
लखनऊ,
लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव के समय महिलाओं के नाम पर बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद महिलाओं को उनके वास्तविक अधिकार देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाती। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करना और उन्हें बराबरी का अधिकार न देना, यह दोहरी राजनीति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती।
महिलाओं की आड़ में राजनीति कर रही है भाजपा
सुनील सिंह ने कहा कि भाजपा महिलाओं के नाम पर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात तो की जाती है, लेकिन जब उन्हें निर्णय लेने वाली जगहों पर उचित भागीदारी देने की बात आती है तो सरकार पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब पहले जैसी नहीं रहीं। वे अपने अधिकारों को समझती हैं और सही समय आने पर ऐसी राजनीति का जवाब भी देंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ भाषणों और नारों से सम्मान नहीं मिलेगा। सम्मान तब मिलेगा जब उन्हें समाज और राजनीति में बराबर का स्थान दिया जाएगा।
33 प्रतिशत नहीं, 50 प्रतिशत आरक्षण की जरूरत
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं, इसलिए उन्हें भी राजनीतिक और प्रशासनिक संस्थाओं में कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं देश की आबादी का आधा हिस्सा हैं, तो उन्हें फैसले लेने वाली संस्थाओं में भी आधी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। केवल सीमित आरक्षण देकर महिलाओं के अधिकारों की बात करना उचित नहीं है।
कानून बनाना ही काफी नहीं
सुनील सिंह ने कहा कि केवल कानून बनाकर राजनीतिक लाभ लेना आसान है, लेकिन असली चुनौती उस कानून को जमीन पर लागू करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को अधिकार देने की बात तो होती है, लेकिन व्यवहार में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाते। उन्होंने कहा कि महिलाओं को चुनाव लड़ने के अवसर, संगठन में जिम्मेदार पद और प्रशासनिक संस्थाओं में मजबूत भूमिका मिलनी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक महिला सशक्तिकरण अधूरा रहेगा।
पुरुष नेताओं की सोच बदलने की जरूरत
सुनील सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा वर्षों से चर्चा में है, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण कुछ पुरुष नेताओं की सोच है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई नेता अपनी राजनीतिक सीटें और प्रभाव छोड़ना नहीं चाहते, इसलिए महिलाओं को आगे बढ़ाने में बाधाएं पैदा की जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल वास्तव में महिलाओं को आगे लाना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी सोच बदलनी होगी और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देने होंगे।
राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की बराबर भागीदारी जरूरी
लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल शब्दों से नहीं बल्कि भागीदारी से तय होता है। राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, न्याय व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में महिलाओं की मजबूत मौजूदगी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगी, तभी समाज में वास्तविक बदलाव दिखाई देगा। महिलाओं को केवल वोटर या समर्थक के रूप में नहीं बल्कि नीति निर्धारक के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
महिलाओं से एकजुट होने की अपील
सुनील सिंह ने देश की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट हों और दिखावटी राजनीति को पहचानें। उन्होंने कहा कि महिलाओं की एकता ही उन्हें उनका हक दिला सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों, सम्मान और बराबरी की हिस्सेदारी के लिए संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए। जब महिलाएं एकजुट होकर अपने अधिकारों की मांग करेंगी, तब कोई भी राजनीतिक दल उनकी अनदेखी नहीं कर पाएगा।
महिलाओं को बराबरी का हक मिलना चाहिए
अपने वक्तव्य के अंत में सुनील सिंह ने कहा कि देश के विकास और लोकतंत्र की मजबूती के लिए महिलाओं की बराबर भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल आरक्षण का लाभार्थी नहीं बल्कि देश के निर्माण में बराबर का साझेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति और अधिक जागरूक होंगी तथा समान भागीदारी की लड़ाई को और मजबूत बनाएंगी।