिका और सरकारी सहायता की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

सरकार से पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि तेल, गैस, कोयला और अन्य प्राकृतिक संसाधन देश की संपत्ति हैं। इन संसाधनों से जुड़े किसी भी फैसले में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों से बार-बार बड़े उद्योग समूहों को फायदा पहुंच रहा है। वहीं केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ‘समुद्र मंथन’ योजना से देश की जनता को क्या लाभ मिलेगा और 84,084 करोड़ रुपये खर्च करने का पूरा आधार क्या है। कांग्रेस ने कहा कि सरकारी धन और देश के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए, किसी विशेष निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं। पार्टी ने ‘समुद्र मंथन’ योजना को खत्म करने, राशि ओएनजीसी को देने और पुराने मामलों की जांच कराने की मांग दोहराई है।

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