
अजमेर | 10 जुलाई 2026
राजस्थान के अजमेर शहर के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी धार्मिक और आध्यात्मिक सौगात आने वाली है। आदर्श नगर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भगवान तिरुपति बालाजी की एक अत्यंत सुंदर और भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा अपनी अनूठी बनावट, बारीक नक्काशी और धार्मिक महत्व के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। खास बात यह है कि इस प्रतिमा में भगवान विष्णु के दसों अवतारों को भी अत्यंत आकर्षक ढंग से दर्शाया गया है। श्रद्धालु एक ही प्रतिमा में भगवान तिरुपति बालाजी के साथ भगवान विष्णु के सभी प्रमुख अवतारों के दर्शन कर सकेंगे।
भुवनेश्वर में 90 दिनों की मेहनत से तैयार हुई प्रतिमा
भगवान तिरुपति बालाजी की इस भव्य प्रतिमा को ओडिशा के भुवनेश्वर में तैयार किया गया है। अनुभवी शिल्पकारों ने लगभग 90 दिनों तक लगातार मेहनत करके इस प्रतिमा को बनाया। प्रतिमा को पारंपरिक भारतीय शिल्पकला के अनुसार हाथों से तराशा गया है। प्रत्येक आकृति और हर छोटी-बड़ी नक्काशी को बहुत ही सावधानी और सुंदरता के साथ तैयार किया गया है। अब यह प्रतिमा अजमेर पहुंच चुकी है और जल्द ही मंदिर में स्थापित की जाएगी।
250 किलो काले पाषाण से बनी है दिव्य प्रतिमा
यह प्रतिमा लगभग 250 किलो वजनी काले पाषाण से बनाई गई है। इसकी ऊंचाई करीब तीन फीट और चौड़ाई लगभग दो फीट है। काले पाषाण से बनी यह प्रतिमा देखने में बेहद आकर्षक और भव्य दिखाई देती है। पत्थर पर की गई बारीक कलाकारी भारतीय शिल्प परंपरा की उत्कृष्ट पहचान है। प्रतिमा को इस प्रकार बनाया गया है कि इसे देखने वाला हर श्रद्धालु इसकी सुंदरता और दिव्यता से प्रभावित हो जाए।
एक ही प्रतिमा में भगवान विष्णु के दसों अवतारों के दर्शन
इस प्रतिमा की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें भगवान विष्णु के दसों अवतारों को भी उकेरा गया है। भगवान मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध और भविष्य के कल्कि अवतार को सुंदर रूप में दर्शाया गया है। इससे श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर भगवान विष्णु के संपूर्ण दशावतारों के दर्शन करने का अवसर मिलेगा। यह विशेषता इस प्रतिमा को अन्य प्रतिमाओं से अलग और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
शेषनाग के संरक्षण में विराजमान हैं भगवान बालाजी
प्रतिमा में भगवान तिरुपति बालाजी को अत्यंत दिव्य स्वरूप में दिखाया गया है। उनके ऊपर सुंदर नक्काशी वाला तोरण और शेषनाग की आकृति बनाई गई है, जो भगवान नारायण की महिमा का प्रतीक है। पूरी प्रतिमा में भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक मंदिर कला की अद्भुत झलक देखने को मिलती है।
दिल्ली के समाजसेवी अनुप मित्तल ने कराया निर्माण
इस भव्य प्रतिमा का निर्माण दिल्ली निवासी समाजसेवी अनुप मित्तल ने अपने माता-पिता योगी मित्तल और सुषमा रानी मित्तल की पावन स्मृति में कराया है। उन्होंने श्रद्धा और सेवा की भावना से इस प्रतिमा को मंदिर को समर्पित किया है। यह कार्य उनके परिवार की धार्मिक आस्था और समाज के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है।
11 और 12 जुलाई को होगा प्राण-प्रतिष्ठा समारोह
आदर्श नगर स्थित शिव मंदिर में 11 और 12 जुलाई को भगवान तिरुपति बालाजी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच प्रतिमा की स्थापना होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाएगा और पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण देखने को मिलेगा।
1942 से आस्था का केंद्र है यह शिव मंदिर
अजमेर का आदर्श नगर शिव मंदिर वर्ष 1942 में स्थापित किया गया था। पिछले कई दशकों से यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अब भगवान तिरुपति बालाजी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद मंदिर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाएगा। इससे दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए यहां पहुंचेंगे।
धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
मंदिर समिति का मानना है कि इस अनोखी प्रतिमा की स्थापना के बाद अजमेर में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। भगवान विष्णु के दसों अवतारों वाली यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। देश के विभिन्न राज्यों से लोग इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन करने के लिए अजमेर आएंगे। अजमेर के आदर्श नगर शिव मंदिर में स्थापित होने जा रही भगवान तिरुपति बालाजी की 250 किलो वजनी काले पाषाण की प्रतिमा भारतीय कला, संस्कृति और धार्मिक आस्था का अद्भुत उदाहरण है। भगवान विष्णु के दसों अवतारों से सुसज्जित यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह मंदिर केवल अजमेर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बनने की ओर अग्रसर होगा।