
नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पेपर लीक, नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मांगों को लेकर राज्यसभा में चर्चा कराने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने राज्यसभा के महासचिव को नियम 267 के तहत नोटिस देकर सदन के सभी नियमित कार्य स्थगित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा कराने का अनुरोध किया है।
संजय सिंह बोले- यह सिर्फ परीक्षा का नहीं, देश के युवाओं के भविष्य का सवाल
संजय सिंह ने कहा कि यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं ने छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर कर दिया है। इसलिए इस पूरे मामले पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को जवाब देना चाहिए।
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर जताई चिंता
संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन धरना स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। संजय सिंह ने कहा कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है और यह अब पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
संजय सिंह ने पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को सुबह भारी पुलिस बल जंतर-मंतर पहुंचा और सोनम वांगचुक को बलपूर्वक अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने कहा कि धरना स्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया गया, लोगों की आवाजाही रोक दी गई और पूरी कार्रवाई बहुत कम समय में पूरी कर दी गई। संजय सिंह का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के अनुसार उन्हें घटना को रिकॉर्ड करने या हस्तक्षेप करने का भी मौका नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान इलाके में मोबाइल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
नीट परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्रों को हुई परेशानी
संजय सिंह ने कहा कि एनटीए द्वारा आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा आयोजित करनी गई। उन्होंने कहा कि इस फैसले से लाखों छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और असुविधा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहली परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जबकि दोबारा हुई परीक्षा में करीब 2.05 लाख छात्र शामिल नहीं हुए। उनके अनुसार यह अब तक की सबसे बड़ी अनुपस्थिति है और इससे साफ पता चलता है कि छात्रों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कम हुआ है।
संजय सिंह ने छात्रों की मौत का भी किया जिक्र
संजय सिंह ने कहा कि पहली परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा होने के बीच के समय में 22 छात्रों की आत्महत्या की खबरें सामने आईं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद स्थिति है और इससे यह साफ होता है कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों का छात्रों पर कितना गंभीर मानसिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए ताकि किसी भी छात्र को भविष्य को लेकर निराशा का सामना न करना पड़े।
दस वर्षों में 150 से अधिक पेपर लीक होने का दावा
संजय सिंह ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 150 से अधिक पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी तो मेहनत करने वाले छात्रों का परीक्षा प्रणाली से विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने कहा कि अब केवल जांच या कार्रवाई की घोषणा से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र में बड़े और स्थायी सुधार करने होंगे।
पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली की मांग
संजय सिंह ने कहा कि देश के छात्र, अभिभावक और नागरिक समाज लंबे समय से पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों की मेहनत और भविष्य की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, लाखों छात्रों की परेशानी, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत जैसे मुद्दों पर संसद में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
संसद में चर्चा कराने की मांग दोहराई
संजय सिंह ने अपने नोटिस में कहा कि यह विषय राष्ट्रीय महत्व का है और इससे सीधे देश के युवाओं का भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और सरकार की जवाबदेही जुड़ी हुई है। इसलिए उन्होंने मांग की कि राज्यसभा के सभी नियमित कार्य स्थगित कर इस पूरे मामले पर तत्काल चर्चा कराई जाए, ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।