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नई दिल्ली, 10 अप्रैल

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के फैसलों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन जैसे बड़े मुद्दों पर चिंता जताई और कहा कि इन पर जल्दबाजी नहीं, बल्कि सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।

परिसीमन पर खरगे की साफ चेतावनी
बैठक में खरगे ने कहा कि सरकार लोकसभा और विधानसभा सीटों को बढ़ाने की योजना बना रही है। लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 तक करने की बात सामने आ रही है। खरगे के अनुसार यह कोई छोटा फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर सीटों का बंटवारा बदला जाता है, तो कई राज्यों की ताकत कम या ज्यादा हो सकती है। इससे संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे फैसले जल्दबाजी में नहीं लेने चाहिए। इस पर सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठकर, शांति से और गहराई से चर्चा होनी चाहिए ताकि कोई भी राज्य या समाज खुद को नुकसान में महसूस न करे।

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख
खरगे ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को अधिकार देने के पक्ष में रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने पहले ही पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाया था। यह पहल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय शुरू हुई थी। आज देश में लाखों महिलाएं राजनीति में सक्रिय हैं, जो उसी फैसले का परिणाम है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि महिला आरक्षण तुरंत लागू हो, लेकिन सरकार इसे 2029 तक टालना चाहती है। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया।

विशेष संसद सत्र पर सवाल
खरगे ने 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समय कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में। ऐसे में कई सांसद अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। इस समय संसद सत्र बुलाना सही नहीं है। खरगे का मानना है कि सरकार जानबूझकर ऐसा कर रही है ताकि विपक्ष पूरी ताकत से भाग न ले सके। उन्होंने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन भी बताया।

सरकार पर राजनीतिक फायदा लेने का आरोप
खरगे ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण बिल को पास कराकर आगामी चुनावों में फायदा लेना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार पहले इस मुद्दे पर चुप थी, लेकिन अब चुनाव नजदीक आते ही अचानक सक्रिय हो गई है। इससे साफ होता है कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि चुनाव जीतना है।

कांग्रेस में महिलाओं की मजबूत भूमिका
खरगे ने अपने भाषण में कांग्रेस में महिलाओं की भूमिका को भी बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस में शुरू से ही महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिला है। सरोजिनी नायडू देश की पहली महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनी थीं। इसके बाद सोनिया गांधी ने भी लंबे समय तक पार्टी का नेतृत्व किया। इससे साफ है कि कांग्रेस हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती है।

लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप
खरगे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात नहीं सुनती और अपने फैसले थोपती है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग भी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा और सरकार के दबाव में है।

आगे क्या करेगी कांग्रेस
बैठक के अंत में खरगे ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अकेले नहीं रहेगी। पार्टी अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इस पर चर्चा करेगी और एक साझा रणनीति बनाएगी। उनका लक्ष्य है कि देश के बड़े फैसले सभी की सहमति से लिए जाएं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में साफ कर दिया कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि देशहित में सोचकर फैसला होना चाहिए। खरगे का मानना है कि अगर सभी दल मिलकर चर्चा करेंगे, तभी सही और संतुलित निर्णय लिया जा सकेगा, जिससे देश का लोकतंत्र मजबूत बना रहेगा।

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