
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा- प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आकर बयान दें; अहंकार उन्हें संसद में आने से रोक रहा
राहुल गांधी बोले- देश के गृह मंत्री अपना मुंह छिपा रहे, क्योंकि वे छात्रों के गुनहगार हैं
केसी वेणुगोपाल बोले- सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा कराने और संसद चलने देने के लिए तैयार नहीं
प्रियंका गांधी ने कहा- छात्रों पर बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की जिम्मेदारी लें गृह मंत्री
नई दिल्ली, 05 अगस्त
कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस की बर्बर कार्रवाई और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर बुधवार को संसद परिसर में प्रेरणा स्थल स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से मकर द्वार तक विरोध मार्च निकाला।
कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह से संसद में आकर इन संवेदनशील मुद्दों पर जवाब देने की मांग की। विपक्षी सांसद “अमित शाह जवाब दो” लिखा विशाल पोस्टर हाथों में लेकर ‘चंदा चोर कहां मिलेंगे-भाजपा के दफ्तर में’ जैसे नारे लगा रहे थे। इसके साथ ही वे जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की भी मांग कर रहे थे।
इस दौरान संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष की मांग दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आकर बयान दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष चर्चा के लिए तैयार है और चर्चा से ही हल निकलेगा।
खरगे ने कहा कि संसद का सत्र शुरू हुए काफी दिन हो चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में न आकर संसद का अपमान कर रहे हैं। उनका अहंकार उन्हें सदन में आने से रोक रहा है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट में खरगे ने सवाल किया कि गृह मंत्री युवाओं पर हुए अत्याचारों पर बयान देने से क्यों कतरा रहे हैं और क्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के लिए प्रधानमंत्री जिम्मेदार नहीं हैं?
इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि देश के गृह मंत्री अपना मुंह छिपा रहे हैं, क्योंकि वे छात्रों के गुनहगार हैं। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि अमित शाह छिपें नहीं, बल्कि संसद में आकर देश के सवाल का जवाब दें कि छात्रों पर हमले का आदेश किसने दिया?
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मोदी सरकार पर जनता और विपक्ष की आवाज न सुनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में छात्रों पर लाठीचार्ज, श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी, ई-20 इथेनॉल और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने जैसे प्रमुख मुद्दे उठा रहा है, लेकिन सरकार किसी भी जनहित के मुद्दे पर चर्चा कराने और संसद चलने देने के लिए तैयार नहीं है।
गृह मंत्री अमित शाह पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परिसीमन विधेयक लाने वाला है, वह संसद में आ ही नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को संसद में आकर यह बताना चाहिए कि 20 जुलाई को छात्रों पर बर्बर कार्रवाई का आदेश किसने दिया था, लेकिन वे जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि वे दोषी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार केवल अपनी पसंद के कानून पारित कराना चाहती है, जिससे विपक्ष बिल्कुल भी सहमत नहीं हो सकता। एफसीआरए विधेयक पर विपक्ष का रुख स्पष्ट करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि इसे पुराने प्रारूप में कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सोच स्वीकार्य नहीं है कि आरएसएस कुछ भी कर सकता है, जबकि अन्य गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर अलग नियम लागू हों; इसलिए इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि गृह मंत्री जिस पद पर हैं, उसकी जनता के प्रति जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र है, किसी का राजदरबार नहीं चल रहा है। छात्रों पर गोलियां चलाना, पैलेट गन व आंसू गैस का इस्तेमाल और लाठीचार्ज किसी के आदेश पर ही हुआ होगा, इसलिए गृह मंत्री को इसकी सीधी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।